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जेकरा ख़ातिर सौ गो अधापन होला,
उहो कहाँ आख़िर में आपन होला।
उहे लुट जाला घर-बाहर दूनू जगे,
जेकरा में ज़ियादा सीधापन होला।
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नूरैन अंसारी

@noorain_ansari

जेकरा ख़ातिर सौ गो अधापन होला,
उहो कहाँ आख़िर में आपन होला।
उहे लुट जाला घर-बाहर दूनू जगे,
जेकरा में ज़ियादा सीधापन होला।
जब गरज पड़ल त बुझनी ई बात,
मदद से ज़ियादा त विज्ञापन होला।
जे जिनगी लगा देल अपनन के ख़ातिर,
बड़ा ही बुरा ओकर समापन होला।
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नूरैन अंसारी

@noorain_ansari

जब गरज पड़ल त बुझनी ई बात,
मदद से ज़ियादा त विज्ञापन होला।
जे जिनगी लगा देल अपनन के ख़ातिर,
बड़ा ही बुरा ओकर समापन होला।
'नूरैन' काटेला जे भी दिन बनवास के,
एक दिन हिस्सा में ओकरे सिंहासन होला.
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नूरैन अंसारी

@noorain_ansari

'नूरैन' काटेला जे भी दिन बनवास के,
एक दिन हिस्सा में ओकरे सिंहासन होला.
फेरू आराम करे ना अइबऽ
तनी से तू सम्हरे ना अइबऽ
बताव ना पापा काहे ए साल
ईद मे अबकी घरे ना अइबऽ
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शम्स जमील

@shamsh_jamil

फेरू आराम करे ना अइबऽ
तनी से तू सम्हरे ना अइबऽ
बताव ना पापा काहे ए साल
ईद मे अबकी घरे ना अइबऽ
गोदी मे तोहरा लोटइतीं खूब
साथे भरपेट खइतीं खूब
स्कूल के नवका कविता पढ़ी
पापा तोहके सुनइतीं खूब
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शम्स जमील

@shamsh_jamil

गोदी मे तोहरा लोटइतीं खूब
साथे भरपेट खइतीं खूब
स्कूल के नवका कविता पढ़ी
पापा तोहके सुनइतीं खूब
बड़ी सवख बा हमरो पापा
कान्ह प अपना धरे ना अइबऽ
बताव ना पापा काहे ए साल
ईद मे अबकी घरे ना अइबऽ
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शम्स जमील

@shamsh_jamil

बड़ी सवख बा हमरो पापा
कान्ह प अपना धरे ना अइबऽ
बताव ना पापा काहे ए साल
ईद मे अबकी घरे ना अइबऽ
चुहकत कुहकत चिरई के
आइल दिन अब भिरई के
सुनले बानी हमहुँ कहीं
मास चईत ह पिरई के
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शम्स जमील

@shamsh_jamil

चुहकत कुहकत चिरई के
आइल दिन अब भिरई के
सुनले बानी हमहुँ कहीं
मास चईत ह पिरई के
कटनी बन्हनी आ दंउरी मे
बाबा के मदद करे ना अइबऽ
बताव ना पापा काहे ए साल
ईद मे अबकी घरे ना अइबऽ
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शम्स जमील

@shamsh_jamil

कटनी बन्हनी आ दंउरी मे
बाबा के मदद करे ना अइबऽ
बताव ना पापा काहे ए साल
ईद मे अबकी घरे ना अइबऽ
​का कही ए भाई आज, कईसे हम ईद मनवनी ह,
ईदगाह में सैकड़ों भीड़ रहल ह, बाकिर खुद के तनहा पवनी ह।
​मने-मने सकुचात रहनी ह, कईसे हाथ बढ़ाईं,
कैसे करीं मुसाफ़ा हम, केकरा से हाथ मिलाईं।
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तबारक अंसारी

@tabarak_ansari

​का कही ए भाई आज, कईसे हम ईद मनवनी ह,
ईदगाह में सैकड़ों भीड़ रहल ह, बाकिर खुद के तनहा पवनी ह।
​मने-मने सकुचात रहनी ह, कईसे हाथ बढ़ाईं,
कैसे करीं मुसाफ़ा हम, केकरा से हाथ मिलाईं।
​ईद परदेसी के अइसहीं होला, मन के हम समझवनी ह,
का कही ए भाई आज, कईसे हम ईद मनवनी ह।
​फिर अउते ईदगाह से हम, माई के फोन लगवनी ह,
दुआ-सलाम भईल ह, सब ठीके बाटे बतवनी ह।
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तबारक अंसारी

@tabarak_ansari

​ईद परदेसी के अइसहीं होला, मन के हम समझवनी ह,
का कही ए भाई आज, कईसे हम ईद मनवनी ह।
​फिर अउते ईदगाह से हम, माई के फोन लगवनी ह,
दुआ-सलाम भईल ह, सब ठीके बाटे बतवनी ह।
​क बजे नमाज भईल ह, कब पढ़ के अईला ह?
पूछली ह माई—"ए बाबू! का बनवला ह, का खइला ह?"
​कवनो बात के कमी नईखे, चिंता मत कर माई रे,
तोहरे हाथ के स्वाद सेवई में, इहवाँ कहाँ भेटाई रे!
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तबारक अंसारी

@tabarak_ansari

​क बजे नमाज भईल ह, कब पढ़ के अईला ह?
पूछली ह माई—"ए बाबू! का बनवला ह, का खइला ह?"
​कवनो बात के कमी नईखे, चिंता मत कर माई रे,
तोहरे हाथ के स्वाद सेवई में, इहवाँ कहाँ भेटाई रे!
​आँख भईल ह नम माई के, कईसहूँ ओके समझवनी ह,
का कही ए भाई आज, कईसे हम ईद मनवनी ह।
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तबारक अंसारी

@tabarak_ansari

​आँख भईल ह नम माई के, कईसहूँ ओके समझवनी ह,
का कही ए भाई आज, कईसे हम ईद मनवनी ह।
गर आपन केहू रूठे तऽ
बेमतलब रिश्ता टूटे तऽ
कईसे सुलझाई?
केहू यार बताई?
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राम अचल पटेल

@ram-achal-patel

गर आपन केहू रूठे तऽ
बेमतलब रिश्ता टूटे तऽ
कईसे सुलझाई?
केहू यार बताई?
सब लोग ही अंधी दौड़ में बा
का आपन अउर पराया काऽ
केहु कहे कि रिश्ता बंधन हऽ
केहु कहे कि रिश्ता माया हऽ
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राम अचल पटेल

@ram-achal-patel

सब लोग ही अंधी दौड़ में बा
का आपन अउर पराया काऽ
केहु कहे कि रिश्ता बंधन हऽ
केहु कहे कि रिश्ता माया हऽ
अइसे में कइसे मन में केहु के
अपनापन के बीज उगाई!
केहू यार बताई?
रिश्तन के खींचा - तानी में
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राम अचल पटेल

@ram-achal-patel

अइसे में कइसे मन में केहु के
अपनापन के बीज उगाई!
केहू यार बताई?
रिश्तन के खींचा - तानी में
बस , उमर बेचारी सरकऽता
एक ओर जमाना के ताना
एक ओर जवानी फरकऽता
मन द्वंद के झूला में झूले
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राम अचल पटेल

@ram-achal-patel

बस , उमर बेचारी सरकऽता
एक ओर जमाना के ताना
एक ओर जवानी फरकऽता
मन द्वंद के झूला में झूले
बैरी आपन ही परछाईं!
केहू यार बताई?
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राम अचल पटेल

@ram-achal-patel

बैरी आपन ही परछाईं!
केहू यार बताई?
असली चेहरा भी दिखाओ तो ज़रा तुम
रूह से पर्दा हटाओ तो ज़रा तुम
भूल जाऊँगा सितम सारे पुराने
फिर सितम ढाने को आओ तो ज़रा तुम
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अंकुश तिवारी

@ankush_tiwari

असली चेहरा भी दिखाओ तो ज़रा तुम
रूह से पर्दा हटाओ तो ज़रा तुम
भूल जाऊँगा सितम सारे पुराने
फिर सितम ढाने को आओ तो ज़रा तुम
बेवफा वो बे-ख़बर हम से हो तो हो
पर ख़बर उसकी सुनाओ तो ज़रा तुम
डर मुझे काँटों से लगता ही नहीं है
इन गुलाबों से बचाओ तो ज़रा तुम
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अंकुश तिवारी

@ankush_tiwari

बेवफा वो बे-ख़बर हम से हो तो हो
पर ख़बर उसकी सुनाओ तो ज़रा तुम
डर मुझे काँटों से लगता ही नहीं है
इन गुलाबों से बचाओ तो ज़रा तुम
इल्तिजा है चाँद देखें हम ज़मीं पर
अब ये घूँघट को हटाओ तो ज़रा तुम
है शग़फ़ उसको, सुना है शायरी से
ये हुनर हमको सिखाओ तो ज़रा तुम
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अंकुश तिवारी

@ankush_tiwari

इल्तिजा है चाँद देखें हम ज़मीं पर
अब ये घूँघट को हटाओ तो ज़रा तुम
है शग़फ़ उसको, सुना है शायरी से
ये हुनर हमको सिखाओ तो ज़रा तुम
थक गया मैं तो हकीमों को दिखा कर
इक दवा दिल की बताओ तो ज़रा तुम
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अंकुश तिवारी

@ankush_tiwari

थक गया मैं तो हकीमों को दिखा कर
इक दवा दिल की बताओ तो ज़रा तुम
बुढ़ापा एक दिन अइबे करी
बचपन गइल, जवानी आइल,
उहो एक दिन जइबे करी,
चाहे कवनो जुगत भिड़ाईं,
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राम सागर सिंह

@ramsagar

बुढ़ापा एक दिन अइबे करी
बचपन गइल, जवानी आइल,
उहो एक दिन जइबे करी,
चाहे कवनो जुगत भिड़ाईं,
बुढ़ापा एक दिन अइबे करी!
केतनो दुध मलिदा खाईं,
काजु किशमिश रोज चबाईं,
खिलल देह खिलले ना रही,
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राम सागर सिंह

@ramsagar

बुढ़ापा एक दिन अइबे करी!
केतनो दुध मलिदा खाईं,
काजु किशमिश रोज चबाईं,
खिलल देह खिलले ना रही,
एक दिन इ सूख जइबे करी,
चाहे कवनो जुगत भिड़ाईं,
बुढ़ापा एक दिन अइबे करी!
कवनो पाउडर क्रीम लगाईं,
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राम सागर सिंह

@ramsagar

एक दिन इ सूख जइबे करी,
चाहे कवनो जुगत भिड़ाईं,
बुढ़ापा एक दिन अइबे करी!
कवनो पाउडर क्रीम लगाईं,
रोज रोज मेकअप करवाईं,
ढ़ल जाई चेहरा के पानी,
एक दिन इ मुरझइबे करी,
चाहे कवनो जुगत भिड़ाई,
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राम सागर सिंह

@ramsagar

रोज रोज मेकअप करवाईं,
ढ़ल जाई चेहरा के पानी,
एक दिन इ मुरझइबे करी,
चाहे कवनो जुगत भिड़ाई,
बुढ़ापा एक दिन अइबे करी!
अपने पर इतराइल छोड़ीं,
रुपवा देख धधाइल छोड़ीं
रामसागर कुछ खबर ना लागी,
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राम सागर सिंह

@ramsagar

बुढ़ापा एक दिन अइबे करी!
अपने पर इतराइल छोड़ीं,
रुपवा देख धधाइल छोड़ीं
रामसागर कुछ खबर ना लागी,
चाम हऽ ई झुल जइबे करी,
चाहे कवनो जुगत भिड़ाईं,
बुढापा एक दिन अइबे करी!
©️✍️: रामसागर सिंह
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राम सागर सिंह

@ramsagar

चाम हऽ ई झुल जइबे करी,
चाहे कवनो जुगत भिड़ाईं,
बुढापा एक दिन अइबे करी!
©️✍️: रामसागर सिंह
सिवान, बिहार
M: 8156077577
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राम सागर सिंह

@ramsagar

सिवान, बिहार
M: 8156077577
भोजपुरिया के सपना के, कब ले बहराई कुची से,
कब ले भोजपुरी बाहरे रही, आठवीं अनुसूची से!
दू लाइन भोजपुरी सुनके, रउआ तऽ अगरा गइनी,
उहों के तऽ पोलियो जइसे, दू बून दवा पिया गइनी!
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राम सागर सिंह

@ramsagar

भोजपुरिया के सपना के, कब ले बहराई कुची से,
कब ले भोजपुरी बाहरे रही, आठवीं अनुसूची से!
दू लाइन भोजपुरी सुनके, रउआ तऽ अगरा गइनी,
उहों के तऽ पोलियो जइसे, दू बून दवा पिया गइनी!
उहां के तऽ डोज पियवनी, खाली वोट के रुचि से,
कब ले भोजपुरी बाहरे रही, आठवीं अनुसूची से!
जंतर मंतर बइठ के रउआ, केतना जोर लगाइब जी,
जब ले संघवा सांसद मंत्री, नेताजी के ना पाइब जी,
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राम सागर सिंह

@ramsagar

उहां के तऽ डोज पियवनी, खाली वोट के रुचि से,
कब ले भोजपुरी बाहरे रही, आठवीं अनुसूची से!
जंतर मंतर बइठ के रउआ, केतना जोर लगाइब जी,
जब ले संघवा सांसद मंत्री, नेताजी के ना पाइब जी,
वोट के जब हरियरी देखिहें, नेताजी अइहें खुशी से,
कब ले भोजपुरी बाहरे रही, आठवीं अनुसूची से!
भाग्य के छोट भोजपुरी बाटे, नेता लोग मुंह चोर बा,
भोजपुरी के आवाज ना बने, पीछे खींचले गोड़ बा!
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राम सागर सिंह

@ramsagar

वोट के जब हरियरी देखिहें, नेताजी अइहें खुशी से,
कब ले भोजपुरी बाहरे रही, आठवीं अनुसूची से!
भाग्य के छोट भोजपुरी बाटे, नेता लोग मुंह चोर बा,
भोजपुरी के आवाज ना बने, पीछे खींचले गोड़ बा!
सवांस नइखे लड़हु वाला के, आपस के कानाफुसी से
कब ले भोजपुरी बाहरे रही, आठवीं अनुसूची से!
भोजपुरी से न्याय के खातिर, आईं अब हठयोगी बनीं,
आईं अब भोजपुरी खातिर भोजपुरिया के सहयोगी बनीं,
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राम सागर सिंह

@ramsagar

सवांस नइखे लड़हु वाला के, आपस के कानाफुसी से
कब ले भोजपुरी बाहरे रही, आठवीं अनुसूची से!
भोजपुरी से न्याय के खातिर, आईं अब हठयोगी बनीं,
आईं अब भोजपुरी खातिर भोजपुरिया के सहयोगी बनीं,
रामसागर कठिन लड़ाई बाटे लड़ लिहीं मजबूती से,
कब ले भोजपुरी बाहरे रही आठवीं अनुसूची से!
✍🏻: रामसागर सिंह
सिवान, बिहार ( वर्तमान में सुरत, गुजरात )
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राम सागर सिंह

@ramsagar

रामसागर कठिन लड़ाई बाटे लड़ लिहीं मजबूती से,
कब ले भोजपुरी बाहरे रही आठवीं अनुसूची से!
✍🏻: रामसागर सिंह
सिवान, बिहार ( वर्तमान में सुरत, गुजरात )
M : 8156077577
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राम सागर सिंह

@ramsagar

M : 8156077577
आसमान से हल्का बुंदाबुंदी, चौपाई बयार के संगे पुस के महीना अंतिम चरण में रहे! लगभग दस दिन से सुरुज महाराज कबहूँ कुहासा त कबहूँ बदरी से तोपाइल,धरती पर आपन नजर ना फेरले रहले! हाड़ कंपावे वाला ठंड़ी के असर नवका लोग के भी जेकर खून अभीन गरम बा, रजाई में लुकाये के मजबूर कर देला तऽ सोचीं जे पुरान हो गइल बा ओकर का हाल होई?
नटवर के माई घर के ओसारा में एगो कोना पलास्टिक के चटाई पर बिछावल दोहरा बिछावन पर बइठ के थर थर कांपत रहली! ओढ़े के तऽ उ विदेश से आइल अरबियन कामरा ओढ़ले रहली, बाकिर पुरनिया देह खातिर उहो कामरा साइत कम पड़त रहे! उ मने मन इहे सोंचते रहली कि पलानी, से खपरैल ले, फेरु जब खपरैल से छत वाला मकान भइल तबहुं जिनगी में अइसन ठंढी कबहूँ ना आइल रहे! का जाने इ हमरा उमिर के दोस बा कि सांचो एतना हाड़ कंपावे वाला ठंढी आइल बा!
पहिले के समय में गाँव आजु के जइसन ना रहे! गाँव-गाँव में जाड़ा के दिन में सभका दुअरा पर घुर,आउर बहिन महतारी खातिर आंगन में बोरसी के जरुर बेवस्था रहे! आपन छोटा मोटा काम ओरवाई के सभे घुर चाहे बोरसी के चारो ओर गोलाईं में बइठ के ठंढी भगावे! ओढ़ना के नाम पर पुरान धोती साड़ी के तहिया के, मोटका डोरा से सीयल गुदरी ही ओह समय के रजाई रहे! असली रजाई त केहुवे केहुवे के घरे रहे!
केहु केहु के घरे पिटुआ कामरा(कंबल) भी रहे जवन भेड़िहार भाई लोग भेंड़ी से उन काट के बनावे लोग! ठ़ंढ़ी भगावे खातिर घर के कवनो कोना में जमीन पर बिछल पुअरा पेठारी आउर ओइपर बिछावन के नाम पर कलकतिया जूट के बोरा, जवन कवनो पुरान धोती चाहे लुगा से ढंकाइल रहे! कुस चाहे पेठारी से बनल चटाई भी ठंढी में बिछावना के काम करे! बाकिर जवन भी साधन रहे ओइसे लोग आपन ठंढी जइसे तइसे काट लेव!
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राम सागर सिंह

@ramsagar

आसमान से हल्का बुंदाबुंदी, चौपाई बयार के संगे पुस के महीना अंतिम चरण में रहे! लगभग दस दिन से सुरुज महाराज कबहूँ कुहासा त कबहूँ बदरी से तोपाइल,धरती पर आपन नजर ना फेरले रहले! हाड़ कंपावे वाला ठंड़ी के असर नवका लोग के भी जेकर खून अभीन गरम बा, रजाई में लुकाये के मजबूर कर देला तऽ सोचीं जे पुरान हो गइल बा ओकर का हाल होई?
नटवर के माई घर के ओसारा में एगो कोना पलास्टिक के चटाई पर बिछावल दोहरा बिछावन पर बइठ के थर थर कांपत रहली! ओढ़े के तऽ उ विदेश से आइल अरबियन कामरा ओढ़ले रहली, बाकिर पुरनिया देह खातिर उहो कामरा साइत कम पड़त रहे! उ मने मन इहे सोंचते रहली कि पलानी, से खपरैल ले, फेरु जब खपरैल से छत वाला मकान भइल तबहुं जिनगी में अइसन ठंढी कबहूँ ना आइल रहे! का जाने इ हमरा उमिर के दोस बा कि सांचो एतना हाड़ कंपावे वाला ठंढी आइल बा!
पहिले के समय में गाँव आजु के जइसन ना रहे! गाँव-गाँव में जाड़ा के दिन में सभका दुअरा पर घुर,आउर बहिन महतारी खातिर आंगन में बोरसी के जरुर बेवस्था रहे! आपन छोटा मोटा काम ओरवाई के सभे घुर चाहे बोरसी के चारो ओर गोलाईं में बइठ के ठंढी भगावे! ओढ़ना के नाम पर पुरान धोती साड़ी के तहिया के, मोटका डोरा से सीयल गुदरी ही ओह समय के रजाई रहे! असली रजाई त केहुवे केहुवे के घरे रहे!
केहु केहु के घरे पिटुआ कामरा(कंबल) भी रहे जवन भेड़िहार भाई लोग भेंड़ी से उन काट के बनावे लोग! ठ़ंढ़ी भगावे खातिर घर के कवनो कोना में जमीन पर बिछल पुअरा पेठारी आउर ओइपर बिछावन के नाम पर कलकतिया जूट के बोरा, जवन कवनो पुरान धोती चाहे लुगा से ढंकाइल रहे! कुस चाहे पेठारी से बनल चटाई भी ठंढी में बिछावना के काम करे! बाकिर जवन भी साधन रहे ओइसे लोग आपन ठंढी जइसे तइसे काट लेव!
अब त गांव पहिले के गांव से बहुत आगे निकल गइल! अब मड़ई, पलानी त खतम होखे के किनारा बा! गांवे गांव बहुते लोग के पक्का मकान, रजवाड़ी गेट, बिजली, पंखा, फ्रीज, हिटर, टी. वी. सब लाग गइल! घर के फर्श पहिले माटी से पलास्तर आउर अब मार्बल, टाइल्स आउर महंगा पत्थर के जुग ले आ गइल!
नटवर भी जब से सउदी कमाये लगले पुरान घर तुड़वा के चकाचक नवका स्टाइल के घर बनवा लिहले! घर में सारा सहुलियत के सामान लाग गइल!
घर में चूना के जगह व्हाइट पुटी आउर सिमेन्ट और ओकरा उपर पसंद के रंग के पेन्ट पोताइल! फर्श पर टाइल्स के जगहा सफेद संगमरमर के पत्थर लागल! कुल मिलाके उनकर घर कवनो शहर के बंगला से कवनो कोना से कम ना रहे! कमी रहे त इ रहे कि ओ घर में माई खातिर कवनो जगहा ना रहे!
गिन गुंथ के ज गो घर बनल रहे नटवर, आउर उनका बेटन के हिसाब से बनल रहे! घर के घरभोज होते ही सभे आपन आपन कोठरी छेंका लिहले! ना नटवर इ सोचले कि माई कहाँ रहीहें ना उनका लरिकन के कवनो आपना इया के कवनो फिकिर रहे!
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राम सागर सिंह

@ramsagar

अब त गांव पहिले के गांव से बहुत आगे निकल गइल! अब मड़ई, पलानी त खतम होखे के किनारा बा! गांवे गांव बहुते लोग के पक्का मकान, रजवाड़ी गेट, बिजली, पंखा, फ्रीज, हिटर, टी. वी. सब लाग गइल! घर के फर्श पहिले माटी से पलास्तर आउर अब मार्बल, टाइल्स आउर महंगा पत्थर के जुग ले आ गइल!
नटवर भी जब से सउदी कमाये लगले पुरान घर तुड़वा के चकाचक नवका स्टाइल के घर बनवा लिहले! घर में सारा सहुलियत के सामान लाग गइल!
घर में चूना के जगह व्हाइट पुटी आउर सिमेन्ट और ओकरा उपर पसंद के रंग के पेन्ट पोताइल! फर्श पर टाइल्स के जगहा सफेद संगमरमर के पत्थर लागल! कुल मिलाके उनकर घर कवनो शहर के बंगला से कवनो कोना से कम ना रहे! कमी रहे त इ रहे कि ओ घर में माई खातिर कवनो जगहा ना रहे!
गिन गुंथ के ज गो घर बनल रहे नटवर, आउर उनका बेटन के हिसाब से बनल रहे! घर के घरभोज होते ही सभे आपन आपन कोठरी छेंका लिहले! ना नटवर इ सोचले कि माई कहाँ रहीहें ना उनका लरिकन के कवनो आपना इया के कवनो फिकिर रहे!
पुस के ओह ठंड़ी में नटवर के माई के बिछावना बहरी ओसारा में हो गइल! संगमरमर के पत्थर के फर्श पर पलास्टिक के चटाई के उपर एगो दरी नियन मेंही गुदरी बिछा के सउदी से आइल कामरा दे के माई के सुता दियाइल!
जवन संगमरमर के सफेद पत्थर घाम में भी ठंढ़े रहेला उ पुस के ठंढ़ी रात में का रंग देखावत होई? सुतते फर्श आपन रंग देखावे लागल! जइसे तइसे आँख लागल बाकिर अधरतिया के पहिलहीं आँख खुल गइल! नीचे से चटाई गुदरी सब पाला हो गइल रहे! उ सउदी वाला कामरा के बगल वाला भाग करवट ले के नीचे दबवली!
कुछ आराम मिलल बाकिर तनिक देर बाद फेरु उहो पाला लागे लागल! रात भर जइसे तइसे उखी-बिखी में बितल!भोर होते होते फर्श के बिछावन त बिछावन ह सउदी वाला कामरा भी बुझाव की बरफ हो गइल बा! उ उठ के बइठ गइली!
बिछावन पर एगो कोना गुटियाके देह गरम करे के कोशिश में लाग गइली! बाकिर ना उनके देह के दलदली कम होखे ना उनकर दाँत कटकटाइल!
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राम सागर सिंह

@ramsagar

पुस के ओह ठंड़ी में नटवर के माई के बिछावना बहरी ओसारा में हो गइल! संगमरमर के पत्थर के फर्श पर पलास्टिक के चटाई के उपर एगो दरी नियन मेंही गुदरी बिछा के सउदी से आइल कामरा दे के माई के सुता दियाइल!
जवन संगमरमर के सफेद पत्थर घाम में भी ठंढ़े रहेला उ पुस के ठंढ़ी रात में का रंग देखावत होई? सुतते फर्श आपन रंग देखावे लागल! जइसे तइसे आँख लागल बाकिर अधरतिया के पहिलहीं आँख खुल गइल! नीचे से चटाई गुदरी सब पाला हो गइल रहे! उ सउदी वाला कामरा के बगल वाला भाग करवट ले के नीचे दबवली!
कुछ आराम मिलल बाकिर तनिक देर बाद फेरु उहो पाला लागे लागल! रात भर जइसे तइसे उखी-बिखी में बितल!भोर होते होते फर्श के बिछावन त बिछावन ह सउदी वाला कामरा भी बुझाव की बरफ हो गइल बा! उ उठ के बइठ गइली!
बिछावन पर एगो कोना गुटियाके देह गरम करे के कोशिश में लाग गइली! बाकिर ना उनके देह के दलदली कम होखे ना उनकर दाँत कटकटाइल!
सुबह नटवर जब अंदर से बाहर अइले, माई के दशा देखके फटाफट घर से एगो आउर कामरा लियाके निमन से ओढ़ा दिहले! देह के आराम मिलल! जइसे तइसे दिन बितल, गदबेर हो गइल! नटवर के माई के आपन रात वाला दुरदासा बिसरत ना रहे!
उ आपना बेटा नटवर के बोला के कहली....
"ए बाबु, निचवा बड़ी पाला लागत बा, ना होखे त एह कोनवा तनी पेठारी बिछवा के खटियवा से आड़ कर दिहतऽ! नीचे से हई पत्थरवा पाला लागत बा आउर उपर से सुपुहा मार के इ कामरा पाला कल् देता! "
" का माई? तुहुं अजबे बात करेलु! अतना मँहगा पत्थर फर्श पर पुअरा पेठारी बिछावे के लागल बा! जब पुअरे पेठारी बिछावे के रहीत त इ बनवावला के का फायदा! तनी तुहीं बतावऽ, लाखो रुपिया लगवाके इ पत्थर लगवअले बानी,खटिया खड़ा कर के इहाँ आड़ कइल जाई , जब खटिया एने ओने खिंचाई त एतना महँगा पत्थर खराब ना होई? "
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राम सागर सिंह

@ramsagar

सुबह नटवर जब अंदर से बाहर अइले, माई के दशा देखके फटाफट घर से एगो आउर कामरा लियाके निमन से ओढ़ा दिहले! देह के आराम मिलल! जइसे तइसे दिन बितल, गदबेर हो गइल! नटवर के माई के आपन रात वाला दुरदासा बिसरत ना रहे!
उ आपना बेटा नटवर के बोला के कहली....
"ए बाबु, निचवा बड़ी पाला लागत बा, ना होखे त एह कोनवा तनी पेठारी बिछवा के खटियवा से आड़ कर दिहतऽ! नीचे से हई पत्थरवा पाला लागत बा आउर उपर से सुपुहा मार के इ कामरा पाला कल् देता! "
" का माई? तुहुं अजबे बात करेलु! अतना मँहगा पत्थर फर्श पर पुअरा पेठारी बिछावे के लागल बा! जब पुअरे पेठारी बिछावे के रहीत त इ बनवावला के का फायदा! तनी तुहीं बतावऽ, लाखो रुपिया लगवाके इ पत्थर लगवअले बानी,खटिया खड़ा कर के इहाँ आड़ कइल जाई , जब खटिया एने ओने खिंचाई त एतना महँगा पत्थर खराब ना होई? "
नटवर के माई के तब बुझाइल कि उ केतना कम किमती बाड़ी! नव महिना पेट में ढो के, सगरी दरद पीरा सह के वंश जनमावल जाला! ना जाने कवन कवन सपना मार के लरिकन के पोसल जाता, बाकिर उहे लरिका जवान होके सब निक लिप देत बाड़े सन! बाप महतारी के बुढ़ारी बोझा लागे लागता! नटवर के माई के बुझा गइल कि लरिकाईं में खिंच खिंच के आंचर ओढ़े वाला नटवर खातिर अब उ काम के चीज नइखी रह गइल!
"ना ए बाबु.. हम तो एह से कहनी ह कि पछुआ हलकोरा मारत बा, लागत बा कि लाद में ठंढ़ी मार दी! "
" ना माई! पत्थर पर पुअरा थोड़े बिछी! एगो कामरा अउरी ले लिह, ठंढ़ी ना लागी!
नटवर के माई "ठीक बा" कह के चुप हो गइली! रात के खाना खइला के बाद सभे अपना अपना घर में सुते चल गइल! नटवर के माई के एगो अउरी कामरा दिया गइल! उ तीन तीन गो कामरा ओढ़ के सुत गइली! पछुआ आपना पुरा रंग में रहे! ओढ़ना आउर पछुआ में वर्चस्व के लड़ाई होत रहे! आखिर ओढ़ना पर पछुआ भारी परे लागल! पछुआ अब कामरा के महीन छेदानी से पार होके नटवर के माई के शरीर छेदे लागल! उ उठ के बइठ गइली!
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राम सागर सिंह

@ramsagar

नटवर के माई के तब बुझाइल कि उ केतना कम किमती बाड़ी! नव महिना पेट में ढो के, सगरी दरद पीरा सह के वंश जनमावल जाला! ना जाने कवन कवन सपना मार के लरिकन के पोसल जाता, बाकिर उहे लरिका जवान होके सब निक लिप देत बाड़े सन! बाप महतारी के बुढ़ारी बोझा लागे लागता! नटवर के माई के बुझा गइल कि लरिकाईं में खिंच खिंच के आंचर ओढ़े वाला नटवर खातिर अब उ काम के चीज नइखी रह गइल!
"ना ए बाबु.. हम तो एह से कहनी ह कि पछुआ हलकोरा मारत बा, लागत बा कि लाद में ठंढ़ी मार दी! "
" ना माई! पत्थर पर पुअरा थोड़े बिछी! एगो कामरा अउरी ले लिह, ठंढ़ी ना लागी!
नटवर के माई "ठीक बा" कह के चुप हो गइली! रात के खाना खइला के बाद सभे अपना अपना घर में सुते चल गइल! नटवर के माई के एगो अउरी कामरा दिया गइल! उ तीन तीन गो कामरा ओढ़ के सुत गइली! पछुआ आपना पुरा रंग में रहे! ओढ़ना आउर पछुआ में वर्चस्व के लड़ाई होत रहे! आखिर ओढ़ना पर पछुआ भारी परे लागल! पछुआ अब कामरा के महीन छेदानी से पार होके नटवर के माई के शरीर छेदे लागल! उ उठ के बइठ गइली!
ठंढी छाती में समा गइल रहे! देह काँपे लागल, पेट दलदलाए लागल, दाँत कटकटाये लागल! उ केतने बार कोशिश कइली कि देह ना हिलो, दाँत जनि कटकटाव, बाकिर बार बार के कोशिश नाकाम भइल! उ एक बेरी फेरु से तीनों कामरा देह में लपेट के ओठंग गइली!
पछुआ आउर ओढ़ना के लड़ाई अब ठंढ़ी आउर नटवर के माई के लड़ाई में बदल गइल रहे! ठंढ़ी उनके हिलावे कंपकंपावे के फेर में रहे, उ अपना के ना हिले देवे के लड़ाई लड़त रहली! आखिर धीरे धीरे उ आपन गोड़ लंबा कर के कामरा में गुटिया के सुत गइली!
बिहान होते नटवर घर से बाहर निकलले! देखले के माई आराम से गोड़ लंबा कर के सुतल बाड़ी! नटवर ओसारा से बाहर निकल के गांव के गुमटी पर कुछ लेवे चल गइले! लगभग एक घंटा बाद उ घरे पहुंचले त माई ओसहीं टंगरी लंबा कर के सुतल रहली! मने मन उ सोंचले कि माई तीन गो कामरा पाके आज आराम से सुतल बिया! उ आवाज दिहले...
"माई...! ए माई, उठऽ बिहान हो गइल!"
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राम सागर सिंह

@ramsagar

ठंढी छाती में समा गइल रहे! देह काँपे लागल, पेट दलदलाए लागल, दाँत कटकटाये लागल! उ केतने बार कोशिश कइली कि देह ना हिलो, दाँत जनि कटकटाव, बाकिर बार बार के कोशिश नाकाम भइल! उ एक बेरी फेरु से तीनों कामरा देह में लपेट के ओठंग गइली!
पछुआ आउर ओढ़ना के लड़ाई अब ठंढ़ी आउर नटवर के माई के लड़ाई में बदल गइल रहे! ठंढ़ी उनके हिलावे कंपकंपावे के फेर में रहे, उ अपना के ना हिले देवे के लड़ाई लड़त रहली! आखिर धीरे धीरे उ आपन गोड़ लंबा कर के कामरा में गुटिया के सुत गइली!
बिहान होते नटवर घर से बाहर निकलले! देखले के माई आराम से गोड़ लंबा कर के सुतल बाड़ी! नटवर ओसारा से बाहर निकल के गांव के गुमटी पर कुछ लेवे चल गइले! लगभग एक घंटा बाद उ घरे पहुंचले त माई ओसहीं टंगरी लंबा कर के सुतल रहली! मने मन उ सोंचले कि माई तीन गो कामरा पाके आज आराम से सुतल बिया! उ आवाज दिहले...
"माई...! ए माई, उठऽ बिहान हो गइल!"
माई कुछउ ना बोलली! उ फेरु आवाज दिहले...
" ए माई, उठऽ ना... आजु तिन गो कामरा मिलल बा त आराम से सुतल बाड़ु! कहुवीं नु कि एगो अउरी कामरा ले ल.. ठंढी ना लागी! "
माई फेरु कुछउ ना बोलली!
नटवर आगे बढ़ के माई के जगावे खातिर कामरा खिंचले! " माई उठऽ... "
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राम सागर सिंह

@ramsagar

माई कुछउ ना बोलली! उ फेरु आवाज दिहले...
" ए माई, उठऽ ना... आजु तिन गो कामरा मिलल बा त आराम से सुतल बाड़ु! कहुवीं नु कि एगो अउरी कामरा ले ल.. ठंढी ना लागी! "
माई फेरु कुछउ ना बोलली!
नटवर आगे बढ़ के माई के जगावे खातिर कामरा खिंचले! " माई उठऽ... "
एगो कामरा उनका हाथ में आ गइल! माई ना हिलली! उ घबरा के फेरु ओढ़ना जोर से पकड़ के खिंच ले... "ए माई.. उठऽ ना.. "
पुरा ओढ़ना उनका हाथ में आ गइल! माई ना हिलली! अब जवन सोझा रहे उ देख के नटवर अवाक रह गइले! माई के दाँत पर दाँत कसाइल रहे, आँख बन्द रहे, हाथ खुलल रहे, नाक से एक दू बूंद खून चु के जम गइल रहे! नटवर के माई ठंढ़ी से आपन लड़ाई हार गइल रहली!
नटवर अब दहाड़ मार मार के माई माई कह के रोवे लगले!उनका लरिकाईं से लेके अभिन तक के सब बात इयाद परे लागल! जिनगी में जवन मिलल माई के आशीर्वाद से मिलल! बाकिर अफसोस....!
कुछ देर बाद नटवर काँच बाँस से बनल पचाठी पर माई के लाश खातिर पुअरा बिछावत रहले! काश.. इ पुअरा एक दिन पहिले उ संगमरमर के पत्थर पर बिछा देले रहते त एतना जल्दी पचाठी पर ना बिछावे के पड़ीत!
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राम सागर सिंह

@ramsagar

एगो कामरा उनका हाथ में आ गइल! माई ना हिलली! उ घबरा के फेरु ओढ़ना जोर से पकड़ के खिंच ले... "ए माई.. उठऽ ना.. "
पुरा ओढ़ना उनका हाथ में आ गइल! माई ना हिलली! अब जवन सोझा रहे उ देख के नटवर अवाक रह गइले! माई के दाँत पर दाँत कसाइल रहे, आँख बन्द रहे, हाथ खुलल रहे, नाक से एक दू बूंद खून चु के जम गइल रहे! नटवर के माई ठंढ़ी से आपन लड़ाई हार गइल रहली!
नटवर अब दहाड़ मार मार के माई माई कह के रोवे लगले!उनका लरिकाईं से लेके अभिन तक के सब बात इयाद परे लागल! जिनगी में जवन मिलल माई के आशीर्वाद से मिलल! बाकिर अफसोस....!
कुछ देर बाद नटवर काँच बाँस से बनल पचाठी पर माई के लाश खातिर पुअरा बिछावत रहले! काश.. इ पुअरा एक दिन पहिले उ संगमरमर के पत्थर पर बिछा देले रहते त एतना जल्दी पचाठी पर ना बिछावे के पड़ीत!
✍️: रामसागर सिंह
ग्राम: कोदई, पचरुखी, सिवान (बिहार)
M: 8156077577
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राम सागर सिंह

@ramsagar

✍️: रामसागर सिंह
ग्राम: कोदई, पचरुखी, सिवान (बिहार)
M: 8156077577
लरिकाईं में हमहुँ एगो, रोबोट बनवले रहनी,
ओकरे आगे हम अपना के, छोट बनवले रहनी।
आठ पहर उ राखत रहे, अपना आँखि के सोझा,
हरदम कोरा टांगि के राखे, ना बुझलस उ बोझा।
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राम सागर सिंह

@ramsagar

लरिकाईं में हमहुँ एगो, रोबोट बनवले रहनी,
ओकरे आगे हम अपना के, छोट बनवले रहनी।
आठ पहर उ राखत रहे, अपना आँखि के सोझा,
हरदम कोरा टांगि के राखे, ना बुझलस उ बोझा।
ममता छोह लुटावे अउरी, पुचकारे दुलरावे,
जब हमरा के भूख लागे, उ आपन दूध पियावे।
हरदम अपना कोरा ले के, संघहि अपना राखे,
उ हमरा कुशलाई खातिर, दर दर भारा भाखे।
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राम सागर सिंह

@ramsagar

ममता छोह लुटावे अउरी, पुचकारे दुलरावे,
जब हमरा के भूख लागे, उ आपन दूध पियावे।
हरदम अपना कोरा ले के, संघहि अपना राखे,
उ हमरा कुशलाई खातिर, दर दर भारा भाखे।
बिनु कहले सब जाने बुझे, हमरा देह के भाषा,
बिनु स्वार्थ सब करे कवनो ना रखलस उ आशा।
अनजाने में कबहुँ जे बिस्तर पर झाड़ा फिरीं,
रोबोट नु रहे! तब उ दउरल आवे हमरा भिरीं।
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राम सागर सिंह

@ramsagar

बिनु कहले सब जाने बुझे, हमरा देह के भाषा,
बिनु स्वार्थ सब करे कवनो ना रखलस उ आशा।
अनजाने में कबहुँ जे बिस्तर पर झाड़ा फिरीं,
रोबोट नु रहे! तब उ दउरल आवे हमरा भिरीं।
धोवे पोंछे नहवावे आ देहि में तेल लगावे
मिसे गोड़ आ देह दबावे हमरो थाक भगावें।
आँखि में हमरा काजर करें माथे लगावे टीका,
टोना नजर ना लागे देवे ओकर इहे तरीका।
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राम सागर सिंह

@ramsagar

धोवे पोंछे नहवावे आ देहि में तेल लगावे
मिसे गोड़ आ देह दबावे हमरो थाक भगावें।
आँखि में हमरा काजर करें माथे लगावे टीका,
टोना नजर ना लागे देवे ओकर इहे तरीका।
रखले रहे मामा एगो आसमान के जाके,
दुध आ भात खियावत रहे चंदा रोज बोला के।
अपने गोदी राखे हमके अपने पास सुतावे,
आजा नींनिया रानी कहके लोरी रोज सुनावें।
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राम सागर सिंह

@ramsagar

रखले रहे मामा एगो आसमान के जाके,
दुध आ भात खियावत रहे चंदा रोज बोला के।
अपने गोदी राखे हमके अपने पास सुतावे,
आजा नींनिया रानी कहके लोरी रोज सुनावें।
आंचर ओकर ओढ़ना हमरो आंचर रहे बिछवना,
सोंचिले के ओइसन सुख अब मिली जगहा कवना?
कवनो बात के फिकिर ना रहे, सब कुछ उहे करें,
नेटा पोंटा गुह मुत से ,ओकर जीव ना भरे।
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राम सागर सिंह

@ramsagar

आंचर ओकर ओढ़ना हमरो आंचर रहे बिछवना,
सोंचिले के ओइसन सुख अब मिली जगहा कवना?
कवनो बात के फिकिर ना रहे, सब कुछ उहे करें,
नेटा पोंटा गुह मुत से ,ओकर जीव ना भरे।
गंड़तर भगई फिंचत फिंचत कहियो ना अगुताइल,
जब जब हमरा ओरी देखलस खुश भइल मुस्काइल।
खुशी के ओकरा पार ना रहे जब हमरा के देखे,
रामसागर कलम सियाही से हम लिखीं कवना लेखे।
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राम सागर सिंह

@ramsagar

गंड़तर भगई फिंचत फिंचत कहियो ना अगुताइल,
जब जब हमरा ओरी देखलस खुश भइल मुस्काइल।
खुशी के ओकरा पार ना रहे जब हमरा के देखे,
रामसागर कलम सियाही से हम लिखीं कवना लेखे।
कुछ बड़ हम भइनी हमहुं कइनी कुछ चतुराई,
खुश होई के हमहीं ओकर नाम ध दिहनी माई!
✍🏻: Ramsagar Singh
M: 8156077577
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राम सागर सिंह

@ramsagar

कुछ बड़ हम भइनी हमहुं कइनी कुछ चतुराई,
खुश होई के हमहीं ओकर नाम ध दिहनी माई!
✍🏻: Ramsagar Singh
M: 8156077577
मिलल जिनगी त रिश्ता हजार बनल,
हजारों मे एक माई के प्यार बनल।
मस्जिद से मंदिर त देव भी हजार हो,
सबसे बड़ जिनगी मे माई के प्यार हो।
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राघवेंद्र प्रकाश 'रघु'

@raghwendra_prakash_raghu

मिलल जिनगी त रिश्ता हजार बनल,
हजारों मे एक माई के प्यार बनल।
मस्जिद से मंदिर त देव भी हजार हो,
सबसे बड़ जिनगी मे माई के प्यार हो।
जेकर अँगुरी पकड़ के देखनी जहान हो,
मतलबी दुनिया मे माई तुही महान हो।
जिनगी मे जेकरा ना मिलल प्यार माई के,
बहुते अभागा माने ई संसार मे आई के।
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राघवेंद्र प्रकाश 'रघु'

@raghwendra_prakash_raghu

जेकर अँगुरी पकड़ के देखनी जहान हो,
मतलबी दुनिया मे माई तुही महान हो।
जिनगी मे जेकरा ना मिलल प्यार माई के,
बहुते अभागा माने ई संसार मे आई के।
दिल के शीशमहल मे छुपा के राखी माई हो,
बहुते सुकुन मिले ओढ़ी तोहार अंचरा माई हो।
फरेबी बनावटी दुनिया मे ममता के मूरत तू,
बहन-भाई-भाई मे प्यार रहेलु जोड़त तू।
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राघवेंद्र प्रकाश 'रघु'

@raghwendra_prakash_raghu

दिल के शीशमहल मे छुपा के राखी माई हो,
बहुते सुकुन मिले ओढ़ी तोहार अंचरा माई हो।
फरेबी बनावटी दुनिया मे ममता के मूरत तू,
बहन-भाई-भाई मे प्यार रहेलु जोड़त तू।
नाही पाई जगह दुनिया मे केहू माई के,
नमन करें "रघुआ" एह दुनिया के सब माई के।
नेकी ना दिलाई माई केहू कतनो महान हो,
जुग कवनो आई माई रहीहे महान हो...
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राघवेंद्र प्रकाश 'रघु'

@raghwendra_prakash_raghu

नाही पाई जगह दुनिया मे केहू माई के,
नमन करें "रघुआ" एह दुनिया के सब माई के।
नेकी ना दिलाई माई केहू कतनो महान हो,
जुग कवनो आई माई रहीहे महान हो...
माई रहीहे महान हो।
✍️राघवेंद्र प्रकाश 'रघु'✍️
ब्रह्मपुर धाम, बक्सर (बिहार)
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राघवेंद्र प्रकाश 'रघु'

@raghwendra_prakash_raghu

माई रहीहे महान हो।
✍️राघवेंद्र प्रकाश 'रघु'✍️
ब्रह्मपुर धाम, बक्सर (बिहार)
दुनिया बात बतावत बाटे,
आपन लोग हरावत बाटे।
मान, जान अउरी गरिमा के,
तफरी खूब उड़ावत बाटे।।
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मुकेश यादव "भावुक"

@bhawuk

दुनिया बात बतावत बाटे,
आपन लोग हरावत बाटे।
मान, जान अउरी गरिमा के,
तफरी खूब उड़ावत बाटे।।
​जेकरा के आपन कहनी हम,
विष के बीज जमावत बाटे।
हँसत देख के दुनिया सगरी,
भीतर-भीतर गावत बाटे।।
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मुकेश यादव "भावुक"

@bhawuk

​जेकरा के आपन कहनी हम,
विष के बीज जमावत बाटे।
हँसत देख के दुनिया सगरी,
भीतर-भीतर गावत बाटे।।
​साँच कहल अब मुश्किल भइल,
झूठ के शोर सुनावत बाटे।
नेह-छोह के धागा कच्चा,
लालच आज तुरावत बाटे।।
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मुकेश यादव "भावुक"

@bhawuk

​साँच कहल अब मुश्किल भइल,
झूठ के शोर सुनावत बाटे।
नेह-छोह के धागा कच्चा,
लालच आज तुरावत बाटे।।
​काँटा बन के रस्ता रोके,
जे राही के भावत बाटे।
भरम के ऊँच महल गढ़ के,
सपना के भरमावत बाटे।
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मुकेश यादव "भावुक"

@bhawuk

​काँटा बन के रस्ता रोके,
जे राही के भावत बाटे।
भरम के ऊँच महल गढ़ के,
सपना के भरमावत बाटे।
बानी बड़ा मजबुरी मे
का लिखीं भोजपुरी मे।
सोहर समाज से दुर भइल
निर्गुन के दोहन भरपुर भइल
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शम्स जमील

@shamsh_jamil

बानी बड़ा मजबुरी मे
का लिखीं भोजपुरी मे।
सोहर समाज से दुर भइल
निर्गुन के दोहन भरपुर भइल
आपन रिवाज के बियाहे के गीत
डीजे के आगे चकनाचुर भइल।
बिना गीतन अब निक ना लागे
रोपनी- सोहनी के मजदुरी मे।
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शम्स जमील

@shamsh_jamil

आपन रिवाज के बियाहे के गीत
डीजे के आगे चकनाचुर भइल।
बिना गीतन अब निक ना लागे
रोपनी- सोहनी के मजदुरी मे।
बानी बड़ा मजबुरी मे
का लिखीं भोजपुरी मे।
गजब के पुरानका रीत रहे
हर परब-तेवहार के गीत रहे
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शम्स जमील

