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कविता

ना कवनो शिकायत,ना कवनो ग़म

ना कवनो शिकायत,ना कवनो ग़म राखत बानी,
बहुत बात दिल में हम अब कम राखत बानी।

विशू यादव , बक्सर, बिहार
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4 नवम्बर 2026 · 12:07 अपराह्न IST

ना कवनो शिकायत,ना कवनो ग़म राखत बानी,
बहुत बात दिल में हम अब कम राखत बानी,
मुश्किल तऽ बा अब आपना के सम्भारल,
बाकिर कोशिश तऽ येह के हरदम राखत बानी,

ना केहू में कहीं से कुछो भरम राखत बानी,
आपन हम निमन करम राखत बानी,
हर जगह बोलल जरूरी अब नईखे,
ऐही से मिजाज कुछ नरम राखत बानी,

बितल काहानी खातिर कलम राखत बानी,
खुशी मिले जाहां से कुछ अलम राखत बानी ,
जहां-जहां से घाव हमके मिलल,
ओह के मिटावे के मलहम राखत बानी।

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