सतावेले दुनिया, रोवावेले दुनिया
नया रोज चेहरा, देखावेले दुनिया।
भरल पेट जेकर, सुतेला ऊ सुख से
गला भूख के तऽ, दबावेले दुनिया।
भले आग लागल, पड़ोसी के घर मे
तमाशा खड़ा सब, करावेले दुनिया।
जरूर पढ़ें
हमरा बलमु जी के बड़ी-बड़ी अँखिया से
देखलीं जे बइठि के दरिया किनारे
साँझीये से बिहँसे ला मनवा हो रामा,बैरी पलँगवा
ई कागज के नोटन, के बा खेल सारा
ई रिस्ता के सूली, चढ़ावेले दुनिया।
कहाँ साँच बोले, के हिम्मत बा केहु में
बस अब झूठो के , सजावेले दुनिया।
सचाई के रस्ता, कठिन बा हमेशा
‘विनायक’ई साँचो, बतावेले दुनिया।