@shamsh_jamil

बानी बड़ा मजबुरी मे
का लिखीं भोजपुरी मे।
गजब के पुरानका रीत रहे
हर परब-तेवहार के गीत रहे
छठी माई से काली माई तक
आपन एगो संगीत रहे।
लोकगीत अब नाच रहल बा
अश्लीलता के अँगुरी मे।
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शम्स जमील

@shamsh_jamil

छठी माई से काली माई तक
आपन एगो संगीत रहे।
लोकगीत अब नाच रहल बा
अश्लीलता के अँगुरी मे।
बानी बड़ा मजबुरी मे
का लिखीं भोजपुरी मे।
बितल सावन ना कजरी आइल
मास चइत ना चइता सुनाइल
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शम्स जमील

@shamsh_jamil

बानी बड़ा मजबुरी मे
का लिखीं भोजपुरी मे।
बितल सावन ना कजरी आइल
मास चइत ना चइता सुनाइल
कुहके जियरा बारहमाँसा के बिना
पुरबी जग से भाग पराइल।
अल्हा- बिरहा लउक रहल बा
हजारों कोस के दुरी मे।
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शम्स जमील

@shamsh_jamil

कुहके जियरा बारहमाँसा के बिना
पुरबी जग से भाग पराइल।
अल्हा- बिरहा लउक रहल बा
हजारों कोस के दुरी मे।
बानी बड़ा मजबुरी मे
का लिखीं भोजपुरी मे।
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शम्स जमील

@shamsh_jamil

बानी बड़ा मजबुरी मे
का लिखीं भोजपुरी मे।
तुम मुझे याद भी करते हो क्या?
अब बता दो प्यार करते हो क्या?
सामने मैं हूँ और ये हिचकियाँ भी,
कहीं और फ़रियाद करते हो क्या?
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मुकेश यादव "भावुक"

@bhawuk

तुम मुझे याद भी करते हो क्या?
अब बता दो प्यार करते हो क्या?
सामने मैं हूँ और ये हिचकियाँ भी,
कहीं और फ़रियाद करते हो क्या?
ना दूर रहेनी,ना पास रहेनी
बन के केहू के आस रहेनी
कहियों ख़ुश होखेम त लिखेम
कि काहे एतना उदास रहेनी
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नूरैन अंसारी

@noorain_ansari

ना दूर रहेनी,ना पास रहेनी
बन के केहू के आस रहेनी
कहियों ख़ुश होखेम त लिखेम
कि काहे एतना उदास रहेनी
थोड़ी हया तो होनी चाहिए आँखों में
थोड़ी तमीज़ तो होनी चाहिए बातों में
रुतबा किसका कितना है क्या करना
रास्ते तो गीले हो ही जाते हैं बरसातों में
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नेहा यादव

@neha_yadav

थोड़ी हया तो होनी चाहिए आँखों में
थोड़ी तमीज़ तो होनी चाहिए बातों में
रुतबा किसका कितना है क्या करना
रास्ते तो गीले हो ही जाते हैं बरसातों में
थोड़ा लहज़ा संभाला करें तो अच्छा है
नफ़रत में घर तक जल जाते हैं बातों में
फ़ुर्सत किसको है किसी से मुलाक़ात की
यहां चेहरे तक पहचाने जाते हैं हालातों में
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नेहा यादव

@neha_yadav

थोड़ा लहज़ा संभाला करें तो अच्छा है
नफ़रत में घर तक जल जाते हैं बातों में
फ़ुर्सत किसको है किसी से मुलाक़ात की
यहां चेहरे तक पहचाने जाते हैं हालातों में
थोड़ा नरमी रखा करिए 'बिना रंग बदले
फिर देखिए लोग भीग जाते हैं जज़्बातों में
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नेहा यादव

@neha_yadav

थोड़ा नरमी रखा करिए 'बिना रंग बदले
फिर देखिए लोग भीग जाते हैं जज़्बातों में
कहाँ केहु दिल में उपकार राखत बा
मतलब से ख़ाली सरोकार राखत बा
बस गरज ले बाटे सब रिश्ता - नाता
बेगरज कहा कौनो दरकार राखत बा
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नूरैन अंसारी

@noorain_ansari

कहाँ केहु दिल में उपकार राखत बा
मतलब से ख़ाली सरोकार राखत बा
बस गरज ले बाटे सब रिश्ता - नाता
बेगरज कहा कौनो दरकार राखत बा
जेकरा के लोग समझत बा आपन
पीठ पीछे उहे तलवार राखत बा
दोसरा के ख़ुशी अब कहा सोहाता
मन में लोग इरखा हज़ार राखत बा
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नूरैन अंसारी

@noorain_ansari

जेकरा के लोग समझत बा आपन
पीठ पीछे उहे तलवार राखत बा
दोसरा के ख़ुशी अब कहा सोहाता
मन में लोग इरखा हज़ार राखत बा
लोग अन्दर से कुछू बा बाहर से कुछू
हर आदमी कइ गो किरदार राखत बा.
आ जेकरा के ईश्वर देत बाडेन खूब
उहे औरी लूटे के बिचार राखत बा.
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नूरैन अंसारी

@noorain_ansari

लोग अन्दर से कुछू बा बाहर से कुछू
हर आदमी कइ गो किरदार राखत बा.
आ जेकरा के ईश्वर देत बाडेन खूब
उहे औरी लूटे के बिचार राखत बा.
अपने लोग अब पराया हो गइल।
गांव से बरगद के सफाया हो गइल।
मेल-जोल अब धतूरा सन जहरीला भइल,
आम-अमरुद के स्वाद पुराना हो गइल।
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मुकेश यादव "भावुक"

@bhawuk

अपने लोग अब पराया हो गइल।
गांव से बरगद के सफाया हो गइल।
मेल-जोल अब धतूरा सन जहरीला भइल,
आम-अमरुद के स्वाद पुराना हो गइल।
चिउंटी के चीनी खियावे वाला लोग कहाँ गइल,
अब त आदमी, आदमी के ही निशाना हो गइल।
डीह बाबा के चउरा पर बैठकी के रिवाज हेराइल,
जब से हर आँगन मे मोबाईल के जमाना हो गइल.
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मुकेश यादव "भावुक"

@bhawuk

चिउंटी के चीनी खियावे वाला लोग कहाँ गइल,
अब त आदमी, आदमी के ही निशाना हो गइल।
डीह बाबा के चउरा पर बैठकी के रिवाज हेराइल,
जब से हर आँगन मे मोबाईल के जमाना हो गइल.
सच कहे वाला के अब के सुनत बा एहिजा,
झूठ के बाजीगर ही सबसे सेयाना हो गइल.
खेत खलिहान छोड़ शहर भागे लागल सब,
माटी से रिश्ता भी अब बेगाना हो गइल.
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मुकेश यादव "भावुक"

@bhawuk

सच कहे वाला के अब के सुनत बा एहिजा,
झूठ के बाजीगर ही सबसे सेयाना हो गइल.
खेत खलिहान छोड़ शहर भागे लागल सब,
माटी से रिश्ता भी अब बेगाना हो गइल.
के सुनी अब झूमर, झारी, चइता, बिरहा, कजरी,
“भावुक” के बोली अब बस फसाना हो गइल।
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मुकेश यादव "भावुक"

@bhawuk

के सुनी अब झूमर, झारी, चइता, बिरहा, कजरी,
“भावुक” के बोली अब बस फसाना हो गइल।
सब एहीजे मिली
---------------------
मोर बाल बच्चा खूबे सुनर,
ई घमंड रूप के पाली मत।
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राघवेंद्र प्रकाश 'रघु'

@raghwendra_prakash_raghu

सब एहीजे मिली
---------------------
मोर बाल बच्चा खूबे सुनर,
ई घमंड रूप के पाली मत।
दोसरा के करिया नकभेभर,
मीन मेख अनका काढ़ी मत।।
सुनरको जाइ बउरको जाइ,
बिधना के लेख बुझाई कब।
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राघवेंद्र प्रकाश 'रघु'

@raghwendra_prakash_raghu

दोसरा के करिया नकभेभर,
मीन मेख अनका काढ़ी मत।।
सुनरको जाइ बउरको जाइ,
बिधना के लेख बुझाई कब।
धरम करम तनी राखी निमन,
ताकि गईला पर गुन गाई सब।।
रहत होखऽ तू महल अटारी,
चाहें टूटल झोपड़ पट्टी लघु।
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राघवेंद्र प्रकाश 'रघु'

@raghwendra_prakash_raghu

धरम करम तनी राखी निमन,
ताकि गईला पर गुन गाई सब।।
रहत होखऽ तू महल अटारी,
चाहें टूटल झोपड़ पट्टी लघु।
आइल बा जे ऊ जइबे करी,
के विधि लेखा के टारी 'रघु'।।
रात अन्हरिया भा अंजोरिया,
हो बसंत या दिन पानी बुनी।
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राघवेंद्र प्रकाश 'रघु'

@raghwendra_prakash_raghu

आइल बा जे ऊ जइबे करी,
के विधि लेखा के टारी 'रघु'।।
रात अन्हरिया भा अंजोरिया,
हो बसंत या दिन पानी बुनी।
छोड़ देह चल जाइ बहरिया,
अमर आत्मा के सब कहानी सुनी।।
छोड़ऽ घमंड रूपया पइसा के,
सोना नियन महल अटारी के।
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राघवेंद्र प्रकाश 'रघु'

@raghwendra_prakash_raghu

छोड़ देह चल जाइ बहरिया,
अमर आत्मा के सब कहानी सुनी।।
छोड़ऽ घमंड रूपया पइसा के,
सोना नियन महल अटारी के।
ए मनई रहऽ बना व्यवहार के,
ना त उड़त परान देह जारी के।।
बाउर दिन भी बनत मिली,
बनल दिन होत बाउर मिली।
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राघवेंद्र प्रकाश 'रघु'

@raghwendra_prakash_raghu

ए मनई रहऽ बना व्यवहार के,
ना त उड़त परान देह जारी के।।
बाउर दिन भी बनत मिली,
बनल दिन होत बाउर मिली।
जइसन करबऽ ओइसन मिली,
सरग नरक सब एहीजे मिली।।
✍️राघवेंद्र प्रकाश 'रघु'
ब्रह्मपुर, बक्सर (बिहार)
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राघवेंद्र प्रकाश 'रघु'

@raghwendra_prakash_raghu

जइसन करबऽ ओइसन मिली,
सरग नरक सब एहीजे मिली।।
✍️राघवेंद्र प्रकाश 'रघु'
ब्रह्मपुर, बक्सर (बिहार)
​आजकल के जमाना देख के मन भकुआ जाला। शौक के कवनो ओर-छोर नइखे रह गइल। जहाँ पहिले दुआर पर गाय-गोरु के रँभाईल सुभ मानल जात रहे, ओहिजा अब कुकुर पोसल जा रहल बा। पहिले स्वागत में कुछु लिखात रहें मेन दरवाजा के आसपास अब कुकुर से बचे के चेतावनी लिखल लउकत बा। आ तनी ओकर तवज्जो देखल जाव... कुकुर न भइल, कवनो वीआईपी (VIP) मेहमान भइल!
​हमार पड़ोसी भइया जी, जे हर बात में 'राजधानी' के रट लगावेले, ऊहो एगो करिया कुकुर ले अइलन। दाम पूछनी त अइसन गरबइलन जइसे कवनो मंगल ग्रह के प्राणी के सौदा क के आइल होखस— "अरे का बताई भयवा, 12000 के त खाली बच्चा रहे, 14000 त ओकरा दवाई-बिरोई में लाग गइल। खास पटना के शौकीन घर के नसल (Breed) ह!"
​हमहूँ तनी 'तेल' लगावे खातिर बिना मन के कह देनी— "वाह भइया! मान गइनी। कुकुर त कुकुर बा, एकदम कुचु-कुचु करिया! अइसन स्मार्ट लुक त पूरा जवार में केहु के कुकुर के नइखे। एकदम लाजवाब बा राउर ई कुकुर.. राउर पसंद के त कवनो जवाबे नइखे!"
​एतना सुनत कहीं कि भइया जी के 'कॉन्फिडेंस' सातवाँ आसमान चीर दिहलस। अब ऊ अंग्रेजी आ हिंदी के खिचड़ी (हिंग्लिश) बना के कुकुर के खान-पान से लेके ओकरा पखाना तक के 'महिमा मंडन' शुरू कर देहलन। हम बेचारा, भोजपुरी देहाती मन, जम्हाई लेत-लेत उनकर गप लपेटे लगनी जैसे तिलंगी उडावत घरी कटला के बाद लटाई में धागा लपेटत होखी... एकदम मुँह चोथा लेखा बनवले.. झवाइल मन से!
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राघवेंद्र प्रकाश 'रघु'

@raghwendra_prakash_raghu

​आजकल के जमाना देख के मन भकुआ जाला। शौक के कवनो ओर-छोर नइखे रह गइल। जहाँ पहिले दुआर पर गाय-गोरु के रँभाईल सुभ मानल जात रहे, ओहिजा अब कुकुर पोसल जा रहल बा। पहिले स्वागत में कुछु लिखात रहें मेन दरवाजा के आसपास अब कुकुर से बचे के चेतावनी लिखल लउकत बा। आ तनी ओकर तवज्जो देखल जाव... कुकुर न भइल, कवनो वीआईपी (VIP) मेहमान भइल!
​हमार पड़ोसी भइया जी, जे हर बात में 'राजधानी' के रट लगावेले, ऊहो एगो करिया कुकुर ले अइलन। दाम पूछनी त अइसन गरबइलन जइसे कवनो मंगल ग्रह के प्राणी के सौदा क के आइल होखस— "अरे का बताई भयवा, 12000 के त खाली बच्चा रहे, 14000 त ओकरा दवाई-बिरोई में लाग गइल। खास पटना के शौकीन घर के नसल (Breed) ह!"
​हमहूँ तनी 'तेल' लगावे खातिर बिना मन के कह देनी— "वाह भइया! मान गइनी। कुकुर त कुकुर बा, एकदम कुचु-कुचु करिया! अइसन स्मार्ट लुक त पूरा जवार में केहु के कुकुर के नइखे। एकदम लाजवाब बा राउर ई कुकुर.. राउर पसंद के त कवनो जवाबे नइखे!"
​एतना सुनत कहीं कि भइया जी के 'कॉन्फिडेंस' सातवाँ आसमान चीर दिहलस। अब ऊ अंग्रेजी आ हिंदी के खिचड़ी (हिंग्लिश) बना के कुकुर के खान-पान से लेके ओकरा पखाना तक के 'महिमा मंडन' शुरू कर देहलन। हम बेचारा, भोजपुरी देहाती मन, जम्हाई लेत-लेत उनकर गप लपेटे लगनी जैसे तिलंगी उडावत घरी कटला के बाद लटाई में धागा लपेटत होखी... एकदम मुँह चोथा लेखा बनवले.. झवाइल मन से!
​मने-मन सोचत रही कि— भाला होखे ई भइया जी के, जे खुद दिन भर कवनो न कवनो नशा में चूर रहेले, माई-बाबू के एकलौता 'कुल-दीपक' (वारिस) हउअन, आ जिनका घर के शाकाहारी चूल्हा पर कसहूँ दाल-भात चड़त बा... ऊ आज कुकुर के 'डाइट' (Diet) पर लेक्चर दे रहल बाड़न!
​हँसी त तब रोके ना रुकल जब ऊ कहलन— "देखऽ भाई, एकरा के हम रोज केला, सेब आ गाय के पियोर दूध-भात खियाइला। एकदम सात्विक भोजन! रोज मतलब प्रतिदिन, एको दिन नागा ना!"
​हमरा के कृषि के पढ़ाई में 'एनिमल हसबेंडरी' (पशुपालन) वाला मास्टर साहब पढ़ावत रहन कि कुकुर मूल रूप से मांसाहारी जीव ह। आ हमहूँ जवार में देखले बानी कि कइसन करिया-उजर कुकुर अंडा-मांस देखला पर गप-गप लेल लपकावेले। अब भइया जी के ई 'शाकाहारी कुकुर' कवन नया अवतार रहे, ई त भगवानें जानस!
​एतने में ऊ 'करिया कुकुर' अपना मालिक के संगे प्रस्थान करे लागल। जाते-जाते ऊ हमरा गली में 'लिक्विड फॉर्म' में पातर पोट्टी (छेरत) करत गइल। जइसे कहत होखे— "बड़ाई त खूब कइलऽ, अब ई प्रसाद भोगऽ!"
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राघवेंद्र प्रकाश 'रघु'

@raghwendra_prakash_raghu

​मने-मन सोचत रही कि— भाला होखे ई भइया जी के, जे खुद दिन भर कवनो न कवनो नशा में चूर रहेले, माई-बाबू के एकलौता 'कुल-दीपक' (वारिस) हउअन, आ जिनका घर के शाकाहारी चूल्हा पर कसहूँ दाल-भात चड़त बा... ऊ आज कुकुर के 'डाइट' (Diet) पर लेक्चर दे रहल बाड़न!
​हँसी त तब रोके ना रुकल जब ऊ कहलन— "देखऽ भाई, एकरा के हम रोज केला, सेब आ गाय के पियोर दूध-भात खियाइला। एकदम सात्विक भोजन! रोज मतलब प्रतिदिन, एको दिन नागा ना!"
​हमरा के कृषि के पढ़ाई में 'एनिमल हसबेंडरी' (पशुपालन) वाला मास्टर साहब पढ़ावत रहन कि कुकुर मूल रूप से मांसाहारी जीव ह। आ हमहूँ जवार में देखले बानी कि कइसन करिया-उजर कुकुर अंडा-मांस देखला पर गप-गप लेल लपकावेले। अब भइया जी के ई 'शाकाहारी कुकुर' कवन नया अवतार रहे, ई त भगवानें जानस!
​एतने में ऊ 'करिया कुकुर' अपना मालिक के संगे प्रस्थान करे लागल। जाते-जाते ऊ हमरा गली में 'लिक्विड फॉर्म' में पातर पोट्टी (छेरत) करत गइल। जइसे कहत होखे— "बड़ाई त खूब कइलऽ, अब ई प्रसाद भोगऽ!"
​हम चैन के साँस लेबे ही वाला रहनी कि नजर पड़ल— हमरा घर के ठीक सोझै, दरवाजा के मुँह पर ऊ कुकुर लिक्विड वाला 'सिंगार' क के गइल रहे। हम मन ही मन कुकुर के पगहा धइले भइया जी के 'गरियावत' गली के बाल्टी-पानी ले के साफ करे लगनी कि बिहान कवनो मान-जान के गोड़ ओकरा में पवितर मत हो जाव।
​अब जा तानी देह-हाथ धोए... काहें कि जब गाय-गोरु पोसे वाला खानदान कुकुर के डाइट चार्ट बनावे आ ओकर बखान लागे करें नू , त आदमी के भकुआइल तय बा! जइसे हमरा दिने में जोन्हि लउकत रहें।
✍️राघवेंद्र प्रकाश 'रघु'
ब्रह्मपुर, बक्सर (बिहार)
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राघवेंद्र प्रकाश 'रघु'

@raghwendra_prakash_raghu

​हम चैन के साँस लेबे ही वाला रहनी कि नजर पड़ल— हमरा घर के ठीक सोझै, दरवाजा के मुँह पर ऊ कुकुर लिक्विड वाला 'सिंगार' क के गइल रहे। हम मन ही मन कुकुर के पगहा धइले भइया जी के 'गरियावत' गली के बाल्टी-पानी ले के साफ करे लगनी कि बिहान कवनो मान-जान के गोड़ ओकरा में पवितर मत हो जाव।
​अब जा तानी देह-हाथ धोए... काहें कि जब गाय-गोरु पोसे वाला खानदान कुकुर के डाइट चार्ट बनावे आ ओकर बखान लागे करें नू , त आदमी के भकुआइल तय बा! जइसे हमरा दिने में जोन्हि लउकत रहें।
✍️राघवेंद्र प्रकाश 'रघु'
ब्रह्मपुर, बक्सर (बिहार)
याद त अइबे करी घरी-घरी,
रिश्ता उ अलगे उफान पर रहल।
नज़र लागल कवने मुदइया के रामा,
बहल नयनन नीर जइसे बरखा रहल।
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राघवेंद्र प्रकाश 'रघु'

@raghwendra_prakash_raghu

याद त अइबे करी घरी-घरी,
रिश्ता उ अलगे उफान पर रहल।
नज़र लागल कवने मुदइया के रामा,
बहल नयनन नीर जइसे बरखा रहल।
पिरितिया हम तोहसे लगवले रहीं,
सखी-सहेली में चर्चा कइले रहीं।
बनबऽ तुही मोर राजा ए 'रघु',
धीरे से काने माई के बतवले रहीं।
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राघवेंद्र प्रकाश 'रघु'

@raghwendra_prakash_raghu

पिरितिया हम तोहसे लगवले रहीं,
सखी-सहेली में चर्चा कइले रहीं।
बनबऽ तुही मोर राजा ए 'रघु',
धीरे से काने माई के बतवले रहीं।
करे के रहल लमहर बात तोहसे,
उ बात अब तक अधूरा रह गइल।
नादान मन सोचले रहल बनी कहानी,
उ बतिया भी आज अधूरा रह गइल।
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राघवेंद्र प्रकाश 'रघु'

@raghwendra_prakash_raghu

करे के रहल लमहर बात तोहसे,
उ बात अब तक अधूरा रह गइल।
नादान मन सोचले रहल बनी कहानी,
उ बतिया भी आज अधूरा रह गइल।
हाथ रखऽ अपना करेजा पर कबो,
सोचिहऽ कि केकरा में गलती रहल।
सोचिहऽ एहु बात के ए राजा कबो,
काहे हमनी के पेयार अधूरा रह गइल।
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राघवेंद्र प्रकाश 'रघु'

@raghwendra_prakash_raghu

हाथ रखऽ अपना करेजा पर कबो,
सोचिहऽ कि केकरा में गलती रहल।
सोचिहऽ एहु बात के ए राजा कबो,
काहे हमनी के पेयार अधूरा रह गइल।
एतना पेयार तोहसे हम कइले रहीं,
कबो दोसरा के ना हम सोचले रहीं।
सफर जिनगी कतहीं मिलिहऽ अगर,
देख के अनदेखा ना करिहऽ कहीं।
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राघवेंद्र प्रकाश 'रघु'

@raghwendra_prakash_raghu

एतना पेयार तोहसे हम कइले रहीं,
कबो दोसरा के ना हम सोचले रहीं।
सफर जिनगी कतहीं मिलिहऽ अगर,
देख के अनदेखा ना करिहऽ कहीं।
बात मनले जे रहतऽ हमरों कभी,
कटत जिनगी राजा तोहरे संगे कहीं।
जहाँ रहऽ आबाद रहऽ तू हसीं ख़ुशी,
टूटल करेजवा से भी हरदम दुआ रही।
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राघवेंद्र प्रकाश 'रघु'

@raghwendra_prakash_raghu

बात मनले जे रहतऽ हमरों कभी,
कटत जिनगी राजा तोहरे संगे कहीं।
जहाँ रहऽ आबाद रहऽ तू हसीं ख़ुशी,
टूटल करेजवा से भी हरदम दुआ रही।
✍️राघवेंद्र प्रकाश 'रघु'
ब्रह्मपुर, बक्सर (बिहार )
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राघवेंद्र प्रकाश 'रघु'

@raghwendra_prakash_raghu

✍️राघवेंद्र प्रकाश 'रघु'
ब्रह्मपुर, बक्सर (बिहार )
हमार शान ह
हमार पहचान ह भोजपुरी,
हमार मतारी ह
हमार जान ह भोजपुरी I
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हरेश्वर राय

@hareshwar_rai

हमार शान ह
हमार पहचान ह भोजपुरी,
हमार मतारी ह
हमार जान ह भोजपुरी I
इहे ह खेत, इहे खरिहान ह
इहे ह सोखा, इहे सिवान ह,
हमार सुरुज ह
हमार चान ह भोजपुरी I
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हरेश्वर राय

@hareshwar_rai

इहे ह खेत, इहे खरिहान ह
इहे ह सोखा, इहे सिवान ह,
हमार सुरुज ह
हमार चान ह भोजपुरी I
बचपन बुढ़ापा ह, ह इहे जवानी
चूल्हा के आगि ह, अदहन के पानी,
हमार साँझ ह
हमार बिहान ह भोजपुरी I
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हरेश्वर राय

@hareshwar_rai

बचपन बुढ़ापा ह, ह इहे जवानी
चूल्हा के आगि ह, अदहन के पानी,
हमार साँझ ह
हमार बिहान ह भोजपुरी I
ओढिला इहे, इहे बिछाइला
कूटिला इहे, इहे पिसाइला,
हमार चाउर ह
हमार पिसान ह भोजपुरी I
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हरेश्वर राय

@hareshwar_rai

ओढिला इहे, इहे बिछाइला
कूटिला इहे, इहे पिसाइला,
हमार चाउर ह
हमार पिसान ह भोजपुरी I
इहे ह धरन, इहे ह छानी
हमरा पसीना के इहे कहानी,
हमार तीर ह
हमार कमान ह भोजपुरी I
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हरेश्वर राय

@hareshwar_rai

इहे ह धरन, इहे ह छानी
हमरा पसीना के इहे कहानी,
हमार तीर ह
हमार कमान ह भोजपुरी I
कजरी ह बिरहा ह, इहे ह फ़ाग
इहे कबीरा ह, इहे ह घाघ,
हमार बिरासत ह
हमार ईमान ह भोजपुरी I
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हरेश्वर राय

@hareshwar_rai

कजरी ह बिरहा ह, इहे ह फ़ाग
इहे कबीरा ह, इहे ह घाघ,
हमार बिरासत ह
हमार ईमान ह भोजपुरी I
फेरु बयरिया डोले लागी !
फेरु भले अधियार गइल बा,
दुर्वह मन के भार भइल बा ;
जँहवाँ ले लउकत बाटे
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श्रद्धानंद पाण्डेय

@shradhananad_pandey

फेरु बयरिया डोले लागी !
फेरु भले अधियार गइल बा,
दुर्वह मन के भार भइल बा ;
जँहवाँ ले लउकत बाटे
करिया सगरे संसार भइल बा।
लाल किरिनिया झाँकी, कलिया-
फेरु नजरिया खोले लागी !
फेरु बयरिया डोले लागी !!
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श्रद्धानंद पाण्डेय

@shradhananad_pandey

करिया सगरे संसार भइल बा।
लाल किरिनिया झाँकी, कलिया-
फेरु नजरिया खोले लागी !
फेरु बयरिया डोले लागी !!
हर चेतन चुप-चाप भइल बा,
नीरवता के शाप भइल बा,
मन में कतनो पीर रहे,
ओठनि के खोलल पाप भइल बा।
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श्रद्धानंद पाण्डेय

@shradhananad_pandey

हर चेतन चुप-चाप भइल बा,
नीरवता के शाप भइल बा,
मन में कतनो पीर रहे,
ओठनि के खोलल पाप भइल बा।
फेरु चिरइया चहकी, भोरे-
फेरु कोयलिया बोले लागी !
फेरु बयरिया डोले लागी !!
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श्रद्धानंद पाण्डेय

@shradhananad_pandey

फेरु चिरइया चहकी, भोरे-
फेरु कोयलिया बोले लागी !
फेरु बयरिया डोले लागी !!
अनपढ़ जाहिल सरकार हो,
जिनिगिया बेकार मोर कइले
जिनगी कइले बेजार हो
जिनिगिया बेकार मोर कइले
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गणेश नाथ तिवारी "विनायक"

@ganesh-nath-tiwari

अनपढ़ जाहिल सरकार हो,
जिनिगिया बेकार मोर कइले
जिनगी कइले बेजार हो
जिनिगिया बेकार मोर कइले
माई के गहना आ बाबू के खेतवा,
बेचि के पढ़ल बा बेचारा ई बेटवा।
पेपर लीक कइले बार-बार हो,
जिनिगिया बेकार मोर कइले
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गणेश नाथ तिवारी "विनायक"

@ganesh-nath-tiwari

माई के गहना आ बाबू के खेतवा,
बेचि के पढ़ल बा बेचारा ई बेटवा।
पेपर लीक कइले बार-बार हो,
जिनिगिया बेकार मोर कइले
अनपढ़ जाहिल सरकार हो…
खेतवा में सूखल बा अन्न के ओरी,
फाँसी लगावेला किसान ओही डोरी।
रोअत बा सगरो परिवार हो,
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गणेश नाथ तिवारी "विनायक"

@ganesh-nath-tiwari

अनपढ़ जाहिल सरकार हो…
खेतवा में सूखल बा अन्न के ओरी,
फाँसी लगावेला किसान ओही डोरी।
रोअत बा सगरो परिवार हो,
जिनिगिया बेकार मोर कइले
अनपढ़ जाहिल सरकार हो..
नमक आ तेल भइल सोना के भाव हो,
मरत बा भूखल अब सगरो ई गाँव हो।
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गणेश नाथ तिवारी "विनायक"

@ganesh-nath-tiwari

जिनिगिया बेकार मोर कइले
अनपढ़ जाहिल सरकार हो..
नमक आ तेल भइल सोना के भाव हो,
मरत बा भूखल अब सगरो ई गाँव हो।
नून-रोटी भइल दुश्वार हो,
जिनिगिया बेकार मोर कइले
अनपढ़ जाहिल सरकार हो…
बिना घूस फाइल अब एको डेग ना डोले,
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गणेश नाथ तिवारी "विनायक"

@ganesh-nath-tiwari

नून-रोटी भइल दुश्वार हो,
जिनिगिया बेकार मोर कइले
अनपढ़ जाहिल सरकार हो…
बिना घूस फाइल अब एको डेग ना डोले,
आन्हर ई तंत्र अब केकरा के बोले।
चहुँओर मचल लूटमार हो,
जिनिगिया बेकार मोर कइले
अनपढ़ जाहिल सरकार हो…
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गणेश नाथ तिवारी "विनायक"

@ganesh-nath-tiwari

आन्हर ई तंत्र अब केकरा के बोले।
चहुँओर मचल लूटमार हो,
जिनिगिया बेकार मोर कइले
अनपढ़ जाहिल सरकार हो…
हाथ के छाला आ गोड़ के बेवायी,
महंगाई के मार में मिलल ना दवाई।
मरले बा कुरु कुरु मार हो,
जिनिगिया बेकार मोर कइले
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गणेश नाथ तिवारी "विनायक"

@ganesh-nath-tiwari

हाथ के छाला आ गोड़ के बेवायी,
महंगाई के मार में मिलल ना दवाई।
मरले बा कुरु कुरु मार हो,
जिनिगिया बेकार मोर कइले
अनपढ़ जाहिल सरकार हो…
डिगरी के कागज अब रद्दी के भाव बा,
पढल-लिखल लइकन के मनवा में घाव बा।
बेचे सभे पकौड़ा आ अचार हो,
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गणेश नाथ तिवारी "विनायक"

@ganesh-nath-tiwari

अनपढ़ जाहिल सरकार हो…
डिगरी के कागज अब रद्दी के भाव बा,
पढल-लिखल लइकन के मनवा में घाव बा।
बेचे सभे पकौड़ा आ अचार हो,
जिनिगिया बेकार मोर कइले
अनपढ़ जाहिल सरकार हो…
भाषण में बाटे सभे स्वर्ग देखावत,
बाकी हकीकत में नरक खियावत।
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गणेश नाथ तिवारी "विनायक"

@ganesh-nath-tiwari

जिनिगिया बेकार मोर कइले
अनपढ़ जाहिल सरकार हो…
भाषण में बाटे सभे स्वर्ग देखावत,
बाकी हकीकत में नरक खियावत।
झूठ के बा सगरो परचार हो,
जिनिगिया बेकार मोर कइले
अनपढ़ जाहिल सरकार हो…
कलम अब तिवारी 'विनायक' के जागल,
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गणेश नाथ तिवारी "विनायक"

@ganesh-nath-tiwari

झूठ के बा सगरो परचार हो,
जिनिगिया बेकार मोर कइले
अनपढ़ जाहिल सरकार हो…
कलम अब तिवारी 'विनायक' के जागल,
देखि के ई तेवर भ्रष्टाचारी बाड़े भागल।
मचल चहुओर हाहाकार हो,
जिनिगिया बेकार मोर कइले
अनपढ़ जाहिल सरकार हो…
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गणेश नाथ तिवारी "विनायक"

@ganesh-nath-tiwari

देखि के ई तेवर भ्रष्टाचारी बाड़े भागल।
मचल चहुओर हाहाकार हो,
जिनिगिया बेकार मोर कइले
अनपढ़ जाहिल सरकार हो…
बाबा साहेब के तू करिहऽ, गुणगान बबुआ।
जे बनावल एही देश के, संविधान बबुआ।
बिखरल रहे समाज घिनौना, छुआछूत की आन्ही में।
जाति-व्यवस्था जहर घोरि दिहले रहे पानी-पानी में।
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संतोष विश्वकर्मा 'सूर्य'

@santosh_viswkarma_surya

बाबा साहेब के तू करिहऽ, गुणगान बबुआ।
जे बनावल एही देश के, संविधान बबुआ।
बिखरल रहे समाज घिनौना, छुआछूत की आन्ही में।
जाति-व्यवस्था जहर घोरि दिहले रहे पानी-पानी में।
ऐही सभ्य समाज में मानव से पशुवत व्यवहार भइल।
अत्याचार बढ़ल एतना की मानवता भी हार गइल।
इहवां समझे ना केहू हमनी के, इंसान बबुआ।
बाबा साहेब के तू करिहऽ, गुणगान बबुआ।
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संतोष विश्वकर्मा 'सूर्य'

@santosh_viswkarma_surya

ऐही सभ्य समाज में मानव से पशुवत व्यवहार भइल।
अत्याचार बढ़ल एतना की मानवता भी हार गइल।
इहवां समझे ना केहू हमनी के, इंसान बबुआ।
बाबा साहेब के तू करिहऽ, गुणगान बबुआ।
जे हमनी के आरक्षण के, फौलादी हथियार दिहल।
शक्तिशाली संविधान के , जे सुंदर उपहार दिहल।
जे समाज खातिर जीवनभर, दुनिया से संघर्ष कइल।
उनका चलते आज हई सपना, सगरो साकार भइल।
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संतोष विश्वकर्मा 'सूर्य'

@santosh_viswkarma_surya

जे हमनी के आरक्षण के, फौलादी हथियार दिहल।
शक्तिशाली संविधान के , जे सुंदर उपहार दिहल।
जे समाज खातिर जीवनभर, दुनिया से संघर्ष कइल।
उनका चलते आज हई सपना, सगरो साकार भइल।
दिहल उनकर हउवे होठे पर मुस्कान बबुआ।
बाबा साहेब के तू कइ लऽ, गुणगान बबुआ।
सत्ता शिक्षा पर समान अधिकार, दियावल उनकर हऽ।
दलित और शोषित गरदन में, हार दियावल उनकर हऽ।
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संतोष विश्वकर्मा 'सूर्य'

@santosh_viswkarma_surya

दिहल उनकर हउवे होठे पर मुस्कान बबुआ।
बाबा साहेब के तू कइ लऽ, गुणगान बबुआ।
सत्ता शिक्षा पर समान अधिकार, दियावल उनकर हऽ।
दलित और शोषित गरदन में, हार दियावल उनकर हऽ।
जे आवाज बनल हमनी के, सड़क से ले के संसद तक,
हमरा तहरा खातिर ई संसार, दियावल उनकर हऽ।
जेकरा आगे शीश झुकावे ला, जहान बबुआ।
बाबा साहेब के तू करिहऽ, गुणगान बबुआ।
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संतोष विश्वकर्मा 'सूर्य'

@santosh_viswkarma_surya

जे आवाज बनल हमनी के, सड़क से ले के संसद तक,
हमरा तहरा खातिर ई संसार, दियावल उनकर हऽ।
जेकरा आगे शीश झुकावे ला, जहान बबुआ।
बाबा साहेब के तू करिहऽ, गुणगान बबुआ।
धूप चटके त अमृत के निसानी चाहीं,
सोन्ह घइला के ओही में पानी चाहीं।
​जवन मिसरी घोल देला मन के भीतर,
ओही सतुआ के सानल कहानी चाहीं।
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गणेश नाथ तिवारी "विनायक"

@ganesh-nath-tiwari

धूप चटके त अमृत के निसानी चाहीं,
सोन्ह घइला के ओही में पानी चाहीं।
​जवन मिसरी घोल देला मन के भीतर,
ओही सतुआ के सानल कहानी चाहीं।
​मेटावे घाम के तीताई जलन देहि से,
पिपरा के छाँव अस एगो जवानी चाहीं।
​चना,जव मकई के सुनर महक आवेला
ओपर नून,मिर्चा टिकोरा छानी चाहीं।
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गणेश नाथ तिवारी "विनायक"

@ganesh-nath-tiwari

​मेटावे घाम के तीताई जलन देहि से,
पिपरा के छाँव अस एगो जवानी चाहीं।
​चना,जव मकई के सुनर महक आवेला
ओपर नून,मिर्चा टिकोरा छानी चाहीं।
मिटे कंठ के तरास जव-बूट के सतुआ से,
अपना गाँव के किसान के मेहरबानी चाहीं।
​जेकरा पवला से पुरखा के याद आवेला
'बिनायक' आज ओइसन रूहानी चाहीं।
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गणेश नाथ तिवारी "विनायक"

@ganesh-nath-tiwari

मिटे कंठ के तरास जव-बूट के सतुआ से,
अपना गाँव के किसान के मेहरबानी चाहीं।
​जेकरा पवला से पुरखा के याद आवेला
'बिनायक' आज ओइसन रूहानी चाहीं।
गणेश नाथ तिवारी"विनायक"
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गणेश नाथ तिवारी "विनायक"

@ganesh-nath-tiwari

गणेश नाथ तिवारी"विनायक"
झूठ बोलल आजकल शान में गिनाता
अब त लेड के पेड़ भी परधान में गिनाता
हो गईल ईमानदारी घर-घर में मूसमात
अब दर्द के दवा भी एहसान में गिनाता
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नूरैन अंसारी

@noorain_ansari

झूठ बोलल आजकल शान में गिनाता
अब त लेड के पेड़ भी परधान में गिनाता
हो गईल ईमानदारी घर-घर में मूसमात
अब दर्द के दवा भी एहसान में गिनाता
भाषण जे देत बाड़े टीवी पर दिन-रात
टाई-सूट वाला भी किसान में गिनाता
भाई के हक़ मार के जे बढ़ गईल आगे
आज उहो लोग साहिबे ईमान में गिनाता
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नूरैन अंसारी

@noorain_ansari

भाषण जे देत बाड़े टीवी पर दिन-रात
टाई-सूट वाला भी किसान में गिनाता
भाई के हक़ मार के जे बढ़ गईल आगे
आज उहो लोग साहिबे ईमान में गिनाता
अब हकीकत बा कम देखावा बा ज़्यादा
सवा मीटर कपड़ा भी थान में गिनाता
छूट गईल गाँव में ही आपन पुश्तैनी घर
शहर के 25 गज के फ्लैट मकान में गिनाता
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नूरैन अंसारी

@noorain_ansari

अब हकीकत बा कम देखावा बा ज़्यादा
सवा मीटर कपड़ा भी थान में गिनाता
छूट गईल गाँव में ही आपन पुश्तैनी घर
शहर के 25 गज के फ्लैट मकान में गिनाता
भीड़ देखि के मदद के गुहार मत लगाईं
जे भीड़ में बा हिन्दू-मुसलमान में गिनाता
नूरैन! जे ग़ैर रहे उ लोग हो भइल आपन
जे आपन रहे, उ अब आन में गिनाता
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नूरैन अंसारी

@noorain_ansari

भीड़ देखि के मदद के गुहार मत लगाईं
जे भीड़ में बा हिन्दू-मुसलमान में गिनाता
नूरैन! जे ग़ैर रहे उ लोग हो भइल आपन
जे आपन रहे, उ अब आन में गिनाता
याद त अइबे करी घरी-घरी,
रिश्ता उ अलगे उफान पर रहल।
नज़र लागल कवने मुदइया के रामा,
बहल नयनन नीर जइसे बरखा रहल।
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राघवेंद्र प्रकाश 'रघु'

@raghwendra_prakash_raghu

याद त अइबे करी घरी-घरी,
रिश्ता उ अलगे उफान पर रहल।
नज़र लागल कवने मुदइया के रामा,
बहल नयनन नीर जइसे बरखा रहल।
पिरितिया हम तोहसे लगवले रहीं,
सखी-सहेली में चर्चा कइले रहीं।
बनबऽ तुही मोर राजा ए 'रघु',
धीरे से काने माई के बतवले रहीं।
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राघवेंद्र प्रकाश 'रघु'

@raghwendra_prakash_raghu

पिरितिया हम तोहसे लगवले रहीं,
सखी-सहेली में चर्चा कइले रहीं।
बनबऽ तुही मोर राजा ए 'रघु',
धीरे से काने माई के बतवले रहीं।
करे के रहल लमहर बात तोहसे,
उ बात अब तक अधूरा रह गइल।
नादान मन सोचले रहल बनी कहानी,
उ बतिया भी आज अधूरा रह गइल।
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राघवेंद्र प्रकाश 'रघु'

@raghwendra_prakash_raghu

करे के रहल लमहर बात तोहसे,
उ बात अब तक अधूरा रह गइल।
नादान मन सोचले रहल बनी कहानी,
उ बतिया भी आज अधूरा रह गइल।
हाथ रखऽ अपना करेजा पर कबो,
सोचिहऽ कि केकरा में गलती रहल।
सोचिहऽ एहु बात के ए राजा कबो,
काहे हमनी के पेयार अधूरा रह गइल।
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राघवेंद्र प्रकाश 'रघु'

@raghwendra_prakash_raghu

हाथ रखऽ अपना करेजा पर कबो,
सोचिहऽ कि केकरा में गलती रहल।
सोचिहऽ एहु बात के ए राजा कबो,
काहे हमनी के पेयार अधूरा रह गइल।
एतना पेयार तोहसे हम कइले रहीं,
कबो दोसरा के ना हम सोचले रहीं।
सफर जिनगी कतहीं मिलिहऽ अगर,
देख के अनदेखा ना करिहऽ कहीं।
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राघवेंद्र प्रकाश 'रघु'

@raghwendra_prakash_raghu

एतना पेयार तोहसे हम कइले रहीं,
कबो दोसरा के ना हम सोचले रहीं।
सफर जिनगी कतहीं मिलिहऽ अगर,
देख के अनदेखा ना करिहऽ कहीं।
बात मनले जे रहतऽ हमरों कभी,
कटत जिनगी राजा तोहरे संगे कहीं।
जहाँ रहऽ आबाद रहऽ तू हसीं ख़ुशी,
टूटल करेजवा से भी हरदम दुआ रही।
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राघवेंद्र प्रकाश 'रघु'

@raghwendra_prakash_raghu

बात मनले जे रहतऽ हमरों कभी,
कटत जिनगी राजा तोहरे संगे कहीं।
जहाँ रहऽ आबाद रहऽ तू हसीं ख़ुशी,
टूटल करेजवा से भी हरदम दुआ रही।
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द पुरवइया डेस्क

@thepurvaiya

माथे पर गमछा सजावल गइल बा,
जइसे सवांग के जगावल गइल बा।
​जेठ के दुपहरी में लू से देहि झुलसे,
तs माथ के ओहार बनावल गइल बा।
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गणेश नाथ तिवारी "विनायक"

@ganesh-nath-tiwari

माथे पर गमछा सजावल गइल बा,
जइसे सवांग के जगावल गइल बा।
​जेठ के दुपहरी में लू से देहि झुलसे,
तs माथ के ओहार बनावल गइल बा।
​उठे जब बबूला के बेजोड़ झोंका,
त मुँह के पट्टी से बचावल गइल बा।
​कबो बीँड़ बन के ई माथा पे सोहे,
तs माथा पs बोझा उठावल गइल बा।
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गणेश नाथ तिवारी "विनायक"

@ganesh-nath-tiwari

​उठे जब बबूला के बेजोड़ झोंका,
त मुँह के पट्टी से बचावल गइल बा।
​कबो बीँड़ बन के ई माथा पे सोहे,
तs माथा पs बोझा उठावल गइल बा।
​खेतवा में मोटरी में सतुआ बँधाइल,
त फाँस के झोरी बनावल गइल बा।
​चले जब ना पुरवा तs बनि के बेना,
कि खुद के हवा ई खियावल गइल बा।
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गणेश नाथ तिवारी "विनायक"

@ganesh-nath-tiwari

​खेतवा में मोटरी में सतुआ बँधाइल,
त फाँस के झोरी बनावल गइल बा।
​चले जब ना पुरवा तs बनि के बेना,
कि खुद के हवा ई खियावल गइल बा।
​कुँआ के जगत पे जो लोटा ना डूबे,
त डोरी के कामो चलावल गइल बा।
​अमवा के टिकोरा जो गिरल बग़इचा,
त खोंइछा बना के उठावल गइल बा।
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गणेश नाथ तिवारी "विनायक"

@ganesh-nath-tiwari

​कुँआ के जगत पे जो लोटा ना डूबे,
त डोरी के कामो चलावल गइल बा।
​अमवा के टिकोरा जो गिरल बग़इचा,
त खोंइछा बना के उठावल गइल बा।
​सहर के उ टाई के चमक बा फीका,
कि इज्जत के गाँठ लगावल गइल बा।
​'विनायक' ई माटी के अइसन महक बा,
जेके रोम-रोम में बसावल गइल बा।
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गणेश नाथ तिवारी "विनायक"

@ganesh-nath-tiwari

​सहर के उ टाई के चमक बा फीका,
कि इज्जत के गाँठ लगावल गइल बा।
​'विनायक' ई माटी के अइसन महक बा,
जेके रोम-रोम में बसावल गइल बा।
आव एगो नया बस्ती बसावल जाव,
सुनर एगो नया दुनिया बनावल जाव।
मजहब के कवनो देवाल ना रही उहवा,
मानवता के एगो नया घर बनावल जाव।
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गणेश नाथ तिवारी "विनायक"

@ganesh-nath-tiwari

आव एगो नया बस्ती बसावल जाव,
सुनर एगो नया दुनिया बनावल जाव।
मजहब के कवनो देवाल ना रही उहवा,
मानवता के एगो नया घर बनावल जाव।
जातियन के कुल करम भरम तूर के,
इसांनियत के बस्ती सजावल जाव।
देहला के औकात जदि बा हमनी के तऽ,
चलऽ कुछ लो पर खुशी लुटावल जाव ।
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गणेश नाथ तिवारी "विनायक"

@ganesh-nath-tiwari

जातियन के कुल करम भरम तूर के,
इसांनियत के बस्ती सजावल जाव।
देहला के औकात जदि बा हमनी के तऽ,
चलऽ कुछ लो पर खुशी लुटावल जाव ।
प्यार मोहब्बत से तs सभे खुस रहेला,
दुनिया से नफरत के दूर भगावल जाव।
भोजपुरिया लो तऽ एक दूसरे में भिड़ल बा लो,
चली मिलजुल भोजपुरी के मान बढ़ावल जाव।
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गणेश नाथ तिवारी "विनायक"

@ganesh-nath-tiwari

प्यार मोहब्बत से तs सभे खुस रहेला,
दुनिया से नफरत के दूर भगावल जाव।
भोजपुरिया लो तऽ एक दूसरे में भिड़ल बा लो,
चली मिलजुल भोजपुरी के मान बढ़ावल जाव।
गोली बम बारुद,विरोध में फिरत बा सब लो
चलs 'गणेश'बिना एकरा जहां बनावल जाव।
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गणेश नाथ तिवारी "विनायक"

@ganesh-nath-tiwari

गोली बम बारुद,विरोध में फिरत बा सब लो
चलs 'गणेश'बिना एकरा जहां बनावल जाव।
राम जी के भइले जनमवा हो रामा
दशरथ के भवनवा
पंडितजी वेद मंत्र ऊँचारे
सखी सहेली फूल माला सवांरे
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गणेश नाथ तिवारी "विनायक"

@ganesh-nath-tiwari

राम जी के भइले जनमवा हो रामा
दशरथ के भवनवा
पंडितजी वेद मंत्र ऊँचारे
सखी सहेली फूल माला सवांरे
चइत के शुभ महिनवा हो रामा
दशरथ के भवनवा
चारो भइया के चरण जब आइल
अवध भूमि इतिहास में लिखाइल
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गणेश नाथ तिवारी "विनायक"

