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बतिया केहू के खल जाला-शम्श जमील

जब कोई अपने प्यार या अपनापन भरी बातें करता है,
तो अक्सर किसी न किसी के मन में जलन (इरखा) पैदा हो जाती है।

शम्स जमील 30 नवम्बर 2025 (पब्लिश्ड: 08:59 IST)

बतिया केहू के खल जाला
इरखा मन मे हल जाला

शक रहेला दुश्मन पर जी
आपन ही केहू छल जाला

केहू जोर लगावे बाकिर
दाल केहू के गल जाला

नया पर धन होखे जहिया
घमंड आपरूपी पल जाला

पावे के जब लकम बा धरत
खोवे के आदत टल जाला

मेहनत से भाग बदलेला केहू
बपौति से हाथ केहू मल जाला

बुढ़वती के चिंता करते करते
जवानी के सुरूज ढल जाला

एह दुनिया से हाथ पसारी
आदमी एकदिन चल जाला

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