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अनपढ़ जाहिल सरकार हो,जिनिगिया बेकार मोर कइले

88 Views • अप्रैल 15, 2026

अनपढ़ जाहिल सरकार हो,
जिनिगिया बेकार मोर कइले
जिनगी कइले बेजार हो
जिनिगिया बेकार मोर कइले

माई के गहना आ बाबू के खेतवा,
बेचि के पढ़ल बा बेचारा ई बेटवा।
पेपर लीक कइले बार-बार हो,
जिनिगिया बेकार मोर कइले
अनपढ़ जाहिल सरकार हो…

खेतवा में सूखल बा अन्न के ओरी,
फाँसी लगावेला किसान ओही डोरी।
रोअत बा सगरो परिवार हो,
जिनिगिया बेकार मोर कइले
अनपढ़ जाहिल सरकार हो..

नमक आ तेल भइल सोना के भाव हो,
मरत बा भूखल अब सगरो ई गाँव हो।
नून-रोटी भइल दुश्वार हो,
जिनिगिया बेकार मोर कइले
अनपढ़ जाहिल सरकार हो…

बिना घूस फाइल अब एको डेग ना डोले,
आन्हर ई तंत्र अब केकरा के बोले।
चहुँओर मचल लूटमार हो,
जिनिगिया बेकार मोर कइले
अनपढ़ जाहिल सरकार हो…

हाथ के छाला आ गोड़ के बेवायी,
महंगाई के मार में मिलल ना दवाई।
मरले बा कुरु कुरु मार हो,
जिनिगिया बेकार मोर कइले
अनपढ़ जाहिल सरकार हो…

डिगरी के कागज अब रद्दी के भाव बा,
पढल-लिखल लइकन के मनवा में घाव बा।
बेचे सभे पकौड़ा आ अचार हो,
जिनिगिया बेकार मोर कइले
अनपढ़ जाहिल सरकार हो…

भाषण में बाटे सभे स्वर्ग देखावत,
बाकी हकीकत में नरक खियावत।
झूठ के बा सगरो परचार हो,
जिनिगिया बेकार मोर कइले
अनपढ़ जाहिल सरकार हो…

कलम अब तिवारी ‘विनायक’ के जागल,
देखि के ई तेवर भ्रष्टाचारी बाड़े भागल।
मचल चहुओर हाहाकार हो,
जिनिगिया बेकार मोर कइले
अनपढ़ जाहिल सरकार हो…

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