@ganesh-nath-tiwari

चइत के शुभ महिनवा हो रामा
दशरथ के भवनवा
चारो भइया के चरण जब आइल
अवध भूमि इतिहास में लिखाइल
देखलस पूरा जमानवा हो रामा
दसरथ के भवनवा
पावन धरती अयोध्या नगरिया
रामजी के बनल भव्य मंदिरिया
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गणेश नाथ तिवारी "विनायक"

@ganesh-nath-tiwari

देखलस पूरा जमानवा हो रामा
दसरथ के भवनवा
पावन धरती अयोध्या नगरिया
रामजी के बनल भव्य मंदिरिया
खुशियाँ मनवेला जहाँनवा हो रामा
दशरथ के भवनवा
रघुवर के आजु भइल पगबन्दन
पूजा गणेश कइले अभिनंदन
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गणेश नाथ तिवारी "विनायक"

@ganesh-nath-tiwari

खुशियाँ मनवेला जहाँनवा हो रामा
दशरथ के भवनवा
रघुवर के आजु भइल पगबन्दन
पूजा गणेश कइले अभिनंदन
दियना जरवले अंगनवा हो रामा
दशरथ के भवनवा
राम जी के भइले जनमवा हो रामा
दशरथ के भवनवा
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गणेश नाथ तिवारी "विनायक"

@ganesh-nath-tiwari

दियना जरवले अंगनवा हो रामा
दशरथ के भवनवा
राम जी के भइले जनमवा हो रामा
दशरथ के भवनवा
चहकेला घरवा दुआरवा हो रामा
अइलें सजनवाँ
रचि रचि धनिया भोज बनवली
सोने के थाल में जेवना सजवली
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गणेश नाथ तिवारी "विनायक"

@ganesh-nath-tiwari

चहकेला घरवा दुआरवा हो रामा
अइलें सजनवाँ
रचि रचि धनिया भोज बनवली
सोने के थाल में जेवना सजवली
जेवेलें बारहों बिजनवाँ हो रामा
अइलें सजनवाँ
बाल गोपाल संघे फुलवो फुलाइल
पेन्ही के पियारिया मन अगराइल
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गणेश नाथ तिवारी "विनायक"

@ganesh-nath-tiwari

जेवेलें बारहों बिजनवाँ हो रामा
अइलें सजनवाँ
बाल गोपाल संघे फुलवो फुलाइल
पेन्ही के पियारिया मन अगराइल
निरखे ले सइंया सेजरिया हो रामा
अइलें सजनवाँ
पोरे पोरे प्यार सजन बरिसावेलें
ललका गुलाब मोरे जुड़ा में लगावेलें
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गणेश नाथ तिवारी "विनायक"

@ganesh-nath-tiwari

निरखे ले सइंया सेजरिया हो रामा
अइलें सजनवाँ
पोरे पोरे प्यार सजन बरिसावेलें
ललका गुलाब मोरे जुड़ा में लगावेलें
मारेले तिरछी नजरिया हो रामा
अइलें सजनवाँ
चहकेला घरवा दुआरवा हो रामा
अइलें सजनवाँ
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गणेश नाथ तिवारी "विनायक"

@ganesh-nath-tiwari

मारेले तिरछी नजरिया हो रामा
अइलें सजनवाँ
चहकेला घरवा दुआरवा हो रामा
अइलें सजनवाँ
साँझीये से बिहँसे ला मनवा हो रामा,
बैरी पलँगवा
आधी रतिया के निनिया ना आवे हो रामा
बैरी पलँगवा
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गणेश नाथ तिवारी "विनायक"

@ganesh-nath-tiwari

साँझीये से बिहँसे ला मनवा हो रामा,
बैरी पलँगवा
आधी रतिया के निनिया ना आवे हो रामा
बैरी पलँगवा
हहरा के बहे जब पछुआ के झोंका,
मोजरि के महँक से हिया भइल चोखा
काँट लेखा लागेला सेजरिया हो रामा
बैरी पलँगवा
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गणेश नाथ तिवारी "विनायक"

@ganesh-nath-tiwari

हहरा के बहे जब पछुआ के झोंका,
मोजरि के महँक से हिया भइल चोखा
काँट लेखा लागेला सेजरिया हो रामा
बैरी पलँगवा
साँझीये से बिहँसे ला मनवा हो रामा,
बैरी पलँगवा
अँखिया के लोरवा से लिखतानी पाती
धड़केला की ना तोहार हिया ए सँघाती
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गणेश नाथ तिवारी "विनायक"

@ganesh-nath-tiwari

साँझीये से बिहँसे ला मनवा हो रामा,
बैरी पलँगवा
अँखिया के लोरवा से लिखतानी पाती
धड़केला की ना तोहार हिया ए सँघाती
अइबs कबले हमरो पजरिया हो रामा
बैरी पलँगवा
साँझीये से बिहँसे ला मनवा हो रामा,
बैरी पलँगवा
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गणेश नाथ तिवारी "विनायक"

@ganesh-nath-tiwari

अइबs कबले हमरो पजरिया हो रामा
बैरी पलँगवा
साँझीये से बिहँसे ला मनवा हो रामा,
बैरी पलँगवा
सोरहो सिंगरवा मोर भइल बा बटोही
परदेस जाके काहे भइल तू निर्मोही
फड़फड़ाता मोर कोमल करेजवा हो रामा
बैरी पलँगवा
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गणेश नाथ तिवारी "विनायक"

@ganesh-nath-tiwari

सोरहो सिंगरवा मोर भइल बा बटोही
परदेस जाके काहे भइल तू निर्मोही
फड़फड़ाता मोर कोमल करेजवा हो रामा
बैरी पलँगवा
साँझीये से बिहँसे ला मनवा हो रामा,
बैरी पलँगवा
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गणेश नाथ तिवारी "विनायक"

@ganesh-nath-tiwari

साँझीये से बिहँसे ला मनवा हो रामा,
बैरी पलँगवा
हहरा के बहेला चइत में बयरिया
कवना कोना में लुकइले सांवरिया
बिहँसे ला हमरो बदनवा
परनवा नाही अइले।
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गणेश नाथ तिवारी "विनायक"

@ganesh-nath-tiwari

हहरा के बहेला चइत में बयरिया
कवना कोना में लुकइले सांवरिया
बिहँसे ला हमरो बदनवा
परनवा नाही अइले।
​भक-भक भभकेला पछुआ के झोंका
हियरा के बुझे वाला आइल नाही सोखा
बितियो गइल बा फगुनवा
परनवा नाही अइले।
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गणेश नाथ तिवारी "विनायक"

@ganesh-nath-tiwari

​भक-भक भभकेला पछुआ के झोंका
हियरा के बुझे वाला आइल नाही सोखा
बितियो गइल बा फगुनवा
परनवा नाही अइले।
करवट बदलत बिति जाला मोर रतिया
मति कादो मरले बिया कवनो सवतिया
बउराइल बाटे मोर मनवा
परनवा नाही अइले।
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गणेश नाथ तिवारी "विनायक"

@ganesh-nath-tiwari

करवट बदलत बिति जाला मोर रतिया
मति कादो मरले बिया कवनो सवतिया
बउराइल बाटे मोर मनवा
परनवा नाही अइले।
रोइ-रोइ हियरा के पनिया सुखावल
कौने जनम के ई बदरवा बा छावल
सकुचात बाटे अब दरपनवा
परनवा नाही अइले।
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गणेश नाथ तिवारी "विनायक"

@ganesh-nath-tiwari

रोइ-रोइ हियरा के पनिया सुखावल
कौने जनम के ई बदरवा बा छावल
सकुचात बाटे अब दरपनवा
परनवा नाही अइले।
हारि पाछि के अब त 'राम' गोहराईं
बिरहा के पीर के कवन बा दवाईं
जुड़इले ना विनायक ई नयनवा
परनवा नाही अइले।
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गणेश नाथ तिवारी "विनायक"

@ganesh-nath-tiwari

हारि पाछि के अब त 'राम' गोहराईं
बिरहा के पीर के कवन बा दवाईं
जुड़इले ना विनायक ई नयनवा
परनवा नाही अइले।
कुहुके करेजवा में हमरो करेजवा
एजवा मारिये दिहलs
देबे के परित दहेजवा
एजवा ……..
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गणेश नाथ तिवारी "विनायक"

@ganesh-nath-tiwari

कुहुके करेजवा में हमरो करेजवा
एजवा मारिये दिहलs
देबे के परित दहेजवा
एजवा ……..
कवन कसूर हमार तनिका बतइति
एगो रहे सोना एगो चानियो अपनइति
परी गइनी फेरा में पावे खातिर पुतवा
एजवा……..
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गणेश नाथ तिवारी "विनायक"

@ganesh-nath-tiwari

कवन कसूर हमार तनिका बतइति
एगो रहे सोना एगो चानियो अपनइति
परी गइनी फेरा में पावे खातिर पुतवा
एजवा……..
केतना हम सोंचनी आ केतना भोकरनी
होत अन्याय पर ना कबहु चोकरनी
काहे के त्यगनी रउआ, कोखि के करेजवा
एजवा…….
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गणेश नाथ तिवारी "विनायक"

@ganesh-nath-tiwari

केतना हम सोंचनी आ केतना भोकरनी
होत अन्याय पर ना कबहु चोकरनी
काहे के त्यगनी रउआ, कोखि के करेजवा
एजवा…….
अइती अँगनवा त गुलजार करिती
बेटा अउरी बेटी के भेदवा बतइति
सगरो जहान के ई दिहत्ती सनेसवा
एजवा……..
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गणेश नाथ तिवारी "विनायक"

@ganesh-nath-tiwari

अइती अँगनवा त गुलजार करिती
बेटा अउरी बेटी के भेदवा बतइति
सगरो जहान के ई दिहत्ती सनेसवा
एजवा……..
कुहुके करेजवा में हमरो करेजवा
एजवा मारिये दिहलs
देबे के परित दहेजवा
एजवा ……..
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गणेश नाथ तिवारी "विनायक"

@ganesh-nath-tiwari

कुहुके करेजवा में हमरो करेजवा
एजवा मारिये दिहलs
देबे के परित दहेजवा
एजवा ……..
कुल्हत मुसमात महतारी के
समाज के अपना नारी के
केकरा चिंता बाटे ए भइया
असल मे एगो बिहारी के
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शम्स जमील

@shamsh_jamil

कुल्हत मुसमात महतारी के
समाज के अपना नारी के
केकरा चिंता बाटे ए भइया
असल मे एगो बिहारी के
आवता जे भी खाता उहे
बाड़ेन असली दाता उहे
का कहीं सरकार के जी
सवत आपन बुझाता उहे
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शम्स जमील

@shamsh_jamil

आवता जे भी खाता उहे
बाड़ेन असली दाता उहे
का कहीं सरकार के जी
सवत आपन बुझाता उहे
मजदुर हमके मानल जाता
भावना रोज खानल जाता
कहीं बोली कहीं भाषा पर
लाठी बेर-बेर तानल जाता
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शम्स जमील

@shamsh_jamil

मजदुर हमके मानल जाता
भावना रोज खानल जाता
कहीं बोली कहीं भाषा पर
लाठी बेर-बेर तानल जाता
बॉम्बे गुजरात ठेलल जाई
पक्ष-विपक्ष खेलल जाई
धरम के ख़ास मुद्दा बनाके
फेरू बिहार मे हेलल जाई
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शम्स जमील

@shamsh_jamil

बॉम्बे गुजरात ठेलल जाई
पक्ष-विपक्ष खेलल जाई
धरम के ख़ास मुद्दा बनाके
फेरू बिहार मे हेलल जाई
आए दिन मिलता ऑफ़र
अब छठ मे रेल गाड़ी के
केकरा चिंता बाटे ए भइया
असल मे एगो बिहारी के
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शम्स जमील

@shamsh_jamil

आए दिन मिलता ऑफ़र
अब छठ मे रेल गाड़ी के
केकरा चिंता बाटे ए भइया
असल मे एगो बिहारी के
केहू दिन केहू रात के नेता
ना मिले रोटी भात के नेता
गली गली अब घूमतारान
देखीं ना रउवा जात के नेता
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शम्स जमील

@shamsh_jamil

केहू दिन केहू रात के नेता
ना मिले रोटी भात के नेता
गली गली अब घूमतारान
देखीं ना रउवा जात के नेता
अपराध के चले जुग जमाना
डरल बाटे व्यापारी घारना
हिम्मत बाटे त पूछी ना जाके
सुतल बा कहँवा पुलिस थाना
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शम्स जमील

@shamsh_jamil

अपराध के चले जुग जमाना
डरल बाटे व्यापारी घारना
हिम्मत बाटे त पूछी ना जाके
सुतल बा कहँवा पुलिस थाना
आँगन राउर दुवार मे का बा
गाँव राउर बाजार मे का बा
कुछ दिन मे कहिअन नेहा
यूपी मे का बिहार मे का बा
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शम्स जमील

@shamsh_jamil

आँगन राउर दुवार मे का बा
गाँव राउर बाजार मे का बा
कुछ दिन मे कहिअन नेहा
यूपी मे का बिहार मे का बा
कहे लोग बिहार ना सुधरी
बुरबक आ लाचार ना सुधरी
कइसे रोजी-रोजगार मिली
आदत जब हमार ना सुधरी
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शम्स जमील

@shamsh_jamil

कहे लोग बिहार ना सुधरी
बुरबक आ लाचार ना सुधरी
कइसे रोजी-रोजगार मिली
आदत जब हमार ना सुधरी
पाँच किलो अनाज अउरी
दू चार सौ रोज डेहारी के
केकरा चिंता बाटे ए भइया
असल मे आज बिहारी के
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शम्स जमील

@shamsh_jamil

पाँच किलो अनाज अउरी
दू चार सौ रोज डेहारी के
केकरा चिंता बाटे ए भइया
असल मे आज बिहारी के
ई बात हवा के खल रहल बा,
कि काहे दीया जल रहल बा।
रात अँहरिया साज़िश कईलस,
तबहूँ सूरज निकल रहल बा।
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नूरैन अंसारी

@noorain_ansari

ई बात हवा के खल रहल बा,
कि काहे दीया जल रहल बा।
रात अँहरिया साज़िश कईलस,
तबहूँ सूरज निकल रहल बा।
दुश्मन से हम बचत रह गइनी,
अपनहीं लोगवा छल रहल बा।
गिरगिट त बदनाम बा खाली,
आदमी ज़्यादा बदल रहल बा।
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नूरैन अंसारी

@noorain_ansari

दुश्मन से हम बचत रह गइनी,
अपनहीं लोगवा छल रहल बा।
गिरगिट त बदनाम बा खाली,
आदमी ज़्यादा बदल रहल बा।
दोष हम काहे काँटा के दीं,
फूल ही पाँव में हल रहल बा।
अब अपने घर के बात “नूरैन”,
दोसरा से पता चल रहल बा।
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नूरैन अंसारी

@noorain_ansari

दोष हम काहे काँटा के दीं,
फूल ही पाँव में हल रहल बा।
अब अपने घर के बात “नूरैन”,
दोसरा से पता चल रहल बा।
चईत -चईत लेखा, बुझात कहां बा,
बनिहार से कटनी, कटात कहां बा।
शहरन में लोगवा लहर लूटत बा,
गांवन में अब केहू जात कहां बा।
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कुमार अजय सिंह

@ajay_singhh

चईत -चईत लेखा, बुझात कहां बा,
बनिहार से कटनी, कटात कहां बा।
शहरन में लोगवा लहर लूटत बा,
गांवन में अब केहू जात कहां बा।
ए. सी. किनाइल त देसी भुलाइल,
खुला हवा अब केहू खात कहां बा।
चईत-चईत लेखा, बुझात कहां बा।
कुदारिन से कोड़ार कोड़ात नइखे,
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कुमार अजय सिंह

@ajay_singhh

ए. सी. किनाइल त देसी भुलाइल,
खुला हवा अब केहू खात कहां बा।
चईत-चईत लेखा, बुझात कहां बा।
कुदारिन से कोड़ार कोड़ात नइखे,
खेत में पानी करहा मोड़ात नइखे।
ट्रैक्टर - ट्रॉली पर बोझा लादाता,
बैलन पर लादना ढोआत कहां बा।
चईत - चईत लेखा, बुझात कहां बा।
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कुमार अजय सिंह

@ajay_singhh

खेत में पानी करहा मोड़ात नइखे।
ट्रैक्टर - ट्रॉली पर बोझा लादाता,
बैलन पर लादना ढोआत कहां बा।
चईत - चईत लेखा, बुझात कहां बा।
हरवाहन के हाथे खेत जोतात नइखे,
टांड़ के चलाके बिया बोआत नइखे।
खटे वाला मजदूरा, मिलत नइखन,
मार मुंअरिन तीसी पिटात कहां बा।
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कुमार अजय सिंह

@ajay_singhh

हरवाहन के हाथे खेत जोतात नइखे,
टांड़ के चलाके बिया बोआत नइखे।
खटे वाला मजदूरा, मिलत नइखन,
मार मुंअरिन तीसी पिटात कहां बा।
चईत - चईत लेखा, बुझात कहां बा।
हार्वेस्टर कटर से फसल कटात बा,
बड़ भूंसा के टाल गंजात कहां बा।
खरिहनियो अब त लिपातो नइखे,
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कुमार अजय सिंह

@ajay_singhh

चईत - चईत लेखा, बुझात कहां बा।
हार्वेस्टर कटर से फसल कटात बा,
बड़ भूंसा के टाल गंजात कहां बा।
खरिहनियो अब त लिपातो नइखे,
अनाजन के ढेरी तउलात कहां बा।
चईत- चईत लेखा, बुझात कहां बा।
ओखर - मुसर, ढेकी उफर परल,
जांत में सतुआ पिसात कहां बा।
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कुमार अजय सिंह

@ajay_singhh

अनाजन के ढेरी तउलात कहां बा।
चईत- चईत लेखा, बुझात कहां बा।
ओखर - मुसर, ढेकी उफर परल,
जांत में सतुआ पिसात कहां बा।
सतुआनो के दिनवा, चटक चटनी,
सतुअवा जवरे जी भेंटात कहां बा।
चईत- चईत लेखा, बुझात कहां बा।
चर-चबेनी, मोहरइया मिलत नइखे,
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कुमार अजय सिंह

@ajay_singhh

सतुआनो के दिनवा, चटक चटनी,
सतुअवा जवरे जी भेंटात कहां बा।
चईत- चईत लेखा, बुझात कहां बा।
चर-चबेनी, मोहरइया मिलत नइखे,
गंउआ में घुंसार झोंकात कहां बा।
गैस से भरल सिलेंडर किनात बा,
गोइंठा ईंधन खातिर पथात कहां बा।
चईत- चईत लेखा, बुझात कहां बा।
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कुमार अजय सिंह

@ajay_singhh

गंउआ में घुंसार झोंकात कहां बा।
गैस से भरल सिलेंडर किनात बा,
गोइंठा ईंधन खातिर पथात कहां बा।
चईत- चईत लेखा, बुझात कहां बा।
आपस में बइठ दुआर - दलान पर,
चईता- चईती अब गावात कहां बा।
ठंडा पानी घइला में रखात कहां बा,
सिलवट प मसाला पिसात कहां बा।
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कुमार अजय सिंह

@ajay_singhh

आपस में बइठ दुआर - दलान पर,
चईता- चईती अब गावात कहां बा।
ठंडा पानी घइला में रखात कहां बा,
सिलवट प मसाला पिसात कहां बा।
चईत -चईत लेखा, बुझात कहां बा।
दूध- दहीया बिकाता पोलिथीन में,
नादा में गोरसवा अवंटात कहां बा।
सिरफल के शर्बत अब दुलम भइल,
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कुमार अजय सिंह

@ajay_singhh

चईत -चईत लेखा, बुझात कहां बा।
दूध- दहीया बिकाता पोलिथीन में,
नादा में गोरसवा अवंटात कहां बा।
सिरफल के शर्बत अब दुलम भइल,
बुंटवा के होरहा झोरात कहां बा।
चईत- चईत लेखा, बुझात कहां बा।
इनार के कचड़ा उड़हात कहां बा,
ठंढा पानी से करेज जुड़ात कहां बा
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कुमार अजय सिंह

@ajay_singhh

बुंटवा के होरहा झोरात कहां बा।
चईत- चईत लेखा, बुझात कहां बा।
इनार के कचड़ा उड़हात कहां बा,
ठंढा पानी से करेज जुड़ात कहां बा
बात त बहुत लिखे के अबहियों बा,
अजय लिखले, लिखात कहां बा।
चईत- चईत लेखा, बुझात कहां बा।
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कुमार अजय सिंह

@ajay_singhh

बात त बहुत लिखे के अबहियों बा,
अजय लिखले, लिखात कहां बा।
चईत- चईत लेखा, बुझात कहां बा।
रहि-रहि बड़ा याद आवे लरिकइँया
बरखा के पानी आ कागदा के नइया!
नानी कहे कहनी एगो राजा एगो रानी
राजा के महलिया भरल रहे सोना-चानी
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राम बहादुर राय

@ram-bahadur-rai

रहि-रहि बड़ा याद आवे लरिकइँया
बरखा के पानी आ कागदा के नइया!
नानी कहे कहनी एगो राजा एगो रानी
राजा के महलिया भरल रहे सोना-चानी
फुदुकि-फुदुकि नाचे गावे सोन चिरइया।
रहि -रहि बड़ा याद आवे लरिकइँया
बरखा के पानी आ कगजा के नइया!
गँवुआ के पूरुब ओरि हई गांगा मइया
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राम बहादुर राय

@ram-bahadur-rai

फुदुकि-फुदुकि नाचे गावे सोन चिरइया।
रहि -रहि बड़ा याद आवे लरिकइँया
बरखा के पानी आ कगजा के नइया!
गँवुआ के पूरुब ओरि हई गांगा मइया
पँवरी जा खूबे सँगे लेके डेंगी नइया
महल बनाइंजा लेके उजरकी बलुइया।
रहि - रहि बड़ा याद आवे लरिकइँया
बरखा के पानी आ कगजा के नइया!
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राम बहादुर राय

@ram-bahadur-rai

पँवरी जा खूबे सँगे लेके डेंगी नइया
महल बनाइंजा लेके उजरकी बलुइया।
रहि - रहि बड़ा याद आवे लरिकइँया
बरखा के पानी आ कगजा के नइया!
गँवुआ के पछिम रहे अमवा के बरिया
लाठी लेके होखत रहल खूबे अगोरिया
मारिंजा लुकाई के हो टीस के पुलुइयाँ।
रहि - रहि बड़ा याद आवे लरिकइँया
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राम बहादुर राय

@ram-bahadur-rai

गँवुआ के पछिम रहे अमवा के बरिया
लाठी लेके होखत रहल खूबे अगोरिया
मारिंजा लुकाई के हो टीस के पुलुइयाँ।
रहि - रहि बड़ा याद आवे लरिकइँया
बरखा के पानी आ कगजा के नइया!
झोरा-पटरी लेके स्कूलिया में जाइँजा
रहिया बीचे घरे सँहतिया के लुकाइँजा
छुट्टी के बेरा घरे लवट के आ जाइँजा
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राम बहादुर राय

@ram-bahadur-rai

बरखा के पानी आ कगजा के नइया!
झोरा-पटरी लेके स्कूलिया में जाइँजा
रहिया बीचे घरे सँहतिया के लुकाइँजा
छुट्टी के बेरा घरे लवट के आ जाइँजा
माहुर अस लागत रहे तहिया पढ़इया।
रहि - रहि बड़ा याद आवे लरिकइँया
बरखा के पानी आ कगजा के नइया!
होखे आइस-पाइस, कबड्डी आ चीका
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राम बहादुर राय

@ram-bahadur-rai

माहुर अस लागत रहे तहिया पढ़इया।
रहि - रहि बड़ा याद आवे लरिकइँया
बरखा के पानी आ कगजा के नइया!
होखे आइस-पाइस, कबड्डी आ चीका
बिन ओल्हा-पाती मन हो जाव फीका
एक दोसरा बिना चलत रहे ना नइया।
रहि - रहि बड़ा याद आवे लरिकइँया
बरखा के पानी आ कगजा के नइया!
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राम बहादुर राय

@ram-bahadur-rai

बिन ओल्हा-पाती मन हो जाव फीका
एक दोसरा बिना चलत रहे ना नइया।
रहि - रहि बड़ा याद आवे लरिकइँया
बरखा के पानी आ कगजा के नइया!
गँवुआ के गोंयेड़ा पाकड़ि के गँछिया
दूध पी के दवुरत रहे बछवा-बछिया
खुस होके पगुरी करे सोकनी गइया।
रहि - रहि बड़ा याद आवे लरिकइँया
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राम बहादुर राय

@ram-bahadur-rai

गँवुआ के गोंयेड़ा पाकड़ि के गँछिया
दूध पी के दवुरत रहे बछवा-बछिया
खुस होके पगुरी करे सोकनी गइया।
रहि - रहि बड़ा याद आवे लरिकइँया
बरखा के पानी आ कगजा के नइया!
राजा के राज गइल बीतल समइया
कहे राम बहादुर सजग रहऽ भइया
जेकरा सँगे बाड़ऽ उहे हवुए मुदइया
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राम बहादुर राय

@ram-bahadur-rai

बरखा के पानी आ कगजा के नइया!
राजा के राज गइल बीतल समइया
कहे राम बहादुर सजग रहऽ भइया
जेकरा सँगे बाड़ऽ उहे हवुए मुदइया
दुसुमन से कइसे तूँ बँचबऽ ए भइया।
रहि रहि बड़ा याद आवे लरिकइँया
बरखा के पानी आ कगजा के नइया!
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राम बहादुर राय

@ram-bahadur-rai

दुसुमन से कइसे तूँ बँचबऽ ए भइया।
रहि रहि बड़ा याद आवे लरिकइँया
बरखा के पानी आ कगजा के नइया!
रेशम के कीड़ा के तरे खुदहीं बनावत जाल बा
ई आदमी अपने बदे काहें रचत जंजाल बा
पानी के बाहर मौत बा, पानी के भीतर जाल बा
लाचार मछरी का करो जब हर कदम पर काल बा़
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मनोज भावुक

@manoj_bhawuk

रेशम के कीड़ा के तरे खुदहीं बनावत जाल बा
ई आदमी अपने बदे काहें रचत जंजाल बा
पानी के बाहर मौत बा, पानी के भीतर जाल बा
लाचार मछरी का करो जब हर कदम पर काल बा़
झूठो के काहे आँख में केहू भरेला लालसा
काल्हो रहे बदहाल ऊ, आजो रहत बदहाल बा
कइसे रही, कहँवाँ रही, ई मन भला सुख-चैन से
बदले ना हालत तब दुखी, बदले तबो बेहाल बा
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मनोज भावुक

@manoj_bhawuk

झूठो के काहे आँख में केहू भरेला लालसा
काल्हो रहे बदहाल ऊ, आजो रहत बदहाल बा
कइसे रही, कहँवाँ रही, ई मन भला सुख-चैन से
बदले ना हालत तब दुखी, बदले तबो बेहाल बा
अइँठात बा मन्दिर के बाहर भीखमंगा भूख से
मंदिर के भीतर झाँक लीं, पंडा त मालेमाल बा
केहू के नइखे पूत तऽ, केहू के नइखे नोकरी
'भावुक' धरा पर आदमी हरदम रहल कंगाल बा
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मनोज भावुक

@manoj_bhawuk

अइँठात बा मन्दिर के बाहर भीखमंगा भूख से
मंदिर के भीतर झाँक लीं, पंडा त मालेमाल बा
केहू के नइखे पूत तऽ, केहू के नइखे नोकरी
'भावुक' धरा पर आदमी हरदम रहल कंगाल बा
कबहूँ लिखा सकल ना तहरीर जिन्दगी के
कबहूँ पढ़ा सकल ना तकदीर जिन्दगी के
केहू निखोर देले बा घाव सब पुरनका
आवँक में आ रहल ना दुख - पीर जिन्दगी के
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मनोज भावुक

@manoj_bhawuk

कबहूँ लिखा सकल ना तहरीर जिन्दगी के
कबहूँ पढ़ा सकल ना तकदीर जिन्दगी के
केहू निखोर देले बा घाव सब पुरनका
आवँक में आ रहल ना दुख - पीर जिन्दगी के
जब - जब भरेला छाती साथी के घात से तब
देला सकून आँखिन के नीर जिन्दगी के
गोदी से लेके डोली, डोली से लेके अर्थी
अतने में बा समूचा तस्वीर जिन्दगी के
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मनोज भावुक

@manoj_bhawuk

जब - जब भरेला छाती साथी के घात से तब
देला सकून आँखिन के नीर जिन्दगी के
गोदी से लेके डोली, डोली से लेके अर्थी
अतने में बा समूचा तस्वीर जिन्दगी के
तहरे बदे रहत बा पागल परान 'भावुक'
तूहीं हिया के थाती, जागीर जिन्दगी के
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मनोज भावुक

@manoj_bhawuk

तहरे बदे रहत बा पागल परान 'भावुक'
तूहीं हिया के थाती, जागीर जिन्दगी के
दरिया के बीच बइठ के कागज के नाव में
का-का करत बा आदमी अपना बचाव में
कान्हा प अपना बोझ उठवलो के बावजूद
हरदम रहल देवाल छते का दबाव में
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मनोज भावुक

@manoj_bhawuk

दरिया के बीच बइठ के कागज के नाव में
का-का करत बा आदमी अपना बचाव में
कान्हा प अपना बोझ उठवलो के बावजूद
हरदम रहल देवाल छते का दबाव में
कहहीं के बाटे देश ई गाँवन के हऽ मगर
खोजलो प गाँव ना मिली अब कवनो भाव में
चेहरा पढ़े के लूर जो हमरा भइल रहित
अइतीं ना बाते- बात प अतना तनाव में
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मनोज भावुक

@manoj_bhawuk

कहहीं के बाटे देश ई गाँवन के हऽ मगर
खोजलो प गाँव ना मिली अब कवनो भाव में
चेहरा पढ़े के लूर जो हमरा भइल रहित
अइतीं ना बाते- बात प अतना तनाव में
लागत बा ऊ मशीन के साथे भईल मशीन
तबहीं त, यार, आज ले लवटल ना गाँव में
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मनोज भावुक

@manoj_bhawuk

लागत बा ऊ मशीन के साथे भईल मशीन
तबहीं त, यार, आज ले लवटल ना गाँव में
ना रहित झाँझर मड़इया फूस के
घर में आइत घाम कइसे पूस के
के कइल चोरी, पता कइसे लगी
चोर जब भाई रही जासूस के
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मनोज भावुक

@manoj_bhawuk

ना रहित झाँझर मड़इया फूस के
घर में आइत घाम कइसे पूस के
के कइल चोरी, पता कइसे लगी
चोर जब भाई रही जासूस के
आज ऊ लँगड़ो दरोगा हो गइल
देख लीं, सरकार जादू घूस के
ख्वाब में भलही रहे एगो परी
सामने चेहरा रहे मनहूस के
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मनोज भावुक

@manoj_bhawuk

आज ऊ लँगड़ो दरोगा हो गइल
देख लीं, सरकार जादू घूस के
ख्वाब में भलही रहे एगो परी
सामने चेहरा रहे मनहूस के
जे भी बा, बाटे बनल बरगद इहाँ
पास के सब पेड़ के रस चूस के
तूहीं ना तऽ जिन्दगी में का रही
छोड़ के मत जा ए 'भावुक' रूस के
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मनोज भावुक

@manoj_bhawuk

जे भी बा, बाटे बनल बरगद इहाँ
पास के सब पेड़ के रस चूस के
तूहीं ना तऽ जिन्दगी में का रही
छोड़ के मत जा ए 'भावुक' रूस के
देखलीं जे बइठि के दरिया किनारे
डूबके देखला प लागल भिन्न, यारे
घर के कीमत का हवे, ऊहे बताई
जे रहत फुटपाथ पर लँगटे-उघारे
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मनोज भावुक

@manoj_bhawuk

देखलीं जे बइठि के दरिया किनारे
डूबके देखला प लागल भिन्न, यारे
घर के कीमत का हवे, ऊहे बताई
जे रहत फुटपाथ पर लँगटे-उघारे
ना परे मन घर कबो बबुआ के भलहीं
रोज बुढ़िया भोर में कउवा उचारे
बस कहे के हम आ ऊ साथ रहीले
साथ का, जब पड़ गइल मन में दरारे
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मनोज भावुक

@manoj_bhawuk

ना परे मन घर कबो बबुआ के भलहीं
रोज बुढ़िया भोर में कउवा उचारे
बस कहे के हम आ ऊ साथ रहीले
साथ का, जब पड़ गइल मन में दरारे
ख्वाब में भी हम कबो सोचले ना होखब
वक्त ले जाई कबो ओहू दुआरे
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मनोज भावुक

@manoj_bhawuk

ख्वाब में भी हम कबो सोचले ना होखब
वक्त ले जाई कबो ओहू दुआरे
बात पर बात होता बात ओराते नइखे
कवनो दिक्कत के समाधान भेंटाते नइखे
 
भोर के आस में जे बूढ़ भइल, सोचत बा
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मनोज भावुक

@manoj_bhawuk

बात पर बात होता बात ओराते नइखे
कवनो दिक्कत के समाधान भेंटाते नइखे
 
भोर के आस में जे बूढ़ भइल, सोचत बा
मर गइल का बा सुरुज रात ई जाते नइखे
 
लोग सिखले बा बजावे के सिरिफ ताली का
सामने जुल्म के अब मुठ्ठी बन्हाते नइखे
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मनोज भावुक

@manoj_bhawuk

मर गइल का बा सुरुज रात ई जाते नइखे
 
लोग सिखले बा बजावे के सिरिफ ताली का
सामने जुल्म के अब मुठ्ठी बन्हाते नइखे
 
कान में खोंट भरल बा तबे तs केहू के
कवनो अलचार के आवाज़ सुनाते नइखे
 
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मनोज भावुक

@manoj_bhawuk

 
कान में खोंट भरल बा तबे तs केहू के
कवनो अलचार के आवाज़ सुनाते नइखे
 
ओद काठी बा, हवा तेज बा,किस्मत देखीं
तेल भरले बा, दिया-बाती बराते नइखे
 
मन के धृतराष्ट्र के आँखिन से सभे देखत बा
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मनोज भावुक

@manoj_bhawuk

ओद काठी बा, हवा तेज बा,किस्मत देखीं
तेल भरले बा, दिया-बाती बराते नइखे
 
मन के धृतराष्ट्र के आँखिन से सभे देखत बा
भीम असली ह कि लोहा के, चिन्हाते नइखे
 
बर्फ हऽ, भाप हऽ, पानी हऽ कि कुछुओ ना हऽ
जिन्दगी का हवे, ई राज बुझाते नइखे
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मनोज भावुक

@manoj_bhawuk

भीम असली ह कि लोहा के, चिन्हाते नइखे
 
बर्फ हऽ, भाप हऽ, पानी हऽ कि कुछुओ ना हऽ
जिन्दगी का हवे, ई राज बुझाते नइखे
 
दफ्न बा दिल में तजुर्बा त बहुत, ए ‘भावुक’
छंद के बंध में सब काहें समाते नइखे
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मनोज भावुक

@manoj_bhawuk

 
दफ्न बा दिल में तजुर्बा त बहुत, ए ‘भावुक’
छंद के बंध में सब काहें समाते नइखे
हियरा में फूल बन के खिले कौनो-कौनो बात
हियरा में शूल बन के हले कौनो-कौनो बात
जज्बात पर यकीन कइल भी बा अब गुनाह
दिल में उतर के दिल के छले कौनो-कौनो बात
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मनोज भावुक

@manoj_bhawuk

हियरा में फूल बन के खिले कौनो-कौनो बात
हियरा में शूल बन के हले कौनो-कौनो बात
जज्बात पर यकीन कइल भी बा अब गुनाह
दिल में उतर के दिल के छले कौनो-कौनो बात
अचके में पैर राख में पड़ते पता चलल
बरिसन ले आग बन के जले कौनो-कौनो बात
रख देला मन के मोड़ के, जिनिगी सँवार के
तत्काल दिल में लागे भले कौनो-कौनो बात
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मनोज भावुक

@manoj_bhawuk

अचके में पैर राख में पड़ते पता चलल
बरिसन ले आग बन के जले कौनो-कौनो बात
रख देला मन के मोड़ के, जिनिगी सँवार के
तत्काल दिल में लागे भले कौनो-कौनो बात
अनुभव नया-नया मिले ‘भावुक’ हो रोज़-रोज़
पर गीत आ गजल में ढ़ले कौनो-कौनो बात
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मनोज भावुक

@manoj_bhawuk

अनुभव नया-नया मिले ‘भावुक’ हो रोज़-रोज़
पर गीत आ गजल में ढ़ले कौनो-कौनो बात
बहुत नाच जिनिगी नचावत रहल
हँसावत, खेलावत, रोआवत रहल
कहाँ खो गइल अब ऊ धुन प्यार के
जे हमरा के पागल बनावत रहल
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मनोज भावुक

@manoj_bhawuk

बहुत नाच जिनिगी नचावत रहल
हँसावत, खेलावत, रोआवत रहल
कहाँ खो गइल अब ऊ धुन प्यार के
जे हमरा के पागल बनावत रहल
बुरा वक्त में ऊ बदलिये गइल
जे हमरा के आपन बतावत रहल
बन्हाइल कहाँ ऊ कबो छंद में
जे हमरा के हरदम लुभावत रहल
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मनोज भावुक

@manoj_bhawuk

बुरा वक्त में ऊ बदलिये गइल
जे हमरा के आपन बतावत रहल
बन्हाइल कहाँ ऊ कबो छंद में
जे हमरा के हरदम लुभावत रहल
उहो आज खोजत बा रस्ता, हजूर
जे सभका के रस्ता देखावत रहल
जमीने प बा आदमी के वजूद
तबो मन परिन्दा उड़ावत रहल
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मनोज भावुक

@manoj_bhawuk

उहो आज खोजत बा रस्ता, हजूर
जे सभका के रस्ता देखावत रहल
जमीने प बा आदमी के वजूद
तबो मन परिन्दा उड़ावत रहल
कबो आज ले ना रुकल ई कदम
भले मोड़ पर मोड़ आवत रहल
लिखे में बहुत प्राण तड़पल तबो
गजल-गीत ‘भावुक’ सुनावत रहल
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मनोज भावुक

@manoj_bhawuk

कबो आज ले ना रुकल ई कदम
भले मोड़ पर मोड़ आवत रहल
लिखे में बहुत प्राण तड़पल तबो
गजल-गीत ‘भावुक’ सुनावत रहल
अबकी दियरी के परब अइसे मनावल जाए
मन के अँगना में एगो दीप जरावल जाए
रोशनी गाँव में, दिल्ली से ले आवल जाए
कैद सूरज के अब आजाद करावल जाए
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मनोज भावुक

@manoj_bhawuk

अबकी दियरी के परब अइसे मनावल जाए
मन के अँगना में एगो दीप जरावल जाए
रोशनी गाँव में, दिल्ली से ले आवल जाए
कैद सूरज के अब आजाद करावल जाए
हिन्दू, मुसलिम ना, ईसाई ना, सिक्ख ए भाई
अपना औलाद के इन्सान बनावल जाए
जेमें भगवान, खुदा, गॉड सभे साथ रहे
एह तरह के एगो देवास बनावल जाए
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मनोज भावुक

@manoj_bhawuk

हिन्दू, मुसलिम ना, ईसाई ना, सिक्ख ए भाई
अपना औलाद के इन्सान बनावल जाए
जेमें भगवान, खुदा, गॉड सभे साथ रहे
एह तरह के एगो देवास बनावल जाए
रोज दियरी बा कहीं, रोज कहीं भूखमरी
काश! दुनिया से विषमता के मिटावल जाए
सूप, चलनी के पटकला से भला का होई
श्रम के लाठी से दलिद्दर के भगावल जाए
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मनोज भावुक

@manoj_bhawuk

रोज दियरी बा कहीं, रोज कहीं भूखमरी
काश! दुनिया से विषमता के मिटावल जाए
सूप, चलनी के पटकला से भला का होई
श्रम के लाठी से दलिद्दर के भगावल जाए
लाख रस्ता हो कठिन, लाख दूर मंजिल हो
आस के फूल ही आँखिन में उगावल जाए
आम मउरल बा, जिया गंध से पागल बाटे
ए सखी, ए सखी ‘भावुक’ के बोलावल जाए
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मनोज भावुक

@manoj_bhawuk

लाख रस्ता हो कठिन, लाख दूर मंजिल हो
आस के फूल ही आँखिन में उगावल जाए
आम मउरल बा, जिया गंध से पागल बाटे
ए सखी, ए सखी ‘भावुक’ के बोलावल जाए
भँवर में डूबियो के आदमी उबर जाला
मरे के बा तऽ ऊ दरिया किनारे मर जाला
पता ई बा कि महल ना टिके कबो अइसन
तबो त रेत प बुनियाद लोग धर जाला
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मनोज भावुक

@manoj_bhawuk

भँवर में डूबियो के आदमी उबर जाला
मरे के बा तऽ ऊ दरिया किनारे मर जाला
पता ई बा कि महल ना टिके कबो अइसन
तबो त रेत प बुनियाद लोग धर जाला
जमीर चीख के सौ बार रोके-टोकेला
तबो त मन ई बेहया गुनाह कर जाला
बहुत बा लोग जे मरलो के बाद जीयत बा
बहुत बा लोग जे जियते में, यार, मर जाला
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मनोज भावुक

@manoj_bhawuk

जमीर चीख के सौ बार रोके-टोकेला
तबो त मन ई बेहया गुनाह कर जाला
बहुत बा लोग जे मरलो के बाद जीयत बा
बहुत बा लोग जे जियते में, यार, मर जाला
अगर जो दिल में लगन, चाह आ भरोसा बा
कसम से चाँद भी अँगना में तब उतर जाला
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मनोज भावुक

@manoj_bhawuk

अगर जो दिल में लगन, चाह आ भरोसा बा
कसम से चाँद भी अँगना में तब उतर जाला
भोजपुरी इंडस्ट्री के 'पावर स्टार' यानी पवन सिंह कब कहाँ का गुल खिलाईहें, ई केहू ना जानत। कबो अपनी निजी जिंदगी त कबो विवाद के चलते सुर्ख़ियों में रहे वाला पवन सिंह ए बेर एगो अइसन धमाका कइले बाड़े कि फैंस गदगद हो गइल बाड़ें। सोशल मीडिया पर उनकर एगो ताजा पोस्ट 'आग' लगा रहल बा, जवना में ऊ अपनी अपकमिंग फिल्म 'डकैत: एक प्रेम कथा' के लेके बड़हन जानकारी साझा कइले बाड़ें।
साउथ के तड़का अउर 'डबल पावर'
पवन सिंह अपनी पोस्ट में साफ लिखले बाड़ें कि ए बार मामला कुछ अलग होखे वाला बा। ऊ लिखलें— "भोजपुरी का फ्लेवर, साउथ का स्वैग... इस बार धमाका होगा डबल पावर के साथ!" यानी साफ़ बा कि पवन सिंह अब साउथ के फिल्म इंडस्ट्री के अंदाज़ में भोजपुरी सिनेमा के जलवा बिखेरे खातिर कमर कस लिहले बाड़ें। बता दीं कि ए फिल्म में अदिवी शेष अउर मृणाल ठाकुर लीड रोल में नजर अइहें, जबकि पवन सिंह अपनी जादुई आवाज़ से ए फिल्म में जान फूँकिहें।
काहे टल गइल रिलीज के तारीख?
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द पुरवइया डेस्क

@thepurvaiya

भोजपुरी इंडस्ट्री के 'पावर स्टार' यानी पवन सिंह कब कहाँ का गुल खिलाईहें, ई केहू ना जानत। कबो अपनी निजी जिंदगी त कबो विवाद के चलते सुर्ख़ियों में रहे वाला पवन सिंह ए बेर एगो अइसन धमाका कइले बाड़े कि फैंस गदगद हो गइल बाड़ें। सोशल मीडिया पर उनकर एगो ताजा पोस्ट 'आग' लगा रहल बा, जवना में ऊ अपनी अपकमिंग फिल्म 'डकैत: एक प्रेम कथा' के लेके बड़हन जानकारी साझा कइले बाड़ें।
साउथ के तड़का अउर 'डबल पावर'
पवन सिंह अपनी पोस्ट में साफ लिखले बाड़ें कि ए बार मामला कुछ अलग होखे वाला बा। ऊ लिखलें— "भोजपुरी का फ्लेवर, साउथ का स्वैग... इस बार धमाका होगा डबल पावर के साथ!" यानी साफ़ बा कि पवन सिंह अब साउथ के फिल्म इंडस्ट्री के अंदाज़ में भोजपुरी सिनेमा के जलवा बिखेरे खातिर कमर कस लिहले बाड़ें। बता दीं कि ए फिल्म में अदिवी शेष अउर मृणाल ठाकुर लीड रोल में नजर अइहें, जबकि पवन सिंह अपनी जादुई आवाज़ से ए फिल्म में जान फूँकिहें।
काहे टल गइल रिलीज के तारीख?
पहिले ई फिल्म 19 मार्च के रिलीज होखे वाली रहे, बाकिर बॉक्स ऑफिस के गणित देखत मेकर्स आपन मन बदल लिहले बाड़ें। दरअसल, पवन कल्याण के फिल्म 'उस्ताद भगत सिंह' अउर रणवीर सिंह के 'धुरंधर 2' के बंपर कमाई के देखत 'डकैत' के टीम कवनो रिस्क ना लेवे के चाहत रहे। एही से अब ई फिल्म 19 मार्च के जगह 10 अप्रैल के सिनेमाघरों में दस्तक दी।
गोरखपुर में मची 'टची बडी' के शोर
खाली फिल्म के खबर ना बा, पवन सिंह अपनी नया गाना 'टची बडी' के लेके भी बवाल मचावे वाले बाड़ें। 'टची बडी ग्रैंड' सॉन्ग इवेंट के जानकारी देत ऊ बतवलें कि ई धमाकेदार इवेंट 28 मार्च के साँझ 6 बजे, गोरखपुर के महंत दिग्विजयनाथ पार्क में आयोजित कइल जाई। गोरखपुर के जनता अउर पवन सिंह के फैंस ए खबर के सुनला के बाद से ही एक्साइटमेंट में बाड़ें कि कब ऊ घड़ी आई अउर कब पावर स्टार के नया गाना गूँजी।
फैंस भइले खुशी से लबालब
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द पुरवइया डेस्क

@thepurvaiya

पहिले ई फिल्म 19 मार्च के रिलीज होखे वाली रहे, बाकिर बॉक्स ऑफिस के गणित देखत मेकर्स आपन मन बदल लिहले बाड़ें। दरअसल, पवन कल्याण के फिल्म 'उस्ताद भगत सिंह' अउर रणवीर सिंह के 'धुरंधर 2' के बंपर कमाई के देखत 'डकैत' के टीम कवनो रिस्क ना लेवे के चाहत रहे। एही से अब ई फिल्म 19 मार्च के जगह 10 अप्रैल के सिनेमाघरों में दस्तक दी।
गोरखपुर में मची 'टची बडी' के शोर
खाली फिल्म के खबर ना बा, पवन सिंह अपनी नया गाना 'टची बडी' के लेके भी बवाल मचावे वाले बाड़ें। 'टची बडी ग्रैंड' सॉन्ग इवेंट के जानकारी देत ऊ बतवलें कि ई धमाकेदार इवेंट 28 मार्च के साँझ 6 बजे, गोरखपुर के महंत दिग्विजयनाथ पार्क में आयोजित कइल जाई। गोरखपुर के जनता अउर पवन सिंह के फैंस ए खबर के सुनला के बाद से ही एक्साइटमेंट में बाड़ें कि कब ऊ घड़ी आई अउर कब पावर स्टार के नया गाना गूँजी।
फैंस भइले खुशी से लबालब
पवन सिंह के ई पोस्ट आवते ही कमेंट सेक्शन में 'पावर स्टार' के जय-जयकार शुरू हो गइल बा। लोगन के कहनाम बा कि पवन सिंह जब भी साउथ के तर्ज पर कुछ नया लेके आवेलें, त ऊ बॉक्स ऑफिस पर झंडा गाड़ देवेला। 'डकैत: एक प्रेम कथा' के नामे से ही लगत बा कि ए बार एक्शन अउर रोमांस के जबरदस्त कॉकटेल मिले वाला बा।
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द पुरवइया डेस्क

