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गीत जिनिगी के गावल ह आपन धरम-जयकांत सिंह ‘जय’
21 घंटे पहले
भाई-भाई में जब बँटवारा भइल
2 महीना पहले
अब त दूरे से, राम-राम होता इहाँ
2 महीना पहले
कहाँ केहु दिल में उपकार राखत बा
4 महीना पहले
अपने लोग अब पराया हो गइल
4 महीना पहले
झूठ बोलल आजकल शान में गिनाता
4 महीना पहले
माथे पर गमछा सजावल गइल बा
4 महीना पहले
आव एगो नया बस्ती बसावल जाव
4 महीना पहले
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