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भोजपुरी साहित्य

सतावेले दुनिया, रोवावेले दुनिया

गणेश नाथ तिवारी "विनायक"
9 अप्रैल 2026 · 06:35 पूर्वाह्न IST

सतावेले दुनिया, रोवावेले दुनिया
नया रोज चेहरा, देखावेले दुनिया।

​भरल पेट जेकर, सुतेला ऊ सुख से
गला भूख के तऽ, दबावेले दुनिया।

​भले आग लागल, पड़ोसी के घर मे
तमाशा खड़ा सब, करावेले दुनिया।

​ई कागज के नोटन, के बा खेल सारा
ई रिस्ता के सूली, चढ़ावेले दुनिया।

​कहाँ साँच बोले, के हिम्मत बा केहु में
बस अब झूठो के , सजावेले दुनिया।

​सचाई के रस्ता, कठिन बा हमेशा
‘विनायक’ई साँचो, बतावेले दुनिया।

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