@thepurvaiya

पवन सिंह के ई पोस्ट आवते ही कमेंट सेक्शन में 'पावर स्टार' के जय-जयकार शुरू हो गइल बा। लोगन के कहनाम बा कि पवन सिंह जब भी साउथ के तर्ज पर कुछ नया लेके आवेलें, त ऊ बॉक्स ऑफिस पर झंडा गाड़ देवेला। 'डकैत: एक प्रेम कथा' के नामे से ही लगत बा कि ए बार एक्शन अउर रोमांस के जबरदस्त कॉकटेल मिले वाला बा।
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भोजपुरी सिनेमा के 'शेरनी' कहल जाए वाली अक्षरा सिंह एक बार फिर से इंटरनेट के पारा बढ़ा देले बाड़ी। मामला कवनो नोकझोंक के ना, बलुक उनकरा एगो नया गाना के धमाका के बा। अक्षरा सोशल मीडिया पर अपनी शूटिंग के कुछ फोटो अउर वीडियो शेयर कइली, जवना में ऊ 'रेड हॉट' रिवीलिंग ड्रेस में एकदम कयामत ढा रहल बाड़ी।
कल्पना पटवारी के 'आइकॉनिक' गाना के नया तड़का
अक्षरा सिंह ए बेर टी-सीरीज (T-Series) के साथ मिल के एगो अइसन गाना लेके आ रहल बाड़ी, जेकरा के कवनो जमाने में मशहूर गायिका कल्पना पटवारी अपनी आवाज से घर-घर में मशहूर कइले रहली। अक्षरा अपनी पोस्ट में दिल खोल के लिखली:
"आज एक आइकॉनिक गाने को नए अंदाज़ में आपके सामने ले आई हूँ... एक अइसन गाना जेकरा के मेरी फेवरेट कल्पना पटवारी जी अपनी आवाज़ से अमर बना देले रहली। हम ओकरा के आज के टाइम के हिसाब से अपने स्टाइल में रीक्रिएट करे के कोशिश कइले बानी।"
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द पुरवइया डेस्क

@thepurvaiya

भोजपुरी सिनेमा के 'शेरनी' कहल जाए वाली अक्षरा सिंह एक बार फिर से इंटरनेट के पारा बढ़ा देले बाड़ी। मामला कवनो नोकझोंक के ना, बलुक उनकरा एगो नया गाना के धमाका के बा। अक्षरा सोशल मीडिया पर अपनी शूटिंग के कुछ फोटो अउर वीडियो शेयर कइली, जवना में ऊ 'रेड हॉट' रिवीलिंग ड्रेस में एकदम कयामत ढा रहल बाड़ी।
कल्पना पटवारी के 'आइकॉनिक' गाना के नया तड़का
अक्षरा सिंह ए बेर टी-सीरीज (T-Series) के साथ मिल के एगो अइसन गाना लेके आ रहल बाड़ी, जेकरा के कवनो जमाने में मशहूर गायिका कल्पना पटवारी अपनी आवाज से घर-घर में मशहूर कइले रहली। अक्षरा अपनी पोस्ट में दिल खोल के लिखली:
"आज एक आइकॉनिक गाने को नए अंदाज़ में आपके सामने ले आई हूँ... एक अइसन गाना जेकरा के मेरी फेवरेट कल्पना पटवारी जी अपनी आवाज़ से अमर बना देले रहली। हम ओकरा के आज के टाइम के हिसाब से अपने स्टाइल में रीक्रिएट करे के कोशिश कइले बानी।"
पैर टूट गइल, बाकिर मेहनत में कमी ना आइल
खबर खाली गाना के ना बा, खबर अक्षरा के जज्बा के भी बा। अक्षरा खुलासा कइली कि ई गाना उनकरा खातिर कतना खास बा। ऊ लिखली कि ए गाना के हर स्टेप, हर एक्सप्रेशन अउर हर शॉट में ऊ आपन जान लगा देले बाड़ी। यहाँ तक कि शूटिंग के दौरान उनकर पैर भी टूट गइल, बाकिर ऊ हार ना मानली। आखिर जनता के कुछ 'खास' देवे के रहे, त एतना दर्द त सहल जा ही सकत रहे।
दलजीत कौर अउर फैंस के 'कमेंटिया' प्यार
जैसे ही अक्षरा ई पोस्ट डालली, सोशल मीडिया के कमेंट सेक्शन में जइसे बाढ़ ही आ गइल। लोगन के प्यार अउर उत्साह देख के लगत बा कि जनता ए कमबैक के बेसब्री से इंतजार करत रहे। टीवी एक्ट्रेस दलजीत कौर त अक्षरा के मेहनत देख के भावुक हो गइली अउर लिखली— "मेरा मेहनती बच्चा।" ओहिजे फैंस के भी ताँता लागल बा। एगो यूजर लिखलस कि "रउआ मेहनत साफ लउकत बा, गाना त एकदम कमाल बा", त केहू 'मजा आ गया' अउर 'बवाल' लिख-लिख के पूरा इंस्टाग्राम के पन्ना भर देले बा।
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द पुरवइया डेस्क

@thepurvaiya

पैर टूट गइल, बाकिर मेहनत में कमी ना आइल
खबर खाली गाना के ना बा, खबर अक्षरा के जज्बा के भी बा। अक्षरा खुलासा कइली कि ई गाना उनकरा खातिर कतना खास बा। ऊ लिखली कि ए गाना के हर स्टेप, हर एक्सप्रेशन अउर हर शॉट में ऊ आपन जान लगा देले बाड़ी। यहाँ तक कि शूटिंग के दौरान उनकर पैर भी टूट गइल, बाकिर ऊ हार ना मानली। आखिर जनता के कुछ 'खास' देवे के रहे, त एतना दर्द त सहल जा ही सकत रहे।
दलजीत कौर अउर फैंस के 'कमेंटिया' प्यार
जैसे ही अक्षरा ई पोस्ट डालली, सोशल मीडिया के कमेंट सेक्शन में जइसे बाढ़ ही आ गइल। लोगन के प्यार अउर उत्साह देख के लगत बा कि जनता ए कमबैक के बेसब्री से इंतजार करत रहे। टीवी एक्ट्रेस दलजीत कौर त अक्षरा के मेहनत देख के भावुक हो गइली अउर लिखली— "मेरा मेहनती बच्चा।" ओहिजे फैंस के भी ताँता लागल बा। एगो यूजर लिखलस कि "रउआ मेहनत साफ लउकत बा, गाना त एकदम कमाल बा", त केहू 'मजा आ गया' अउर 'बवाल' लिख-लिख के पूरा इंस्टाग्राम के पन्ना भर देले बा।
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द पुरवइया डेस्क

@thepurvaiya

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मन के मार के जियल भी मुश्किल
मन के माफिक़ भी दुश्वारी
बनल बा दुश्मन, दुनियादारी
एक ओर परिवार के चिंता
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राम अचल पटेल

@ram-achal-patel

मन के मार के जियल भी मुश्किल
मन के माफिक़ भी दुश्वारी
बनल बा दुश्मन, दुनियादारी
एक ओर परिवार के चिंता
एक ओर घर - बार के चिंता
हितई - नतई मान - प्रतिष्ठा
रोज़ी औ - रोजगार के चिंता
चैता - चईती फगुआ गुड़िया
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राम अचल पटेल

@ram-achal-patel

एक ओर घर - बार के चिंता
हितई - नतई मान - प्रतिष्ठा
रोज़ी औ - रोजगार के चिंता
चैता - चईती फगुआ गुड़िया
तिथि तीज- त्यौहार के चिंता
यार के चिंता, प्यार के चिंता
एह सारा संसार के चिंता
सब एक साथे साधी कईसे
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राम अचल पटेल

@ram-achal-patel

तिथि तीज- त्यौहार के चिंता
यार के चिंता, प्यार के चिंता
एह सारा संसार के चिंता
सब एक साथे साधी कईसे
एक सूत में बांधी कईसे
बर के बर्बस करी बरारी
कबों ठहर के सोचिला जब
डर के डरे सिहर जाईला
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राम अचल पटेल

@ram-achal-patel

एक सूत में बांधी कईसे
बर के बर्बस करी बरारी
कबों ठहर के सोचिला जब
डर के डरे सिहर जाईला
छन भर खातिर जम जाला तन
छन भर खातिर मर जाईला
फिर भी हार ना मनले बानी
जीते के ज़िद ठनले बानी
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राम अचल पटेल

@ram-achal-patel

छन भर खातिर जम जाला तन
छन भर खातिर मर जाईला
फिर भी हार ना मनले बानी
जीते के ज़िद ठनले बानी
साँस-साँस पे आस जगा के
जीवन राह पकड़ले बानी
बाक़ी बा सब राम भरोसे
राम जी दिहले राम ही सोचें
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राम अचल पटेल

@ram-achal-patel

साँस-साँस पे आस जगा के
जीवन राह पकड़ले बानी
बाक़ी बा सब राम भरोसे
राम जी दिहले राम ही सोचें
अब उनुकर ही बाटे बारी
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राम अचल पटेल

@ram-achal-patel

अब उनुकर ही बाटे बारी
गाँव के माटी, मन के मीत,
गावत बा ई, सुंदर गीत।
​खेतन में बा, हरियर धान,
बढ़े हमरा, देस के मान।
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गणेश नाथ तिवारी "विनायक"

@ganesh-nath-tiwari

गाँव के माटी, मन के मीत,
गावत बा ई, सुंदर गीत।
​खेतन में बा, हरियर धान,
बढ़े हमरा, देस के मान।
​नदी किनारे, सीतल धार,
बहत बाटे, मन्द बयार।
​चिड़िया चहके, गूँजे गान,
भोर भइल अब,तजहुँ मसान।
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गणेश नाथ तिवारी "विनायक"

@ganesh-nath-tiwari

​नदी किनारे, सीतल धार,
बहत बाटे, मन्द बयार।
​चिड़िया चहके, गूँजे गान,
भोर भइल अब,तजहुँ मसान।
​नीम के पेड़, अउर हरियाली,
झूले झूला, डाली-डाली।
​बरगद बाबा, छइयाँ देत,
मेहनत करहीं, सबहूँ खेत।
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गणेश नाथ तिवारी "विनायक"

@ganesh-nath-tiwari

​नीम के पेड़, अउर हरियाली,
झूले झूला, डाली-डाली।
​बरगद बाबा, छइयाँ देत,
मेहनत करहीं, सबहूँ खेत।
​पगडंडी के, धूर सुहानी,
याद आवे, पुरखा के बानी।
​गऊ चरावत, ग्वाला गीत,
साँच रहे ई, जग के रीत।
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गणेश नाथ तिवारी "विनायक"

@ganesh-nath-tiwari

​पगडंडी के, धूर सुहानी,
याद आवे, पुरखा के बानी।
​गऊ चरावत, ग्वाला गीत,
साँच रहे ई, जग के रीत।
​शाम भइल जब, दीप जलावे,
घर-घर में तब, मंगल छावे।
​प्रेम भाव के, बहे बयार,
माटी से बा, गहरा प्यार।
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गणेश नाथ तिवारी "विनायक"

@ganesh-nath-tiwari

​शाम भइल जब, दीप जलावे,
घर-घर में तब, मंगल छावे।
​प्रेम भाव के, बहे बयार,
माटी से बा, गहरा प्यार।
पुरवइया के पेज रही।
सोझा सातवां फेज‌ रही।
माटी कवि सम्मेलन के,
भोजपुरियन में क्रेज रही।
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संतोष विश्वकर्मा 'सूर्य'

@santosh_viswkarma_surya

पुरवइया के पेज रही।
सोझा सातवां फेज‌ रही।
माटी कवि सम्मेलन के,
भोजपुरियन में क्रेज रही।
समय आ दिन भुलाइब मत
अउरी कतो अझुराइब मत।
पेज के लाइक फालो कर लीं,
विडियो हमार सरकाइब मत।
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संतोष विश्वकर्मा 'सूर्य'

@santosh_viswkarma_surya

समय आ दिन भुलाइब मत
अउरी कतो अझुराइब मत।
पेज के लाइक फालो कर लीं,
विडियो हमार सरकाइब मत।
सजी समस्या के हल होई।
शेयर करब तऽ वायरल होई।
राउर प्यार दुलार ए भइया,
हमरा मेहनत के फल होई।
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संतोष विश्वकर्मा 'सूर्य'

@santosh_viswkarma_surya

सजी समस्या के हल होई।
शेयर करब तऽ वायरल होई।
राउर प्यार दुलार ए भइया,
हमरा मेहनत के फल होई।
नीमन-नीमन कंटेंट मिली।
सब दिन परमानेंट मिली।
रउरी सेवा में हाजिर ई,
साहित्यिक सर्वेंट मिली।
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संतोष विश्वकर्मा 'सूर्य'

@santosh_viswkarma_surya

नीमन-नीमन कंटेंट मिली।
सब दिन परमानेंट मिली।
रउरी सेवा में हाजिर ई,
साहित्यिक सर्वेंट मिली।
राउर साथ बढ़ाई आगे।
रउरी चहँले किस्मत जागे।
लिखनिहार आ पाठक लो के,
बड़ा अटूट रिश्ता लागे।
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संतोष विश्वकर्मा 'सूर्य'

@santosh_viswkarma_surya

राउर साथ बढ़ाई आगे।
रउरी चहँले किस्मत जागे।
लिखनिहार आ पाठक लो के,
बड़ा अटूट रिश्ता लागे।
दिन हऽ इतवार,पुरवईया स्थान बा,
कवि सम्मेलन में काल्ह जुटान बा।
सुंदर-सुंदर मुक्तक से होई शुरुआत,
माई भोजपुरी के ही होई खाली बात।
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नूरैन अंसारी

@noorain_ansari

दिन हऽ इतवार,पुरवईया स्थान बा,
कवि सम्मेलन में काल्ह जुटान बा।
सुंदर-सुंदर मुक्तक से होई शुरुआत,
माई भोजपुरी के ही होई खाली बात।
माई भाखा हमनी के आन, बान, शान बा,
कवि सम्मेलन में काल्ह जुटान बा।
तनी सा रउवो समय निकालीं,
रात 8 बजे online कुर्सी संभालीं।
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नूरैन अंसारी

@noorain_ansari

माई भाखा हमनी के आन, बान, शान बा,
कवि सम्मेलन में काल्ह जुटान बा।
तनी सा रउवो समय निकालीं,
रात 8 बजे online कुर्सी संभालीं।
बिन रउवा हमनी के कहाँ अड़ान बा,
कवि सम्मेलन में काल्ह जुटान बा।
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नूरैन अंसारी

@noorain_ansari

बिन रउवा हमनी के कहाँ अड़ान बा,
कवि सम्मेलन में काल्ह जुटान बा।
एक दिन बाद भेंट होई
नाही केहू अब लेट होई
कविता गीत गज़ल से
मंच ई काल्ह सेट होई
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शम्स जमील

@shamsh_jamil

एक दिन बाद भेंट होई
नाही केहू अब लेट होई
कविता गीत गज़ल से
मंच ई काल्ह सेट होई
भोजपुरी मे राखता जे
नवहा लोगन के ठेल के
अबकी बेर सुने के मिली
भइया संतोष पटेल के
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शम्स जमील

@shamsh_jamil

भोजपुरी मे राखता जे
नवहा लोगन के ठेल के
अबकी बेर सुने के मिली
भइया संतोष पटेल के
डर के मारे नुरैन अंसारी
कुछ गड़बड़ नाही सुनाई
बेलना लेके बइठल रहस
बगले मे हमार भउजाई
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शम्स जमील

@shamsh_jamil

डर के मारे नुरैन अंसारी
कुछ गड़बड़ नाही सुनाई
बेलना लेके बइठल रहस
बगले मे हमार भउजाई
जेकरा भीतर श्रंगार के
रस से भरल गागर बा
जिला सिवान जन्मभूमि
नाम देखीं रामसागर बा
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शम्स जमील

@shamsh_jamil

जेकरा भीतर श्रंगार के
रस से भरल गागर बा
जिला सिवान जन्मभूमि
नाम देखीं रामसागर बा
वीडियो जे बना रहल बा
गड़हा गड़ही मे ढुल के
संतोष विश्वकर्मा जी के
सुने के मिली खुल के
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शम्स जमील

@shamsh_jamil

वीडियो जे बना रहल बा
गड़हा गड़ही मे ढुल के
संतोष विश्वकर्मा जी के
सुने के मिली खुल के
सुने सभे किस्सा कहानी
आँख मुन के विरन के
गीत गवनई मे जोड़ा केने
कलकता से किरन के
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शम्स जमील

@shamsh_jamil

सुने सभे किस्सा कहानी
आँख मुन के विरन के
गीत गवनई मे जोड़ा केने
कलकता से किरन के
मुड़ी मे केस जेकरा देखीं
बाटे बडी गम्भीर जी
सउदी अरब से जुड़िहें
भाई जमील मीर जी
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शम्स जमील

@shamsh_jamil

मुड़ी मे केस जेकरा देखीं
बाटे बडी गम्भीर जी
सउदी अरब से जुड़िहें
भाई जमील मीर जी
वइसे त तबारक भाई
कहेलन ओमान बाड़न
बाकिर पुरवइया मंच के
हरमेसा से जान बाड़न
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शम्स जमील

@shamsh_jamil

वइसे त तबारक भाई
कहेलन ओमान बाड़न
बाकिर पुरवइया मंच के
हरमेसा से जान बाड़न
छपरा से आवऽ तारन
लागता पैदल चल के
पहिला बेर स्वागत करीं
मंच पर सुर्येश निर्मल के
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शम्स जमील

@shamsh_jamil

छपरा से आवऽ तारन
लागता पैदल चल के
पहिला बेर स्वागत करीं
मंच पर सुर्येश निर्मल के
माई भाखा ला भूल जाला
खाये के जे खाएक जी
भोजपुरी के अइसन हस्ती
बानी गणेश विनायक जी
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शम्स जमील

@shamsh_jamil

माई भाखा ला भूल जाला
खाये के जे खाएक जी
भोजपुरी के अइसन हस्ती
बानी गणेश विनायक जी
सरस्वती के जेकरा उपर
गजबे के अशेष बाटे
कार्यक्रम के कर्ता धर्ता
नाम भाउक मुकेश बाटे
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शम्स जमील

@shamsh_jamil

सरस्वती के जेकरा उपर
गजबे के अशेष बाटे
कार्यक्रम के कर्ता धर्ता
नाम भाउक मुकेश बाटे
कर लीं तुलना इंहा के
साहित्य मे धुरंधर से
सुनल जाई कविता अबकी
फेरू कवि राघवेंद्र से
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शम्स जमील

@shamsh_jamil

कर लीं तुलना इंहा के
साहित्य मे धुरंधर से
सुनल जाई कविता अबकी
फेरू कवि राघवेंद्र से
देखते जेके के बढ़ जाला
धड़कन रउवा दिल के
संचालन के जिम्मा बाटे
दुबई से शम्श जमील के.
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शम्स जमील

@shamsh_jamil

देखते जेके के बढ़ जाला
धड़कन रउवा दिल के
संचालन के जिम्मा बाटे
दुबई से शम्श जमील के.
असली प्रीत ठुकरा के पगली, खोजतारू उधार में,
कदर पिया के कईलू नाहीं, घूमतारू बजार में।
​समझा-बुझा के हार गइले ऊ, बात कगरी क दिहलु,
जवन-जवन ऊ मना कइले, करम उहे सगरी क दिहलु।
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तबारक अंसारी

@tabarak_ansari

असली प्रीत ठुकरा के पगली, खोजतारू उधार में,
कदर पिया के कईलू नाहीं, घूमतारू बजार में।
​समझा-बुझा के हार गइले ऊ, बात कगरी क दिहलु,
जवन-जवन ऊ मना कइले, करम उहे सगरी क दिहलु।
​खाँची भर मेकअप पोतला से, लउटी ना जवानी,
अबो से कदर करs साजन के, मिट जाई परेशानी।
​दुनियादारी पड़ जाई भारी, फँस जइबू मझधार में,
कदर पिया के कईलू नाहीं, घूमतारू बजार में।
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तबारक अंसारी

@tabarak_ansari

​खाँची भर मेकअप पोतला से, लउटी ना जवानी,
अबो से कदर करs साजन के, मिट जाई परेशानी।
​दुनियादारी पड़ जाई भारी, फँस जइबू मझधार में,
कदर पिया के कईलू नाहीं, घूमतारू बजार में।
जतन से गरीबी जोगावल गइल बा
गरीबन क सपना देखावल गइल बा
पियासल रहे जब उ पानी खतीरा
शराबी सभेके बनावल गइल बा
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गणेश नाथ तिवारी "विनायक"

@ganesh-nath-tiwari

जतन से गरीबी जोगावल गइल बा
गरीबन क सपना देखावल गइल बा
पियासल रहे जब उ पानी खतीरा
शराबी सभेके बनावल गइल बा
कबो ना गइल देस से सब गरीबी
दिमागी गरीबी मिटावल गइल बा
कइल बा जवन पाँच साले क वादा
उ वादा कबो ना निभावल गइल बा
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गणेश नाथ तिवारी "विनायक"

@ganesh-nath-tiwari

कबो ना गइल देस से सब गरीबी
दिमागी गरीबी मिटावल गइल बा
कइल बा जवन पाँच साले क वादा
उ वादा कबो ना निभावल गइल बा
सरेआम रोजे घुमत बा उ बहरा
जुबानी कहानी सुनावल गइल बा
अमीरी गरीबी फरक देस में बा
पुरनकी मड़इया जरावल गइल बा
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गणेश नाथ तिवारी "विनायक"

@ganesh-nath-tiwari

सरेआम रोजे घुमत बा उ बहरा
जुबानी कहानी सुनावल गइल बा
अमीरी गरीबी फरक देस में बा
पुरनकी मड़इया जरावल गइल बा
जरावल मड़इया गरीबन क छाती
धनिक के महलिया बनावल गइल बा
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गणेश नाथ तिवारी "विनायक"

@ganesh-nath-tiwari

जरावल मड़इया गरीबन क छाती
धनिक के महलिया बनावल गइल बा
दोसती के हाथ हरदम, बा बढावत लोगवा।
नेहिया के डोर हरदम, बा थमावत लोगवा।
जिंदगी में घुल गइलन,मीठ चीनी के तरे।
काम सांचो बात हरदम,बा करावत लोगवा।।
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गणेश नाथ तिवारी "विनायक"

@ganesh-nath-tiwari

दोसती के हाथ हरदम, बा बढावत लोगवा।
नेहिया के डोर हरदम, बा थमावत लोगवा।
जिंदगी में घुल गइलन,मीठ चीनी के तरे।
काम सांचो बात हरदम,बा करावत लोगवा।।
दोसती के दोष नइखे, बदनसीबी ढेर बा।
आग लागल जिंदगी में,बा जरावत लोगवा।।
देत नइखे साथ हरदम,दोसती के नाम पर।
साथ देबे के समय मे,बा सतावत लोगवा।।
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गणेश नाथ तिवारी "विनायक"

@ganesh-nath-tiwari

दोसती के दोष नइखे, बदनसीबी ढेर बा।
आग लागल जिंदगी में,बा जरावत लोगवा।।
देत नइखे साथ हरदम,दोसती के नाम पर।
साथ देबे के समय मे,बा सतावत लोगवा।।
प्रेम के अब नाम पर तू, पाठ पूजा छोड़ दs।
राम जइसन नाम हमके,बा रटावत लोगवा।।
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गणेश नाथ तिवारी "विनायक"

@ganesh-nath-tiwari

प्रेम के अब नाम पर तू, पाठ पूजा छोड़ दs।
राम जइसन नाम हमके,बा रटावत लोगवा।।
सतावल करेला सुबह शाम हरदम।
पढ़ावल करेला हरे राम हरदम।।
थकल बा हमेशा कमासुत शहर के।
लगावल करेला नरम जाम हरदम।।
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गणेश नाथ तिवारी "विनायक"

@ganesh-nath-tiwari

सतावल करेला सुबह शाम हरदम।
पढ़ावल करेला हरे राम हरदम।।
थकल बा हमेशा कमासुत शहर के।
लगावल करेला नरम जाम हरदम।।
सुबह नींद टूटल तमाशा बनवलस।
बतावल करेला जबर काम हरदम।।
गजब के उ कइलसि परम प्रेम हमसे।
रटावल करेला अपन नाम हरदम।।
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गणेश नाथ तिवारी "विनायक"

@ganesh-nath-tiwari

सुबह नींद टूटल तमाशा बनवलस।
बतावल करेला जबर काम हरदम।।
गजब के उ कइलसि परम प्रेम हमसे।
रटावल करेला अपन नाम हरदम।।
कहेलन विनायक रही बाँचि उनसे।
करावल करेला उ बदनाम हरदम।।
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गणेश नाथ तिवारी "विनायक"

@ganesh-nath-tiwari

कहेलन विनायक रही बाँचि उनसे।
करावल करेला उ बदनाम हरदम।।
प्रीति के रीति सबके पता हो गइल
आजु अइसन भइल का खता हो गइल
साँस अचके फँसल नेह के डोर में
लाज लागल त साँचो वफ़ा हो गइल
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गणेश नाथ तिवारी "विनायक"

@ganesh-nath-tiwari

प्रीति के रीति सबके पता हो गइल
आजु अइसन भइल का खता हो गइल
साँस अचके फँसल नेह के डोर में
लाज लागल त साँचो वफ़ा हो गइल
डोर छूटल कलम हाथ से छू गइल
आजु लिखलस कलम ऊ दफा हो गइल
कैद से आज उनका मिलल मौसमी
देखि मौसम सुहानी खफा हो गइल
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गणेश नाथ तिवारी "विनायक"

@ganesh-nath-tiwari

डोर छूटल कलम हाथ से छू गइल
आजु लिखलस कलम ऊ दफा हो गइल
कैद से आज उनका मिलल मौसमी
देखि मौसम सुहानी खफा हो गइल
बाति सारा जगत के पता चल गइल
नाम से तोहरा जब नफा हो गइल
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गणेश नाथ तिवारी "विनायक"

@ganesh-nath-tiwari

बाति सारा जगत के पता चल गइल
नाम से तोहरा जब नफा हो गइल
आजु देखी मर रहल संसार बा।
का कहीं लाचार ई सरकार बा।।
ध्यान राखीं देहिया के काम बा।
आन से आशा कइल बेकार बा।।
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गणेश नाथ तिवारी "विनायक"

@ganesh-nath-tiwari

आजु देखी मर रहल संसार बा।
का कहीं लाचार ई सरकार बा।।
ध्यान राखीं देहिया के काम बा।
आन से आशा कइल बेकार बा।।
जाति के चरचा करा के आदमी।
देखि ली कतना करत तकरार बा।।
लोग के लागे कि हमरा ज्ञान बा।
आजु इनका आदमी दरकार बा
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गणेश नाथ तिवारी "विनायक"

@ganesh-nath-tiwari

जाति के चरचा करा के आदमी।
देखि ली कतना करत तकरार बा।।
लोग के लागे कि हमरा ज्ञान बा।
आजु इनका आदमी दरकार बा
देखि के बाग के फूल मउरा गइल।
का भइल आदमी आज बउरा गइल।।
ना रहल आस जब आँखि पर ओकरा।
आँख अछइत कली आज कजरा गइल।।
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गणेश नाथ तिवारी "विनायक"

@ganesh-nath-tiwari

देखि के बाग के फूल मउरा गइल।
का भइल आदमी आज बउरा गइल।।
ना रहल आस जब आँखि पर ओकरा।
आँख अछइत कली आज कजरा गइल।।
गाँठ बान्हल गइल गाँछि पर दाबि के।
साँझि ले गाँठि तs खूब अझुरा गइल।।
काम के ना रही दू नमर धन कबो।
लूट के भोज से देह गदरा गइल।।
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गणेश नाथ तिवारी "विनायक"

@ganesh-nath-tiwari

गाँठ बान्हल गइल गाँछि पर दाबि के।
साँझि ले गाँठि तs खूब अझुरा गइल।।
काम के ना रही दू नमर धन कबो।
लूट के भोज से देह गदरा गइल।।
घाम में आजु बाड़े घमाइल रघु।
घेरि के साँझि बेरा अब बदरा गइल।।
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गणेश नाथ तिवारी "विनायक"

@ganesh-nath-tiwari

घाम में आजु बाड़े घमाइल रघु।
घेरि के साँझि बेरा अब बदरा गइल।।
कबो खूब हमके हंसावल गइल,
त कबो बेदर्दी से रोवावल गइल।
नेहिया के नाता से जोड़ी के अब,
बीचही डगर पर छोड़ावल गइल।
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गणेश नाथ तिवारी "विनायक"

@ganesh-nath-tiwari

कबो खूब हमके हंसावल गइल,
त कबो बेदर्दी से रोवावल गइल।
नेहिया के नाता से जोड़ी के अब,
बीचही डगर पर छोड़ावल गइल।

भरोसा हमार त तिनका रहल,
ओही के सहारे सतावल गइल।
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गणेश नाथ तिवारी "विनायक"

@ganesh-nath-tiwari


भरोसा हमार त तिनका रहल,
ओही के सहारे सतावल गइल।
संभल के त हमहूँ चलत रहनी पर,
पकड़ के कलाई गिरावल गइल।

बिनायक इहाँ केहू नइखे आपन,
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गणेश नाथ तिवारी "विनायक"

@ganesh-nath-tiwari

संभल के त हमहूँ चलत रहनी पर,
पकड़ के कलाई गिरावल गइल।

बिनायक इहाँ केहू नइखे आपन,
इहाँ त बस सपना सजावल गइल।
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गणेश नाथ तिवारी "विनायक"

@ganesh-nath-tiwari

इहाँ त बस सपना सजावल गइल।
सतावेले दुनिया, रोवावेले दुनिया
नया रोज चेहरा, देखावेले दुनिया।
​भरल पेट जेकर, सुतेला ऊ सुख से
गला भूख के तऽ, दबावेले दुनिया।
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गणेश नाथ तिवारी "विनायक"

@ganesh-nath-tiwari

सतावेले दुनिया, रोवावेले दुनिया
नया रोज चेहरा, देखावेले दुनिया।
​भरल पेट जेकर, सुतेला ऊ सुख से
गला भूख के तऽ, दबावेले दुनिया।
​भले आग लागल, पड़ोसी के घर मे
तमाशा खड़ा सब, करावेले दुनिया।
​ई कागज के नोटन, के बा खेल सारा
ई रिस्ता के सूली, चढ़ावेले दुनिया।
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गणेश नाथ तिवारी "विनायक"

@ganesh-nath-tiwari

​भले आग लागल, पड़ोसी के घर मे
तमाशा खड़ा सब, करावेले दुनिया।
​ई कागज के नोटन, के बा खेल सारा
ई रिस्ता के सूली, चढ़ावेले दुनिया।
​कहाँ साँच बोले, के हिम्मत बा केहु में
बस अब झूठो के , सजावेले दुनिया।
​सचाई के रस्ता, कठिन बा हमेशा
'विनायक'ई साँचो, बतावेले दुनिया।
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गणेश नाथ तिवारी "विनायक"

@ganesh-nath-tiwari

​कहाँ साँच बोले, के हिम्मत बा केहु में
बस अब झूठो के , सजावेले दुनिया।
​सचाई के रस्ता, कठिन बा हमेशा
'विनायक'ई साँचो, बतावेले दुनिया।
अब झूठ के कमाई करे लगनी
काहे साँच के तुरपाई करे लगनी
हिस्सा में जब एगो पोखरा मिलल
तब समुंदर के बुराई करे लगनी
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नूरैन अंसारी

@noorain_ansari

अब झूठ के कमाई करे लगनी
काहे साँच के तुरपाई करे लगनी
हिस्सा में जब एगो पोखरा मिलल
तब समुंदर के बुराई करे लगनी
कबहूँ मुश्किल में साथ ना देहनी
आज काहे भाई-भाई करे लगनी
जब बात उठल सियासत के इहाँ
तब आपस में लड़ाई करे लगनी
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नूरैन अंसारी

@noorain_ansari

कबहूँ मुश्किल में साथ ना देहनी
आज काहे भाई-भाई करे लगनी
जब बात उठल सियासत के इहाँ
तब आपस में लड़ाई करे लगनी
पसीना के रंग जब फीका पड़ल
जी-हजूरी के पुताई करे लगनी
जेकर साया में ‘नूरैन’ जिनगी बीतल
ओही पेड़ के कटाई करे लगनी
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नूरैन अंसारी

@noorain_ansari

पसीना के रंग जब फीका पड़ल
जी-हजूरी के पुताई करे लगनी
जेकर साया में ‘नूरैन’ जिनगी बीतल
ओही पेड़ के कटाई करे लगनी
कौन जीता यहाँ और हारा है कौन?
किसने किसको लहू में उतारा है मौन?
​सभ्यताएँ खड़ीं आज खामोश हैं,
सड़कों पे बिखरा हुआ होश है।
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मुकेश यादव "भावुक"

@bhawuk

कौन जीता यहाँ और हारा है कौन?
किसने किसको लहू में उतारा है मौन?
​सभ्यताएँ खड़ीं आज खामोश हैं,
सड़कों पे बिखरा हुआ होश है।
​जश्न अपनी ही जीत का गाएँगे वो,
हार को जीत अपनी बताएँगे वो।
​मसले जो असल थे वो सब खो गए,
हाकिम भी सच से जुदा हो गए।
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मुकेश यादव "भावुक"

@bhawuk

​जश्न अपनी ही जीत का गाएँगे वो,
हार को जीत अपनी बताएँगे वो।
​मसले जो असल थे वो सब खो गए,
हाकिम भी सच से जुदा हो गए।
​कब पूछेगी जनता ये उनसे भला,
उफनता सवाल अब जो दिल में जला?
बस्तियाँ राख हैं, ख़्वाब मलबे में है,
फ़ैसले सब यहाँ बंद कमरों में हैं।
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मुकेश यादव "भावुक"

@bhawuk

​कब पूछेगी जनता ये उनसे भला,
उफनता सवाल अब जो दिल में जला?
बस्तियाँ राख हैं, ख़्वाब मलबे में है,
फ़ैसले सब यहाँ बंद कमरों में हैं।
​वो जो सरहद पे सर को कटा कर गिरे,
नाम उनके महज़ अब तो ख़बरों में हैं।
​कुर्सियाँ ही यहाँ बस सलामत रहीं,
चीख मासूम बच्चों की आफ़त रही।
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मुकेश यादव "भावुक"

@bhawuk

​वो जो सरहद पे सर को कटा कर गिरे,
नाम उनके महज़ अब तो ख़बरों में हैं।
​कुर्सियाँ ही यहाँ बस सलामत रहीं,
चीख मासूम बच्चों की आफ़त रही।
​बोया नफ़रत का बीज और काटी फ़सल,
क्या सियासत की यही बस इबादत रही?
​देख लो आज इंसानियत हार गई,
स्वार्थ की भूख दुनिया को मार गई।
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मुकेश यादव "भावुक"

@bhawuk

​बोया नफ़रत का बीज और काटी फ़सल,
क्या सियासत की यही बस इबादत रही?
​देख लो आज इंसानियत हार गई,
स्वार्थ की भूख दुनिया को मार गई।
रउवा रुठ गइनी तऽ मनाईब कइसे,
जवन परल दरार भराईब कइसे।
हमहु चुप रहब आ रउवो चुप रहब,
तऽ चुपी के दीवार गिराईब कइसे।
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किरण शर्मा

@kiran_sharma

रउवा रुठ गइनी तऽ मनाईब कइसे,
जवन परल दरार भराईब कइसे।
हमहु चुप रहब आ रउवो चुप रहब,
तऽ चुपी के दीवार गिराईब कइसे।
बात छोटी-छोटी जे दिल से लगायब,
तऽ नाता इ आगे निभाईब कइसे।
खिसिया के कोहबर में बइठल रहब तऽ,
इ रिस्ता के आगे बढ़ाईब कइसे।
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किरण शर्मा

@kiran_sharma

बात छोटी-छोटी जे दिल से लगायब,
तऽ नाता इ आगे निभाईब कइसे।
खिसिया के कोहबर में बइठल रहब तऽ,
इ रिस्ता के आगे बढ़ाईब कइसे।
ना रउवा ही राजी ना हमही ही राजी,
तऽ माफी के हाथ बढ़ाईब कइसे।
डूबल बा इ दिल याद के समंदर में,
तऽ टूटत ई धीरज बँधाईब कइसे।
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किरण शर्मा

@kiran_sharma

ना रउवा ही राजी ना हमही ही राजी,
तऽ माफी के हाथ बढ़ाईब कइसे।
डूबल बा इ दिल याद के समंदर में,
तऽ टूटत ई धीरज बँधाईब कइसे।
अहम रउवो में बा, अहम हमरो में बा,
तऽ ई "अहम" के मिल के हराईब कइसे।
जिंदगी तऽ केहू के मिलल ना सदा के,
तऽ तन्हा ई लम्हा बिताईब कइसे।
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किरण शर्मा

@kiran_sharma

अहम रउवो में बा, अहम हमरो में बा,
तऽ ई "अहम" के मिल के हराईब कइसे।
जिंदगी तऽ केहू के मिलल ना सदा के,
तऽ तन्हा ई लम्हा बिताईब कइसे।
मूँद जाई आँखी जो दुनु में से केहू के,
तऽ 'किरन' फेर धैर्य बँधाईब कइसे।
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किरण शर्मा

@kiran_sharma

मूँद जाई आँखी जो दुनु में से केहू के,
तऽ 'किरन' फेर धैर्य बँधाईब कइसे।
एक तरफ़ तो आँगन में दीवाली थी,
घर के अंदर झाँका तो बदहाली थी।
उसकी क्या पहचान बताऊँ मैं तुमको,
गर्दन पर तिल था कानो में बाली थी।
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गौरव साक्षी

@gaurav_sakshi

एक तरफ़ तो आँगन में दीवाली थी,
घर के अंदर झाँका तो बदहाली थी।
उसकी क्या पहचान बताऊँ मैं तुमको,
गर्दन पर तिल था कानो में बाली थी।
हम तो उसकी याद मिटाने बैठे थे,
ग्लास भरा था बोतल पूरी खाली थी।
कल कोई पी.के. आकर यह बोलेगा,
पहले इस गोले पर भी हरियाली थी।
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गौरव साक्षी

@gaurav_sakshi

हम तो उसकी याद मिटाने बैठे थे,
ग्लास भरा था बोतल पूरी खाली थी।
कल कोई पी.के. आकर यह बोलेगा,
पहले इस गोले पर भी हरियाली थी।
पास हमारे आते ही सो जाती है,
वो जो पूरी रात जगाने वाली थी।
क्या बतलाएँ कैसा इश्क़ रहा अपना,
यह समझो की हमने आफ़त पाली थी।
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गौरव साक्षी

@gaurav_sakshi

पास हमारे आते ही सो जाती है,
वो जो पूरी रात जगाने वाली थी।
क्या बतलाएँ कैसा इश्क़ रहा अपना,
यह समझो की हमने आफ़त पाली थी।
अभी अभी वो हमको छोड़ गई हमने,
अभी अभी तो उसकी आदत डाली थी।
उसने भी इक गीत लिखा सो बदले में,
हमने भी दो चार ग़ज़ल कह डाली थी।
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गौरव साक्षी

@gaurav_sakshi

अभी अभी वो हमको छोड़ गई हमने,
अभी अभी तो उसकी आदत डाली थी।
उसने भी इक गीत लिखा सो बदले में,
हमने भी दो चार ग़ज़ल कह डाली थी।
बचपन के हमरा याद के दरपन कहाँ गइल
माई रे, अपना घर के ऊ आँगन कहाँ गइल
खुशबू भरल सनेह के उपवन कहाँ गइल
भउजी हो, तहरा गाँव के मधुवन कहाँ गइल
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मनोज भावुक

@manoj_bhawuk

बचपन के हमरा याद के दरपन कहाँ गइल
माई रे, अपना घर के ऊ आँगन कहाँ गइल
खुशबू भरल सनेह के उपवन कहाँ गइल
भउजी हो, तहरा गाँव के मधुवन कहाँ गइल
खुलके मिले-जुले के लकम अब त ना रहल
विश्वास, नेह, प्रेम-भरल मन कहाँ गइल
हर बात पर जे रोज कहे दोस्त हम हईं
हमके डुबाके आज ऊ आपन कहाँ गइल
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मनोज भावुक

@manoj_bhawuk

खुलके मिले-जुले के लकम अब त ना रहल
विश्वास, नेह, प्रेम-भरल मन कहाँ गइल
हर बात पर जे रोज कहे दोस्त हम हईं
हमके डुबाके आज ऊ आपन कहाँ गइल
बरिसत रहे जे आँख से हमरा बदे कबो
आखिर ऊ इन्तजार के सावन कहाँ गइल
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मनोज भावुक

@manoj_bhawuk

बरिसत रहे जे आँख से हमरा बदे कबो
आखिर ऊ इन्तजार के सावन कहाँ गइल
फूल के अस्मिता बचावे के
काँट चारो तरफ उगावे के
ए जी ! बाटे बहार गुलशन में
आईं सहरा में गुल खिलावे के
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मनोज भावुक

@manoj_bhawuk

फूल के अस्मिता बचावे के
काँट चारो तरफ उगावे के
ए जी ! बाटे बहार गुलशन में
आईं सहरा में गुल खिलावे के
ऊ जे तूफान के बुझा देवे
एगो अइसन दिया जरावे के
एह दशहरा में कवनो पुतला ना
मन के रावण के तन जरावे के
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मनोज भावुक

@manoj_bhawuk

ऊ जे तूफान के बुझा देवे
एगो अइसन दिया जरावे के
एह दशहरा में कवनो पुतला ना
मन के रावण के तन जरावे के
तय कइल ई बहुत जरूरी बा
माथ कहवां ले बा झुकावे के
आईं हियरा के झील में अपना
प्यार के इक कमल खिलावे के
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मनोज भावुक

@manoj_bhawuk

तय कइल ई बहुत जरूरी बा
माथ कहवां ले बा झुकावे के
आईं हियरा के झील में अपना
प्यार के इक कमल खिलावे के
काम अइसन करे के जवना से
पीठ पीछे भी मान पावे के
जिस्म जर जाई एक दिन 'भावुक'
रूह के रूह से मिलावे के
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मनोज भावुक

@manoj_bhawuk

काम अइसन करे के जवना से
पीठ पीछे भी मान पावे के
जिस्म जर जाई एक दिन 'भावुक'
रूह के रूह से मिलावे के
हजारो सपना सजा के मन में चलत रहेलें मनोज भावुक
गिरत रहेलें, उठत रहेलें, बढ़त रहेलें मनोज भावुक
एह जिंदगी के सफर में उनका तरह-तरह के मिलल तजुर्बा
ओमे से कुछ के ग़ज़ल बना के कहत रहेलें मनोज भावुक
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मनोज भावुक

@manoj_bhawuk

हजारो सपना सजा के मन में चलत रहेलें मनोज भावुक
गिरत रहेलें, उठत रहेलें, बढ़त रहेलें मनोज भावुक
एह जिंदगी के सफर में उनका तरह-तरह के मिलल तजुर्बा
ओमे से कुछ के ग़ज़ल बना के कहत रहेलें मनोज भावुक
ऊ जौन भोगलें, ऊ जौन देखलें, ना भोगे आगे के नस्ल ऊ सब
एही से आपन कथा-कहानी लिखत रहेलें मनोज भावुक
के भाई कहके बनल कसाई, के गोद लेके करेज कढ़लस
उठा के एल्बम चिन्हें के कोशिश करत रहेलें मनोज भावुक
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मनोज भावुक

@manoj_bhawuk

ऊ जौन भोगलें, ऊ जौन देखलें, ना भोगे आगे के नस्ल ऊ सब
एही से आपन कथा-कहानी लिखत रहेलें मनोज भावुक
के भाई कहके बनल कसाई, के गोद लेके करेज कढ़लस
उठा के एल्बम चिन्हें के कोशिश करत रहेलें मनोज भावुक
बा दर्द एतना अधिक कि जाने कहां अँटावस एह छोट दिल में
एही से ओके गज़ल में अपना भरत रहेलें मनोज भावुक
ना जाने केकरा से गप करेलें ई बंद कमरा में बुदबुदा के
केहू ना बूझे, हिया के घड़कन सुनत रहेलें मनोज भावुक
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मनोज भावुक

@manoj_bhawuk

बा दर्द एतना अधिक कि जाने कहां अँटावस एह छोट दिल में
एही से ओके गज़ल में अपना भरत रहेलें मनोज भावुक
ना जाने केकरा से गप करेलें ई बंद कमरा में बुदबुदा के
केहू ना बूझे, हिया के घड़कन सुनत रहेलें मनोज भावुक
दुआर-अंगना टहल-टहल के, गज़ल कहे के लकम बा लागल
कहेला घर भर कि कादो -कादो बकत रहेलें मनोज भावुक
एने जरत बाटे ‘रोम’, ओने महल में ‘नीरो’ सुनत बा बंसी
लगेला ओइसे गज़ल में अपना झुमत रहेलें मनोज भावुक
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मनोज भावुक

@manoj_bhawuk

दुआर-अंगना टहल-टहल के, गज़ल कहे के लकम बा लागल
कहेला घर भर कि कादो -कादो बकत रहेलें मनोज भावुक
एने जरत बाटे ‘रोम’, ओने महल में ‘नीरो’ सुनत बा बंसी
लगेला ओइसे गज़ल में अपना झुमत रहेलें मनोज भावुक
करेलें कोशिश गज़ल लिखे के मगर अभी ले लिखे ना आइल
बस आदतन ही कलम उठा के घिसत रहेलें मनोज भावुक
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मनोज भावुक

@manoj_bhawuk

करेलें कोशिश गज़ल लिखे के मगर अभी ले लिखे ना आइल
बस आदतन ही कलम उठा के घिसत रहेलें मनोज भावुक
दर्द उबल के जब छलकेला गज़ल कहेलें भावुक जी
जब-जब जे महसूस करेलें उहे लिखेलें भावुक जी
टुकड़ा-टुकड़ा, किस्त-किस्त में जीये-मुयेलें भावुक जी
जिनिगी फाटे रोज -रोज आ रोज सियेलें भावुक जी
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मनोज भावुक

@manoj_bhawuk

दर्द उबल के जब छलकेला गज़ल कहेलें भावुक जी
जब-जब जे महसूस करेलें उहे लिखेलें भावुक जी
टुकड़ा-टुकड़ा, किस्त-किस्त में जीये-मुयेलें भावुक जी
जिनिगी फाटे रोज -रोज आ रोज सियेलें भावुक जी
अपना जाने बड़का-बड़का काम करेलें भावुक जी
चलनी में पानी बरिसन से रोज भरेलें भावुक जी
हिरनीला बउराइल मन भटकावे जाने कहाँ-कहाँ
गिरत-उठत अनजान सफर में चलत रहेलें भावुक जी
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मनोज भावुक

@manoj_bhawuk

अपना जाने बड़का-बड़का काम करेलें भावुक जी
चलनी में पानी बरिसन से रोज भरेलें भावुक जी
हिरनीला बउराइल मन भटकावे जाने कहाँ-कहाँ
गिरत-उठत अनजान सफर में चलत रहेलें भावुक जी
कुछुओ कर लीं, होई ऊहे ,जवन लिखल बा किस्मत में
इहे सोच के अक्सर कुछुओ ना सोचेलें भावुक जी
आँच लगे जब कस के तब जाके पाके कच्चा घइला
अइसे दुख के दुपहरिया में जरत रहेंलें भावुक जी
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मनोज भावुक

@manoj_bhawuk

कुछुओ कर लीं, होई ऊहे ,जवन लिखल बा किस्मत में
इहे सोच के अक्सर कुछुओ ना सोचेलें भावुक जी
आँच लगे जब कस के तब जाके पाके कच्चा घइला
अइसे दुख के दुपहरिया में जरत रहेंलें भावुक जी
पटना,दिल्ली,बंबे,लंदन अउर अफ्रीका याद आवे
जिनगी के बीतल पन्ना जब भी पलटेलें भावुक जी
जिक्र चले जब भी वसंत के हो जालें बेचैन बहुत
आँख मूंद के जाने का-का याद करेलें भावुक जी
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मनोज भावुक

