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भोजपुरी साहित्य

बाटे बस बात अब भरोसा के इहवाँ

मुकेश यादव "भावुक"
8 अप्रैल 2026 · 06:35 पूर्वाह्न IST

ताकेला झूठ अब झरोखा से इहवाँ,
बाटे बस बात अब भरोसा के इहवाँ।

​कहाँ बन्हाइल बा सूरज के रोशनी,
धरती, आसमाँ आ चान से पूछनी,
तबो त अंजोरिया के धोखा बा इहवाँ।
ताकेला झूठ अब झरोखा से इहवाँ।

​साथ बा लोग जब मौसम बहार बा,
पतझड़ में सोझा साफे इनकार बा,
सनेहिया छीटाइल बा बोरा से इहवाँ,
ताकेला झूठ अब झरोखा से इहवाँ।

​भीजल गोइठा में सुनुगता अहरा,
पईचा प कटत बा भीतर आ बहरा,
‘भावुक’ के नेह अकोरा में इहवाँ,
ताकेला झूठ अब झरोखा से इहवाँ।

ताकेला झूठ अब झरोखा से इहवाँ,
बाटे बस बात अब भरोसा के इहवाँ।

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