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भोजपुरी साहित्य

आव एगो नया बस्ती बसावल जाव

गणेश नाथ तिवारी "विनायक" , श्रीकरपुर,सिवान
19.2K Views
12 अप्रैल 2026 · 11:27 पूर्वाह्न IST

आव एगो नया बस्ती बसावल जाव,
सुनर एगो नया दुनिया बनावल जाव।

मजहब के कवनो देवाल ना रही उहवा,
मानवता के एगो नया घर बनावल जाव।

जातियन के कुल करम भरम तूर के,
इसांनियत के बस्ती सजावल जाव।

देहला के औकात जदि बा हमनी के तऽ,
चलऽ कुछ लो पर खुशी लुटावल जाव ।

प्यार मोहब्बत से तs सभे खुस रहेला,
दुनिया से नफरत के दूर भगावल जाव।

भोजपुरिया लो तऽ एक दूसरे में भिड़ल बा लो,
चली मिलजुल भोजपुरी के मान बढ़ावल जाव।

गोली बम बारुद,विरोध में फिरत बा सब लो
चलs ‘गणेश’बिना एकरा जहां बनावल जाव।

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