@manoj_bhawuk

पटना,दिल्ली,बंबे,लंदन अउर अफ्रीका याद आवे
जिनगी के बीतल पन्ना जब भी पलटेलें भावुक जी
जिक्र चले जब भी वसंत के हो जालें बेचैन बहुत
आँख मूंद के जाने का-का याद करेलें भावुक जी
जब से शहर में आइल तब से बा अउँजियाइल
रोटी बदे दुलरुआ खूंटा से बा बन्हाइल
गदहो के बाप बोले, दिनवो के रात बोले
सुग्गा बनल ई मनई पिंजड़ा में बा पोसाइल
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मनोज भावुक

@manoj_bhawuk

जब से शहर में आइल तब से बा अउँजियाइल
रोटी बदे दुलरुआ खूंटा से बा बन्हाइल
गदहो के बाप बोले, दिनवो के रात बोले
सुग्गा बनल ई मनई पिंजड़ा में बा पोसाइल
शूगर बढ़ल रहत बा, बी.पी. बढ़ल रहत बा
ग़जबे के जॉब बाटे किडनी ले बा डेराइल
पेटवे से बा कनेक्शन एह जॉब के, एही से
सहमल बा शेर अउरी गीदड़ बा फनफनाइल
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मनोज भावुक

@manoj_bhawuk

शूगर बढ़ल रहत बा, बी.पी. बढ़ल रहत बा
ग़जबे के जॉब बाटे किडनी ले बा डेराइल
पेटवे से बा कनेक्शन एह जॉब के, एही से
सहमल बा शेर अउरी गीदड़ बा फनफनाइल
जे सुर में सुर मिलावल, जे मुंह में मुंह सटावल
ओही के बा तरक्की, ओह पर बहार आइल
मीटिंग के बदले मेटिंग, सर्विस के बदले सेटिंग
जेकरा में ई हुनर बा, ऊ हर जगह फुलाइल
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मनोज भावुक

@manoj_bhawuk

जे सुर में सुर मिलावल, जे मुंह में मुंह सटावल
ओही के बा तरक्की, ओह पर बहार आइल
मीटिंग के बदले मेटिंग, सर्विस के बदले सेटिंग
जेकरा में ई हुनर बा, ऊ हर जगह फुलाइल
अंधेर राज में बा चमचन के पूछ भलहीं
बेरा प यार हरदम टैलेंट कामे आइल
अन्हियार जे मिटावे, सूरज उहे कहाला
ओही से बाटे दुनिया, ऊहे सदा पुजाइल
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मनोज भावुक

@manoj_bhawuk

अंधेर राज में बा चमचन के पूछ भलहीं
बेरा प यार हरदम टैलेंट कामे आइल
अन्हियार जे मिटावे, सूरज उहे कहाला
ओही से बाटे दुनिया, ऊहे सदा पुजाइल
अइसे त फेसबुक पर बाड़न हजार साथी
संकट में जब खोजाइल, केहू नजर ना आइल
नेटे प देख लिहलस माई के काम-किरिया
बबुआ बा व्यस्त अतना लंदन से आ न पाइल
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मनोज भावुक

@manoj_bhawuk

अइसे त फेसबुक पर बाड़न हजार साथी
संकट में जब खोजाइल, केहू नजर ना आइल
नेटे प देख लिहलस माई के काम-किरिया
बबुआ बा व्यस्त अतना लंदन से आ न पाइल
साथी के घात से बा गतरे गतर घवाहिल
रिश्तन के जालसाजी भावुक के ना बुझाइल
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मनोज भावुक

@manoj_bhawuk

साथी के घात से बा गतरे गतर घवाहिल
रिश्तन के जालसाजी भावुक के ना बुझाइल
करिके गवनवा, भवनवा में छोडि कर, अपने परईलन पुरूबवा बलमुआ।
अंखिया से दिन भर, गिरे लोर ढर ढर, बटिया जोहत दिन बितेला बलमुआ।
गुलमा के नतिया, आवेला जब रतिया, तिल भर कल नाही परेला बलमुआ।
का कईनी चूकवा, कि छोडल मुलुकवा, कहल ना दिलवा के हलिया बलमुआ।
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भिखारी ठाकुर

@bhikhari_thakur

करिके गवनवा, भवनवा में छोडि कर, अपने परईलन पुरूबवा बलमुआ।
अंखिया से दिन भर, गिरे लोर ढर ढर, बटिया जोहत दिन बितेला बलमुआ।
गुलमा के नतिया, आवेला जब रतिया, तिल भर कल नाही परेला बलमुआ।
का कईनी चूकवा, कि छोडल मुलुकवा, कहल ना दिलवा के हलिया बलमुआ।
सांवली सुरतिया, सालत बाटे छतिया, में एको नाही पतिया भेजवल बलमुआ।
घर में अकेले बानी, ईश्वरजी राख पानी, चढ़ल जवानी माटी मिलेला बलमुआ।
ताक तानी चारू ओर, पिया आके कर सोर, लवटो अभागिन के भगिया बलमुआ।
कहत 'भिखारी' नाई, आस नइखे एको पाई, हमरा से होखे के दीदार हो बलमुआ।
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भिखारी ठाकुर

@bhikhari_thakur

सांवली सुरतिया, सालत बाटे छतिया, में एको नाही पतिया भेजवल बलमुआ।
घर में अकेले बानी, ईश्वरजी राख पानी, चढ़ल जवानी माटी मिलेला बलमुआ।
ताक तानी चारू ओर, पिया आके कर सोर, लवटो अभागिन के भगिया बलमुआ।
कहत 'भिखारी' नाई, आस नइखे एको पाई, हमरा से होखे के दीदार हो बलमुआ।
गवना कराइ सैंया घर बइठवले से,
अपने लोभइले परदेस रे बिदेसिया।।
चढ़ली जवनियाँ बैरन भइली हमरी रे,
के मोरा हरिहें कलेस रे बिदेसिया।।
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भिखारी ठाकुर

@bhikhari_thakur

गवना कराइ सैंया घर बइठवले से,
अपने लोभइले परदेस रे बिदेसिया।।
चढ़ली जवनियाँ बैरन भइली हमरी रे,
के मोरा हरिहें कलेस रे बिदेसिया।।
दिनवाँ बितेला सइयाँ वटिया जोहत तोरा,
रतिया बितेला जागि-जागि रे बिदेसिया।।
घरी राति गइले पहर राति गइले से,
धधके करेजवा में आगि रे बिदेसिया।।
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भिखारी ठाकुर

@bhikhari_thakur

दिनवाँ बितेला सइयाँ वटिया जोहत तोरा,
रतिया बितेला जागि-जागि रे बिदेसिया।।
घरी राति गइले पहर राति गइले से,
धधके करेजवा में आगि रे बिदेसिया।।
आमवाँ मोररि गइले लगले टिकोरवा से,
दिन-पर-दिन पियराय रे बिदेसिया।।
एक दिन बहि जइहें जुलमी बयरिया से,
डाढ़ पात जइहें भहराय रे बिदेसिया।।
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भिखारी ठाकुर

@bhikhari_thakur

आमवाँ मोररि गइले लगले टिकोरवा से,
दिन-पर-दिन पियराय रे बिदेसिया।।
एक दिन बहि जइहें जुलमी बयरिया से,
डाढ़ पात जइहें भहराय रे बिदेसिया।।
भभकि के चढ़लीं मैं अपनी अँटरिया से,
चारो ओर चितवों चिहाइ रे बिदेसिया।।
कतहूँ न देखीं रामा सइयाँ के सूरतिया से,
जियरा गइले मुरझाइ रे बिदेसिया।।
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भिखारी ठाकुर

@bhikhari_thakur

भभकि के चढ़लीं मैं अपनी अँटरिया से,
चारो ओर चितवों चिहाइ रे बिदेसिया।।
कतहूँ न देखीं रामा सइयाँ के सूरतिया से,
जियरा गइले मुरझाइ रे बिदेसिया।।
हमरा बलमु जी के बड़ी-बड़ी अँखिया से,
चोखे-चोखे बाड़े नयना कोर रे बटोहिया।
ओठवा त बाड़े जइसे कतरल पनवा से,
नकिया सुगनवा के ठोर रे बटोहिया।
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भिखारी ठाकुर

@bhikhari_thakur

हमरा बलमु जी के बड़ी-बड़ी अँखिया से,
चोखे-चोखे बाड़े नयना कोर रे बटोहिया।
ओठवा त बाड़े जइसे कतरल पनवा से,
नकिया सुगनवा के ठोर रे बटोहिया।
दँतवा ऊ सोभे जइसे चमके बिजुलिया से,
मोंछियन भँवरा गुँजारे रे बटोहिया।
मथवा में सोभे रामा टेढ़ी कारी टोपिया से,
रोरी बूना सोभेला लिलार रे बटोहिया।।
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भिखारी ठाकुर

@bhikhari_thakur

दँतवा ऊ सोभे जइसे चमके बिजुलिया से,
मोंछियन भँवरा गुँजारे रे बटोहिया।
मथवा में सोभे रामा टेढ़ी कारी टोपिया से,
रोरी बूना सोभेला लिलार रे बटोहिया।।
गिरिजा-कुमार!, करऽ दुखवा हमार पार;
ढर-ढर ढरकत बा लोर मोर हो बाबूजी।
पढल-गुनल भूलि गइलऽ, समदल भेंड़ा भइलऽ;
सउदा बेसाहे में ठगइलऽ हो बाबूजी।
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भिखारी ठाकुर

@bhikhari_thakur

गिरिजा-कुमार!, करऽ दुखवा हमार पार;
ढर-ढर ढरकत बा लोर मोर हो बाबूजी।
पढल-गुनल भूलि गइलऽ, समदल भेंड़ा भइलऽ;
सउदा बेसाहे में ठगइलऽ हो बाबूजी।
केइ अइसन जादू कइल, पागल तोहार मति भइल;
नेटी काटि के बेटी भसिअवलऽ हो बाबूजी।
रोपेया गिनाई लिहलऽ, पगहा धराई दिहलऽ;
चेरिया के छेरिया बनवलऽ हो बाबूजी।
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भिखारी ठाकुर

@bhikhari_thakur

केइ अइसन जादू कइल, पागल तोहार मति भइल;
नेटी काटि के बेटी भसिअवलऽ हो बाबूजी।
रोपेया गिनाई लिहलऽ, पगहा धराई दिहलऽ;
चेरिया के छेरिया बनवलऽ हो बाबूजी।
साफ क के आँगन-गली, छीपा-लोटा जूठ मलिके;
बनि के रहलीं माई के टहलनी हो बाबूजी।
गोबर-करसी कइला से, पियहा-छुतिहर घइला से;
कवना करनियाँ में चुकली हों बाबूजी।
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भिखारी ठाकुर

@bhikhari_thakur

साफ क के आँगन-गली, छीपा-लोटा जूठ मलिके;
बनि के रहलीं माई के टहलनी हो बाबूजी।
गोबर-करसी कइला से, पियहा-छुतिहर घइला से;
कवना करनियाँ में चुकली हों बाबूजी।
बर खोजे चलि गइलऽ, माल लेके घर में धइलऽ;
दादा लेखा खोजलऽ दुलहवा हो बाबूजी।
अइसन देखवलऽ दुख, सपना भइल सुख;
सोनवाँ में डललऽ सोहागावा हो बाबूजी।
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भिखारी ठाकुर

@bhikhari_thakur

बर खोजे चलि गइलऽ, माल लेके घर में धइलऽ;
दादा लेखा खोजलऽ दुलहवा हो बाबूजी।
अइसन देखवलऽ दुख, सपना भइल सुख;
सोनवाँ में डललऽ सोहागावा हो बाबूजी।
बुढऊ से सादी भइल, सुख वो सोहाग गइल;
घर पर हर चलववलऽ हो बाबूजी।
अबहूँ से करऽ चेत, देखि के पुरान सेत; डोला
काढ़ऽ, मोलवा मोलइहऽ मत हो बाबूजी।
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भिखारी ठाकुर

@bhikhari_thakur

बुढऊ से सादी भइल, सुख वो सोहाग गइल;
घर पर हर चलववलऽ हो बाबूजी।
अबहूँ से करऽ चेत, देखि के पुरान सेत; डोला
काढ़ऽ, मोलवा मोलइहऽ मत हो बाबूजी।
घूठी पर धोती, तोर, आस कइलऽ नास मोर;
पगली पर बगली भरवलऽ हो बाबूजी।
हँसत बा लोग गॅइयाँ के, सूरत देखि के सँइयाँ के;
खाइके जहर मरि जाइब हम हो बाबूजी।
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भिखारी ठाकुर

@bhikhari_thakur

घूठी पर धोती, तोर, आस कइलऽ नास मोर;
पगली पर बगली भरवलऽ हो बाबूजी।
हँसत बा लोग गॅइयाँ के, सूरत देखि के सँइयाँ के;
खाइके जहर मरि जाइब हम हो बाबूजी।
खुसी से होता बिदाई, पथल छाती कइलस माई;
दूधवा पिआई बिसराई देली हो बाबूजी।
लाज सभ छोडि़ कर, दूनो हाथ जोडि़ कर;
चित में के गीत हम गावत बानीं हो बाबूजी।
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भिखारी ठाकुर

@bhikhari_thakur

खुसी से होता बिदाई, पथल छाती कइलस माई;
दूधवा पिआई बिसराई देली हो बाबूजी।
लाज सभ छोडि़ कर, दूनो हाथ जोडि़ कर;
चित में के गीत हम गावत बानीं हो बाबूजी।
प्राणनाथ धइलन हाथ, कइसे के निबही अब साथ;
इहे गुनि-गुनि सिर धूनत बानी हो बाबूजी।
बुद्ध बाड़न पति मोर, चढ़ल बा जवानी जोर;
जरिया के अरिया से कटलऽ हो बाबूजी।
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भिखारी ठाकुर

@bhikhari_thakur

प्राणनाथ धइलन हाथ, कइसे के निबही अब साथ;
इहे गुनि-गुनि सिर धूनत बानी हो बाबूजी।
बुद्ध बाड़न पति मोर, चढ़ल बा जवानी जोर;
जरिया के अरिया से कटलऽ हो बाबूजी।
अगुआ अभागा मुँहलागा अगुआन होके;
पूड़ी खाके छूड़ी पेसि दिहलसि हो बाबूजी।
रोबत बानी सिर धुनि, इहे छछनल सुनि;
बेटी मति बेंचक दीहऽ केहू के हो बाबूजी।
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भिखारी ठाकुर

@bhikhari_thakur

अगुआ अभागा मुँहलागा अगुआन होके;
पूड़ी खाके छूड़ी पेसि दिहलसि हो बाबूजी।
रोबत बानी सिर धुनि, इहे छछनल सुनि;
बेटी मति बेंचक दीहऽ केहू के हो बाबूजी।
आपन होखे तेकरो के, पूछे आवे सेकरों के;
दीहऽ मति पति दुलहिन जोग हो बाबूजी।
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भिखारी ठाकुर

@bhikhari_thakur

आपन होखे तेकरो के, पूछे आवे सेकरों के;
दीहऽ मति पति दुलहिन जोग हो बाबूजी।
आवेला आसाढ़ मास, लागेला अधिक आस,
बरखा में पिया रहितन पासवा बटोहिया।
पिया अइतन बुनिया में,राखि लिहतन दुनिया में,
अखरेला अधिका सवनवाँ बटोहिया।
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भिखारी ठाकुर

@bhikhari_thakur

आवेला आसाढ़ मास, लागेला अधिक आस,
बरखा में पिया रहितन पासवा बटोहिया।
पिया अइतन बुनिया में,राखि लिहतन दुनिया में,
अखरेला अधिका सवनवाँ बटोहिया।
आई जब मास भादों, सभे खेली दही-कादो,
कृस्न के जनम बीती असहीं बटोहिया।
आसिन महीनवाँ के, कड़ा घाम दिनवाँ के,
लूकवा समानवाँ बुझाला हो बटोहिया।
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भिखारी ठाकुर

@bhikhari_thakur

आई जब मास भादों, सभे खेली दही-कादो,
कृस्न के जनम बीती असहीं बटोहिया।
आसिन महीनवाँ के, कड़ा घाम दिनवाँ के,
लूकवा समानवाँ बुझाला हो बटोहिया।
कातिक के मासवा में, पियऊ का फाँसवा में,
हाड़ में से रसवा चुअत बा बटोहिया।
अगहन- पूस मासे, दुख कहीं केकरा से?
बनवाँ सरिस बा भवनवाँ बटोहिया।
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भिखारी ठाकुर

@bhikhari_thakur

कातिक के मासवा में, पियऊ का फाँसवा में,
हाड़ में से रसवा चुअत बा बटोहिया।
अगहन- पूस मासे, दुख कहीं केकरा से?
बनवाँ सरिस बा भवनवाँ बटोहिया।
मास आई बाघवा, कँपावे लागी माघवा,
त हाड़वा में जाड़वा समाई हो बटोहिया।
पलंग बा सूनवाँ, का कइली अयगुनवाँ से,
भारी ह महिनवाँ फगुनवाँ बटोहिया।
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भिखारी ठाकुर

@bhikhari_thakur

मास आई बाघवा, कँपावे लागी माघवा,
त हाड़वा में जाड़वा समाई हो बटोहिया।
पलंग बा सूनवाँ, का कइली अयगुनवाँ से,
भारी ह महिनवाँ फगुनवाँ बटोहिया।
अबीर के घोरि-घोरि, सब लोग खेली होरी,
रँगवा में भँगवा परल हो बटोहिया।
कोइलि के मीठी बोली, लागेला करेजे गोली,
पिया बिनु भावे ना चइतवा बटोहिया।
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भिखारी ठाकुर

@bhikhari_thakur

अबीर के घोरि-घोरि, सब लोग खेली होरी,
रँगवा में भँगवा परल हो बटोहिया।
कोइलि के मीठी बोली, लागेला करेजे गोली,
पिया बिनु भावे ना चइतवा बटोहिया।
चढ़ी बइसाख जब, लगन पहुँची तब,
जेठवा दबाई हमें हेठवा बटोहिया।
मंगल करी कलोल, घरे-घरे बाजी ढोल,
कहत ‘भिखारी’ खोजऽ पिया के बटोहिया।
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भिखारी ठाकुर

@bhikhari_thakur

चढ़ी बइसाख जब, लगन पहुँची तब,
जेठवा दबाई हमें हेठवा बटोहिया।
मंगल करी कलोल, घरे-घरे बाजी ढोल,
कहत ‘भिखारी’ खोजऽ पिया के बटोहिया।
ताखा पर दिया बारऽता केहू
छन्ने छन्ने जिया जारऽता केहू
सालों से उहे गाँव मे आपन
हमरो राह  निहारऽता  केहू
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शम्स जमील

@shamsh_jamil

ताखा पर दिया बारऽता केहू
छन्ने छन्ने जिया जारऽता केहू
सालों से उहे गाँव मे आपन
हमरो राह  निहारऽता  केहू
परदेश के जबसे लकम लागल
इयाद  दिल मे  उतारऽता  केहू
जे प्रीत के भूखल  उहे नू जानी
एक एकदिन कइसे टारऽता केहू
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शम्स जमील

@shamsh_jamil

परदेश के जबसे लकम लागल
इयाद  दिल मे  उतारऽता  केहू
जे प्रीत के भूखल  उहे नू जानी
एक एकदिन कइसे टारऽता केहू
केहू बा हाड़-मास एक कइले
आ दरे पर नोट झारऽता केहू
समय के बाटे बस खेला ए भाई
खुद से ही खुद के हारऽता केहू
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शम्स जमील

@shamsh_jamil

केहू बा हाड़-मास एक कइले
आ दरे पर नोट झारऽता केहू
समय के बाटे बस खेला ए भाई
खुद से ही खुद के हारऽता केहू
आपस में अझुराइल बोलीं ठीक कहाई का?
तू-तू-मैं-मैं कइला से झगड़ा फरियाई का ?
सोच-समझ के कुछऊ‌ बोले चाले‌ के चाहीं,
मुंँह से निकलल बाति लौट के, वापस आई का?
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संतोष विश्वकर्मा 'सूर्य'

@santosh_viswkarma_surya

आपस में अझुराइल बोलीं ठीक कहाई का?
तू-तू-मैं-मैं कइला से झगड़ा फरियाई का ?
सोच-समझ के कुछऊ‌ बोले चाले‌ के चाहीं,
मुंँह से निकलल बाति लौट के, वापस आई का?
बड़ बानीं तऽ बड़ भइला के आपन गरिमा बा,
छोटकन‌ से अझुराइब इज्जत बांचे पाई‌ का?
आन की कहला पर आपस में लाठी जे तानी,
चैन के दाना ए जिनगी में कबहूंँ खाई का?
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संतोष विश्वकर्मा 'सूर्य'

@santosh_viswkarma_surya

बड़ बानीं तऽ बड़ भइला के आपन गरिमा बा,
छोटकन‌ से अझुराइब इज्जत बांचे पाई‌ का?
आन की कहला पर आपस में लाठी जे तानी,
चैन के दाना ए जिनगी में कबहूंँ खाई का?
मेल मोहब्बत जे अपना भाई से ना राखल,
चार लोग भी ओकरा पाछे हाथ उठाई का?
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संतोष विश्वकर्मा 'सूर्य'

@santosh_viswkarma_surya

मेल मोहब्बत जे अपना भाई से ना राखल,
चार लोग भी ओकरा पाछे हाथ उठाई का?
सगरो देहियां फूला देले बाटे।
कांचे निनिया जगा देले बाटे।
हाथ गोड़ केतनो पटकनी हंँ दादा,
जगे जगे सूई चुभा देले बाटे।
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संतोष विश्वकर्मा 'सूर्य'

@santosh_viswkarma_surya

सगरो देहियां फूला देले बाटे।
कांचे निनिया जगा देले बाटे।
हाथ गोड़ केतनो पटकनी हंँ दादा,
जगे जगे सूई चुभा देले बाटे।
भनर-भनर कइले बा काने में आ के,
फेरा में अइसन फंसा देले बाटे।
फेल भइल आल-आउट, क्वायल प्रोटक्शन,
गतर-गतर दँतवा हला देले बाटे।
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संतोष विश्वकर्मा 'सूर्य'

@santosh_viswkarma_surya

भनर-भनर कइले बा काने में आ के,
फेरा में अइसन फंसा देले बाटे।
फेल भइल आल-आउट, क्वायल प्रोटक्शन,
गतर-गतर दँतवा हला देले बाटे।
कइले बा सगरो तबाह मोरा जिनगी
राती भर मच्छर मुँआ देले बाटे।
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संतोष विश्वकर्मा 'सूर्य'

@santosh_viswkarma_surya

कइले बा सगरो तबाह मोरा जिनगी
राती भर मच्छर मुँआ देले बाटे।
चलत जबले जिनगी के गाड़ी रहे,
न पईसा न कवनो उधारी रहे।
​नेह-छोह अइसन बनल रहे हरदम,
कि उमिर भर कायम ई यारी रहे।
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मुकेश यादव "भावुक"

@bhawuk

चलत जबले जिनगी के गाड़ी रहे,
न पईसा न कवनो उधारी रहे।
​नेह-छोह अइसन बनल रहे हरदम,
कि उमिर भर कायम ई यारी रहे।
​जरूरत पड़े त ई जानो बा हाजिर,
कहे-सुने में कहुँ न दुशवारी रहे।
​बोवल जाई अबसे भरोसे के खेती,
न मन में कवनो दुख भारी रहे।
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मुकेश यादव "भावुक"

@bhawuk

​जरूरत पड़े त ई जानो बा हाजिर,
कहे-सुने में कहुँ न दुशवारी रहे।
​बोवल जाई अबसे भरोसे के खेती,
न मन में कवनो दुख भारी रहे।
​हँसत-खेलत काटीं निमन सब समइया,
बाकिर बुरा वक्त के भी तइयारी रहे।
​कहाँ अब बा कवनो डर-भय 'भावुक',
जिनगी जंग ह, रोज जंग जारी रहे।
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मुकेश यादव "भावुक"

@bhawuk

​हँसत-खेलत काटीं निमन सब समइया,
बाकिर बुरा वक्त के भी तइयारी रहे।
​कहाँ अब बा कवनो डर-भय 'भावुक',
जिनगी जंग ह, रोज जंग जारी रहे।
दिल कइसे तोहसे हम लगाईं, दिल चुरा लिहलस केहू,
हम कइसे तोहके आपन बनाईं, आपन बना लिहलस केहू।
प्रेम अइसन लागल कि अँजोरिया भइल,
मन के मंदिर के उ सांवरिया भइल।
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मुकेश यादव "भावुक"

@bhawuk

दिल कइसे तोहसे हम लगाईं, दिल चुरा लिहलस केहू,
हम कइसे तोहके आपन बनाईं, आपन बना लिहलस केहू।
प्रेम अइसन लागल कि अँजोरिया भइल,
मन के मंदिर के उ सांवरिया भइल।
नेह के दियरी कइसे हम जराईं, जब जरा दिहलस केहू,
हम कइसे तोहके आपन बनाईं, आपन बना लिहलस केहू।
खेत में पियर सरसों फुलाए लागल,
ना देखनी त बरसों बुझाए लागल।
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मुकेश यादव "भावुक"

@bhawuk

नेह के दियरी कइसे हम जराईं, जब जरा दिहलस केहू,
हम कइसे तोहके आपन बनाईं, आपन बना लिहलस केहू।
खेत में पियर सरसों फुलाए लागल,
ना देखनी त बरसों बुझाए लागल।
अपना एह पागल दिल के समझाईं, जइसे समझा लिहलस केहू,
हम कइसे तोहके आपन बनाईं, आपन बना लिहलस केहू।
प्रेम पूरा भइल त अधूरा न बा,
जे अधूरा रहल उ धतूरा न बा.
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मुकेश यादव "भावुक"

@bhawuk

अपना एह पागल दिल के समझाईं, जइसे समझा लिहलस केहू,
हम कइसे तोहके आपन बनाईं, आपन बना लिहलस केहू।
प्रेम पूरा भइल त अधूरा न बा,
जे अधूरा रहल उ धतूरा न बा.
होके 'भावुक' हम कइसे कोहनाईं, जब मना लिहलस केहू,
हम कइसे तोहके आपन बनाईं, आपन बना लिहलस केहू।
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मुकेश यादव "भावुक"

@bhawuk

होके 'भावुक' हम कइसे कोहनाईं, जब मना लिहलस केहू,
हम कइसे तोहके आपन बनाईं, आपन बना लिहलस केहू।
ताकेला झूठ अब झरोखा से इहवाँ,
बाटे बस बात अब भरोसा के इहवाँ।
​कहाँ बन्हाइल बा सूरज के रोशनी,
धरती, आसमाँ आ चान से पूछनी,
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मुकेश यादव "भावुक"

@bhawuk

ताकेला झूठ अब झरोखा से इहवाँ,
बाटे बस बात अब भरोसा के इहवाँ।
​कहाँ बन्हाइल बा सूरज के रोशनी,
धरती, आसमाँ आ चान से पूछनी,
तबो त अंजोरिया के धोखा बा इहवाँ।
ताकेला झूठ अब झरोखा से इहवाँ।
​साथ बा लोग जब मौसम बहार बा,
पतझड़ में सोझा साफे इनकार बा,
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मुकेश यादव "भावुक"

@bhawuk

तबो त अंजोरिया के धोखा बा इहवाँ।
ताकेला झूठ अब झरोखा से इहवाँ।
​साथ बा लोग जब मौसम बहार बा,
पतझड़ में सोझा साफे इनकार बा,
सनेहिया छीटाइल बा बोरा से इहवाँ,
ताकेला झूठ अब झरोखा से इहवाँ।
​भीजल गोइठा में सुनुगता अहरा,
पईचा प कटत बा भीतर आ बहरा,
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मुकेश यादव "भावुक"

@bhawuk

सनेहिया छीटाइल बा बोरा से इहवाँ,
ताकेला झूठ अब झरोखा से इहवाँ।
​भीजल गोइठा में सुनुगता अहरा,
पईचा प कटत बा भीतर आ बहरा,
'भावुक' के नेह अकोरा में इहवाँ,
ताकेला झूठ अब झरोखा से इहवाँ।
ताकेला झूठ अब झरोखा से इहवाँ,
बाटे बस बात अब भरोसा के इहवाँ।
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मुकेश यादव "भावुक"

@bhawuk

'भावुक' के नेह अकोरा में इहवाँ,
ताकेला झूठ अब झरोखा से इहवाँ।
ताकेला झूठ अब झरोखा से इहवाँ,
बाटे बस बात अब भरोसा के इहवाँ।
जिनगी के का-का तमाशा देखावे जरूरत,
कबो हँसावे त कबो ई रोवावे जरूरत।
​शेर जंगल के त राजा हवे बाकिर इहाँ,
अब सियारो के गद्दी प बइठावे जरूरत।
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मुकेश यादव "भावुक"

@bhawuk

जिनगी के का-का तमाशा देखावे जरूरत,
कबो हँसावे त कबो ई रोवावे जरूरत।
​शेर जंगल के त राजा हवे बाकिर इहाँ,
अब सियारो के गद्दी प बइठावे जरूरत।
​महल के चाहत में रस्ता भुला गइनी हम,
अब त झोपड़िउ में नेह के जगावे जरूरत।
​राह जोहत ही नेह के दियना बुता गइल,
अब फालतू में काहें के हाथ जलावे जरूरत।
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मुकेश यादव "भावुक"

@bhawuk

​महल के चाहत में रस्ता भुला गइनी हम,
अब त झोपड़िउ में नेह के जगावे जरूरत।
​राह जोहत ही नेह के दियना बुता गइल,
अब फालतू में काहें के हाथ जलावे जरूरत।
​बा शतरंज के बिछौना ई सगरो जहान,
इहाँ अपने के ही मोहरा बनावे जरूरत।
​जब मिले ना उजियार राह में 'भावुक' कहीं,
तब त खुद के ही सूरज बनावे जरूरत।
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मुकेश यादव "भावुक"

@bhawuk

​बा शतरंज के बिछौना ई सगरो जहान,
इहाँ अपने के ही मोहरा बनावे जरूरत।
​जब मिले ना उजियार राह में 'भावुक' कहीं,
तब त खुद के ही सूरज बनावे जरूरत।
कइसे ई जिनगीया कटी, कुछु बोल सखी
बस उनुकर सूरतीया देखीं, कुछ बोल सखी..
उनके से गुन कुल बाटे सहूरवा
कुल सिंगार हमार भइल महुरवा
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मुकेश यादव "भावुक"

@bhawuk

कइसे ई जिनगीया कटी, कुछु बोल सखी
बस उनुकर सूरतीया देखीं, कुछ बोल सखी..
उनके से गुन कुल बाटे सहूरवा
कुल सिंगार हमार भइल महुरवा
अब केकरा ला सजी धजी, कुछ बोल सखी
कइसे ई जिनगीया कटी, कुछु बोल सखी
बोले कोयलिया बोली, काँव काँव लागे
मन दो काहें पिरितिया से भागे
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मुकेश यादव "भावुक"

@bhawuk

अब केकरा ला सजी धजी, कुछ बोल सखी
कइसे ई जिनगीया कटी, कुछु बोल सखी
बोले कोयलिया बोली, काँव काँव लागे
मन दो काहें पिरितिया से भागे
निरमोही कइसे के कहीं, कुछ बोल सखी
कइसे ई जिनगीया कटी, कुछु बोल सखी
बाटे उम्मीद मोर अइहे सजनवा
जइसे चारे महीना मे बदले महिनवा
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मुकेश यादव "भावुक"

@bhawuk

निरमोही कइसे के कहीं, कुछ बोल सखी
कइसे ई जिनगीया कटी, कुछु बोल सखी
बाटे उम्मीद मोर अइहे सजनवा
जइसे चारे महीना मे बदले महिनवा
पिया 'भावुक' के पइया पड़ी, कुछ बोल सखी
कइसे ई जिनगीया कटी, कुछु बोल सखी
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मुकेश यादव "भावुक"

@bhawuk

पिया 'भावुक' के पइया पड़ी, कुछ बोल सखी
कइसे ई जिनगीया कटी, कुछु बोल सखी
खात-कमात जब इहँवा बाड़अ,
दोसरा के काहे बखानत बाड़अ?
बा खटास जब सरकार से,
देश के काहे नीचा दिखावत बाड़अ?
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राघवेंद्र प्रकाश 'रघु'

@raghwendra_prakash_raghu

खात-कमात जब इहँवा बाड़अ,
दोसरा के काहे बखानत बाड़अ?
बा खटास जब सरकार से,
देश के काहे नीचा दिखावत बाड़अ?
का तू बनबअ बड़का नेता,
हिन्दू-हिन्दू से लड़ावत बाड़अ?
देश के नास कइके जमापूंजी,
काहे दोसरा के भड़कावत बाड़अ?
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राघवेंद्र प्रकाश 'रघु'

@raghwendra_prakash_raghu

का तू बनबअ बड़का नेता,
हिन्दू-हिन्दू से लड़ावत बाड़अ?
देश के नास कइके जमापूंजी,
काहे दोसरा के भड़कावत बाड़अ?
रात अन्हरिया बन बहुरूपिया,
हिन्दू-मुसलमान के भरमावत बाड़अ।
डूब मरअ एक चुरुआ पानी में,
खटत किसान के हक मारत बाड़अ।
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राघवेंद्र प्रकाश 'रघु'

@raghwendra_prakash_raghu

रात अन्हरिया बन बहुरूपिया,
हिन्दू-मुसलमान के भरमावत बाड़अ।
डूब मरअ एक चुरुआ पानी में,
खटत किसान के हक मारत बाड़अ।
नमक-हरामी चरम सीमा पर,
अनका खीर खियावत बाड़अ।
आपन सोहाए ना आँखि तोहरा,
एक से एक नियम निकालत बाड़अ।
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राघवेंद्र प्रकाश 'रघु'

@raghwendra_prakash_raghu

नमक-हरामी चरम सीमा पर,
अनका खीर खियावत बाड़अ।
आपन सोहाए ना आँखि तोहरा,
एक से एक नियम निकालत बाड़अ।
सभा-सभा आ कूदत-फानत,
खाली अनकर गुन गावत बाड़अ।
कामे अइहें अपने लोगवा,
जानत फेरु दांत चियारत बाड़अ।
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राघवेंद्र प्रकाश 'रघु'

@raghwendra_prakash_raghu

सभा-सभा आ कूदत-फानत,
खाली अनकर गुन गावत बाड़अ।
कामे अइहें अपने लोगवा,
जानत फेरु दांत चियारत बाड़अ।
काम करअ कुछ अइसन नेता,
अमर होके नइखअ आइल बाड़अ।
गुन गावे जहँवा जग सगरी,
काहे कुल-खानदान लसारत बाड़अ?
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राघवेंद्र प्रकाश 'रघु'

@raghwendra_prakash_raghu

काम करअ कुछ अइसन नेता,
अमर होके नइखअ आइल बाड़अ।
गुन गावे जहँवा जग सगरी,
काहे कुल-खानदान लसारत बाड़अ?
हमरा अटैची से सामान निकालत में भउजी के हाथ पर एगो तिलचट्टा रेंगल. ऊ अकबका के अतना जोर से आपन हाथ झटकली कि हमार अटैची दूर फेंका गइल आ ओमें राखल सब सामान एने-ओने छितरा गइल. भउजी सब सामान बटोरे लगली. तलहीं उनकर नजर हमरा ओह प्रेम-पत्र पर गइल, जवन विज्ञान के किताब के जिल्द फार के बहरी झाँकत रहे. भउजी पहिले सब सामान सहेज के रख दिहली. फेर ओह चिट्ठी में डूब गइली –
“प्रिय हमराही,
“हमरा जिनिगी के सब सुख तोहरे प अर्पित. अचानके चिट्ठी का माध्यम से हमरा होंठ के स्पर्श पा के तऽ चौंक गइल होखबऽ. बा नु ई बात. तोहरा का पता, कवना तरे हमार ई होंठ पाँच बरिस से आपन जुबान बन्द कइले तरफड़ात बाड़न स. लाख-लाख शुक्र बा भगवान के जे ऊ हमरा के हिमालिनी से मिलववले. हँ-हँ, उहे हिमालिनी जेकर नेह, प्यार आ सान्निध्य तोहरा दू बरिस ले रस्तोगी फिजिक्स सेण्टर, पटना में मिलत रहल बा. ई चिट्ठियो हम उनहीं के हाथे भेज रहल बानी. काहे कि तू हमरा के आपन पतो-ठेकाना देबे लायक ना समुझलऽ.
“राहुल, हमरा दिल के धड़कन ….. . अइसन कवन कसूर हो गइल हमरा से कि तूँ हमरा के बीच मँझधार में छोड़ के लापता हो गइलऽ? ….जवाब द …..चुप काहे बाड़! बोलऽ ना राहुल, तू अतना कठोर कइसे हो गइलऽ. आज हमार दिल हमरा से रो-रो के पूछत बा कि का तोहार राहुल अबहियों उहे राहुल होइहें जवन एशिया के सबसे बड़ महाविद्यालय जे॰बी॰एस॰ कॉलेज, कानपुर के छात्रनेता रहले, जे समाज सुधारक संघ के अध्यक्ष रहले. जेकरा अभिनय पर, जेकरा आवाज पर हजार ताली एके बेर गड़गड़ा उठे. जेकरा एक इशारा पर पल भर में सड़क जाम हो जाय भा कॉलेज के लइकन-लइकियन का बीचे नेता भा डी॰एम॰ घिर जास.
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मनोज भावुक

@manoj_bhawuk

हमरा अटैची से सामान निकालत में भउजी के हाथ पर एगो तिलचट्टा रेंगल. ऊ अकबका के अतना जोर से आपन हाथ झटकली कि हमार अटैची दूर फेंका गइल आ ओमें राखल सब सामान एने-ओने छितरा गइल. भउजी सब सामान बटोरे लगली. तलहीं उनकर नजर हमरा ओह प्रेम-पत्र पर गइल, जवन विज्ञान के किताब के जिल्द फार के बहरी झाँकत रहे. भउजी पहिले सब सामान सहेज के रख दिहली. फेर ओह चिट्ठी में डूब गइली –
“प्रिय हमराही,
“हमरा जिनिगी के सब सुख तोहरे प अर्पित. अचानके चिट्ठी का माध्यम से हमरा होंठ के स्पर्श पा के तऽ चौंक गइल होखबऽ. बा नु ई बात. तोहरा का पता, कवना तरे हमार ई होंठ पाँच बरिस से आपन जुबान बन्द कइले तरफड़ात बाड़न स. लाख-लाख शुक्र बा भगवान के जे ऊ हमरा के हिमालिनी से मिलववले. हँ-हँ, उहे हिमालिनी जेकर नेह, प्यार आ सान्निध्य तोहरा दू बरिस ले रस्तोगी फिजिक्स सेण्टर, पटना में मिलत रहल बा. ई चिट्ठियो हम उनहीं के हाथे भेज रहल बानी. काहे कि तू हमरा के आपन पतो-ठेकाना देबे लायक ना समुझलऽ.
“राहुल, हमरा दिल के धड़कन ….. . अइसन कवन कसूर हो गइल हमरा से कि तूँ हमरा के बीच मँझधार में छोड़ के लापता हो गइलऽ? ….जवाब द …..चुप काहे बाड़! बोलऽ ना राहुल, तू अतना कठोर कइसे हो गइलऽ. आज हमार दिल हमरा से रो-रो के पूछत बा कि का तोहार राहुल अबहियों उहे राहुल होइहें जवन एशिया के सबसे बड़ महाविद्यालय जे॰बी॰एस॰ कॉलेज, कानपुर के छात्रनेता रहले, जे समाज सुधारक संघ के अध्यक्ष रहले. जेकरा अभिनय पर, जेकरा आवाज पर हजार ताली एके बेर गड़गड़ा उठे. जेकरा एक इशारा पर पल भर में सड़क जाम हो जाय भा कॉलेज के लइकन-लइकियन का बीचे नेता भा डी॰एम॰ घिर जास.
“का तू अबहियों उहे राहुल बाड़ऽ, जेकरा के हमार सखी लोग “श्वेता के प्रिन्स” कहके पुकारे? का तू अबहियों उहे राहुल बाड़ऽ जे जेठ के दुपहरिया होखे भा माघ के कड़क ठंढ, मोती-झील के किनारे बइठ के घंटन हमरा संगे बतियावऽ?
“तूँ कइसे भुला गइलऽ ओ पहिला मुलाकत के, जब “विवेकानन्द भारत परिक्रमा” कार्यक्रम के दौरान तूँ हमरा के फूल के गुलदस्ता भेंट कइले रहलऽ, भा जब हमार अंगुरी, तहरा अंगुरी से छुआ गइल त कहले रहल कि “अब तो कयामत तक भी इस क्षण से मुक्त नहीं हो सकेंगीं ये उंगलियाँ.” आ सालो ना बीतल, तू हमरा के छोड़ के लापता हो गइलऽ, ई कयामत अतना जल्दी कइसे आ गइल, राहुल!
“यकीन नइखे होत. तू अइसन हो जइबऽ. का गलती रहे हमार, कवन गुनाह कइले रहनी हम, जे तू हमरा से मिले बिना, बिना बतियवले चुप-चाप हमेशा-हमेशा खातिर कानपुर छोड़ दिहलऽ. हम मानत बानी ६ दिसम्बर ९२ के ऊ रात, जब बाबरी मन्दिर ध्वस्त भइल, तहरा खातिर खतरनाक रहे. एगो छात्र नेता खातिर भयावह रहे. तू चारो तरफ से मुसलमानन से घिरल रहलऽ. मउवत तहरा सिर पर मँडरात रहे आ परमपिता परमेश्वर के असीम कृपा (जवना के हम अपना सुहाग के सौभाग्यो मानऽ तानी) कि तू सकुशल इहाँ से बच निकललऽ आ अपना घरे चल गइलऽ.
“मालूम बा, हम ओह दिन रात भर रोअत रहनी, छटपटात रहनी, भगवान से गोहरावत रहनी कि हे भगवान! हमरा राहुल के रक्षा करिहऽ. हम अपना के के कोसत रहनी कि तू हमरे वजह से सात थाना के मुसलमानन से दुश्मनी ले लिहलऽ. पूरा कॉलेज एक तरफ आ तू अकेले, अपना छात्रावास के कुछ साथियन का संगे गरजत रहलऽ. इ सब तू हमरे खातिर कइलऽ. एकर मतलब, जरूर तहरा हमरा से प्यार बा. तू हमरा के बहुत चाहेलऽ.
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मनोज भावुक

@manoj_bhawuk

“का तू अबहियों उहे राहुल बाड़ऽ, जेकरा के हमार सखी लोग “श्वेता के प्रिन्स” कहके पुकारे? का तू अबहियों उहे राहुल बाड़ऽ जे जेठ के दुपहरिया होखे भा माघ के कड़क ठंढ, मोती-झील के किनारे बइठ के घंटन हमरा संगे बतियावऽ?
“तूँ कइसे भुला गइलऽ ओ पहिला मुलाकत के, जब “विवेकानन्द भारत परिक्रमा” कार्यक्रम के दौरान तूँ हमरा के फूल के गुलदस्ता भेंट कइले रहलऽ, भा जब हमार अंगुरी, तहरा अंगुरी से छुआ गइल त कहले रहल कि “अब तो कयामत तक भी इस क्षण से मुक्त नहीं हो सकेंगीं ये उंगलियाँ.” आ सालो ना बीतल, तू हमरा के छोड़ के लापता हो गइलऽ, ई कयामत अतना जल्दी कइसे आ गइल, राहुल!
“यकीन नइखे होत. तू अइसन हो जइबऽ. का गलती रहे हमार, कवन गुनाह कइले रहनी हम, जे तू हमरा से मिले बिना, बिना बतियवले चुप-चाप हमेशा-हमेशा खातिर कानपुर छोड़ दिहलऽ. हम मानत बानी ६ दिसम्बर ९२ के ऊ रात, जब बाबरी मन्दिर ध्वस्त भइल, तहरा खातिर खतरनाक रहे. एगो छात्र नेता खातिर भयावह रहे. तू चारो तरफ से मुसलमानन से घिरल रहलऽ. मउवत तहरा सिर पर मँडरात रहे आ परमपिता परमेश्वर के असीम कृपा (जवना के हम अपना सुहाग के सौभाग्यो मानऽ तानी) कि तू सकुशल इहाँ से बच निकललऽ आ अपना घरे चल गइलऽ.
“मालूम बा, हम ओह दिन रात भर रोअत रहनी, छटपटात रहनी, भगवान से गोहरावत रहनी कि हे भगवान! हमरा राहुल के रक्षा करिहऽ. हम अपना के के कोसत रहनी कि तू हमरे वजह से सात थाना के मुसलमानन से दुश्मनी ले लिहलऽ. पूरा कॉलेज एक तरफ आ तू अकेले, अपना छात्रावास के कुछ साथियन का संगे गरजत रहलऽ. इ सब तू हमरे खातिर कइलऽ. एकर मतलब, जरूर तहरा हमरा से प्यार बा. तू हमरा के बहुत चाहेलऽ.
“सबेरे प्रिन्सिपल साहब से मिल के तहरा बारे में पूछे के चहनी बाकी सात दिन ले कर्फ्यू लागल रहल आ हम तड़पत रहनी, छटपटात रहनी, तहरा खातिर. आठवाँ दिने कॉलेज पहुँचनी त पता चलल कि तू हॉस्टल छोड़ के बिहार चल गइलऽ. हमरा बहुत खुशी भइल कि हमार राहुल सकुशल अपना घरे चल गइले. बाकी हमरा ई का पता रहे कि ऊ कानपुर का साथे-साथे हमरो के सदा खातिर छोड़ गइले. जब कबो डाकिया आवे, हम दउड़ के ओकरा पासे पहुँचीं. ई सोच के कि तोहार चिट्ठी हमरा नावें आइल होई. बाकिर अइसन कबो ना भइल. हम पाँच बरिस ले दउड़त रहनी, अइसन अवसर कबो ना आइल.
“तहरा मालूम बा कि हम तहरा के केतना चाहत रहनी. तहरे का? पूरा कॉलेज, कॉलेज के हर स्टाफ आ तहरा-हमरा के जाने वाला लगभग हर कोई ई जानत रहे कि श्वेता आ राहुल एकही शरीर के दू गो नाँव हऽ. आज स्थिति ई बा कि हमनी दुनू नदी के दू किनारा बनिके जिनिगी जी रहल बानी. ऊ त ईश्वर के किरिपा बा कि हमरा हिमालिनी मिल गइली. विश्वास करऽ राहुल, ई ईश्वर का मंजूर नइखे कि हमनी दूनो जुदा रहीं. एही से ऊ फेर से हमनी के मिलववले ह. चिट्ठी देत खा हिमालिनी त सब बतावते होइहें. तबो हमार जीव नइखे मानत. मन करऽता कि तहरा से जी भर के बतिआईं.
“जानत बाड़, जब तहरा चिट्ठी के इन्तजार करत-करत एक साल बीत गइल त हम ऊ सब कुछ करे लगनी, जवन तू करत रहलऽ. हमरा ठीक से भोजपुरी ना आवत रहे, तबो हम भोजपुरी में कविता लिखल शुरू कइनी. हमरा अभिनय ना आवत रहे, तबो हम अभिनय कइल शुरु कइनी आ अभिनय में , लेखन में, दूनू में तोहार छवि निहारत रहनी, तहरा के इयाद करत रहनीं. धीरे-धीरे एह दूनू क्षेत्रन में हमरा सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार मिलल.
“तूँ चल गइलऽ. फेर ब्वायेज हॉस्टल आ कॉलेज खातिर छात्रनेता के चुनाव भइल. नवीन नाम के एगो लइका छात्रनेता चुनाइल. हम गर्ल्स हॉस्टल आ कॉलेज के छात्रनेता पद त्याग दिहनीं आ अपना भाषण में बोलनी कि “राहुल बिना श्वेता ना” ….. जब राहुल छात्रनेता नइखन त श्वेता भी एह पद के त्यागत बाड़ी. ओकरा बाद हम तहरा प्रतिभा आ टैलेन्ट के इयाद क-क के पढ़े लगनी. तू मेधा सूची के मेधावी छात्र रहल बाड़ऽ. इ सोचि-सोचि के हमहूँ मेहनत करे लगनी कि हम तोहरा साथे खड़ा हो सकीं भा तहरा लायक बन सकीं. भगवान हमार सुन लेलें. उत्तरप्रदेश के मेडिकल परीक्षा (CPMT) के मेधा सूची में हमरा स्थान मिलल आ हम किंग जार्ज मेडिकल कॉलेज में मेडिकल के पढ़ाई करे चल अइनी. सौभाग्य देखऽ, ईश्वर के विधान देखऽ कि एही कॉलेज में तहार एगो दोस्त, रस्तोगी फिजिक्स सेण्टर, पटना के सहपाठी हिमालिनी भी पहुँचली. बाते बात में, एकदिन ऊ आपन एलबम देखइली. ओमें तहार फोटो देख के हम अवाक रह गइनी. हमरा लागल कि इहो लइकी तोहरा के चाहेले. तबों हम अपना के रोक ना सकनी. हम रो पड़नी आ हिमालिनी के जिद कइला पर आपन सब बात बतावे के पड़ल. बाकी हम ई ना जान सकनी कि हिमालिनी तहार कइसन दोस्त हई. जाने के कोशिशो ना कइनी. जानहूँ के नइखीं चाहत. हम नइखीं चाहत कि हमार राहुल केहू दोसरा के होखस. हमार जइसन होखस, जवना हाल में होखस, हमरा राहुल चाहीं.
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@manoj_bhawuk

