ताखा पर दिया बारऽता केहू
छन्ने छन्ने जिया जारऽता केहू
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बचपन के हमरा याद के दरपन कहाँ गइल
बाटे बस बात अब भरोसा के इहवाँ
भाई-भाई में जब बँटवारा भइल
सालों से उहे गाँव मे आपन
हमरो राह निहारऽता केहू
परदेश के जबसे लकम लागल
इयाद दिल मे उतारऽता केहू
जे प्रीत के भूखल उहे नू जानी
एक एकदिन कइसे टारऽता केहू
केहू बा हाड़-मास एक कइले
आ दरे पर नोट झारऽता केहू
समय के बाटे बस खेला ए भाई
खुद से ही खुद के हारऽता केहू