आजु देखी मर रहल संसार बा।
का कहीं लाचार ई सरकार बा।।
ध्यान राखीं देहिया के काम बा।
आन से आशा कइल बेकार बा।।
जाति के चरचा करा के आदमी।
देखि ली कतना करत तकरार बा।।
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गवना कराइ सैंया घर बइठवले से
जब से शहर में आइल तब से बा अउँजियाइल
बतिया केहू के खल जाला-शम्श जमील
लोग के लागे कि हमरा ज्ञान बा।
आजु इनका आदमी दरकार बा