पईसा…. राघवेन्द्र प्रकाश “रघु”

राघवेंद्र प्रकाश 'रघु' 2 Subscribers
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@raghwendra_prakash_raghu • 561 Views • 30 नवम्बर, 2025

पईसा बिना लोग देखअ,
एक देने तड़पे।
खाए के ना अन्न दाना,
जीव देखअ डहके।।

पईसा बा त लोग कइसे,
पउवा पखारेला।
नहाईला के बाद चढ़ी,
धोतियों खंगारेला।।

साच कही नईखे पईसा,
अपनो खदेड़ेला।
भुला के सब रिश्ता-धरम,
सहियो में गलती जोहेला।।

पईसवे से इज्ज़त देखअ,
पईसवे से शोहरत।
नईखे पईसा साच बाटे,
अपनो बा खदेड़त।।

पईसे से सब कुछ,
इहे लोग बा बुझत।
बिना पइसा वाला के,
केहू कहवा बा पूछत।।

दोष ई जमाना के कि,
दोष ई समाज के।
जिनका भीरी पईसा,
इज्ज़त होता उ समाज के।।

बिना पईसा रोटी खाती,
रोए केहू आज के।
गजबे सच्चाई “रघु”,
इहे बा समाज के..।।

Purvaiya
राघवेंद्र प्रकाश 'रघु' @raghwendra_prakash_raghu

पईसा बिना लोग देखअ,
एक देने तड़पे।
खाए के ना अन्न दाना,
जीव देखअ डहके।।

पईसा बा त लोग कइसे,
पउवा पखारेला।
नहाईला के बाद चढ़ी,
धोतियों खंगारेला।।

साच कही नईखे पईसा,
अपनो खदेड़ेला।
भुला के सब रिश्ता-धरम,
सहियो में गलती जोहेला।।

पईसवे से इज्ज़त देखअ,
पईसवे से शोहरत।
नईखे पईसा साच बाटे,
अपनो बा खदेड़त।।

पईसे से सब कुछ,
इहे लोग बा बुझत।
बिना पइसा वाला के,
केहू कहवा बा पूछत।।

दोष ई जमाना के कि,
दोष ई समाज के।
जिनका भीरी पईसा,
इज्ज़त होता उ समाज के।।

बिना पईसा रोटी खाती,
रोए केहू आज के।
गजबे सच्चाई "रघु",
इहे बा समाज के..।।

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