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भोजपुरी साहित्य

जान में हमरे जान तब आई

बंदना मिश्रा
25 अक्टूबर 2026 · 12:51 अपराह्न IST

जान में हमरे जान तब आई।
जान कही के जब जान बुलाई।
बेसुध बानी कुछ कहल ना जाई।
जान कही के जब जान बोलाई।

कबसे जगाई हम जागत नईखी।
भइल का कुसूर उठी हमके बताई।
हियरा से अपने हियरा मिलाई।
जान कही के हमें जान बोलाई।

भइल भिनसार उठी अब जाई।
चाहत होखी जो आपन भलाई।
मनावत बानी मानी रउवा जाई
जान कही के अब जान बोलाई।

करी ना नाटक हमे ना सताई।
कही त रउरे बाऊ जी के बोलाईं।
दिहे चारी पैना उठी तब जाईब।
जान कही के तब जान बोलाई।

करब नाटक त हमहूं रूठी जाईब।
हम नाही बोलब केतना बोलाईब।
मानब तब्बे जब रउवे मनाईब।
जान कही के जब जान बोलाइब।

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