“सबेरे प्रिन्सिपल साहब से मिल के तहरा बारे में पूछे के चहनी बाकी सात दिन ले कर्फ्यू लागल रहल आ हम तड़पत रहनी, छटपटात रहनी, तहरा खातिर. आठवाँ दिने कॉलेज पहुँचनी त पता चलल कि तू हॉस्टल छोड़ के बिहार चल गइलऽ. हमरा बहुत खुशी भइल कि हमार राहुल सकुशल अपना घरे चल गइले. बाकी हमरा ई का पता रहे कि ऊ कानपुर का साथे-साथे हमरो के सदा खातिर छोड़ गइले. जब कबो डाकिया आवे, हम दउड़ के ओकरा पासे पहुँचीं. ई सोच के कि तोहार चिट्ठी हमरा नावें आइल होई. बाकिर अइसन कबो ना भइल. हम पाँच बरिस ले दउड़त रहनी, अइसन अवसर कबो ना आइल.
“तहरा मालूम बा कि हम तहरा के केतना चाहत रहनी. तहरे का? पूरा कॉलेज, कॉलेज के हर स्टाफ आ तहरा-हमरा के जाने वाला लगभग हर कोई ई जानत रहे कि श्वेता आ राहुल एकही शरीर के दू गो नाँव हऽ. आज स्थिति ई बा कि हमनी दुनू नदी के दू किनारा बनिके जिनिगी जी रहल बानी. ऊ त ईश्वर के किरिपा बा कि हमरा हिमालिनी मिल गइली. विश्वास करऽ राहुल, ई ईश्वर का मंजूर नइखे कि हमनी दूनो जुदा रहीं. एही से ऊ फेर से हमनी के मिलववले ह. चिट्ठी देत खा हिमालिनी त सब बतावते होइहें. तबो हमार जीव नइखे मानत. मन करऽता कि तहरा से जी भर के बतिआईं.
“जानत बाड़, जब तहरा चिट्ठी के इन्तजार करत-करत एक साल बीत गइल त हम ऊ सब कुछ करे लगनी, जवन तू करत रहलऽ. हमरा ठीक से भोजपुरी ना आवत रहे, तबो हम भोजपुरी में कविता लिखल शुरू कइनी. हमरा अभिनय ना आवत रहे, तबो हम अभिनय कइल शुरु कइनी आ अभिनय में , लेखन में, दूनू में तोहार छवि निहारत रहनी, तहरा के इयाद करत रहनीं. धीरे-धीरे एह दूनू क्षेत्रन में हमरा सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार मिलल.
“तूँ चल गइलऽ. फेर ब्वायेज हॉस्टल आ कॉलेज खातिर छात्रनेता के चुनाव भइल. नवीन नाम के एगो लइका छात्रनेता चुनाइल. हम गर्ल्स हॉस्टल आ कॉलेज के छात्रनेता पद त्याग दिहनीं आ अपना भाषण में बोलनी कि “राहुल बिना श्वेता ना” ….. जब राहुल छात्रनेता नइखन त श्वेता भी एह पद के त्यागत बाड़ी. ओकरा बाद हम तहरा प्रतिभा आ टैलेन्ट के इयाद क-क के पढ़े लगनी. तू मेधा सूची के मेधावी छात्र रहल बाड़ऽ. इ सोचि-सोचि के हमहूँ मेहनत करे लगनी कि हम तोहरा साथे खड़ा हो सकीं भा तहरा लायक बन सकीं. भगवान हमार सुन लेलें. उत्तरप्रदेश के मेडिकल परीक्षा (CPMT) के मेधा सूची में हमरा स्थान मिलल आ हम किंग जार्ज मेडिकल कॉलेज में मेडिकल के पढ़ाई करे चल अइनी. सौभाग्य देखऽ, ईश्वर के विधान देखऽ कि एही कॉलेज में तहार एगो दोस्त, रस्तोगी फिजिक्स सेण्टर, पटना के सहपाठी हिमालिनी भी पहुँचली. बाते बात में, एकदिन ऊ आपन एलबम देखइली. ओमें तहार फोटो देख के हम अवाक रह गइनी. हमरा लागल कि इहो लइकी तोहरा के चाहेले. तबों हम अपना के रोक ना सकनी. हम रो पड़नी आ हिमालिनी के जिद कइला पर आपन सब बात बतावे के पड़ल. बाकी हम ई ना जान सकनी कि हिमालिनी तहार कइसन दोस्त हई. जाने के कोशिशो ना कइनी. जानहूँ के नइखीं चाहत. हम नइखीं चाहत कि हमार राहुल केहू दोसरा के होखस. हमार जइसन होखस, जवना हाल में होखस, हमरा राहुल चाहीं.
“एने कॉलेज में एगो ब्यूटी कम्पिटीशन भइल रहल हऽ. हम ओहू में टॉप कइनी हँ. हम बहुत खुश बानी. साँचो अब भगवान देलें त छप्पर फार के देलें. ऊ हमरा के सब देलें. हर तरह के सफलता ……हर खुशी. बाबूजी एगो आई॰ए॰एस॰ अधिकारी, माई डाक्टर. ….सब कुछ. बस, कमी बा, त खाली तहरे. देखऽ तहरा मालूम बा कि हम अपना माई-बाप के अकेले बानी.
“बुढ़ापा के लाठी. आँखिन के पुतरी. ऊ हमार बात कबो ना टलिहें. हमार माई हमरा के बहुत चाहेले. माई के ख्याल करऽ. माई शब्द से तूहूँ परिचित बाड़ऽ. तहरो माई बाड़ी. इयाद करऽ – बिड़ला मन्दिर में देवी के मूर्ति का सामने तू कहले रहलऽ कि श्वेता हमार माईयो एही देवी लेखा बिया. बिल्कुल देवी. हम अपना माई से तहरा के एक दिन जरूर मिलाइब, बाकिर अइसे ना …. एतना कह के तू हमार दुपट्टा के घूंघट में बदल देलऽ आ मुस्कुरा के कहलऽ कि अइसे……. . का-का सपना देखइले रहलऽ … का सपना सपने रह जाई ? बोलऽ कब मिलावत बाड़ माई से ? … ओह देवी से जेकरा आशीष खातिर हमार रोम-रोम कलप रहल बा.
“राहुल! “दुपट्टा में हथियार” वाली घटना इयाद बा तहरा ? जवना के बाद तूँ बड़ी मजाकिया मूड में हमरा से कहले रहऽ कि “वर माँगो बालिके… दिल खोल के माँगों… राहुल बाबा आज तुम पर बहुत खुश है … जो माँगोगी , बाबा वो देगा.” तब हम जवाब देहले रहीं कि “राहुल बाबा रहने भी दो. इतनी जल्दी क्या है? जरूरत पड़ने पर माँग लूँगी.” आज वर माँगे के जरूरत आ गइल बा राहुल. तू हमार प्यार लौटा दऽ – तू फेर उहे राहुल बन जा …. पाँच बरिस पहिले वाला राहुल, श्वेता के राहुल.
“हिमालिनी कहत रहली कि उहाँ फेयरवेल के दिन तूँ क्लास में आपन एगो रचना सुनइले रहलऽ कि ” क्या हुआ जो अक्सर मौन रहता हूँ, कह नहीं पाता कि तुमसे प्यार करता हूँ.” अगर ई कविता हमरा खातिर रहे त तू आ जा. हम तहरा से कहत बानी कि हँऽ “हम तहरे से प्यार करीले. सिर्फ तहरे से. तहरे खातिर जीयत बानी आ तहरे खातिर मरब.” हमरा सुन्दरता आ टैलेन्ट पर पूरा मेडिकल कॉलेज लट्टू बा आ हम तहरा पर. तहरा हमरा पर गर्व होखे के चाहीं, पर ना होत होई. बा नू ई बात. काहे कि भारतीय मरदन के ई आदत होला कि ऊ अपना प्रेमिका भा पत्नी के अपना से नीचे रखे के चाहेलन. हम मेडिकल कॉलेज में बानी आ तूँ कॉलेज के बाहर. जदि तू अइसन सोचत होखऽ त सिर्फ एकबार आके कह दऽ कि श्वेता हम तोहार साथ देबे के वादा करत बानी त हम तहरा पर आपन मेडिकल कैरियर भी न्यौछावर क देब, हमरा नइखे बनेके डाक्टर. हमार सब मेहनत खाली तहरे खातिर रहे. मेडिकल में प्रवेश भी तहरे खातिर. तू मिल जा. हम समुझब कि हमार सब तपस्या सफल हो गइल… तहार श्वेता … सिर्फ तहार … तहरे.
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मनोज भावुक

@manoj_bhawuk

“एने कॉलेज में एगो ब्यूटी कम्पिटीशन भइल रहल हऽ. हम ओहू में टॉप कइनी हँ. हम बहुत खुश बानी. साँचो अब भगवान देलें त छप्पर फार के देलें. ऊ हमरा के सब देलें. हर तरह के सफलता ……हर खुशी. बाबूजी एगो आई॰ए॰एस॰ अधिकारी, माई डाक्टर. ….सब कुछ. बस, कमी बा, त खाली तहरे. देखऽ तहरा मालूम बा कि हम अपना माई-बाप के अकेले बानी.
“बुढ़ापा के लाठी. आँखिन के पुतरी. ऊ हमार बात कबो ना टलिहें. हमार माई हमरा के बहुत चाहेले. माई के ख्याल करऽ. माई शब्द से तूहूँ परिचित बाड़ऽ. तहरो माई बाड़ी. इयाद करऽ – बिड़ला मन्दिर में देवी के मूर्ति का सामने तू कहले रहलऽ कि श्वेता हमार माईयो एही देवी लेखा बिया. बिल्कुल देवी. हम अपना माई से तहरा के एक दिन जरूर मिलाइब, बाकिर अइसे ना …. एतना कह के तू हमार दुपट्टा के घूंघट में बदल देलऽ आ मुस्कुरा के कहलऽ कि अइसे……. . का-का सपना देखइले रहलऽ … का सपना सपने रह जाई ? बोलऽ कब मिलावत बाड़ माई से ? … ओह देवी से जेकरा आशीष खातिर हमार रोम-रोम कलप रहल बा.
“राहुल! “दुपट्टा में हथियार” वाली घटना इयाद बा तहरा ? जवना के बाद तूँ बड़ी मजाकिया मूड में हमरा से कहले रहऽ कि “वर माँगो बालिके… दिल खोल के माँगों… राहुल बाबा आज तुम पर बहुत खुश है … जो माँगोगी , बाबा वो देगा.” तब हम जवाब देहले रहीं कि “राहुल बाबा रहने भी दो. इतनी जल्दी क्या है? जरूरत पड़ने पर माँग लूँगी.” आज वर माँगे के जरूरत आ गइल बा राहुल. तू हमार प्यार लौटा दऽ – तू फेर उहे राहुल बन जा …. पाँच बरिस पहिले वाला राहुल, श्वेता के राहुल.
“हिमालिनी कहत रहली कि उहाँ फेयरवेल के दिन तूँ क्लास में आपन एगो रचना सुनइले रहलऽ कि ” क्या हुआ जो अक्सर मौन रहता हूँ, कह नहीं पाता कि तुमसे प्यार करता हूँ.” अगर ई कविता हमरा खातिर रहे त तू आ जा. हम तहरा से कहत बानी कि हँऽ “हम तहरे से प्यार करीले. सिर्फ तहरे से. तहरे खातिर जीयत बानी आ तहरे खातिर मरब.” हमरा सुन्दरता आ टैलेन्ट पर पूरा मेडिकल कॉलेज लट्टू बा आ हम तहरा पर. तहरा हमरा पर गर्व होखे के चाहीं, पर ना होत होई. बा नू ई बात. काहे कि भारतीय मरदन के ई आदत होला कि ऊ अपना प्रेमिका भा पत्नी के अपना से नीचे रखे के चाहेलन. हम मेडिकल कॉलेज में बानी आ तूँ कॉलेज के बाहर. जदि तू अइसन सोचत होखऽ त सिर्फ एकबार आके कह दऽ कि श्वेता हम तोहार साथ देबे के वादा करत बानी त हम तहरा पर आपन मेडिकल कैरियर भी न्यौछावर क देब, हमरा नइखे बनेके डाक्टर. हमार सब मेहनत खाली तहरे खातिर रहे. मेडिकल में प्रवेश भी तहरे खातिर. तू मिल जा. हम समुझब कि हमार सब तपस्या सफल हो गइल… तहार श्वेता … सिर्फ तहार … तहरे.
“आरे, एगो राज के बात त बतइबे ना कइनी. राजे ना, भगवान के महान किरिपा. तहार बाबूजी रामराज पार्टी के नेता हउवन नू. रेणुकूट (उ.प्र.) में बिड़लाके फैक्टरी मात्र एके बेर बन्द भइल रहे आ ओकरा के बन्द करावे के श्रेय तहरा बाबूजिए के बा नू. जानतारऽ, ई सब हमरा कइसे पता चलल. एक दिन तहार ऊ फोटो जवना में तू अपना बाबूजी का साथे बाड़ऽ, हमरा बाबूजी के हाथे लाग गइल. बाबूजी फोटो देखते कहले कि आरे ई त कृष्णदेव भाई के फोटो हऽ. ओकरा बाद ऊ हमरा से फोटो के बारे में पूछलन त हम बता दिहनी कि हमरा एगो बहुत बढ़िया दोस्त के हऽ. तब तक हमार बाबूजी अपना अतीत में खो चुकल रहले. ऊ बतावे लगले कि “हम आ कृष्णदेव भाई दूनो आदमी एके साथे जे॰पी॰ आन्दोलन में जेल में रहनी जा.” रिहन्द बाँध के एगो ममिला में जब हमार बाबूजी के फअसा दिहल गइल रहे त पता ना के तरी-के तरी तहरे बाबूजी हमरा बाबूजी के जान बचवले. हमार आ तहार बाबूजी बहुत अच्छा दोस्त रहे लोग, जेकरा एक-दूसरा से मिले आज २०-२५ बरिस हो गइल. भगवान बड़ा कारसाज हउवन. ऊ आदमी के कब, कहाँ आ कइसे मिलवा दीहें, एकर कवनो पता नइखे. राहुल, हमनी दूनू के मिलन दू गो बूढ़ दोस्तन के दोस्ती के रिश्तेदारी में बदल दी. तू हँ कह द. हम बाबूजी से बात क लेब. देखऽ, हम होली में तहार इन्तजार करब. तूँ ना अइबऽ त बहुत पछतइबऽ. ….देखऽ, बसन्त आ रहल बा….. तूही त हमरा जीवन के बसन्त हउवऽ. तूहूँ आ जा. अगर तू ना आइबऽ त जिनिगी भर अपना के माफ ना कर सकब. हम जेतना तड़पल बानी, जेतना रोवल बानी…. हमार आह तहरा के जीवन भर चैन से जीये ना दी. …तू जरूर अइबऽ राहुल. …. जरूर अइबऽ. हमार विश्वास अमर बा. जे अमर बा, ओकर मौत ना होखे. तहरा आवहीं के पड़ी. हम इन्तजार करेब, होली बीते के अन्तिम क्षण तक. जदि तू ना अइबऽ त समझ जा कि ऊ हमरा दिल के धड़कन के अन्तिम क्षण होई.
– तोहरे श्वेता….. अपना राहुल के श्वेता …. श्वेता राहुल.”
घरे बड़ चचेरा भाई के बियाह रहे. एही में सभे बहरा से आइल रहे. भइया आ भउजी रेणुकूट से आ हम पटना से पहुँचल रहलीं. घर हीत-नात से खचाखच भरल रहे. एह भीड़-भाड़ में भउजी के टाइम ना मिल पावल कि ऊ हमरा से बइठ के अस्थिर बतियावस. बाकिर एह चहल-पहल का बीच जब-जब उनकर नजर हमरा पर पड़ो त ऊ मुस्कुरा देस. ओह घरी हमरा कुछुओ बुझात ना रहे कि ऊ हमरा के देख-देख हँसत काहे बाड़ी. सोचनी, होई कवनो बात. हमरा पूछे के फुर्सतो त ना रहे. काम में बाझल रहीं आ घर में बइठला पर बड़का भइया के डाँटो सुने के त डर रहे कि सब साला घरघुसना हो गइलन सन. काम बा त जाके चुल्ही में बइठल बाड़न स.
बियाह बीत गइल आ हम पटना वापस लवटे खातिर तइयार हो गइनी. गाँव से अतना जल्दी आवे के त मन ना करत रहे बाकिर दूइये दिन बाद एम॰एससी॰ के परीक्षा रहे. एह से आवल जरूरिए रहे.
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“आरे, एगो राज के बात त बतइबे ना कइनी. राजे ना, भगवान के महान किरिपा. तहार बाबूजी रामराज पार्टी के नेता हउवन नू. रेणुकूट (उ.प्र.) में बिड़लाके फैक्टरी मात्र एके बेर बन्द भइल रहे आ ओकरा के बन्द करावे के श्रेय तहरा बाबूजिए के बा नू. जानतारऽ, ई सब हमरा कइसे पता चलल. एक दिन तहार ऊ फोटो जवना में तू अपना बाबूजी का साथे बाड़ऽ, हमरा बाबूजी के हाथे लाग गइल. बाबूजी फोटो देखते कहले कि आरे ई त कृष्णदेव भाई के फोटो हऽ. ओकरा बाद ऊ हमरा से फोटो के बारे में पूछलन त हम बता दिहनी कि हमरा एगो बहुत बढ़िया दोस्त के हऽ. तब तक हमार बाबूजी अपना अतीत में खो चुकल रहले. ऊ बतावे लगले कि “हम आ कृष्णदेव भाई दूनो आदमी एके साथे जे॰पी॰ आन्दोलन में जेल में रहनी जा.” रिहन्द बाँध के एगो ममिला में जब हमार बाबूजी के फअसा दिहल गइल रहे त पता ना के तरी-के तरी तहरे बाबूजी हमरा बाबूजी के जान बचवले. हमार आ तहार बाबूजी बहुत अच्छा दोस्त रहे लोग, जेकरा एक-दूसरा से मिले आज २०-२५ बरिस हो गइल. भगवान बड़ा कारसाज हउवन. ऊ आदमी के कब, कहाँ आ कइसे मिलवा दीहें, एकर कवनो पता नइखे. राहुल, हमनी दूनू के मिलन दू गो बूढ़ दोस्तन के दोस्ती के रिश्तेदारी में बदल दी. तू हँ कह द. हम बाबूजी से बात क लेब. देखऽ, हम होली में तहार इन्तजार करब. तूँ ना अइबऽ त बहुत पछतइबऽ. ….देखऽ, बसन्त आ रहल बा….. तूही त हमरा जीवन के बसन्त हउवऽ. तूहूँ आ जा. अगर तू ना आइबऽ त जिनिगी भर अपना के माफ ना कर सकब. हम जेतना तड़पल बानी, जेतना रोवल बानी…. हमार आह तहरा के जीवन भर चैन से जीये ना दी. …तू जरूर अइबऽ राहुल. …. जरूर अइबऽ. हमार विश्वास अमर बा. जे अमर बा, ओकर मौत ना होखे. तहरा आवहीं के पड़ी. हम इन्तजार करेब, होली बीते के अन्तिम क्षण तक. जदि तू ना अइबऽ त समझ जा कि ऊ हमरा दिल के धड़कन के अन्तिम क्षण होई.
– तोहरे श्वेता….. अपना राहुल के श्वेता …. श्वेता राहुल.”
घरे बड़ चचेरा भाई के बियाह रहे. एही में सभे बहरा से आइल रहे. भइया आ भउजी रेणुकूट से आ हम पटना से पहुँचल रहलीं. घर हीत-नात से खचाखच भरल रहे. एह भीड़-भाड़ में भउजी के टाइम ना मिल पावल कि ऊ हमरा से बइठ के अस्थिर बतियावस. बाकिर एह चहल-पहल का बीच जब-जब उनकर नजर हमरा पर पड़ो त ऊ मुस्कुरा देस. ओह घरी हमरा कुछुओ बुझात ना रहे कि ऊ हमरा के देख-देख हँसत काहे बाड़ी. सोचनी, होई कवनो बात. हमरा पूछे के फुर्सतो त ना रहे. काम में बाझल रहीं आ घर में बइठला पर बड़का भइया के डाँटो सुने के त डर रहे कि सब साला घरघुसना हो गइलन सन. काम बा त जाके चुल्ही में बइठल बाड़न स.
बियाह बीत गइल आ हम पटना वापस लवटे खातिर तइयार हो गइनी. गाँव से अतना जल्दी आवे के त मन ना करत रहे बाकिर दूइये दिन बाद एम॰एससी॰ के परीक्षा रहे. एह से आवल जरूरिए रहे.
चले का बेर भउजी बोलली,”ए जी, रउआ त बड़ लबजा बानी हम कई बेर कहले होखब कि कवनो ओइसन बात होई त हमरा से जरूर कहब …. छिपाइब मत. …आ “त ना भउजी, हम तहरा से छिपाइब भला.” …. आ सब बात गंगा जी लेखान पचा के रखले बानीं.”
“कवन बात भउजी” – हम चिहात पूछली. अभी भउजी कुछ बोलती कि माई दही पूड़ी लेले आ गइल आ हम दूइये चार कवर खइले होखब कि भइया चिचियाये लगले – “राहुल जल्दी करऽ, बस छूट जाई.”
हम सभकर गोड़ छू के घर से निकल गइनी.
धीरे-धीरे समय बीतल. ई चिट्ठी वाली बात सभका मालूम चल गइल. मालूम चलित कइसे ना…. मेहरारूअन का पेट में त कवनो बात ना पचे. खैर, चिन्ता के असल बात ई ना रहे …. असल बात त रहे भइया के चिट्ठी. भइया लिखले रहले कि “राहुल तोहार सब बात हमरा मालूम चल गइल बा. हमरे ना, माई, बाबूजी, मउसा-मउसी, बड़-छोट, लइका-जवान सभका पता चल गइल बा. एह में लजाये-शर्माये वाली कवनो बात नइखे. ई जिनिगी के सहज आ स्वाभाविक प्रक्रिया हऽ. एहसे तू श्वेता का बारे में विस्तार से लीखऽ आ अगर उनकर कवनो फोटो होखे त भेज द. आगे के कार्रवाई हमनी का सहर्ष पूरा करब जा. पत्रोत्तर का इन्तजार में, तोहार भइया ‌- मुकेश.”
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मनोज भावुक

@manoj_bhawuk

चले का बेर भउजी बोलली,”ए जी, रउआ त बड़ लबजा बानी हम कई बेर कहले होखब कि कवनो ओइसन बात होई त हमरा से जरूर कहब …. छिपाइब मत. …आ “त ना भउजी, हम तहरा से छिपाइब भला.” …. आ सब बात गंगा जी लेखान पचा के रखले बानीं.”
“कवन बात भउजी” – हम चिहात पूछली. अभी भउजी कुछ बोलती कि माई दही पूड़ी लेले आ गइल आ हम दूइये चार कवर खइले होखब कि भइया चिचियाये लगले – “राहुल जल्दी करऽ, बस छूट जाई.”
हम सभकर गोड़ छू के घर से निकल गइनी.
धीरे-धीरे समय बीतल. ई चिट्ठी वाली बात सभका मालूम चल गइल. मालूम चलित कइसे ना…. मेहरारूअन का पेट में त कवनो बात ना पचे. खैर, चिन्ता के असल बात ई ना रहे …. असल बात त रहे भइया के चिट्ठी. भइया लिखले रहले कि “राहुल तोहार सब बात हमरा मालूम चल गइल बा. हमरे ना, माई, बाबूजी, मउसा-मउसी, बड़-छोट, लइका-जवान सभका पता चल गइल बा. एह में लजाये-शर्माये वाली कवनो बात नइखे. ई जिनिगी के सहज आ स्वाभाविक प्रक्रिया हऽ. एहसे तू श्वेता का बारे में विस्तार से लीखऽ आ अगर उनकर कवनो फोटो होखे त भेज द. आगे के कार्रवाई हमनी का सहर्ष पूरा करब जा. पत्रोत्तर का इन्तजार में, तोहार भइया ‌- मुकेश.”
दिल में प्यार के बीया बोआ जब गइल.
प्रीत के तब फसल, लहलहइबे करी.
जब दिले तोहार, उनकर घर बन गइल.
तब भइया के चिट्ठी त अइबे करी.
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मनोज भावुक

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दिल में प्यार के बीया बोआ जब गइल.
प्रीत के तब फसल, लहलहइबे करी.
जब दिले तोहार, उनकर घर बन गइल.
तब भइया के चिट्ठी त अइबे करी.
“धत मर्दे, त एहमें चिन्ता के कवन बात बा. बजवा ना दऽ बाजा, एही साल. तनी हमहूँ भउजी के देख के जी जाईं. …. जा ए राहुल, हम ना जानत रहलीं कि तू अतना कठकरेजा बाड़ऽ. आरे भइया के चिट्ठी पढ़के त तहरा छव फीट धरती से ऊपर कूद जाये के चाहीं. आ तू बाड़ऽ कि तहरा चिट्ठी पढ़के खुशी ना भइल, अचरज भइल.”
” ना ए मनोज भाई, भइया के चिट्ठी पढ़के हमरा कवनो अचरज ना भइल काहे कि हम अपना घर के खुला माहौल से वाकिफ रहली. बाकिर का जवाब लिखीं भइया के. इहे चिन्ता लेस दीहलस. का ऊ आगे के प्रक्रिया …. आगे के कार्रवाई साँचहूँ पूरा कर पइहें ? … का हमार माई ई बर्दास्त कर पाई कि ओकर बहू हिन्दू ना मुसलमान लड़की हऽ जेकर असली नाम शबाना ह. आ अगर ऊ बर्दास्त कइयो ली, अपना बेटा खातिर, त का बेटा के इहे फरज ह कि ऊ अपना स्वार्थ खातिर अपना महतारी के एह बुढ़ापा में अइसन आत्मिक कष्ट देवे जवना में ऊ रूढ़िवादी समाज से टकरात टकरात दम तूड़ देव. ना-ना ई हमरा से ना हो सकी. हम सच्चाई ना उगिल सकब. हम भइया के लिख देब कि भइया तू जवन जानत बाड़ऽ, ऊ सब झूठ हऽ आ भउजी के जवन चिट्ठी हमरा अटैची में मिलल ऊ त एगो “कहानी के प्लाट” ह. देखिहऽ, कुछ दिन में कहानी छप के आ जाई.
“ठीक बा, भइया के त झूठ बोल के समुझा देब कि ऊ कहानी ह. बाकिर अपना मन के कइसे समुझाइब. हम कइसे भुला पाइब शबाना के ऊ वादा कि “राहुल, देखऽ हमार माई एगो डाक्टर होइयो के बड़ी कड़ियल आ कट्टर धार्मिक भावना वाली महिला हियऽ. तू हमरा घर में राहुल बनके त ना चल सकेलऽ. एह से तू हमरा खातिर आपन एगो आउर नाम रख लऽ.” आ फेर उहे अपना पसन्द से हमरा खातिर एगो नया नाम चुनली – मु॰सरफराज खाँ.
ओही घरी चट से हमहूँ उनका के एगो नया नाम दे दीहलीं – श्वेता.
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मनोज भावुक

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“धत मर्दे, त एहमें चिन्ता के कवन बात बा. बजवा ना दऽ बाजा, एही साल. तनी हमहूँ भउजी के देख के जी जाईं. …. जा ए राहुल, हम ना जानत रहलीं कि तू अतना कठकरेजा बाड़ऽ. आरे भइया के चिट्ठी पढ़के त तहरा छव फीट धरती से ऊपर कूद जाये के चाहीं. आ तू बाड़ऽ कि तहरा चिट्ठी पढ़के खुशी ना भइल, अचरज भइल.”
” ना ए मनोज भाई, भइया के चिट्ठी पढ़के हमरा कवनो अचरज ना भइल काहे कि हम अपना घर के खुला माहौल से वाकिफ रहली. बाकिर का जवाब लिखीं भइया के. इहे चिन्ता लेस दीहलस. का ऊ आगे के प्रक्रिया …. आगे के कार्रवाई साँचहूँ पूरा कर पइहें ? … का हमार माई ई बर्दास्त कर पाई कि ओकर बहू हिन्दू ना मुसलमान लड़की हऽ जेकर असली नाम शबाना ह. आ अगर ऊ बर्दास्त कइयो ली, अपना बेटा खातिर, त का बेटा के इहे फरज ह कि ऊ अपना स्वार्थ खातिर अपना महतारी के एह बुढ़ापा में अइसन आत्मिक कष्ट देवे जवना में ऊ रूढ़िवादी समाज से टकरात टकरात दम तूड़ देव. ना-ना ई हमरा से ना हो सकी. हम सच्चाई ना उगिल सकब. हम भइया के लिख देब कि भइया तू जवन जानत बाड़ऽ, ऊ सब झूठ हऽ आ भउजी के जवन चिट्ठी हमरा अटैची में मिलल ऊ त एगो “कहानी के प्लाट” ह. देखिहऽ, कुछ दिन में कहानी छप के आ जाई.
“ठीक बा, भइया के त झूठ बोल के समुझा देब कि ऊ कहानी ह. बाकिर अपना मन के कइसे समुझाइब. हम कइसे भुला पाइब शबाना के ऊ वादा कि “राहुल, देखऽ हमार माई एगो डाक्टर होइयो के बड़ी कड़ियल आ कट्टर धार्मिक भावना वाली महिला हियऽ. तू हमरा घर में राहुल बनके त ना चल सकेलऽ. एह से तू हमरा खातिर आपन एगो आउर नाम रख लऽ.” आ फेर उहे अपना पसन्द से हमरा खातिर एगो नया नाम चुनली – मु॰सरफराज खाँ.
ओही घरी चट से हमहूँ उनका के एगो नया नाम दे दीहलीं – श्वेता.
एकरा बाद हम सरफराज बनिके उनका घरे जाईं आ ऊ श्वेता बनके हमरा से मिलस. एकरा चलते बहुते मुसलमान हमार दुश्मनो बनि गइले जवना के परिणाम ई भइल कि हमरा अपना सुरक्षा खातिर बरोबरे अवैध हथियार राखे के पड़े.
एकदिन अचानके पास के थाना के गाड़ी आ गइल, कॉलेज में इन्सपेक्शन खातिर. ओह घरी हम क्लास रूम में रहलीं आ श्वेता कॉलेज के लाइब्रेरी से किताब इसु करवा के आवत रहली. तले उनकर नजर हमरा क्लास रूम के ओर आवत पुलिस के समूह पर पड़ल. ऊ काँप उठली आगे के घटना के कल्पना पर. बाकिर चेतना शून्य ना भइली. उनकर विवेक उनका के हिम्मत देलस आ बड़ी तेजी से हमरा पास अइली आ दुपट्टा फइला के फुसफुसा के बोलली – “राहुल दुपट्टा में हथियार डाल द, बाहर पुलिस”. हम दुपट्टा में हथियार डाल देनी आ ऊ धीरे से अपना जगहा पर जाके बइठ गइली.
पुलिस के दल सभ लइकन के चेक करे लागल. हमार दुश्मन मुस्की काटे लगले. सोचले, आज त सब हीरोबाजी निकलिये जाई, बाकिर ओह गदहन के का पता कि प्यार में कतना ताकत होला. अइसन-अइसन छोट जुर्म त दुपट्टे में लुका जाला. ….. पुलिस हमरा पॉकेट में हाथ डललस. कुछ ना भेंटाइल. ऊ निराश होके आगे बढ़ गइल. हमार नजर श्वेता पर गइल. ऊ कनखी मार देली.
प्यार आउर गहरा गइल. …. दिल के नदी में बाढ़ आ गइल बाकिर मर्यादा के बाँध ना टूटल.
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मनोज भावुक

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एकरा बाद हम सरफराज बनिके उनका घरे जाईं आ ऊ श्वेता बनके हमरा से मिलस. एकरा चलते बहुते मुसलमान हमार दुश्मनो बनि गइले जवना के परिणाम ई भइल कि हमरा अपना सुरक्षा खातिर बरोबरे अवैध हथियार राखे के पड़े.
एकदिन अचानके पास के थाना के गाड़ी आ गइल, कॉलेज में इन्सपेक्शन खातिर. ओह घरी हम क्लास रूम में रहलीं आ श्वेता कॉलेज के लाइब्रेरी से किताब इसु करवा के आवत रहली. तले उनकर नजर हमरा क्लास रूम के ओर आवत पुलिस के समूह पर पड़ल. ऊ काँप उठली आगे के घटना के कल्पना पर. बाकिर चेतना शून्य ना भइली. उनकर विवेक उनका के हिम्मत देलस आ बड़ी तेजी से हमरा पास अइली आ दुपट्टा फइला के फुसफुसा के बोलली – “राहुल दुपट्टा में हथियार डाल द, बाहर पुलिस”. हम दुपट्टा में हथियार डाल देनी आ ऊ धीरे से अपना जगहा पर जाके बइठ गइली.
पुलिस के दल सभ लइकन के चेक करे लागल. हमार दुश्मन मुस्की काटे लगले. सोचले, आज त सब हीरोबाजी निकलिये जाई, बाकिर ओह गदहन के का पता कि प्यार में कतना ताकत होला. अइसन-अइसन छोट जुर्म त दुपट्टे में लुका जाला. ….. पुलिस हमरा पॉकेट में हाथ डललस. कुछ ना भेंटाइल. ऊ निराश होके आगे बढ़ गइल. हमार नजर श्वेता पर गइल. ऊ कनखी मार देली.
प्यार आउर गहरा गइल. …. दिल के नदी में बाढ़ आ गइल बाकिर मर्यादा के बाँध ना टूटल.
हमनी दूनो जानत रहलीं कि हमनी केतनो नजदीक आ जाईं, एक ना हो पाइब. एक होखे के मतलब बा, दू गो परिवार के विनाश आ प्यार के काम विनाश कइल ना ह … तूड़ल ना ह. निर्माण कइल ह …. जोड़ल ह. एकरा खातिर ऊ भले टूट जाव. प्यार करे वाला भले बर्बाद हो जाव. …. एही से शुरूए से हमनी दूनों सचेत रहलीं, एगो सीमा के भीतर. एह जवानी का दहलीज पर भी हमनी कबो बहकलीं ना. कानपुर छोड़ला का बाद त हम एगो चिट्ठियो ना लिखनी, उनका के भूला जाये के कोशिश में. बाकिर अचानके पाँच बरिस का बाद मिलल उनकर चिट्ठी हमरा के फेर से बेचैन क देलस. हम फेर ओही आग में धधके लगनी, जवना में पाँच बरिस पहिले धधकत रहीं. एक‌-एक दृश्य दिमाग में नाचे लागल. दिमाग के नस-नस फाटे लागल. मन जिनगी के बीतल पन्ना उलटे लागल.
सावन के सोमार …. साँझ के बेरा आ टिप-टिप बरखा. हॉस्टल के सब लइका सिनेमा देखे गइल रहलन स. एगो हमहीं बाँच गइल रहनीं. सोचनी कि आज डट के पढ़ाई करब, बाकिर ओकनी के गइला का बाद, का जाने काहे हमार मन कइसन-कइसन दो होखे लागल. भीतर बहुत अशान्ति बुझाइल त बिड़ला मन्दिर चल देहनी, उहाँ पहुँचनी त देखनी कि मन्दिर लइकियन आ मेहरारूअन से खचाखच भरल बा. हमरा ई ना बुझात रहे कि आज मेहरारूअन के अतना भीड़ काहे बा? तलहीं हमार नजर हरियर साड़ी पेन्हले आ हरियरे बिन्दी लगवले, …. गजब के चुम्बकीय आकर्षण वाली एगो दिव्यांगना पर गइल. … आरे ई त शबाना हई. माने कि हमार श्वेता. ऊ मन्दिर से पूजा क के निकलत रहलीं. हम धीरे से उनका पीछा हो गइली आ पीछे पीछे चले लगनी, ऊ बहरा पानी के झरना के पास के घास के मैदान पर बइठ के अपना सखियन के इन्तजार करे लगली. हम नजर बचा के धीरे से उनका पीछा बइठ गइलीं आ फेर अपना दूनो हथेली से उनकर आँख मूद देलीं. छन भर खातिर ऊ चिहुँकली आ फेर बोले लगली – “ए सखी छोड़ऽ ना … ए गीता छोड़ऽ, ए सावित्री देखऽ ठीक ना होई …. तू बड़ी तंग करेलू ..अब लड़ाई हो जाई.”
“हो ना जाव लड़ाई, ए सखी! शुरू करऽ वार …” बोलत हम आपन हाथ हटा लेहनी. ऊ हमरा के देख के अवाक रह गइली. लाजे नजर झुक गइल. धीरे से होठ काटत बोलली – “धत छलिया कहीं का.” आ फेर प्यार के बतकही शुरू हो गइल. सखी लोग उनका के हमरा संगे देख के टरक गइल.
ऊ बोलली, हम सखी लोग का साथे सोमारी करे आइल रहनी हँ. हमार माथा ठनकल … शबाना आ सोमारी. हम कहलीं – सोमारी त हिन्दू लोग में होला. उनकर चेहरा तन गइल आ आँख हमरा आँख पर गड़ गइल. ऊ बोलली, प्यार करे वाला ना हिन्दू होला ना मुसलमान. आ दोसर बात ई तू काहे भुला जालऽ कि अगर हमार जनम देबे वाला माई हमरा के शबनम कह के बोलावेले त जिनिगी देबे वाला एगो दोस्त श्वेता कहके भी बुलावेला. हम मने मन कहनी, श्वेता! हमरा प्रति तोहार जे भाव बा, भगवान हमरा के ओह लायक बनावस.
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मनोज भावुक

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हमनी दूनो जानत रहलीं कि हमनी केतनो नजदीक आ जाईं, एक ना हो पाइब. एक होखे के मतलब बा, दू गो परिवार के विनाश आ प्यार के काम विनाश कइल ना ह … तूड़ल ना ह. निर्माण कइल ह …. जोड़ल ह. एकरा खातिर ऊ भले टूट जाव. प्यार करे वाला भले बर्बाद हो जाव. …. एही से शुरूए से हमनी दूनों सचेत रहलीं, एगो सीमा के भीतर. एह जवानी का दहलीज पर भी हमनी कबो बहकलीं ना. कानपुर छोड़ला का बाद त हम एगो चिट्ठियो ना लिखनी, उनका के भूला जाये के कोशिश में. बाकिर अचानके पाँच बरिस का बाद मिलल उनकर चिट्ठी हमरा के फेर से बेचैन क देलस. हम फेर ओही आग में धधके लगनी, जवना में पाँच बरिस पहिले धधकत रहीं. एक‌-एक दृश्य दिमाग में नाचे लागल. दिमाग के नस-नस फाटे लागल. मन जिनगी के बीतल पन्ना उलटे लागल.
सावन के सोमार …. साँझ के बेरा आ टिप-टिप बरखा. हॉस्टल के सब लइका सिनेमा देखे गइल रहलन स. एगो हमहीं बाँच गइल रहनीं. सोचनी कि आज डट के पढ़ाई करब, बाकिर ओकनी के गइला का बाद, का जाने काहे हमार मन कइसन-कइसन दो होखे लागल. भीतर बहुत अशान्ति बुझाइल त बिड़ला मन्दिर चल देहनी, उहाँ पहुँचनी त देखनी कि मन्दिर लइकियन आ मेहरारूअन से खचाखच भरल बा. हमरा ई ना बुझात रहे कि आज मेहरारूअन के अतना भीड़ काहे बा? तलहीं हमार नजर हरियर साड़ी पेन्हले आ हरियरे बिन्दी लगवले, …. गजब के चुम्बकीय आकर्षण वाली एगो दिव्यांगना पर गइल. … आरे ई त शबाना हई. माने कि हमार श्वेता. ऊ मन्दिर से पूजा क के निकलत रहलीं. हम धीरे से उनका पीछा हो गइली आ पीछे पीछे चले लगनी, ऊ बहरा पानी के झरना के पास के घास के मैदान पर बइठ के अपना सखियन के इन्तजार करे लगली. हम नजर बचा के धीरे से उनका पीछा बइठ गइलीं आ फेर अपना दूनो हथेली से उनकर आँख मूद देलीं. छन भर खातिर ऊ चिहुँकली आ फेर बोले लगली – “ए सखी छोड़ऽ ना … ए गीता छोड़ऽ, ए सावित्री देखऽ ठीक ना होई …. तू बड़ी तंग करेलू ..अब लड़ाई हो जाई.”
“हो ना जाव लड़ाई, ए सखी! शुरू करऽ वार …” बोलत हम आपन हाथ हटा लेहनी. ऊ हमरा के देख के अवाक रह गइली. लाजे नजर झुक गइल. धीरे से होठ काटत बोलली – “धत छलिया कहीं का.” आ फेर प्यार के बतकही शुरू हो गइल. सखी लोग उनका के हमरा संगे देख के टरक गइल.
ऊ बोलली, हम सखी लोग का साथे सोमारी करे आइल रहनी हँ. हमार माथा ठनकल … शबाना आ सोमारी. हम कहलीं – सोमारी त हिन्दू लोग में होला. उनकर चेहरा तन गइल आ आँख हमरा आँख पर गड़ गइल. ऊ बोलली, प्यार करे वाला ना हिन्दू होला ना मुसलमान. आ दोसर बात ई तू काहे भुला जालऽ कि अगर हमार जनम देबे वाला माई हमरा के शबनम कह के बोलावेले त जिनिगी देबे वाला एगो दोस्त श्वेता कहके भी बुलावेला. हम मने मन कहनी, श्वेता! हमरा प्रति तोहार जे भाव बा, भगवान हमरा के ओह लायक बनावस.
अन्हार बढ़े लागल. हम बोलनी , श्वेता, घरे चलऽ, अन्हार बढ़ल जाता. थोड़े देर ऊ चुप रहली. आस-पास नजर दउड़वली आ फेर हमरा आँख में आँख डाल के बोलली, अन्हार बढ़ल जाता ओसे का. अँजोर त हमरा साथे बा. श्वेता के जिनिगी के अन्हरिया काटे खातिर राहुल के दिव्य प्रकाश कम नइखे.
तलहीं हमरा कमरा के बिजली गुल हो गइल. हमार ध्यान टूटल. हम वर्तमान में वापस लवट अइलीं, मन पागल लेखान हो गइल. अनायासे कादो कादो बके लागल. …हँ …हँ श्वेता …. बिल्कुल ठीक…. राहुल के दिव्य प्रकाश … देखऽ, अन्हार हो गइल. चिराग तरे अन्धेरा …. आग लागल बा, हमरा देह में …. हम धधकत बानी … ओही से प्रकाश निकलत बा…. दिव्य प्रकाश.
हम उनका से मिले खातिर व्यग्र हो गइलीं. चिट्ठी में ऊ हमरा के होली पर बोलवले रहली. हम समझ गइलीं, ई होली ना ईद पर के बोलावा हऽ. ई कुल्हि हमनी के कोड वर्ड ह.
ईद में हम कानपुर गइबो कइनी बाकी उनका घरे ना गइनी. फोन क के उनका के मोतीझील में बोला लिहनी. जब ऊ अइली त हम पूछनीं, “का हो, हमार बाबूजी त तहरा बाबूजी के लँगोटिया इयार हउवन.” पहिले त उ हँसली आ फेर फफक के रो पड़ली. बोलली – “ना, इ झूठ ह … हमार कल्पना ह. तोहरा कठोर दिल के पिघलावे खातिर …. अइसन कठोर जे पाँच बरिस ले पातियो ना लिखल, ओकरे के झकझोरे खातिर, एह झूठ के सहारा लेके, चिट्ठी के मार्मिक बनवलीं कि एहू से तू आ जा.”
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अन्हार बढ़े लागल. हम बोलनी , श्वेता, घरे चलऽ, अन्हार बढ़ल जाता. थोड़े देर ऊ चुप रहली. आस-पास नजर दउड़वली आ फेर हमरा आँख में आँख डाल के बोलली, अन्हार बढ़ल जाता ओसे का. अँजोर त हमरा साथे बा. श्वेता के जिनिगी के अन्हरिया काटे खातिर राहुल के दिव्य प्रकाश कम नइखे.
तलहीं हमरा कमरा के बिजली गुल हो गइल. हमार ध्यान टूटल. हम वर्तमान में वापस लवट अइलीं, मन पागल लेखान हो गइल. अनायासे कादो कादो बके लागल. …हँ …हँ श्वेता …. बिल्कुल ठीक…. राहुल के दिव्य प्रकाश … देखऽ, अन्हार हो गइल. चिराग तरे अन्धेरा …. आग लागल बा, हमरा देह में …. हम धधकत बानी … ओही से प्रकाश निकलत बा…. दिव्य प्रकाश.
हम उनका से मिले खातिर व्यग्र हो गइलीं. चिट्ठी में ऊ हमरा के होली पर बोलवले रहली. हम समझ गइलीं, ई होली ना ईद पर के बोलावा हऽ. ई कुल्हि हमनी के कोड वर्ड ह.
ईद में हम कानपुर गइबो कइनी बाकी उनका घरे ना गइनी. फोन क के उनका के मोतीझील में बोला लिहनी. जब ऊ अइली त हम पूछनीं, “का हो, हमार बाबूजी त तहरा बाबूजी के लँगोटिया इयार हउवन.” पहिले त उ हँसली आ फेर फफक के रो पड़ली. बोलली – “ना, इ झूठ ह … हमार कल्पना ह. तोहरा कठोर दिल के पिघलावे खातिर …. अइसन कठोर जे पाँच बरिस ले पातियो ना लिखल, ओकरे के झकझोरे खातिर, एह झूठ के सहारा लेके, चिट्ठी के मार्मिक बनवलीं कि एहू से तू आ जा.”
“तब, तू बाजी त मार लिहलू. तोहार योजना त सफल हो गइल. हम हँसत बोलनी. तहरा हरमेशा मजाके लागल रहेला. जिनिगी के कभी गम्भीरत से ना सोचे लऽ”, ऊ रीझ के कहली.
आ हम फेर साचहूँ गम्भीर हो गइलीं. हमरा गम्भीरता के तूड़त ऊ बोलली – “खिसिया गइलऽ का. हम त अइसहीं कहलीं हँ.” हम कुछुओ ना बोलनी त ऊ फेर बोलली – “घरे ना चलबऽ ?”
“सरफराज खाँ बनिके कि राहुल बनिके” – हमरा मुँह से अनायासे निकल गइल. ऊ कुछ ना बोलली, चुप. ऊहो चुप, हमहूँ चुप. … चुप्पी…. सन्नाटा साँय-साँय जइसे हवा बहत बहत-बहत रुक गइल होखे. कवनो पतई हिलत ना रहे.
हमहीं पहल क के चुप्पी तुड़नी – “काहे हो ?”
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“तब, तू बाजी त मार लिहलू. तोहार योजना त सफल हो गइल. हम हँसत बोलनी. तहरा हरमेशा मजाके लागल रहेला. जिनिगी के कभी गम्भीरत से ना सोचे लऽ”, ऊ रीझ के कहली.
आ हम फेर साचहूँ गम्भीर हो गइलीं. हमरा गम्भीरता के तूड़त ऊ बोलली – “खिसिया गइलऽ का. हम त अइसहीं कहलीं हँ.” हम कुछुओ ना बोलनी त ऊ फेर बोलली – “घरे ना चलबऽ ?”
“सरफराज खाँ बनिके कि राहुल बनिके” – हमरा मुँह से अनायासे निकल गइल. ऊ कुछ ना बोलली, चुप. ऊहो चुप, हमहूँ चुप. … चुप्पी…. सन्नाटा साँय-साँय जइसे हवा बहत बहत-बहत रुक गइल होखे. कवनो पतई हिलत ना रहे.
हमहीं पहल क के चुप्पी तुड़नी – “काहे हो ?”
ऊ भरि-भरि आँखि लोर लेले बोलली – “राहुल, दुनिया में बहुते अइसन अद्भुत आ आकर्षक चीज बा, जवना के निर्माण खाली देखे खातिर भइल बा, ओकरा के अपनावल नइखे जा सकत. हर “प्रिय” आपन ना हो पावे आ जे आपन ना हो पावे आ प्रिय होखे …ऊ “पूज्य” हो जाला….उहे ललक हमरा के विवश कइलस चिट्ठी लिखे खातिर – अइसन चिट्ठी जवन तोहरा के विवश कइलस इहवां आवे खातिर. ….आखिर हमार साध पूरा हो गइल. तोहार दर्शन हो गइल. हमरा ओरि देखऽ हम तोहरा के जी भरके देखे के चाहत बानी. जवना चीज के अपनावल नइखे जा सकत, ओकरा के जी भर के देखहीं के पड़ेला. …. हम केकर दोष दीं….ए रूढ़िवादी समाज के …. अपना दुर्भाग्य के … आ कि माई खातिर बेटी के कर्तव्य के… हँ राहुल हँ …हमार माई त कहिये से सरफराज के आपन दामाद मान चुकल बिया. जब ओकरा ई पता चलल रहे कि सरफराज हरमेशा खातिर कानपुर छोड़ देले बाड़न आ उनकर कवनो पता ठेकान हमरा पास नइखे, त ऊ बड़ा दुखी भइल.
“बाकिर उहे माई जब ई जानी कि ओकर दामाद मुसलमान ना.. हिन्दू हउवन त ओकरा प का गुजरी. ऊ हिन्दू के त फूटलो आँखिन ना देख सकेले आ जब से बाबरी मस्जिद ढहल, तब से त आउरो ना. एमें रिश्ता के बात सोचल त…”
“श्वेता, हम तोहार स्थिति समुझत बानी. तू रोअ मत. देखऽ आजु ले हमनी दोस्त बनके रहल बानी आ जिनिगी भर रहब. एमें बियाह के सवाले कहाँ उठत बा. आवऽ हमनी के किरिया खा लेवे के कि दोसरा के होइयो के हमनी का बीच क डोर कबहूँ टूटी ना.” – हम उनका कन्धापर हाथ ध के बोलनी.
ऊ हमरा से लिपटा के सुसुके लगली. उनका दिल के दरद आँख का राहे छलछला के हमरा छाती पर टपकल आ हमरा सीना में लागल आग के ताप से भाप बनके उड़ गइल. … दिल में जोर से एगो तूफान उठल. आग लहोक ले लेलस. बुझाइल जे सामाजिक रूढ़िवादिता के महल जर के राख हो गइल आ हमनीं एक हो गइलीं. तलहीं ओह राख में दू गो परिवार के ढेर लोग के लाश लउकल. हम ठंढा पड़ गइलीं आ पटना वापस लवट अइलीं.
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मनोज भावुक

