कइसे ई जिनगीया कटी, कुछु बोल सखी

प्रकाशित: 08 अप्रैल, 2026

कइसे ई जिनगीया कटी, कुछु बोल सखी
बस उनुकर सूरतीया देखीं, कुछ बोल सखी..

उनके से गुन कुल बाटे सहूरवा
कुल सिंगार हमार भइल महुरवा
अब केकरा ला सजी धजी, कुछ बोल सखी
कइसे ई जिनगीया कटी, कुछु बोल सखी

बोले कोयलिया बोली, काँव काँव लागे
मन दो काहें पिरितिया से भागे
निरमोही कइसे के कहीं, कुछ बोल सखी
कइसे ई जिनगीया कटी, कुछु बोल सखी

बाटे उम्मीद मोर अइहे सजनवा
जइसे चारे महीना मे बदले महिनवा
पिया ‘भावुक’ के पइया पड़ी, कुछ बोल सखी
कइसे ई जिनगीया कटी, कुछु बोल सखी

मुकेश यादव "भावुक"

पेशेवर सिविल इंजिनियर नई दिल्ली

"मुकेश यादव 'भावुक' भोजपुरी के उभरत रचनाकार बाड़ें. इहां के गीत/ग़ज़ल मे आम जनमानस के आवाज़ होला."

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