रोज भेजीं ले मैसेज ना मिलेला जवाब,
अउरी केतना हमरा के तड़पावे के बा।
थक गइल बा नयन राह जोहत-जोहत,
बोलीं गाँवे रउआ कब ले आवे के बा।
कह के गइनी कि बस कुछ दिन ही रहब,
प्रीत के पीर अब हम ना सईया सहब।
दिल दुखा लीं हमर जेतना दुखावे के बा,
बोलीं गाँवे रउआ कब ले आवे के बा।
बाली बिंदिया तोहके बोलावे सजन,
बहे पुरवईया सगरी सिहरे ला बदन।
सांच बतिया कहिया बतावे के बा,
बोलीं गाँवे रउआ कब ले आवे के बा।

नींद आवे ना सेजिया पर जागल रही।
इयाद में रातों-दिन तोहरा पागल रहीं।
“कमली” केतना बहाना बनावे के बा,
बोलीं गाँवे रउआ कब ले आवे के बा।