@manoj_bhawuk

ऊ भरि-भरि आँखि लोर लेले बोलली – “राहुल, दुनिया में बहुते अइसन अद्भुत आ आकर्षक चीज बा, जवना के निर्माण खाली देखे खातिर भइल बा, ओकरा के अपनावल नइखे जा सकत. हर “प्रिय” आपन ना हो पावे आ जे आपन ना हो पावे आ प्रिय होखे …ऊ “पूज्य” हो जाला….उहे ललक हमरा के विवश कइलस चिट्ठी लिखे खातिर – अइसन चिट्ठी जवन तोहरा के विवश कइलस इहवां आवे खातिर. ….आखिर हमार साध पूरा हो गइल. तोहार दर्शन हो गइल. हमरा ओरि देखऽ हम तोहरा के जी भरके देखे के चाहत बानी. जवना चीज के अपनावल नइखे जा सकत, ओकरा के जी भर के देखहीं के पड़ेला. …. हम केकर दोष दीं….ए रूढ़िवादी समाज के …. अपना दुर्भाग्य के … आ कि माई खातिर बेटी के कर्तव्य के… हँ राहुल हँ …हमार माई त कहिये से सरफराज के आपन दामाद मान चुकल बिया. जब ओकरा ई पता चलल रहे कि सरफराज हरमेशा खातिर कानपुर छोड़ देले बाड़न आ उनकर कवनो पता ठेकान हमरा पास नइखे, त ऊ बड़ा दुखी भइल.
“बाकिर उहे माई जब ई जानी कि ओकर दामाद मुसलमान ना.. हिन्दू हउवन त ओकरा प का गुजरी. ऊ हिन्दू के त फूटलो आँखिन ना देख सकेले आ जब से बाबरी मस्जिद ढहल, तब से त आउरो ना. एमें रिश्ता के बात सोचल त…”
“श्वेता, हम तोहार स्थिति समुझत बानी. तू रोअ मत. देखऽ आजु ले हमनी दोस्त बनके रहल बानी आ जिनिगी भर रहब. एमें बियाह के सवाले कहाँ उठत बा. आवऽ हमनी के किरिया खा लेवे के कि दोसरा के होइयो के हमनी का बीच क डोर कबहूँ टूटी ना.” – हम उनका कन्धापर हाथ ध के बोलनी.
ऊ हमरा से लिपटा के सुसुके लगली. उनका दिल के दरद आँख का राहे छलछला के हमरा छाती पर टपकल आ हमरा सीना में लागल आग के ताप से भाप बनके उड़ गइल. … दिल में जोर से एगो तूफान उठल. आग लहोक ले लेलस. बुझाइल जे सामाजिक रूढ़िवादिता के महल जर के राख हो गइल आ हमनीं एक हो गइलीं. तलहीं ओह राख में दू गो परिवार के ढेर लोग के लाश लउकल. हम ठंढा पड़ गइलीं आ पटना वापस लवट अइलीं.
एह तरी मिले जुले के, फोन पर बात करे के आ चिट्ठी लिखे के सिलसिला फेर शुरू हो गइल. बाकिर बीच में जवन बियाह के प्रश्न त्रिशंकु लेखान लटकत रहे, ऊ हरमेशा खातिर खतम हो गइल रहे. हम ऐ प्रश्न से मुक्त हो गइल रहनी. बाकिर भइया के चिट्ठी पढ़ के हम भावुक ना भइनीं, बलुक पहिले से ज्यादा कठोर बन गइनी.
जिनिगी के दुख-सुख के थपेड़न के सहे खातिर कठोर त बनहीं के पड़ी. यथार्थ कठोर बा, धरती कठोर बिया, त दिल के कठोर त बनावहीं के पड़ी, ना त भावुक बनि के एह कठोर जिनिगी के सफर कव घरी तय कइल जा सकेला ?
त ठीक बा. हम भइया के चिट्ठी के जवाब लिख देब कि भइया हमरा अटैची के चिट्ठी, जवन भउजी के मिलल, उ हकीकत ना ह … एगो कहानी के प्लॉट हऽ.
बोलत बोलत राहुल के गला रूँध गइल. उनकर आवाज बन्द होखे लागल. नाड़ी के गति धीरे-धीरे शून्य का ओर बढ़े लागल. फेर निष्प्राण होके केने दो लापता हो गइल.
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मनोज भावुक

@manoj_bhawuk

एह तरी मिले जुले के, फोन पर बात करे के आ चिट्ठी लिखे के सिलसिला फेर शुरू हो गइल. बाकिर बीच में जवन बियाह के प्रश्न त्रिशंकु लेखान लटकत रहे, ऊ हरमेशा खातिर खतम हो गइल रहे. हम ऐ प्रश्न से मुक्त हो गइल रहनी. बाकिर भइया के चिट्ठी पढ़ के हम भावुक ना भइनीं, बलुक पहिले से ज्यादा कठोर बन गइनी.
जिनिगी के दुख-सुख के थपेड़न के सहे खातिर कठोर त बनहीं के पड़ी. यथार्थ कठोर बा, धरती कठोर बिया, त दिल के कठोर त बनावहीं के पड़ी, ना त भावुक बनि के एह कठोर जिनिगी के सफर कव घरी तय कइल जा सकेला ?
त ठीक बा. हम भइया के चिट्ठी के जवाब लिख देब कि भइया हमरा अटैची के चिट्ठी, जवन भउजी के मिलल, उ हकीकत ना ह … एगो कहानी के प्लॉट हऽ.
बोलत बोलत राहुल के गला रूँध गइल. उनकर आवाज बन्द होखे लागल. नाड़ी के गति धीरे-धीरे शून्य का ओर बढ़े लागल. फेर निष्प्राण होके केने दो लापता हो गइल.
आरे, ई पलक झपकते का हो गइल ? इहाँ त केहू नइखे. फेर हम बतियावत केकरा से रहनी हँ ? …भूत से …देवाल से… ना-ना .. फेर केकरा से ? कहीं अपनहीं से त ना ? तब ई राहुल के हऽ ? आ हमहीं के हईं ? हमार दिमाग चक्कर काटे लागल. धरती आकाश सब घूमे लागल. बुझाइल जे राहुल केहू दोसर ना, हमरे आत्मा के दोसर नाम हऽ. हमरे छाया, हमरे प्राण के प्रतिरूप…. जे हमरा बीतला जिनिगी के व्यथा कथा सुनावत बा. हम ध्यान से सुने लगनी. आत्मा के धड़कन. धड़कन के स्वर. एकदम रोआइन. … फेर ठठा के हँसे आवाज, आ ओह हँसी में कुछ व्यंग भरल प्रश्न. बुझाइल जइसे केहू पूछत होखे, का हो मनोज कहानी के प्लॉट ह कि हकीकत के पोस्टमार्टम ?
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मनोज भावुक

@manoj_bhawuk

आरे, ई पलक झपकते का हो गइल ? इहाँ त केहू नइखे. फेर हम बतियावत केकरा से रहनी हँ ? …भूत से …देवाल से… ना-ना .. फेर केकरा से ? कहीं अपनहीं से त ना ? तब ई राहुल के हऽ ? आ हमहीं के हईं ? हमार दिमाग चक्कर काटे लागल. धरती आकाश सब घूमे लागल. बुझाइल जे राहुल केहू दोसर ना, हमरे आत्मा के दोसर नाम हऽ. हमरे छाया, हमरे प्राण के प्रतिरूप…. जे हमरा बीतला जिनिगी के व्यथा कथा सुनावत बा. हम ध्यान से सुने लगनी. आत्मा के धड़कन. धड़कन के स्वर. एकदम रोआइन. … फेर ठठा के हँसे आवाज, आ ओह हँसी में कुछ व्यंग भरल प्रश्न. बुझाइल जइसे केहू पूछत होखे, का हो मनोज कहानी के प्लॉट ह कि हकीकत के पोस्टमार्टम ?
रोज का तरे ओहू दिन इसकूल में पहुँचि के दस बरिस के मुनिया आपन सहेली लोगन के खुशखबरी देवे के ना भुलाइलि । ओइसे तऽ मुनिया के इसकूली नाम प्रेरणा हऽ बकिर घर में आ हित-नात के बीच इनकरा के लोग मुनिएँ बोलेला । मुनिया भिर रोज कऊनों न कऊनो खुशखबरी रहेला । जइसे आज हमरे बालकनी में एगो खूब सुन्नर उज्जर रंग के कबूतर आइल रहे या काल्हि हमरा छत पे एगो लाल रंग के सुग्गा आइल रहे । बकिर आज के खुशखबरी कुछ खास रहे मुनिया हँस-हँस के अपने एगो हमउम्र लइकी कृति के बतावत रहे- " जानती हो कृति न्अ...हमारे बालकनी के रोशनदान पर एक चिड़िया ने अपना घोंसला बनाया है और उसमें उसके दो प्यारे-प्यारे नन्हें बच्चे भी हैं । "
" सचमुच यार ।"
" और नहीं तो क्या...? मैं झूठ बोलती हूँ । "
" अरे नहीं यार...फिर मुझे कब ले चलेगी अपने घर । बड़े प्यारे लगते होंगे वे नन्हें-नन्हें बच्चे । "
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श्लेष अलंकार

@shlesh_alankaar

रोज का तरे ओहू दिन इसकूल में पहुँचि के दस बरिस के मुनिया आपन सहेली लोगन के खुशखबरी देवे के ना भुलाइलि । ओइसे तऽ मुनिया के इसकूली नाम प्रेरणा हऽ बकिर घर में आ हित-नात के बीच इनकरा के लोग मुनिएँ बोलेला । मुनिया भिर रोज कऊनों न कऊनो खुशखबरी रहेला । जइसे आज हमरे बालकनी में एगो खूब सुन्नर उज्जर रंग के कबूतर आइल रहे या काल्हि हमरा छत पे एगो लाल रंग के सुग्गा आइल रहे । बकिर आज के खुशखबरी कुछ खास रहे मुनिया हँस-हँस के अपने एगो हमउम्र लइकी कृति के बतावत रहे- " जानती हो कृति न्अ...हमारे बालकनी के रोशनदान पर एक चिड़िया ने अपना घोंसला बनाया है और उसमें उसके दो प्यारे-प्यारे नन्हें बच्चे भी हैं । "
" सचमुच यार ।"
" और नहीं तो क्या...? मैं झूठ बोलती हूँ । "
" अरे नहीं यार...फिर मुझे कब ले चलेगी अपने घर । बड़े प्यारे लगते होंगे वे नन्हें-नन्हें बच्चे । "
एक शर्त पर ले चलूँगी... तू मेरे लिए कैडबरी वाला चाकलेट लाएगी । "
ठीक है बाबा मैं तेरे लिए कैडबरी वाला चाकलेट लाऊंगी ।
" पक्का "
" हाँ पक्का ।"
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श्लेष अलंकार

@shlesh_alankaar

एक शर्त पर ले चलूँगी... तू मेरे लिए कैडबरी वाला चाकलेट लाएगी । "
ठीक है बाबा मैं तेरे लिए कैडबरी वाला चाकलेट लाऊंगी ।
" पक्का "
" हाँ पक्का ।"
तबे इसकूल के घंटी टन-टन बाजे लागेल आ लरिकन आपन-आपन कक्षा में जा के बइठि गइलें । मास्टर लोग आ गइल अऊर पढ़ाई शुरु। नियमित पढ़ाई के बाद छुट्टी भइला प मुनिया के घरे जाए के बड़ी जल्दी रहे, काहे से कि ओकर आँखि में ऊ चिरई के छोट-छोट गेदा-गेदी बेरि-बेरि लऊकत रहले । घरे चहुँपते मुनिया बस्ता फेंकि के बालकनी में आ गइलि अऊर खोता के निहारे लागलि । ऊ तनिक देर तक कऊनो आहट न पाके मायूस हो गइलि । आ मम्मी से पूँछे लागलि- " मम्मी-मम्मी, ई चिरई कहाँ गइल, एकर बच्चा लोग बोलत काहे नइखन ।"
अरे बेटा पहिले एहर अइबू , कपड़ा बदल के खाना-पानी खइबू कि चिरई के पीछे पड़ल रहबू... ओकरा भूख ना लागेला? ऊँहो खाना-पानी खाए कहईं गइल होई । "
"ओकरा भूख लागेला आ ओकर लरिकन के भूख न लागेला...?"
काहे न लागेला...पहिले ई बतावा तोहरा के खाना खियवले बिना हम खाना खाइला? "
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श्लेष अलंकार

@shlesh_alankaar

तबे इसकूल के घंटी टन-टन बाजे लागेल आ लरिकन आपन-आपन कक्षा में जा के बइठि गइलें । मास्टर लोग आ गइल अऊर पढ़ाई शुरु। नियमित पढ़ाई के बाद छुट्टी भइला प मुनिया के घरे जाए के बड़ी जल्दी रहे, काहे से कि ओकर आँखि में ऊ चिरई के छोट-छोट गेदा-गेदी बेरि-बेरि लऊकत रहले । घरे चहुँपते मुनिया बस्ता फेंकि के बालकनी में आ गइलि अऊर खोता के निहारे लागलि । ऊ तनिक देर तक कऊनो आहट न पाके मायूस हो गइलि । आ मम्मी से पूँछे लागलि- " मम्मी-मम्मी, ई चिरई कहाँ गइल, एकर बच्चा लोग बोलत काहे नइखन ।"
अरे बेटा पहिले एहर अइबू , कपड़ा बदल के खाना-पानी खइबू कि चिरई के पीछे पड़ल रहबू... ओकरा भूख ना लागेला? ऊँहो खाना-पानी खाए कहईं गइल होई । "
"ओकरा भूख लागेला आ ओकर लरिकन के भूख न लागेला...?"
काहे न लागेला...पहिले ई बतावा तोहरा के खाना खियवले बिना हम खाना खाइला? "
" ना...बिल्कुल ना ।"
" तब...! ऊहो अपने लइका लोगन के पहिले दाना चुगा के फिर भोजन के तलाश में निकल गइल बिआ।"
" अच्छा मम्मी ई बतावा ऊ बच्चा लोग बोलत काहे नाहीं बाड़े? "
अबहीं ऊ लोग आराम से सूतल बाड़े । अब्बै चिरई जब आई तऽ बोलिहें सन् । अब तू खाना खा लऽ। "
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श्लेष अलंकार

@shlesh_alankaar

" ना...बिल्कुल ना ।"
" तब...! ऊहो अपने लइका लोगन के पहिले दाना चुगा के फिर भोजन के तलाश में निकल गइल बिआ।"
" अच्छा मम्मी ई बतावा ऊ बच्चा लोग बोलत काहे नाहीं बाड़े? "
अबहीं ऊ लोग आराम से सूतल बाड़े । अब्बै चिरई जब आई तऽ बोलिहें सन् । अब तू खाना खा लऽ। "
" ना मम्मी ना, हम खाना ना खाएब जब तक ले चिरई ना आ जाई हम इहवें इंतजार करबि । "
थोड़ी देर में मम्मी कोऊनो काम में लागि गइली आ मुनिया उहवें बइठि के फिर खोता निहारे लागलि। कुछ देर बाद सचमुच चिरई आ गइल , आ ओकरा अऊते बच्चा लोग चू...चू...चू कइके खोता के बहरा झाके लगलन । मुनिया के खुशी के ठिकाना न रहल । मुनिया मने-मन अपने-आप के ओहि चिरई के बच्चन के जगह देखे लागलि ।
दिन गुजरे लागल मुनिया के रोज के इहे दिनचर्या रहे । इस्कूल से अइला के बाद जबतक ऊ चिड़िया के बच्चा लोगन के देखि ना लेवे, खाना ना खाए ।
ऊ अपना मुहल्ला के आ इसकूल के तकरीबन सब सहेलिन के चिरई से मिलवा चुकल रहली । धीरे-धीरे दीपावली नियरात रहे लोगन के घर में साफ-सफाई आ रंग रोगन के काम जोर पकड़त रहे । मुनिया के घर में भी चर्चा होखे लागल । मुनिया के मम्मी के मन त न रहे बकिर पापा चाहत रहलें कि ढेर दिन भइल घर के रंग-रोगन भइले असों ई काम होइ जास त ठीक रही। लइका लोग दीवार के एकदम गंदा क दिहले बाड़न । फिर का पूछे के रहल , दूसरा दिन दूगो आदमी घर में बाल्टी , ब्रश आ सीढ़ी ले के लाघ गइलन । एक हफ्ता काम भइला के बाद भितरी के पेंट के काम लगभग समाप्त हो गइल रहे, आज बहरी के दीवार अऊर बालकनी के लमर रहे ।
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श्लेष अलंकार

@shlesh_alankaar

" ना मम्मी ना, हम खाना ना खाएब जब तक ले चिरई ना आ जाई हम इहवें इंतजार करबि । "
थोड़ी देर में मम्मी कोऊनो काम में लागि गइली आ मुनिया उहवें बइठि के फिर खोता निहारे लागलि। कुछ देर बाद सचमुच चिरई आ गइल , आ ओकरा अऊते बच्चा लोग चू...चू...चू कइके खोता के बहरा झाके लगलन । मुनिया के खुशी के ठिकाना न रहल । मुनिया मने-मन अपने-आप के ओहि चिरई के बच्चन के जगह देखे लागलि ।
दिन गुजरे लागल मुनिया के रोज के इहे दिनचर्या रहे । इस्कूल से अइला के बाद जबतक ऊ चिड़िया के बच्चा लोगन के देखि ना लेवे, खाना ना खाए ।
ऊ अपना मुहल्ला के आ इसकूल के तकरीबन सब सहेलिन के चिरई से मिलवा चुकल रहली । धीरे-धीरे दीपावली नियरात रहे लोगन के घर में साफ-सफाई आ रंग रोगन के काम जोर पकड़त रहे । मुनिया के घर में भी चर्चा होखे लागल । मुनिया के मम्मी के मन त न रहे बकिर पापा चाहत रहलें कि ढेर दिन भइल घर के रंग-रोगन भइले असों ई काम होइ जास त ठीक रही। लइका लोग दीवार के एकदम गंदा क दिहले बाड़न । फिर का पूछे के रहल , दूसरा दिन दूगो आदमी घर में बाल्टी , ब्रश आ सीढ़ी ले के लाघ गइलन । एक हफ्ता काम भइला के बाद भितरी के पेंट के काम लगभग समाप्त हो गइल रहे, आज बहरी के दीवार अऊर बालकनी के लमर रहे ।
रोज का तरे आजो मुनिया इसकूल गइल रही बकिर आज उनकर मन पढ़ाई में ना लगत रहे । रहि-रहि के उनुका चिरई के इयाद आवत रहे । छुट्टी के घंटी लगते मुनिया सरपट घरे चहुँपि गइली। दरवाजा खुलते बस्ता फेंकि के सीधा बालकनी में दाखिल हो गइली । एकाएक बालकनी से बहुत दर्दनाक चीख सुनाई पड़े लागल । चीख सुनिके मम्मी दौड़ि के आ गइली।
" का भइल ए बेटा, काहे रोवऽताडू...चोट लागल हऽ , गिर गइलू? का भइल बतावऽ ना...?"
मुनिया पैर पटकि-पटकि के चिल्लात रहलि। बस एक बेरि रोशनदान का ओरि इशारा कइलसि- " मम्मी...! " चिरई के खोता का भइल?"
मम्मी के आँखि में छलछल लोर रहे। ऊ मुनिया के गोदी से चिपका लिहली अऊर एतने कहि पइली-
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श्लेष अलंकार

@shlesh_alankaar

रोज का तरे आजो मुनिया इसकूल गइल रही बकिर आज उनकर मन पढ़ाई में ना लगत रहे । रहि-रहि के उनुका चिरई के इयाद आवत रहे । छुट्टी के घंटी लगते मुनिया सरपट घरे चहुँपि गइली। दरवाजा खुलते बस्ता फेंकि के सीधा बालकनी में दाखिल हो गइली । एकाएक बालकनी से बहुत दर्दनाक चीख सुनाई पड़े लागल । चीख सुनिके मम्मी दौड़ि के आ गइली।
" का भइल ए बेटा, काहे रोवऽताडू...चोट लागल हऽ , गिर गइलू? का भइल बतावऽ ना...?"
मुनिया पैर पटकि-पटकि के चिल्लात रहलि। बस एक बेरि रोशनदान का ओरि इशारा कइलसि- " मम्मी...! " चिरई के खोता का भइल?"
मम्मी के आँखि में छलछल लोर रहे। ऊ मुनिया के गोदी से चिपका लिहली अऊर एतने कहि पइली-
" चिरई बड़ा जुलुम तू कइलू...
घर में खोता लगवलू ना । "
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श्लेष अलंकार

@shlesh_alankaar

" चिरई बड़ा जुलुम तू कइलू...
घर में खोता लगवलू ना । "
खेदारू के बिआह फूला संघे बड़ी धूमधाम से भइल। बिदाई के बेरा फूला के माई-बाप, भाई-भउजाई, चाचा-चाची सभे उदास रहे। फूला के सखी चमेलियो कम उदास ना रहली, बाकिर केहू का करित, बेटी के त एक दिन बहुरिया बनहिं के परेला। फूला के अकवारी में भर के चमेली एतना लोर बहवली कि भादवो सरमा गइल। भदवारी में त बरखा के बाद आसमान साफ हो जाला, बाकिर चमेली के आँखियन से ना बरखा ओरात रहे ना बादर।
बिदाई भइल, नवसे आ उनके घर के सभे बहुत निहाल रहे। येने कार में बहुरिया के साथे नवसे प्रेम रस में नहात रहलन, त ओने घर के मेहरारू समाज बहुरिया के इन्तजार में नाचत गावत रहे। बाकिर भगवान जी के मरज़ी के का कहल जा! ऊहाँ के त कुछ अउरिए मंजूर रहे!
बड़ी जोर आन्ही आइल, सड़क के दूनू बगल रहे बड़े बड़े पेड़, बीचे बीचे निकसत रहे बरातिन के काफिला। अचानक एगो पेड़ गिरल, टेक्सी में बइठल खेदारू के बाबू जी घाही हो गइलन। अब का होखो सभे उनके ले के अस्पताल पहुँचल। डाक्टर कहलन कि “गहीर चोट लागल बा, आपरेशन करे के पड़ी कम से कम पचास हजार के इन्तजाम करीं लोगिन।”
घरे त फूटल कउड़ी ना रहे, कहाँ से आइत पचास हजार! बड़ी घावला के बाद नेउर सेठ बियाज पर रूपया देबे के तइयार हो गइलन। शंकर के चीर-फार, दवा-दारू भइल, कुछ दिन में ऊ त ठीक हो गइलन। बाकिर पचास हजार के करजा कवनो रोग से कम त ना रहे।
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आकाश महेशपुरी

@aakash_maheshpuri

खेदारू के बिआह फूला संघे बड़ी धूमधाम से भइल। बिदाई के बेरा फूला के माई-बाप, भाई-भउजाई, चाचा-चाची सभे उदास रहे। फूला के सखी चमेलियो कम उदास ना रहली, बाकिर केहू का करित, बेटी के त एक दिन बहुरिया बनहिं के परेला। फूला के अकवारी में भर के चमेली एतना लोर बहवली कि भादवो सरमा गइल। भदवारी में त बरखा के बाद आसमान साफ हो जाला, बाकिर चमेली के आँखियन से ना बरखा ओरात रहे ना बादर।
बिदाई भइल, नवसे आ उनके घर के सभे बहुत निहाल रहे। येने कार में बहुरिया के साथे नवसे प्रेम रस में नहात रहलन, त ओने घर के मेहरारू समाज बहुरिया के इन्तजार में नाचत गावत रहे। बाकिर भगवान जी के मरज़ी के का कहल जा! ऊहाँ के त कुछ अउरिए मंजूर रहे!
बड़ी जोर आन्ही आइल, सड़क के दूनू बगल रहे बड़े बड़े पेड़, बीचे बीचे निकसत रहे बरातिन के काफिला। अचानक एगो पेड़ गिरल, टेक्सी में बइठल खेदारू के बाबू जी घाही हो गइलन। अब का होखो सभे उनके ले के अस्पताल पहुँचल। डाक्टर कहलन कि “गहीर चोट लागल बा, आपरेशन करे के पड़ी कम से कम पचास हजार के इन्तजाम करीं लोगिन।”
घरे त फूटल कउड़ी ना रहे, कहाँ से आइत पचास हजार! बड़ी घावला के बाद नेउर सेठ बियाज पर रूपया देबे के तइयार हो गइलन। शंकर के चीर-फार, दवा-दारू भइल, कुछ दिन में ऊ त ठीक हो गइलन। बाकिर पचास हजार के करजा कवनो रोग से कम त ना रहे।
खेदारू बेचारू का करतें! किरिया खा लिहलन कि “जबले हम करजा ना चुकाइब, अपना मेहरारू से देहिं ना छुआइब।”
खेदारू कमाये दिल्ली जात रहलन, उनकर मेहरारू बहुते उदास रहली। करिया बादर घेरले होखे, धान पानी बिन सूखत होखे, आन्ही आवे आ बादर उधिआ जा, बुनियो ना परे त डरेरा पर आस में बइठल किसान के जइसल बुझाला—कुछ अइसने हालत फूला के हो गइल। उनकी अँखियन से लोर झरे लागल।
खेदारू के जाते फूला के रोज ताना मिले लागल—“ये कुलच्छनी के आवते घर भिला गइल। ई मरियो जाइत त करेजा जुड़ाइत।” अउरियो का जाने कवन-कवन ताना सुत-उठ के मिले, बाकिर फूला सब कुछ चुपचाप सहत रहली।
खेदारू वैल्डिंग के काम सीख लीहले रहलन। महीना में दस-एगारे हजार बनिये जात रहे, हर महीना एक-दू हजार भेजियो देत रहलन। एही तरह तीन साल बीत गइल।
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आकाश महेशपुरी

@aakash_maheshpuri

खेदारू बेचारू का करतें! किरिया खा लिहलन कि “जबले हम करजा ना चुकाइब, अपना मेहरारू से देहिं ना छुआइब।”
खेदारू कमाये दिल्ली जात रहलन, उनकर मेहरारू बहुते उदास रहली। करिया बादर घेरले होखे, धान पानी बिन सूखत होखे, आन्ही आवे आ बादर उधिआ जा, बुनियो ना परे त डरेरा पर आस में बइठल किसान के जइसल बुझाला—कुछ अइसने हालत फूला के हो गइल। उनकी अँखियन से लोर झरे लागल।
खेदारू के जाते फूला के रोज ताना मिले लागल—“ये कुलच्छनी के आवते घर भिला गइल। ई मरियो जाइत त करेजा जुड़ाइत।” अउरियो का जाने कवन-कवन ताना सुत-उठ के मिले, बाकिर फूला सब कुछ चुपचाप सहत रहली।
खेदारू वैल्डिंग के काम सीख लीहले रहलन। महीना में दस-एगारे हजार बनिये जात रहे, हर महीना एक-दू हजार भेजियो देत रहलन। एही तरह तीन साल बीत गइल।
खेदारू कुछ पइसा जमा कर लिहलन। सोचलन—“अब घरे चले के चाहीं। फूला हमके देख के कितना खुश होई!”
भिनसारे ट्रेन पकड़ लिहलन। रास्ता में एगो आदमी से दोस्ती हो गइल। बात-चीत भइल।
“खइनी खइब?”
“खा लीं।”
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आकाश महेशपुरी

@aakash_maheshpuri

खेदारू कुछ पइसा जमा कर लिहलन। सोचलन—“अब घरे चले के चाहीं। फूला हमके देख के कितना खुश होई!”
भिनसारे ट्रेन पकड़ लिहलन। रास्ता में एगो आदमी से दोस्ती हो गइल। बात-चीत भइल।
“खइनी खइब?”
“खा लीं।”
खइनी में नशा मिलावल रहे। खेदारू बेहोश हो गइलन। ओ आदमी अटैची बदल के उतर गइल।
जब होश आइल, खेदारू के कुछ समझ ना पड़ल। घर पहुँच के अटैची खोललन—त ओह में किताब-कॉपी रहे, पैसा गायब!
सेठ तगादा करे आ गइल—“अब त पैसा दे द!”
खेदारू समझ गइलन कि अटैची बदल गइल बा।
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आकाश महेशपुरी

@aakash_maheshpuri

खइनी में नशा मिलावल रहे। खेदारू बेहोश हो गइलन। ओ आदमी अटैची बदल के उतर गइल।
जब होश आइल, खेदारू के कुछ समझ ना पड़ल। घर पहुँच के अटैची खोललन—त ओह में किताब-कॉपी रहे, पैसा गायब!
सेठ तगादा करे आ गइल—“अब त पैसा दे द!”
खेदारू समझ गइलन कि अटैची बदल गइल बा।
एही बीच उ आदमी (मोहन) के घर में ओकर मेहरारू चमेली अटैची खोल के देखली त लाखन रुपया आ फूला के फोटो मिलल। ऊ चिहा गइल—“अरे! ई त हमार सखी के अटैची ह!”
चमेली मोहन से कहलस—“ई पाप के कमाई बा। चल, लौटा के आ।”
मोहन पहिले हिचकिचाइल, बाकिर आखिर मान गइल।
दूनो जन अटैची ले के खेदारू के घर पहुँचलन।
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आकाश महेशपुरी

@aakash_maheshpuri

एही बीच उ आदमी (मोहन) के घर में ओकर मेहरारू चमेली अटैची खोल के देखली त लाखन रुपया आ फूला के फोटो मिलल। ऊ चिहा गइल—“अरे! ई त हमार सखी के अटैची ह!”
चमेली मोहन से कहलस—“ई पाप के कमाई बा। चल, लौटा के आ।”
मोहन पहिले हिचकिचाइल, बाकिर आखिर मान गइल।
दूनो जन अटैची ले के खेदारू के घर पहुँचलन।
खेदारू परेशान बइठल रहलन। जब मोहन अटैची लौटा दिहलस त उनका आँख में खुशी के आँसू आ गइल।
खेदारू तुरंत सेठ के सारा पैसा चुका दिहलन।
तीन साल के करजा उतर गइल।
अब खेदारू फूला के ओर देखलन… धीरे से ओकर गाल पर चिकोटी काट दिहलन। फूला लजा गइल। घर में हँसी गूँज उठल।
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आकाश महेशपुरी

@aakash_maheshpuri

खेदारू परेशान बइठल रहलन। जब मोहन अटैची लौटा दिहलस त उनका आँख में खुशी के आँसू आ गइल।
खेदारू तुरंत सेठ के सारा पैसा चुका दिहलन।
तीन साल के करजा उतर गइल।
अब खेदारू फूला के ओर देखलन… धीरे से ओकर गाल पर चिकोटी काट दिहलन। फूला लजा गइल। घर में हँसी गूँज उठल।
तीन साल के दूरी आज खत्म हो गइल।
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आकाश महेशपुरी

@aakash_maheshpuri

तीन साल के दूरी आज खत्म हो गइल।
जइसे ही लइका सवाल कइलस कि अतना बरिस से दुबई कमा तारऽ? का कइले बाड़ आजतक लेऽ? एको पइसा के आदमी बाड़ऽ? कमा के कुछ रखले बाड़ऽ? राजेश के मन बइठ गइल, लागल कि आजे धड़कन साथ छोड़ दी।
जइसे-तइसे खुद के सम्भाल पइलें,अउरी जिनगी के पचीस बरिस के हिसाब-किताब मे अझुरा गइलें।
बियाह के दुइए महीना बाद रिंकिया के माई के छोड़ के, अरब जाए के पड़ल रहे। मलिकाइन केतना कहली कि छोड़ दीं, रहे दीं, घरहीं कुछू करब। माई अतना कूल बात सुना देले रहे। इयाद बा, बाबू जी उ भर सफर कवनो चिठ्ठी के जवाब तकले ना देले रहलन। एगो मड़ई के घर आ दुआर पर एगो टूटल खटिया देख राजेश के बड़ा लाज लागे। उपर से बियाह मे लिहल कारजा। राजेशवा के झंकझोर के रख दिहलस। बेचारा नया-नचर मेहरारू छोड़ दुबई वापिस लौट गइल।
समय परवान चढ़ल। थावे वाली दुर्गा माई के कृपा भइल, हजरत निजामुद्दिन औलिया के रहमो-करम से, अंगना मे एगो लइका, एगो लइकी खेले लगलें। राजेश के मेहनत अउरी जिम्मेदारी दिन बा दिन अउरी बढ़े लागल। बहिन के बियाह, भाई के बियाह, घर बनावल, बेटा के पढ़ाई, बेटी के पढ़ाई फेर बेटी के बियाह जइसन काम,बेचारा के कबो साँसों लेबे के फुर्सत ना दिहलस।
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शम्स जमील

@shamsh_jamil

जइसे ही लइका सवाल कइलस कि अतना बरिस से दुबई कमा तारऽ? का कइले बाड़ आजतक लेऽ? एको पइसा के आदमी बाड़ऽ? कमा के कुछ रखले बाड़ऽ? राजेश के मन बइठ गइल, लागल कि आजे धड़कन साथ छोड़ दी।
जइसे-तइसे खुद के सम्भाल पइलें,अउरी जिनगी के पचीस बरिस के हिसाब-किताब मे अझुरा गइलें।
बियाह के दुइए महीना बाद रिंकिया के माई के छोड़ के, अरब जाए के पड़ल रहे। मलिकाइन केतना कहली कि छोड़ दीं, रहे दीं, घरहीं कुछू करब। माई अतना कूल बात सुना देले रहे। इयाद बा, बाबू जी उ भर सफर कवनो चिठ्ठी के जवाब तकले ना देले रहलन। एगो मड़ई के घर आ दुआर पर एगो टूटल खटिया देख राजेश के बड़ा लाज लागे। उपर से बियाह मे लिहल कारजा। राजेशवा के झंकझोर के रख दिहलस। बेचारा नया-नचर मेहरारू छोड़ दुबई वापिस लौट गइल।
समय परवान चढ़ल। थावे वाली दुर्गा माई के कृपा भइल, हजरत निजामुद्दिन औलिया के रहमो-करम से, अंगना मे एगो लइका, एगो लइकी खेले लगलें। राजेश के मेहनत अउरी जिम्मेदारी दिन बा दिन अउरी बढ़े लागल। बहिन के बियाह, भाई के बियाह, घर बनावल, बेटा के पढ़ाई, बेटी के पढ़ाई फेर बेटी के बियाह जइसन काम,बेचारा के कबो साँसों लेबे के फुर्सत ना दिहलस।
हर दू साल मे दू महीना के छुट्टी आ ओ छुट्टी मे, माथा पर लादाइल सैकड़ो काम। हाय रे अरब के नौकरी?
घरे जाए से पहिले लोग कहेला कि राजेशवा बड़ी ओवर टाइम खिचेंला। कारन कि बजट से उपर लइकन के फरमाईश। कवनो के स्मार्टफोन के नया वर्जन चाहीं त कवनो के नया जेनेरेशन के लेपटॉप, कवनो के घड़ी त कवनो के कपड़ा। सगरी मेहनत अउर हारल-थाकल देंह बस एह बात के सुकून देला कि चलऽ अगिला महीना तऽ घरे जाहीं के बा।
पिछले बेरी के बात ह जब राहुल पटना पढ़े खातिर घर मे अठान-कठान डाल दिहले रहलन तऽ राजेश आपन एलआईसी तोड़ के उनके पटना भेजले रहलें। मलिकाइन खिसियइली तऽ तर्क ई दियाइल कि सब लइके खातिर नू होता। कय बेर मलिकाइन कहली कि कुछू रखीं अपनो लगे ना तऽ आज-काल्ह के लइका माई-बाप के कहँवा देखत बाड़े? बाकिर राजेश उनके एक ना सुनलें। जवन जमा-पूँजी, धन दउलत रहल बस परिवारे रहल।
घंटा भर से साइड मे बइठल राजेश के एक तरफ मुड़ी से पसीना गिरत रहे तऽ दूसरका तरफ आँख से लोर। लंच ब्रेक खतम भइल। हिसाब-किताब मे अभी अझुराइले रहलें तबले इंडिया वाला बैंक अकाउंट के मैसेस आइल। आपके अकाउंट मे शेष राशि 325 रूपये 50 पैसे हैं। और न्यूनतम राशि ना होने के कारन आपका बैंक अकाउंट बंद किया जा रहा है।
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शम्स जमील

@shamsh_jamil

हर दू साल मे दू महीना के छुट्टी आ ओ छुट्टी मे, माथा पर लादाइल सैकड़ो काम। हाय रे अरब के नौकरी?
घरे जाए से पहिले लोग कहेला कि राजेशवा बड़ी ओवर टाइम खिचेंला। कारन कि बजट से उपर लइकन के फरमाईश। कवनो के स्मार्टफोन के नया वर्जन चाहीं त कवनो के नया जेनेरेशन के लेपटॉप, कवनो के घड़ी त कवनो के कपड़ा। सगरी मेहनत अउर हारल-थाकल देंह बस एह बात के सुकून देला कि चलऽ अगिला महीना तऽ घरे जाहीं के बा।
पिछले बेरी के बात ह जब राहुल पटना पढ़े खातिर घर मे अठान-कठान डाल दिहले रहलन तऽ राजेश आपन एलआईसी तोड़ के उनके पटना भेजले रहलें। मलिकाइन खिसियइली तऽ तर्क ई दियाइल कि सब लइके खातिर नू होता। कय बेर मलिकाइन कहली कि कुछू रखीं अपनो लगे ना तऽ आज-काल्ह के लइका माई-बाप के कहँवा देखत बाड़े? बाकिर राजेश उनके एक ना सुनलें। जवन जमा-पूँजी, धन दउलत रहल बस परिवारे रहल।
घंटा भर से साइड मे बइठल राजेश के एक तरफ मुड़ी से पसीना गिरत रहे तऽ दूसरका तरफ आँख से लोर। लंच ब्रेक खतम भइल। हिसाब-किताब मे अभी अझुराइले रहलें तबले इंडिया वाला बैंक अकाउंट के मैसेस आइल। आपके अकाउंट मे शेष राशि 325 रूपये 50 पैसे हैं। और न्यूनतम राशि ना होने के कारन आपका बैंक अकाउंट बंद किया जा रहा है।
दू-चार दिन से बड़ा मन चिड़चिड़ाइल रहत रहे, तनी पाकिट ढीला हो गइल रहे से।
सुबह-सुबह दरवाजा केहूँ पीटलस… जा के खोलनी त माई दरवाजा पर खड़ा रहस।
गोड़ लगनी त आशीर्वाद देत कमरा में ढूक अइली।
हम पूछनी – केकरा संगे अइले ह?
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राघवेंद्र प्रकाश 'रघु'

@raghwendra_prakash_raghu

दू-चार दिन से बड़ा मन चिड़चिड़ाइल रहत रहे, तनी पाकिट ढीला हो गइल रहे से।
सुबह-सुबह दरवाजा केहूँ पीटलस… जा के खोलनी त माई दरवाजा पर खड़ा रहस।
गोड़ लगनी त आशीर्वाद देत कमरा में ढूक अइली।
हम पूछनी – केकरा संगे अइले ह?
त बतवली – भुअरा आवत रहे, त कहनी हमहूँ के लेते चल।
मेहरारू माई के देखते तमतमा उठली।
गोड़ त लगली, बाकिर भुनभुनात बोलली –
“लागता बूढ़िया के पैसा के जरूरत आ गइल बा… नाहीं त एहिजा काहे आवे वाली रही… एहिजा आपन पेट पहाड़ भइल बा, घरवालन के कवन लदिया लदब…?”
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राघवेंद्र प्रकाश 'रघु'

@raghwendra_prakash_raghu

त बतवली – भुअरा आवत रहे, त कहनी हमहूँ के लेते चल।
मेहरारू माई के देखते तमतमा उठली।
गोड़ त लगली, बाकिर भुनभुनात बोलली –
“लागता बूढ़िया के पैसा के जरूरत आ गइल बा… नाहीं त एहिजा काहे आवे वाली रही… एहिजा आपन पेट पहाड़ भइल बा, घरवालन के कवन लदिया लदब…?”
इतना कह के मुँह बिजुकावत रसोईघर में घुस गइली।
हम नजर बचावत दोसरा ओर हट गइनी।
एने माई कल पे हाथ-मुँह धो के बगल में रखल प्लास्टिक के कुर्सी पर बैठ के कहली –
“बबुआ, तनी चाय पियाऊ, ताकि सफ़र के थकान दूर हो जाव।”
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राघवेंद्र प्रकाश 'रघु'

@raghwendra_prakash_raghu

इतना कह के मुँह बिजुकावत रसोईघर में घुस गइली।
हम नजर बचावत दोसरा ओर हट गइनी।
एने माई कल पे हाथ-मुँह धो के बगल में रखल प्लास्टिक के कुर्सी पर बैठ के कहली –
“बबुआ, तनी चाय पियाऊ, ताकि सफ़र के थकान दूर हो जाव।”
हम रसोईघर से चाय ले आ के देनी।
कहनी – माई, चाय पी के तनी आराम कर ल।
दू-तीन महीना से तनी हाथ कुछ ढीला चल रहल बा।
परी बिटिया के जूता भी फाट गइल बा। रोज कहतिया कि स्कूल में सब चिढ़ावत बा, काहे से कि एगो अंगुरी बाहर निकल आवेला।
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राघवेंद्र प्रकाश 'रघु'

@raghwendra_prakash_raghu

हम रसोईघर से चाय ले आ के देनी।
कहनी – माई, चाय पी के तनी आराम कर ल।
दू-तीन महीना से तनी हाथ कुछ ढीला चल रहल बा।
परी बिटिया के जूता भी फाट गइल बा। रोज कहतिया कि स्कूल में सब चिढ़ावत बा, काहे से कि एगो अंगुरी बाहर निकल आवेला।
हम रोज टार देत रहनी – हाथ में कुछ आवे त सबसे पहिले बुचिया के जूता किनम।
मेहरारू के इलाज खातिर दवाई तक ना खरीद पइनी।
माई के अबहिये आवे के रहे — ई सोच के मन अउरी भारी हो गइल।
घर में गजब के चुप्पी रहे।
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राघवेंद्र प्रकाश 'रघु'

@raghwendra_prakash_raghu

हम रोज टार देत रहनी – हाथ में कुछ आवे त सबसे पहिले बुचिया के जूता किनम।
मेहरारू के इलाज खातिर दवाई तक ना खरीद पइनी।
माई के अबहिये आवे के रहे — ई सोच के मन अउरी भारी हो गइल।
घर में गजब के चुप्पी रहे।
मेहरारू के मुँह देखे जोग ना रहे।
दुपहरिया में खाना खाए घरी हम माई के भीरी खड़ा रहनी।
माई इशारा कइली — भीरी बैठ जा।
हम बैठ गइनी, मन में सोचत कि कहीं कउनो आर्थिक परेशानी लेके त ना अइली हई…
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राघवेंद्र प्रकाश 'रघु'

@raghwendra_prakash_raghu

मेहरारू के मुँह देखे जोग ना रहे।
दुपहरिया में खाना खाए घरी हम माई के भीरी खड़ा रहनी।
माई इशारा कइली — भीरी बैठ जा।
हम बैठ गइनी, मन में सोचत कि कहीं कउनो आर्थिक परेशानी लेके त ना अइली हई…
माई खाना खा के पूछली –
“सब ठीक बा नू?”
हम हिचकिचात कहनी –
“हँ, सब ठीक बा।”
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राघवेंद्र प्रकाश 'रघु'

@raghwendra_prakash_raghu

माई खाना खा के पूछली –
“सब ठीक बा नू?”
हम हिचकिचात कहनी –
“हँ, सब ठीक बा।”
माई उठ के चौकी पर बइठ गइली — एकदम निफिकिर।
हम थरिया ले जाए खातिर मेहरारू के गोहरइनी। उहो आ के थरिया उठा ले गइली।
माई से कहनी – तनी आराम कर।
माई कहलस – एह चौकी पर तहरे लगे बइठब।
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राघवेंद्र प्रकाश 'रघु'

@raghwendra_prakash_raghu

माई उठ के चौकी पर बइठ गइली — एकदम निफिकिर।
हम थरिया ले जाए खातिर मेहरारू के गोहरइनी। उहो आ के थरिया उठा ले गइली।
माई से कहनी – तनी आराम कर।
माई कहलस – एह चौकी पर तहरे लगे बइठब।
हम साँस रोक के माई के मुँह ताकत बइठ गइनी।
रोआँ-रोआँ कान बन के सुनत रहनी — अब माई का कहिहें?
तब माई बोलली –
“खेती-किसानी में घड़ी भर फुरसत नइखे मिलत तहरा बाबूजी के। चइत के कटनी चरम पर बा।
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राघवेंद्र प्रकाश 'रघु'

