माटी कवि सम्मेलन

साँझीये से बिहँसे ला मनवा हो रामा,बैरी पलँगवा

गणेश नाथ तिवारी "विनायक"

12 अप्रैल, 2026

साँझीये से बिहँसे ला मनवा हो रामा,
बैरी पलँगवा
आधी रतिया के निनिया ना आवे हो रामा
बैरी पलँगवा

हहरा के बहे जब पछुआ के झोंका,
मोजरि के महँक से हिया भइल चोखा
काँट लेखा लागेला सेजरिया हो रामा
बैरी पलँगवा
साँझीये से बिहँसे ला मनवा हो रामा,
बैरी पलँगवा

अँखिया के लोरवा से लिखतानी पाती
धड़केला की ना तोहार हिया ए सँघाती
अइबs कबले हमरो पजरिया हो रामा
बैरी पलँगवा
साँझीये से बिहँसे ला मनवा हो रामा,
बैरी पलँगवा

सोरहो सिंगरवा मोर भइल बा बटोही
परदेस जाके काहे भइल तू निर्मोही
फड़फड़ाता मोर कोमल करेजवा हो रामा
बैरी पलँगवा
साँझीये से बिहँसे ला मनवा हो रामा,
बैरी पलँगवा

कठिन शब्द अउर अर्थ

  • लागेला: महसूस होना या प्रतीत होना।

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गणेश नाथ तिवारी "विनायक"

संस्थापक-जय भोजपुरी जय भोजपुरिया, सह सम्पादक- सिरिजन भोजपुरी तिमाही ई पत्रिका श्रीकरपुर,सिवान

"वर्तमान पता-3,प्रिन्सेप लेन कोलकाता शिक्षा - स्नातक मो0 9523825251 (सऊदी अरब में मेकेनिकल टेक्नीशियन के रूप में नोकरी 2011 से 2024 तक )"

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