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कविता

आपन लोग हरावत बाटे

दुनिया बात बतावत बाटे,आपन लोग हरावत बाटे।मान, जान अउरी गरिमा के,तफरी खूब उड़ावत बाटे।। ​जेकरा के आपन कहनी हम,विष के बीज जमावत बाटे।हँसत देख के दुनिया सगरी,भीतर-भीतर गावत बाटे।। ​साँच कहल अब…
मुकेश यादव "भावुक"
13 मई 2026 · 12:14 अपराह्न IST

दुनिया बात बतावत बाटे,
आपन लोग हरावत बाटे।
मान, जान अउरी गरिमा के,
तफरी खूब उड़ावत बाटे।।

​जेकरा के आपन कहनी हम,
विष के बीज जमावत बाटे।
हँसत देख के दुनिया सगरी,
भीतर-भीतर गावत बाटे।।

​साँच कहल अब मुश्किल भइल,
झूठ के शोर सुनावत बाटे।
नेह-छोह के धागा कच्चा,
लालच आज तुरावत बाटे।।

​काँटा बन के रस्ता रोके,
जे राही के भावत बाटे।
भरम के ऊँच महल गढ़ के,
सपना के भरमावत बाटे।

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