@raghwendra_prakash_raghu

हम साँस रोक के माई के मुँह ताकत बइठ गइनी।
रोआँ-रोआँ कान बन के सुनत रहनी — अब माई का कहिहें?
तब माई बोलली –
“खेती-किसानी में घड़ी भर फुरसत नइखे मिलत तहरा बाबूजी के। चइत के कटनी चरम पर बा।
रात वाला गड़िया धरा दिहअ, ओहिसे हम गावे चल जइब। तीन महीना से तहरा लोगन के कउनो समाचार ना मिलल रहे, त बाबूजी कहलन — भुअरा जात बा, ओकरे संगे चल जा, बबुआ लगे।”
“जब तू परेशान होल तबे अइसन करेलअ…”
इतना कह के माई अपना कुर्ती से सौ-सौ के पचास नोट निकाल के हमरा ओर बढ़ा दिहली –
“रख लअ… तहार बाबूजी देलन ह। तहरा काम आई।
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राघवेंद्र प्रकाश 'रघु'

@raghwendra_prakash_raghu

रात वाला गड़िया धरा दिहअ, ओहिसे हम गावे चल जइब। तीन महीना से तहरा लोगन के कउनो समाचार ना मिलल रहे, त बाबूजी कहलन — भुअरा जात बा, ओकरे संगे चल जा, बबुआ लगे।”
“जब तू परेशान होल तबे अइसन करेलअ…”
इतना कह के माई अपना कुर्ती से सौ-सौ के पचास नोट निकाल के हमरा ओर बढ़ा दिहली –
“रख लअ… तहार बाबूजी देलन ह। तहरा काम आई।
गेहूँ के फसल अच्छा भइल रहे, पहिले ही कटवा के बेच देलन। तरकुलवा खाए खातिर रखाई, काल परसो कटी।”
“घरे कउनो दिक्कत नइखे। तू बहुत कमजोर लागतारअ। ढंग से खाइल-पियल करअ। बहू आ बाल-बच्चा के ध्यान राखअ।
बुचिया पढ़े जाए घरी गोड़ लागे आइल रहे — ओकर जूता फाटल रहे, किन दिहा।”
हम नीचे मुड़िया के लजा गइनी।
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राघवेंद्र प्रकाश 'रघु'

@raghwendra_prakash_raghu

गेहूँ के फसल अच्छा भइल रहे, पहिले ही कटवा के बेच देलन। तरकुलवा खाए खातिर रखाई, काल परसो कटी।”
“घरे कउनो दिक्कत नइखे। तू बहुत कमजोर लागतारअ। ढंग से खाइल-पियल करअ। बहू आ बाल-बच्चा के ध्यान राखअ।
बुचिया पढ़े जाए घरी गोड़ लागे आइल रहे — ओकर जूता फाटल रहे, किन दिहा।”
हम नीचे मुड़िया के लजा गइनी।
कुछो कहे के शब्द ना रहे।
दरवाजा के पीछे से ई सब बतकही मेहरारू भी सुनत रहे। उहो आपन आप के कोसत रहे — माई के बारे में अइसन सोचले खातिर।
हम कुछ कहती, ओह से पहिले माई प्यार से डांटलस –
“ले धर, अतना बड़ नइखीस हो गइल?”
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राघवेंद्र प्रकाश 'रघु'

@raghwendra_prakash_raghu

कुछो कहे के शब्द ना रहे।
दरवाजा के पीछे से ई सब बतकही मेहरारू भी सुनत रहे। उहो आपन आप के कोसत रहे — माई के बारे में अइसन सोचले खातिर।
हम कुछ कहती, ओह से पहिले माई प्यार से डांटलस –
“ले धर, अतना बड़ नइखीस हो गइल?”
हिचकिचात कहनी – “ना माई…”
माई नोट हमरा हथेली पर रख दिहली।
ऊ दिन याद आ गइल, जब बरसों पहिले माई स्कूल भेजे घरी अइसहीं हथेली पर अठन्नी रख देत रहस, आ हम बाबूजी के अंगुरी पकड़ के फुदकत स्कूल निकल जात रहनी।
पर तब नजर आज लेखा झुकल ना रहत रहे…
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राघवेंद्र प्रकाश 'रघु'

@raghwendra_prakash_raghu

हिचकिचात कहनी – “ना माई…”
माई नोट हमरा हथेली पर रख दिहली।
ऊ दिन याद आ गइल, जब बरसों पहिले माई स्कूल भेजे घरी अइसहीं हथेली पर अठन्नी रख देत रहस, आ हम बाबूजी के अंगुरी पकड़ के फुदकत स्कूल निकल जात रहनी।
पर तब नजर आज लेखा झुकल ना रहत रहे…
हमनी के राति दिन दुखवा भोगत बानी
हमनी के साहेब से मिनती सुनाइबि।
हमनी के दुख भगवानओं न देखता ते,
हमनी के कबले कलेसवा उठाइबि।
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हीरा डोम

@hira_dom

हमनी के राति दिन दुखवा भोगत बानी
हमनी के साहेब से मिनती सुनाइबि।
हमनी के दुख भगवानओं न देखता ते,
हमनी के कबले कलेसवा उठाइबि।
पदरी सहेब के कचहरी में जाइबिजां,
बेधरम होके रंगरेज बानि जाइबिजां,
हाय राम! धसरम न छोड़त बनत बा जे,
बे-धरम होके कैसे मुंहवा दिखइबि॥१॥
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हीरा डोम

@hira_dom

पदरी सहेब के कचहरी में जाइबिजां,
बेधरम होके रंगरेज बानि जाइबिजां,
हाय राम! धसरम न छोड़त बनत बा जे,
बे-धरम होके कैसे मुंहवा दिखइबि॥१॥
खंभवा के फारी पहलाद के बंचवले।
ग्राह के मुँह से गजराज के बचवले।
धोती जुरजोधना कै भइया छोरत रहै,
परगट होके तहां कपड़ा बढ़वले।
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हीरा डोम

@hira_dom

खंभवा के फारी पहलाद के बंचवले।
ग्राह के मुँह से गजराज के बचवले।
धोती जुरजोधना कै भइया छोरत रहै,
परगट होके तहां कपड़ा बढ़वले।
मरले रवनवाँ कै पलले भभिखना के,
कानी उँगुरी पै धैके पथरा उठले।
कहंवा सुतल बाटे सुनत न बाटे अब।
डोम तानि हमनी क छुए से डेराले॥२॥
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हीरा डोम

@hira_dom

मरले रवनवाँ कै पलले भभिखना के,
कानी उँगुरी पै धैके पथरा उठले।
कहंवा सुतल बाटे सुनत न बाटे अब।
डोम तानि हमनी क छुए से डेराले॥२॥
हमनी के राति दिन मेहत करीजां,
दुइगो रूपयावा दरमहा में पाइबि।
ठाकुरे के सुखसेत घर में सुलत बानीं,
हमनी के जोति-जोति खेतिया कमाइबि।
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हीरा डोम

@hira_dom

हमनी के राति दिन मेहत करीजां,
दुइगो रूपयावा दरमहा में पाइबि।
ठाकुरे के सुखसेत घर में सुलत बानीं,
हमनी के जोति-जोति खेतिया कमाइबि।
हकिमे के लसकरि उतरल बानीं।
जेत उहओं बेगारीया में पकरल जाइबि।
मुँह बान्हि ऐसन नौकरिया करत बानीं,
ई कुल खबरी सरकार के सुनाइबि॥३॥
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हीरा डोम

@hira_dom

हकिमे के लसकरि उतरल बानीं।
जेत उहओं बेगारीया में पकरल जाइबि।
मुँह बान्हि ऐसन नौकरिया करत बानीं,
ई कुल खबरी सरकार के सुनाइबि॥३॥
बभने के लेखे हम भिखिया न मांगबजां,
ठकुर क लेखे नहिं लउरि चलाइबि।
सहुआ के लेखे नहि डांड़ी हम जोरबजां,
अहिरा के लेखे न कबित्त हम जोरजां,
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हीरा डोम

@hira_dom

बभने के लेखे हम भिखिया न मांगबजां,
ठकुर क लेखे नहिं लउरि चलाइबि।
सहुआ के लेखे नहि डांड़ी हम जोरबजां,
अहिरा के लेखे न कबित्त हम जोरजां,
पबड़ी न बनि के कचहरी में जाइबि॥४॥
अपने पहसनवा कै पइसा कमादबजां,
घर भर मिलि जुलि बांटि-चोंटि खदबि।
हड़वा मसुदया कै देहियां बभनओं कै बानीं,
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हीरा डोम

@hira_dom

पबड़ी न बनि के कचहरी में जाइबि॥४॥
अपने पहसनवा कै पइसा कमादबजां,
घर भर मिलि जुलि बांटि-चोंटि खदबि।
हड़वा मसुदया कै देहियां बभनओं कै बानीं,
ओकरा कै घरे पुजवा होखत बाजे,
ओकरै इलकवा भदलैं जिजमानी।
सगरै इलकवा भइलैं जिजमानी।
हमनी क इनरा के निगिचे न जाइलेजां,
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हीरा डोम

@hira_dom

ओकरा कै घरे पुजवा होखत बाजे,
ओकरै इलकवा भदलैं जिजमानी।
सगरै इलकवा भइलैं जिजमानी।
हमनी क इनरा के निगिचे न जाइलेजां,
पांके से पिटि-पिटि हाथ गोड़ तुरि दैलैं,
हमने के एतनी काही के हलकानी॥५॥
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हीरा डोम

@hira_dom

पांके से पिटि-पिटि हाथ गोड़ तुरि दैलैं,
हमने के एतनी काही के हलकानी॥५॥
हमेशा रहल नेह दियना बुताइल,
जिनिगिया ई अबले अन्हारे में बीतल।
हिया में रहल पीर अँखियनि में पानी,
न जियरा के केहू सकल सुनि कहानी,
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श्रद्धानंद पाण्डेय

@shradhananad_pandey

हमेशा रहल नेह दियना बुताइल,
जिनिगिया ई अबले अन्हारे में बीतल।
हिया में रहल पीर अँखियनि में पानी,
न जियरा के केहू सकल सुनि कहानी,
न ओठनि प आइल कबो बात मन में,
जिनिगिया ई सोचे-विचारे में बीतल।
न आइल कबो ले संदेशा बदरिया,
रहल ताकते नीर भरले नजरिया,
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श्रद्धानंद पाण्डेय

@shradhananad_pandey

न ओठनि प आइल कबो बात मन में,
जिनिगिया ई सोचे-विचारे में बीतल।
न आइल कबो ले संदेशा बदरिया,
रहल ताकते नीर भरले नजरिया,
न आइल घरे मीत मनवाँ के कबहूँ,
जिनिगिया ई रहिया निहारे में बीतल।
गइल बीत सावन ना गवलीं कजरिया,
बहल ना कबो मन्द शीतल बयरिया,
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श्रद्धानंद पाण्डेय

@shradhananad_pandey

न आइल घरे मीत मनवाँ के कबहूँ,
जिनिगिया ई रहिया निहारे में बीतल।
गइल बीत सावन ना गवलीं कजरिया,
बहल ना कबो मन्द शीतल बयरिया,
न साधनि के हमरा कबो मेघ बरिसल
जिनिगिया ई अबले सुखारे में बीतल।
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श्रद्धानंद पाण्डेय

@shradhananad_pandey

न साधनि के हमरा कबो मेघ बरिसल
जिनिगिया ई अबले सुखारे में बीतल।
https://www.youtube.com/watch?v=fM9jD-v32Wg
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मुकेश यादव "भावुक"

@bhawuk

https://www.youtube.com/watch?v=fM9jD-v32Wg
चोट खा-खा के जिनिगी, ई घाही बनल
लागल भगिया में अगिया, तबाही बनल
घाव बड़हन भइलऽ, ऊ नाऽ जल्दी भरी
जे डुबवलस ऊ मौका पर, हाथ का धरी
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कुमार अजय सिंह

@ajay_singhh

चोट खा-खा के जिनिगी, ई घाही बनल
लागल भगिया में अगिया, तबाही बनल
घाव बड़हन भइलऽ, ऊ नाऽ जल्दी भरी
जे डुबवलस ऊ मौका पर, हाथ का धरी
ऊ चिन्हलके आदमिया बा, डाही बनल
चोट खा-खा के जिनिगी, ई घाही बनल
लोर ढ़रकत ना पोछत, पूछत केहूए बा
का गुजरत ना तनिको,सोंचत केहूए बा
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कुमार अजय सिंह

@ajay_singhh

ऊ चिन्हलके आदमिया बा, डाही बनल
चोट खा-खा के जिनिगी, ई घाही बनल
लोर ढ़रकत ना पोछत, पूछत केहूए बा
का गुजरत ना तनिको,सोंचत केहूए बा
रहनी जेकरा से दूर हम,उहे दाही बनल
चोट खा-खा के जिनिगी, ई घाही बनल
का करि जी केहु केकरो प,अब विश्वास
खाइके मरला से नीमन, रहलका उपास
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कुमार अजय सिंह

@ajay_singhh

रहनी जेकरा से दूर हम,उहे दाही बनल
चोट खा-खा के जिनिगी, ई घाही बनल
का करि जी केहु केकरो प,अब विश्वास
खाइके मरला से नीमन, रहलका उपास
जब जमलका हमार अब ऊ, नाहीं रहल
चोट खा-खा के जिनिगी, ई घाही बनल
ना रहिले सर झुकाके, नाहीं रहल चाहीं
बात तनिका भर मनवा के, कहल चाहीं
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कुमार अजय सिंह

@ajay_singhh

जब जमलका हमार अब ऊ, नाहीं रहल
चोट खा-खा के जिनिगी, ई घाही बनल
ना रहिले सर झुकाके, नाहीं रहल चाहीं
बात तनिका भर मनवा के, कहल चाहीं
“अजय” चुपचाप सहल,लरिकाही बनल
चोट खा-खा के जिनिगी, ई घाही बनल
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कुमार अजय सिंह

@ajay_singhh

“अजय” चुपचाप सहल,लरिकाही बनल
चोट खा-खा के जिनिगी, ई घाही बनल
कहीं चूल्हे पे अदहन खौलता है
कहीं बेबस कोई मन खौलता है
फुहारें सबके हिस्से में कहां हैं
बुझा हो दिल तो सावन खौलता है
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चेतना पाण्डेय

@chetna_pandey

कहीं चूल्हे पे अदहन खौलता है
कहीं बेबस कोई मन खौलता है
फुहारें सबके हिस्से में कहां हैं
बुझा हो दिल तो सावन खौलता है
लगें जब कानाफूसी करने कमरे
तो फिर उकता के आँगन खौलता है
जो पागल ढूंढते रंगों में मज़हब
उन्हें देखे तो फागुन खौलता है
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चेतना पाण्डेय

@chetna_pandey

लगें जब कानाफूसी करने कमरे
तो फिर उकता के आँगन खौलता है
जो पागल ढूंढते रंगों में मज़हब
उन्हें देखे तो फागुन खौलता है
किसी को कैद,आजादी किसी को
सज़ा कैसी है, बन्धन खौलता है
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चेतना पाण्डेय

@chetna_pandey

किसी को कैद,आजादी किसी को
सज़ा कैसी है, बन्धन खौलता है
जाड़ से एतना हाड़ कपवलु, दम तू कईलु नाकी-
ए शीतलहरी काकी
रखलु ना करम कवनो बाकी-ए शीतलहरी काकी
करी कोई ड्यूटी कइसे, जाई अपना काम-धन्धा।
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डॉo यशवन्त केशोपुरी

@yashwant_keshopuri

जाड़ से एतना हाड़ कपवलु, दम तू कईलु नाकी-
ए शीतलहरी काकी
रखलु ना करम कवनो बाकी-ए शीतलहरी काकी
करी कोई ड्यूटी कइसे, जाई अपना काम-धन्धा।
धुन्ध से रोड पर सूझत नइखे, भईल आदमी अन्धा।
मांगत बा सभे पनाह अब, देख के तोहर बेबाकी-
ए शीतलहरी काकी .....
तापमान दिन पर दिन गिरे, भईल पांच से नीचे।
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डॉo यशवन्त केशोपुरी

@yashwant_keshopuri

धुन्ध से रोड पर सूझत नइखे, भईल आदमी अन्धा।
मांगत बा सभे पनाह अब, देख के तोहर बेबाकी-
ए शीतलहरी काकी .....
तापमान दिन पर दिन गिरे, भईल पांच से नीचे।
अब त ई समझे ना आवे, के नहाव के फिंचे।
पाला गोड़ नाहीं गरमाला, केतनो कम्बल में माकी-
ए शीतलहरी काकी .....
राहत के ना सांस मिलेला, बीते दिन अगिया तापत।
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डॉo यशवन्त केशोपुरी

@yashwant_keshopuri

अब त ई समझे ना आवे, के नहाव के फिंचे।
पाला गोड़ नाहीं गरमाला, केतनो कम्बल में माकी-
ए शीतलहरी काकी .....
राहत के ना सांस मिलेला, बीते दिन अगिया तापत।
घाम के दर्शन होते नइखे, थर थर बा सब कांपत।
ओस में सुरुजदेव लुकाके, मारेलन अब फाकी-
ए शीतलहरी काकी .....
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डॉo यशवन्त केशोपुरी

@yashwant_keshopuri

घाम के दर्शन होते नइखे, थर थर बा सब कांपत।
ओस में सुरुजदेव लुकाके, मारेलन अब फाकी-
ए शीतलहरी काकी .....
चाहे गमछा फार के रहअ।
चाहे तु झार के रहअ।।
दिल मे अपने मुहब्बत के
दिया एगो बार के रहअ।।
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जमील मिर

@jamil-meer

चाहे गमछा फार के रहअ।
चाहे तु झार के रहअ।।
दिल मे अपने मुहब्बत के
दिया एगो बार के रहअ।।
ना प्यार ना बैर से
ना आपन ना गैर से
जब भी चलअ राह मे
आपन कदम सम्हार के रहअ।।
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जमील मिर

@jamil-meer

ना प्यार ना बैर से
ना आपन ना गैर से
जब भी चलअ राह मे
आपन कदम सम्हार के रहअ।।
झूठ से बचल जाता कहाँ
सांच बोलल जाता कहाँ
जहाँ चुगलन के देखअ भाई
मुँह पर ताला मार के रहअ।।
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जमील मिर

@jamil-meer

झूठ से बचल जाता कहाँ
सांच बोलल जाता कहाँ
जहाँ चुगलन के देखअ भाई
मुँह पर ताला मार के रहअ।।
चाहे गमछा फार के रहअ।
चाहे तु झार के रहअ।।
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जमील मिर

@jamil-meer

चाहे गमछा फार के रहअ।
चाहे तु झार के रहअ।।
मन धधाइल, गावें गइनी, का बतलाई का हाल भइल
यूपीएससी भी पीछे छूटल जब अइसन सवाल भइल।
डीह बाबा के चऊरा से ही मन तनी धुकधुकात रहे,
ना जननी की ऐह खेला के इ त बस शुरुआत रहे,
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मुकेश यादव "भावुक"

@bhawuk

मन धधाइल, गावें गइनी, का बतलाई का हाल भइल
यूपीएससी भी पीछे छूटल जब अइसन सवाल भइल।
डीह बाबा के चऊरा से ही मन तनी धुकधुकात रहे,
ना जननी की ऐह खेला के इ त बस शुरुआत रहे,
छोड़ी हाल फिकिर के चिंता, पइसे बड़की बात भइल।
मन धधाइल गावें गइनी, का बतलाई का हाल भइल
सौ मीटर के दूरी भी सात समुंदर लेखा लागे लागल,
जाने काहें पिराले देहियां,मन  गांव से भागे लागल,
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मुकेश यादव "भावुक"

@bhawuk

छोड़ी हाल फिकिर के चिंता, पइसे बड़की बात भइल।
मन धधाइल गावें गइनी, का बतलाई का हाल भइल
सौ मीटर के दूरी भी सात समुंदर लेखा लागे लागल,
जाने काहें पिराले देहियां,मन  गांव से भागे लागल,
अस घेराइल घेरा देदा अइसन अइसन उतपात भइल।
मन धधाइल गावें गइनी, का बतलाई का हाल भइल
मुह बान्ह के आगे बढ़नी पर ई सबसे भारी भूल भइल,
महीनों अभी बीतल ना गइले, लागता नोकरी छूट गइल।
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मुकेश यादव "भावुक"

@bhawuk

अस घेराइल घेरा देदा अइसन अइसन उतपात भइल।
मन धधाइल गावें गइनी, का बतलाई का हाल भइल
मुह बान्ह के आगे बढ़नी पर ई सबसे भारी भूल भइल,
महीनों अभी बीतल ना गइले, लागता नोकरी छूट गइल।
स्वागत में हर मुह से बस,  बढ़के एक से एक संवाद भइल।
मन धधाइल गावें गइनी, का बतलाई का हाल भइल
अतनो पर ना मानल किस्मत, सुनी कहानी आगे के,
मरकहवा सढ़वा दउरवलस, कहा जाइ अब भागी के,
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मुकेश यादव "भावुक"

@bhawuk

स्वागत में हर मुह से बस,  बढ़के एक से एक संवाद भइल।
मन धधाइल गावें गइनी, का बतलाई का हाल भइल
अतनो पर ना मानल किस्मत, सुनी कहानी आगे के,
मरकहवा सढ़वा दउरवलस, कहा जाइ अब भागी के,
सर समान अन्हे छितराइल, एम्बुलेंस के काल भइल।
मन धधाइल गावें गइनी, का बतलाई का हाल भइल
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मुकेश यादव "भावुक"

@bhawuk

सर समान अन्हे छितराइल, एम्बुलेंस के काल भइल।
मन धधाइल गावें गइनी, का बतलाई का हाल भइल
माई भाखा के साथे अइसे जन अब घात करी
भोजपुरी के भोजपुरी से भोजपुरी मे बात करी
ना हिंदी मे समाइल ठिक
ना अंग्रेजी मे अझुराइल ठिक
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शम्स जमील

@shamsh_jamil

माई भाखा के साथे अइसे जन अब घात करी
भोजपुरी के भोजपुरी से भोजपुरी मे बात करी
ना हिंदी मे समाइल ठिक
ना अंग्रेजी मे अझुराइल ठिक
सोझा रउवा बोलहीं के पड़ी
अब आज नइखे लजाइल ठिक
दिन दुपहरिया सांझ सबेरे चाहे रात बिरात करीं
भोजपुरी के भोजपुरी से भोजपुरी मे बात करी
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शम्स जमील

@shamsh_jamil

सोझा रउवा बोलहीं के पड़ी
अब आज नइखे लजाइल ठिक
दिन दुपहरिया सांझ सबेरे चाहे रात बिरात करीं
भोजपुरी के भोजपुरी से भोजपुरी मे बात करी
संविधान मे अभी ले आइल ना
उ मान सम्मान भेंटाइल ना
ई भाषा केतना जरूरी बाटे
शायद रउवा बुझाइल ना
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शम्स जमील

@shamsh_jamil

संविधान मे अभी ले आइल ना
उ मान सम्मान भेंटाइल ना
ई भाषा केतना जरूरी बाटे
शायद रउवा बुझाइल ना
अपने घर मे भाखा के अइसे जन अनाथ करीं
भोजपुरी के भोजपुरी से भोजपुरी मे बात करी
माई भाखा आज रोवत बिया
रउवा मे खुद के टोवत बिया
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शम्स जमील

@shamsh_jamil

अपने घर मे भाखा के अइसे जन अनाथ करीं
भोजपुरी के भोजपुरी से भोजपुरी मे बात करी
माई भाखा आज रोवत बिया
रउवा मे खुद के टोवत बिया
आपन घर के हमार भोजपुरी
अस्तित्व आपन खोवत बिया
जहाँ मौका रउवा मिले भोजपुरी मे साक्षात करी
भोजपुरी के भोजपुरी से भोजपुरी मे बात करी
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शम्स जमील

@shamsh_jamil

आपन घर के हमार भोजपुरी
अस्तित्व आपन खोवत बिया
जहाँ मौका रउवा मिले भोजपुरी मे साक्षात करी
भोजपुरी के भोजपुरी से भोजपुरी मे बात करी
बताई ना बाटे दूरी कइसन
रउवा भिरी मजबुरी कइसन
जे लोगन के जोड़ ना पावे
भाषा हमार भोजपुरी कइसन
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शम्स जमील

@shamsh_jamil

बताई ना बाटे दूरी कइसन
रउवा भिरी मजबुरी कइसन
जे लोगन के जोड़ ना पावे
भाषा हमार भोजपुरी कइसन
भोजपुरी के धरम आपन भोजपुरीये के जात करीं
भोजपुरी के भोजपुरी से भोजपुरी मे बात करी
चाहें कवनो देश मे रहीं
चाहे नवका भेष मे रहीं
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शम्स जमील

@shamsh_jamil

भोजपुरी के धरम आपन भोजपुरीये के जात करीं
भोजपुरी के भोजपुरी से भोजपुरी मे बात करी
चाहें कवनो देश मे रहीं
चाहे नवका भेष मे रहीं
जबले सरकार सुनत नइखे
साँझे सबेरे रेस मे रहीं
खाईं किरिया खुद के उपर बस एगो सौगात करीं
भोजपुरी के भोजपुरी से भोजपुरी मे बात करी
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शम्स जमील

@shamsh_jamil

जबले सरकार सुनत नइखे
साँझे सबेरे रेस मे रहीं
खाईं किरिया खुद के उपर बस एगो सौगात करीं
भोजपुरी के भोजपुरी से भोजपुरी मे बात करी
मन कबों थोर ना रहे
जिगर कमजोर ना रहे
16 स के दौड़ मारी रोज,
अइसन कवनो भोर ना रहे!
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सुजीत पाण्डेय

@sujit_pandey

मन कबों थोर ना रहे
जिगर कमजोर ना रहे
16 स के दौड़ मारी रोज,
अइसन कवनो भोर ना रहे!
जिला में चलत रहे नाव,
कवन जवार में शोर ना रहे
कोशिश रहे सवार दी कालहू
हिम्मत के ओर ना रहे....!
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सुजीत पाण्डेय

@sujit_pandey

जिला में चलत रहे नाव,
कवन जवार में शोर ना रहे
कोशिश रहे सवार दी कालहू
हिम्मत के ओर ना रहे....!
दिन बदलल, हालात सुधरल
बाकी सोचनी तवन बात ना रहे
रही जाला कचक के जियरा
जिस्म रहे पर जज्बात ना रहे!
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सुजीत पाण्डेय

@sujit_pandey

दिन बदलल, हालात सुधरल
बाकी सोचनी तवन बात ना रहे
रही जाला कचक के जियरा
जिस्म रहे पर जज्बात ना रहे!
मैदान में सामने टिक जाईत
अइसन केवनो जोड़ ना रहे
लाख कोशिश भईल ' सु जीत
एह किस्मत में उ अंजोर ना रहे!
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सुजीत पाण्डेय

@sujit_pandey

मैदान में सामने टिक जाईत
अइसन केवनो जोड़ ना रहे
लाख कोशिश भईल ' सु जीत
एह किस्मत में उ अंजोर ना रहे!
जइसे गरमी में दिवाकर के,
आ सस्ती में टमाटर के
जइसे बिना धार के फरसा के,
आ बिन मौसम के बरसा के
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रिशु कुमार गुप्ता

@rishu_gupta

जइसे गरमी में दिवाकर के,
आ सस्ती में टमाटर के
जइसे बिना धार के फरसा के,
आ बिन मौसम के बरसा के
जइसे बिना भुख के भात के,
आ मेहंदी लागल हाथ के
जइसे ठंडा में पछुआ पुरुवा के,
आ बिना छत के घरवा के
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रिशु कुमार गुप्ता

@rishu_gupta

जइसे बिना भुख के भात के,
आ मेहंदी लागल हाथ के
जइसे ठंडा में पछुआ पुरुवा के,
आ बिना छत के घरवा के
जइसे बिन उपजाउ माटी के,
आ टुटल गोड़ वाली खाटी के
जइसे बिन सियाही कलम के,
आ बिना चोट के मरहम के
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रिशु कुमार गुप्ता

@rishu_gupta

जइसे बिन उपजाउ माटी के,
आ टुटल गोड़ वाली खाटी के
जइसे बिन सियाही कलम के,
आ बिना चोट के मरहम के
जइसे फाटल जूता के,
आ बिन गरु के खूटा के
जइसे सुख में सुमिरन के,
आ काटल छाटल कतरन के
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रिशु कुमार गुप्ता

@rishu_gupta

जइसे फाटल जूता के,
आ बिन गरु के खूटा के
जइसे सुख में सुमिरन के,
आ काटल छाटल कतरन के
जइसे बिन जरूरत अनाज के,
आ फायदा बिना समाज के
जइसे मदद बाद मददगार के,
आ समाज में बेरोजगार के
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रिशु कुमार गुप्ता

@rishu_gupta

जइसे बिन जरूरत अनाज के,
आ फायदा बिना समाज के
जइसे मदद बाद मददगार के,
आ समाज में बेरोजगार के
जइसे बिना चमक के चानी के,
आ बिना जोर के आन्ही के
जइसे बिन मौका राष्ट्रगान के,
आ असमय भारत सम्मान के
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रिशु कुमार गुप्ता

@rishu_gupta

जइसे बिना चमक के चानी के,
आ बिना जोर के आन्ही के
जइसे बिन मौका राष्ट्रगान के,
आ असमय भारत सम्मान के
जइसे हमनी देश में जनानी के,
आ पढ़ल लिखल ज्ञानी के
सुनऽ ए रिशु,
उहे कीमत बा आज एक रूपिया के।
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रिशु कुमार गुप्ता

@rishu_gupta

जइसे हमनी देश में जनानी के,
आ पढ़ल लिखल ज्ञानी के
सुनऽ ए रिशु,
उहे कीमत बा आज एक रूपिया के।
भीतरे भीतर घवाहिल बा,
बात समझ मे आइल बा
नेह वेह से सब दूर भइल
मन काहें अकुताइल बा।
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मुकेश यादव "भावुक"

@bhawuk

भीतरे भीतर घवाहिल बा,
बात समझ मे आइल बा
नेह वेह से सब दूर भइल
मन काहें अकुताइल बा।
चोरन के अब ज़ोर भइल,
भीतरे भीतर शोर भइल,
मुह गिरा के बइठल बाड़,
का मन के चोर धराईल बा?
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मुकेश यादव "भावुक"

@bhawuk

चोरन के अब ज़ोर भइल,
भीतरे भीतर शोर भइल,
मुह गिरा के बइठल बाड़,
का मन के चोर धराईल बा?
आके बईठ पास मे हमरी
नज़र चोरा भागेल कगरी
थाती तोहके सब दे देहब,
काहे मुह झुराइल बा ?
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मुकेश यादव "भावुक"

@bhawuk

आके बईठ पास मे हमरी
नज़र चोरा भागेल कगरी
थाती तोहके सब दे देहब,
काहे मुह झुराइल बा ?
अइसन तोहार खिलवना रहे,
बाकी हमार बिछवना रहे,
रात रात भर जागत रहनी,
काहें अब देह पिराइल बा?
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मुकेश यादव "भावुक"

@bhawuk

अइसन तोहार खिलवना रहे,
बाकी हमार बिछवना रहे,
रात रात भर जागत रहनी,
काहें अब देह पिराइल बा?
इश्क़ विश्क सब बेमानी ह,
कुछ हमरो भी नादानी ह,
'भावुक' मन ना बुझे पावे,
कईसन ई प्रीत बन्हाइल बा?
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मुकेश यादव "भावुक"

@bhawuk

इश्क़ विश्क सब बेमानी ह,
कुछ हमरो भी नादानी ह,
'भावुक' मन ना बुझे पावे,
कईसन ई प्रीत बन्हाइल बा?
भीतरे भीतर घवाहिल बा,
बात समझ मे आइल बा
नेह वेह से सब दूर भइल
मन काहें अकुताइल बा।
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मुकेश यादव "भावुक"

@bhawuk

भीतरे भीतर घवाहिल बा,
बात समझ मे आइल बा
नेह वेह से सब दूर भइल
मन काहें अकुताइल बा।
https://www.youtube.com/watch?v=E9d_VOGpSvk
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नूरैन अंसारी

@noorain_ansari

https://www.youtube.com/watch?v=E9d_VOGpSvk
https://www.youtube.com/watch?v=QtXXYEbjQH4
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नूरैन अंसारी

@noorain_ansari

https://www.youtube.com/watch?v=QtXXYEbjQH4
https://www.youtube.com/watch?v=qZSc__1wClg
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मनोज भावुक

@manoj_bhawuk

https://www.youtube.com/watch?v=qZSc__1wClg
https://www.youtube.com/watch?v=SKgntoqf5jY
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तबारक अंसारी

@tabarak_ansari

https://www.youtube.com/watch?v=SKgntoqf5jY
https://www.youtube.com/watch?v=vR5LAmOyQLI
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नूरैन अंसारी

@noorain_ansari

https://www.youtube.com/watch?v=vR5LAmOyQLI
https://www.youtube.com/watch?v=7PLyoPiD5a4&pbjreload=102
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शम्स जमील

@shamsh_jamil

https://www.youtube.com/watch?v=7PLyoPiD5a4&pbjreload=102
छोड़े के ना परित कबहूं आपन घर दुआर।
मिलित अगर सभे के बिहार में ही रोज़गार।
अपनन से बिछड़े के कबो दरद ना होइत।
बीवी-बचवन के याद कर के दिल ना रोइत।
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ताजुद्दीन अंसारी

@tazuddin_ansari

छोड़े के ना परित कबहूं आपन घर दुआर।
मिलित अगर सभे के बिहार में ही रोज़गार।
अपनन से बिछड़े के कबो दरद ना होइत।
बीवी-बचवन के याद कर के दिल ना रोइत।
आपन घरे दुआरे सभे सुख चैन से सोइत।
अपनो भी घरे करित कोई हर साँझ में इंतजार।
मिलित अगर सभे के बिहार में ही रोज़गार।
घर में आपन लोग के आंख के सोझा रहित।
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ताजुद्दीन अंसारी

@tazuddin_ansari

आपन घरे दुआरे सभे सुख चैन से सोइत।
अपनो भी घरे करित कोई हर साँझ में इंतजार।
मिलित अगर सभे के बिहार में ही रोज़गार।
घर में आपन लोग के आंख के सोझा रहित।
घरे उहे सब पाकित जवन जवन ऊ कहित।
सभ के घर परिवार में प्रेम के गंगा खूबे बहित।
हंसी खुशी मनित सभ के घर में परब तेहवार।
मिलित अगर सभे के बिहार में ही रोज़गार।
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ताजुद्दीन अंसारी

@tazuddin_ansari

घरे उहे सब पाकित जवन जवन ऊ कहित।
सभ के घर परिवार में प्रेम के गंगा खूबे बहित।
हंसी खुशी मनित सभ के घर में परब तेहवार।
मिलित अगर सभे के बिहार में ही रोज़गार।
आपन सरकार के गंभीरता से एह पर सोचे के चाहिँ।
बिहार में सभे के खातिर रोज़गार होखे के चाहिँ।
ईहांवा के सभे लोग के पलायन जरूर रोके के चाहिँ।
उम्मीद बा सरकार करी ई सब पर ठीक से विचार।
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ताजुद्दीन अंसारी

@tazuddin_ansari

आपन सरकार के गंभीरता से एह पर सोचे के चाहिँ।
बिहार में सभे के खातिर रोज़गार होखे के चाहिँ।
ईहांवा के सभे लोग के पलायन जरूर रोके के चाहिँ।
उम्मीद बा सरकार करी ई सब पर ठीक से विचार।
मिलित अगर सभे के बिहार में ही रोज़गार।
भाई पलायन के दरद त हमहूं कम ना सहतानी।
लगातार तेईस साल से कुवैत में हम रहतानी।
एही से हम आज ई बात आपन सबसे कहतानी।
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ताजुद्दीन अंसारी

@tazuddin_ansari

मिलित अगर सभे के बिहार में ही रोज़गार।
भाई पलायन के दरद त हमहूं कम ना सहतानी।
लगातार तेईस साल से कुवैत में हम रहतानी।
एही से हम आज ई बात आपन सबसे कहतानी।
हमार लइका पर ना पड़े कबों ई पलायन के मार।
मिलित अगर सभे के बिहार में ही रोज़गार।
बिहार के लोग के किस्मत तबे जाके जागी।
जब कल कारखाना बिहार में हर जगह लागी।
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ताजुद्दीन अंसारी

@tazuddin_ansari

हमार लइका पर ना पड़े कबों ई पलायन के मार।
मिलित अगर सभे के बिहार में ही रोज़गार।
बिहार के लोग के किस्मत तबे जाके जागी।
जब कल कारखाना बिहार में हर जगह लागी।
तब काहे कोई बिहार छोड़ के एने ओने भागी।
खुशहाल होखित "ताज" आपन गांव जवार।
मिलित अगर सभे के बिहार में ही रोज़गार।
छोड़े के ना परित कबहूं आपन घर दुआर।
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ताजुद्दीन अंसारी

@tazuddin_ansari

तब काहे कोई बिहार छोड़ के एने ओने भागी।
खुशहाल होखित "ताज" आपन गांव जवार।
मिलित अगर सभे के बिहार में ही रोज़गार।
छोड़े के ना परित कबहूं आपन घर दुआर।
मिलित अगर सभे के बिहार में ही रोज़गार।
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ताजुद्दीन अंसारी

@tazuddin_ansari

मिलित अगर सभे के बिहार में ही रोज़गार।
मोबाइल सोझा नकारा बन गइल बा
आदमी अब बेचारा बन गइल बा
पहुंना हित नात साथी संघाती
मोबाइले अब सहारा बन गइल बा
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रिशु कुमार गुप्ता

@rishu_gupta

मोबाइल सोझा नकारा बन गइल बा
आदमी अब बेचारा बन गइल बा
पहुंना हित नात साथी संघाती
मोबाइले अब सहारा बन गइल बा
ओकरे हिसाब से खिलेला दुनिया
उहे गर्मी आ जाड़ा बन गइल बा
गरम भा ठंडा महसूस करावे
थर्मामीटर के पारा बन गइल बा
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रिशु कुमार गुप्ता

@rishu_gupta

ओकरे हिसाब से खिलेला दुनिया
उहे गर्मी आ जाड़ा बन गइल बा
गरम भा ठंडा महसूस करावे
थर्मामीटर के पारा बन गइल बा
दिन रात बस रही निहारत
ई आंख के तारा बन गइल बा
पातर छीतर मोटापा बा थमले
ई काजू आ छुआरा बन गइल बा
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रिशु कुमार गुप्ता

@rishu_gupta

दिन रात बस रही निहारत
ई आंख के तारा बन गइल बा
पातर छीतर मोटापा बा थमले
ई काजू आ छुआरा बन गइल बा
इज्जत आ मर्यादा मोबाइल में
ई पतलून के नाड़ा बन गइल बा
बैंक बनल एटीएम बनल
ई टैक्सी के भाड़ा बन गइल बा
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रिशु कुमार गुप्ता

@rishu_gupta

इज्जत आ मर्यादा मोबाइल में
ई पतलून के नाड़ा बन गइल बा
बैंक बनल एटीएम बनल
ई टैक्सी के भाड़ा बन गइल बा
लइकन खातिर ई आंगनबाड़ी
ए बी सी डी पहाड़ा बन गइल बा
स्कूल कॉलेज से कम नइखे
कापी किताब सारा बन गइल बा
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रिशु कुमार गुप्ता

@rishu_gupta

लइकन खातिर ई आंगनबाड़ी
ए बी सी डी पहाड़ा बन गइल बा
स्कूल कॉलेज से कम नइखे
कापी किताब सारा बन गइल बा
लोगवा देखीं लड़ेला अपने में
फोनवा अब अखाड़ा बन गइल बा
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रिशु कुमार गुप्ता

@rishu_gupta

लोगवा देखीं लड़ेला अपने में
फोनवा अब अखाड़ा बन गइल बा
पईसा बिना लोग देखअ,
एक देने तड़पे।
खाए के ना अन्न दाना,
जीव देखअ डहके।।
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राघवेंद्र प्रकाश 'रघु'

@raghwendra_prakash_raghu

पईसा बिना लोग देखअ,
एक देने तड़पे।
खाए के ना अन्न दाना,
जीव देखअ डहके।।
पईसा बा त लोग कइसे,
पउवा पखारेला।
नहाईला के बाद चढ़ी,
धोतियों खंगारेला।।
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राघवेंद्र प्रकाश 'रघु'

@raghwendra_prakash_raghu

पईसा बा त लोग कइसे,
पउवा पखारेला।
नहाईला के बाद चढ़ी,
धोतियों खंगारेला।।
साच कही नईखे पईसा,
अपनो खदेड़ेला।
भुला के सब रिश्ता-धरम,
सहियो में गलती जोहेला।।
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राघवेंद्र प्रकाश 'रघु'

@raghwendra_prakash_raghu

साच कही नईखे पईसा,
अपनो खदेड़ेला।
भुला के सब रिश्ता-धरम,
सहियो में गलती जोहेला।।
पईसवे से इज्ज़त देखअ,
पईसवे से शोहरत।
नईखे पईसा साच बाटे,
अपनो बा खदेड़त।।
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राघवेंद्र प्रकाश 'रघु'

@raghwendra_prakash_raghu

पईसवे से इज्ज़त देखअ,
पईसवे से शोहरत।
नईखे पईसा साच बाटे,
अपनो बा खदेड़त।।
पईसे से सब कुछ,
इहे लोग बा बुझत।
बिना पइसा वाला के,
केहू कहवा बा पूछत।।
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राघवेंद्र प्रकाश 'रघु'

@raghwendra_prakash_raghu

पईसे से सब कुछ,
इहे लोग बा बुझत।
बिना पइसा वाला के,
केहू कहवा बा पूछत।।
दोष ई जमाना के कि,
दोष ई समाज के।
जिनका भीरी पईसा,
इज्ज़त होता उ समाज के।।
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राघवेंद्र प्रकाश 'रघु'

@raghwendra_prakash_raghu

दोष ई जमाना के कि,
दोष ई समाज के।
जिनका भीरी पईसा,
इज्ज़त होता उ समाज के।।
बिना पईसा रोटी खाती,
रोए केहू आज के।
गजबे सच्चाई "रघु",
इहे बा समाज के..।।
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राघवेंद्र प्रकाश 'रघु'

@raghwendra_prakash_raghu

बिना पईसा रोटी खाती,
रोए केहू आज के।
गजबे सच्चाई "रघु",
इहे बा समाज के..।।
उनुकर इरादा हमके सतावे के बा,
हमहीं से प्रेम, हमहीं से छुपावे के बा।
कब ले देखब छुप-छुप के चाँद के,
अब चाँद के ही जमीन पर बुलावे के बा।
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मुकेश यादव "भावुक"

@bhawuk

उनुकर इरादा हमके सतावे के बा,
हमहीं से प्रेम, हमहीं से छुपावे के बा।
कब ले देखब छुप-छुप के चाँद के,
अब चाँद के ही जमीन पर बुलावे के बा।
रोम-रोम में एगो अलगे नशा चढ़ल बा,
इहे खुशबू अब दुनिया में महकावे के बा।
प्रेम के वासना मत बुझीं, ए भाई,
ई बात अब मजनुवन के समझावे के बा।
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मुकेश यादव "भावुक"

@bhawuk

रोम-रोम में एगो अलगे नशा चढ़ल बा,
इहे खुशबू अब दुनिया में महकावे के बा।
प्रेम के वासना मत बुझीं, ए भाई,
ई बात अब मजनुवन के समझावे के बा।
मोबाइल आ इंटरनेट के एह दौर में भी,
कवनो कबूतर से चिट्ठी पहुँचावे के बा।
मन बना लीं त मंजिल दूर कहाँ बा,
सात समंदर पार भी घर बनावे के बा।
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मुकेश यादव "भावुक"

@bhawuk

मोबाइल आ इंटरनेट के एह दौर में भी,
कवनो कबूतर से चिट्ठी पहुँचावे के बा।
मन बना लीं त मंजिल दूर कहाँ बा,
सात समंदर पार भी घर बनावे के बा।
‘भावुक’, जब-जब उनकर याद सताई,
लौट के, एक ना एक दिन त आवे के बा।
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मुकेश यादव "भावुक"

@bhawuk

‘भावुक’, जब-जब उनकर याद सताई,
लौट के, एक ना एक दिन त आवे के बा।
रेसा-रेसा टूट गइल,
का बताईं, का छूट गइल।
मितवा जबसे गाँव छोड़नी,
किस्मत हमसे रूठ गइल।
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मुकेश यादव "भावुक"

@bhawuk

रेसा-रेसा टूट गइल,
का बताईं, का छूट गइल।
मितवा जबसे गाँव छोड़नी,
किस्मत हमसे रूठ गइल।
​शहर त बा, पर अपनावत नईखे,
गाँव भी अब त बोलावत नईखे,
लोग कहेला— 'मजा मारत होइहें',
रुपिया के अइसन गारत होइहें।
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मुकेश यादव "भावुक"

@bhawuk

​शहर त बा, पर अपनावत नईखे,
गाँव भी अब त बोलावत नईखे,
लोग कहेला— 'मजा मारत होइहें',
रुपिया के अइसन गारत होइहें।
​मुड़ी के अब बार ना बचल,
जियते गहिरा दुख भइल।
मितवा जबसे गाँव छोड़नी,
किस्मत हमसे रूठ गइल।
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मुकेश यादव "भावुक"

@bhawuk

​मुड़ी के अब बार ना बचल,
जियते गहिरा दुख भइल।
मितवा जबसे गाँव छोड़नी,
किस्मत हमसे रूठ गइल।
बतिया केहू के खल जाला
इरखा मन मे हल जाला
शक रहेला दुश्मन पर जी
आपन ही केहू छल जाला
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शम्स जमील

@shamsh_jamil

बतिया केहू के खल जाला
इरखा मन मे हल जाला
शक रहेला दुश्मन पर जी
आपन ही केहू छल जाला
केहू जोर लगावे बाकिर
दाल केहू के गल जाला
नया पर धन होखे जहिया
घमंड आपरूपी पल जाला
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शम्स जमील

@shamsh_jamil

केहू जोर लगावे बाकिर
दाल केहू के गल जाला
नया पर धन होखे जहिया
घमंड आपरूपी पल जाला
पावे के जब लकम बा धरत
खोवे के आदत टल जाला
मेहनत से भाग बदलेला केहू
बपौति से हाथ केहू मल जाला
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शम्स जमील

@shamsh_jamil

पावे के जब लकम बा धरत
खोवे के आदत टल जाला
मेहनत से भाग बदलेला केहू
बपौति से हाथ केहू मल जाला
बुढ़वती के चिंता करते करते
जवानी के सुरूज ढल जाला
एह दुनिया से हाथ पसारी
आदमी एकदिन चल जाला
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शम्स जमील

@shamsh_jamil

बुढ़वती के चिंता करते करते
जवानी के सुरूज ढल जाला
एह दुनिया से हाथ पसारी
आदमी एकदिन चल जाला
हम का करीं, बुझाते नइखे.
दुःख मुसीबत, जाते नइखे.
दोसरा के छोड़ीं महाराज,
आपन तऽ, सम्हराते नइखे.
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नूरैन अंसारी

@noorain_ansari

हम का करीं, बुझाते नइखे.
दुःख मुसीबत, जाते नइखे.
दोसरा के छोड़ीं महाराज,
आपन तऽ, सम्हराते नइखे.
खेती कइनी नोकरी कइनी,
कही कुछउ, पोसाते नइखे.
हाल बताई हम केकरा से,
जब क़ेहु, पतियाते नइखे.
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नूरैन अंसारी

@noorain_ansari

खेती कइनी नोकरी कइनी,
कही कुछउ, पोसाते नइखे.
हाल बताई हम केकरा से,
जब क़ेहु, पतियाते नइखे.
कबले माहुर पियत रहीं,
बोलला बिना,ख़ेपाते नइखे
पंच बोलाइ तऽ बाऊर बा,
आ घर में ,फरियाते नइखे.
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नूरैन अंसारी

@noorain_ansari

कबले माहुर पियत रहीं,
बोलला बिना,ख़ेपाते नइखे
पंच बोलाइ तऽ बाऊर बा,
आ घर में ,फरियाते नइखे.
होखे आपन चाहे वीराना,
बढ़ल क़ेहु के,सोहाते नइखे.
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नूरैन अंसारी

@noorain_ansari

होखे आपन चाहे वीराना,
बढ़ल क़ेहु के,सोहाते नइखे.