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भोजपुरी साहित्य

नेह हमरा से ओकर छोड़ावल गइल

नेह हमरा से ओकर छोड़ावल गइल
संग दोसरा के ओकर धरावल गइल

कुंवर नाज़ुक , चंदौली, उत्तर प्रदेश
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1 नवम्बर 2026 · 01:31 पूर्वाह्न IST

नेह हमरा से ओकर छोड़ावल गइल
संग दोसरा के ओकर धरावल गइल

आग जिनगी में हमरा लगावल गइल
ओकरा जिनगी के बहुते सजावल गइल

ओकरा सुख देख बहुते ही ख़ुश रहनी हम
ओकरा अंखियां से लोरिया बहावल गइल

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देख हमरा के केतना उ ख़ुश होखे ले
नइखे ग़म कउनो केतनो सतावल गइल

चाहे जेतना ज़हर रहे पिये के परल
नेह ‘नाज़ुक’ से सभकर निभावल गइल

कठिन शब्द अउर अर्थ

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