भाई-भाई में जब बँटवारा भइल,
पाटीदारन के घरे भण्डारा भइल
माई-बाबू के केहू झूठो ना पुछल
एकही गो रोटी कई खाड़ा भइल.
अमीरी में डाह के धइलस बेमारी,
गरीबी में तऽ प्रेम से गुजारा भइल.
देखल ना गइल लोग से ई बढ़न्ती,
घर फुटल, स्वाहा भाईचारा भइल.
उठ गइल आख़िर देवाल अँगना में,
पर- पंचायत जबकि सारा भइल.
नूरैन हेरा गइल ख़ुशी घर से हमरा,
टुवर जइसन आँगन,ओसारा भइल
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