दुनिया बात बतावत बाटे,
आपन लोग हरावत बाटे।
मान, जान अउरी गरिमा के,
तफरी खूब उड़ावत बाटे।।
जेकरा के आपन कहनी हम,
विष के बीज जमावत बाटे।
हँसत देख के दुनिया सगरी,
भीतर-भीतर गावत बाटे।।
साँच कहल अब मुश्किल भइल,
झूठ के शोर सुनावत बाटे।
नेह-छोह के धागा कच्चा,
लालच आज तुरावत बाटे।।
जरूर पढ़ें
राती भर मच्छर मुँआ देले बाटे
हियरा में फूल बन के खिले कौनो-कौनो बात
दरिया के बीच बइठ के कागज के नाव में
काँटा बन के रस्ता रोके,
जे राही के भावत बाटे।
भरम के ऊँच महल गढ़ के,
सपना के भरमावत बाटे।