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बड़हन डील: भारत के मिलल यूरेनियम, खुल गइल ऊर्जा के नया रस्ता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऑस्ट्रेलिया दौरा के बीच एगो अइसन ऐतिहासिक समझौता भइल बा, जेकरा से भारत के ऊर्जा जरूरतन के पूरा करे में भारी…
द पुरवइया डेस्क 9 जुलाई 2026 (पब्लिश्ड: 10:41 IST)
PIB.GOV.IN

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऑस्ट्रेलिया दौरा के बीच एगो अइसन ऐतिहासिक समझौता भइल बा, जेकरा से भारत के ऊर्जा जरूरतन के पूरा करे में भारी मदद मिली। ई समझौता यूरेनियम के सप्लाई के लेके बा। एह कदम से भारत के परमाणु ऊर्जा (न्यूक्लियर एनर्जी) के मिशन के नया पंख लाग गइल बा।

यूरेनियम के सप्लाई आ एकर महत्व

पूरी दुनिया के लगभग 32 प्रतिशत यूरेनियम अकेले ऑस्ट्रेलिया लगे बा, बाकिर कानूनी अड़चन आ राजनीतिक संवेदनशीलता के चलते ई भारत के ना मिल पावत रहे। हालांकि साल 2012 में ही ऑस्ट्रेलिया भारत से प्रतिबंध हटा लेले रहे, बाकिर अब जाके निर्यात के रस्ता साफ भइल बा।

एह समझौता पर पीएम मोदी कहले कि, “आज हमनी के परमाणु ऊर्जा पर एगो अहम समझौता पर दस्तखत कइले बानी जा। एकरा से ऑस्ट्रेलिया से भारत के यूरेनियम आवे के रस्ता खुली आ हमनी के स्वच्छ ऊर्जा (क्लीन एनर्जी) के लक्ष्य के नईका रफ़्तार मिली।” दुनों देस साफ कइले बाड़े कि ई यूरेनियम खाली ‘शांतिपूर्ण काम’ खातिर दिहल जाई आ एकर निर्यात इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) के तय सुरक्षा नियमन के तहत होई।

चीन पर लगाम आ कूटनीतिक जीत

जानकार लोग के मानल बा कि भारत आ ऑस्ट्रेलिया के ई बढत नज़दीकी खाली व्यापार खातिर नइखे, बलुक एकरा पीछे चीन के बढ़ती सैन्य ताक़त पर नकेल कसे के भी रणनीति बा। एकरा अलावे दुनों देस अंतरिक्ष क्षेत्र में भी बड़ कदम उठावत हिंद महासागर के कोकोस (कीलिंग) द्वीप पर एगो “अस्थायी स्पेस ट्रैकिंग टर्मिनल” बनावे जा रहल बाड़े, जेकरा से भारत के स्पेस मिशन के तगड़ा सपोर्ट मिली।

ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ एह मौका पर पीएम मोदी के नेतृत्व के जम के तारीफ़ कइले। याद रहे कि 2026 के ताज़ा आंकड़ा बता रहल बा कि ऑस्ट्रेलिया में अब भारतीय मूल के लोग ब्रिटिश लोगन के पछाड़ के सबसे बड़ प्रवासी समुदाय बन गइल बा।

भारत के 2047 के लक्ष्य आ SHANTI कानून

भारत सरकार साल 2047 ले परमाणु ऊर्जा से 100 गीगावॉट बिजली पैदा करे के लक्ष्य रखले बिया। वर्तमान में ई क्षमता 8.78 गीगावॉट बा, जवना के 2031-32 ले 22 गीगावॉट करे के तइयारी बा।

एह लक्ष्य के हासिल करे खातिर ही भारत सरकार दिसंबर 2025 में संसद से SHANTI (शांति) बिल पास करवले रहे। एह नया कानून के तहत अब प्राइवेट कंपनी सभ के भी परमाणु बिजलीघर बनावे, ओकरा के चलावे आ यूरेनियम जइसन ईंधन के इस्तेमाल करे के छूट मिल गइल बा। भारी उद्योग, डेटा सेंटर आ नईका तकनीक के चलावे खातिर चौबीसों घंटा बिजली के जवन जरूरत बा, उ परमाणु ऊर्जा से ही बिना प्रदूषण फइलवले पूरा कइल जा सकेला।

राजनीतिक बयानबाजी: केकरा जाई श्रेय?

एह ऐतिहासिक कदम पर देस में राजनीति भी चालू बा। कांग्रेस नेता जयराम रमेश एह समझौता के असली श्रेय पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के दिहले बाड़े। रमेश कहले कि 2005 से 2008 के बीच अमेरिका के संगे भइल ऐतिहासिक असैन्य परमाणु समझौता के चलते ही दुनिया भर से यूरेनियम मिले के रस्ता खुलल रहे। बता दीं कि 1974 आ 1998 के परमाणु परीक्षण के बाद दुनिया भारत पर भारी प्रतिबंध लगा दिहले रहे, जवन अमेरिका से डील भइला के बाद खत्म भइल रहे।

यूरेनियम: ई कइसन धातु ह?

यूरेनियम एगो भारी आ सघन धातु ह, जेकर खोज 1789 में भइल रहे आ एकर नाम यूरेनस ग्रह पर रखल गइल बा। एकर मेल्टिंग पॉइंट 1132 डिग्री सेल्सियस होला। ई एतना सघन होला कि एकर इस्तेमाल विमान के सिस्टम आ रेडिएशन से बचाव के ढाल बनावे में भी होला। वैज्ञानिकन के माने त यूरेनियम के निर्माण 6.6 अरब साल पहिले सुपरनोवा विस्फोट में भइल रहे आ आजुओ धरती के भीतर जवन गरमी बा (जेकरा से महाद्वीप खिसकेले), ओकर मुख्य कारण यूरेनियम के रेडियोधर्मी क्षय ही ह।

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