चलत जबले जिनगी के गाड़ी रहे,
न पईसा न कवनो उधारी रहे।
नेह-छोह अइसन बनल रहे हरदम,
कि उमिर भर कायम ई यारी रहे।
जरूरत पड़े त ई जानो बा हाजिर,
कहे-सुने में कहुँ न दुशवारी रहे।
बोवल जाई अबसे भरोसे के खेती,
न मन में कवनो दुख भारी रहे।
हँसत-खेलत काटीं निमन सब समइया,
बाकिर बुरा वक्त के भी तइयारी रहे।
कहाँ अब बा कवनो डर-भय ‘भावुक’,
जिनगी जंग ह, रोज जंग जारी रहे।
कठिन शब्द अउर अर्थ
- जिनगीजिंदगी।
- छोहममता या दया।
- निमनई ठेठ भोजपुरी शब्द ह। कवनो चीज के गुणवत्ता (Quality) बतावे खातिर एकर प्रयोग कइल जाला
- दुशवारीई शब्द उर्दू से आइल बा, बाकिर भोजपुरी कविता में एकर प्रयोग बात के वजन बढ़ा देवेला। एकर मतलब होला कवनो काम में आवे वाली बाधा
- नेह-छोहई शब्द भोजपुरी संस्कृति के जान ह। ‘नेह’ माने स्नेह आ ‘छोह’ माने लगाव या दया। जब केहू से गहिर लगाव होला त ओकरा के ‘नेह-छोह’ कहल जाला।
