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कविता

इलू इलू में मत रह

इलू इलू में मत रहs जादा,
जोड़े के पड़ी , ईंटा के रादा।

तौसीफ़ अहमद , ब्रह्मपुर, बक्सर
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4 नवम्बर 2026 · 08:53 अपराह्न IST

इलू इलू में मत रहs जादा,
जोड़े के पड़ी , ईंटा के रादा।

हरमेश रखs तू दिमाग में,
माई बाबू से कईल वादा।

चाक चुक से रहs तनी दूर,
पढ़ाई में ध्यान रखs जादा।

बुरा मत मनी हs ,ए बबुआ,
मन में रखीहs ई बात सदा।

दाल भात , रोटी सब्जी, निक,
चटकार लs मन यदा कदा।

अटर,पटर, ई बर्गर, कुछ दिन,
रोजे, जवनिये में बनाई दादा।

सिगरेट ,गुटखा कैंसर के जड़,
खा पान मीठा तs कबो सादा।

बुरा मत मनी हs ,ए बबुआ,
मन में रखीहs ई बात सदा।

रील वील , भइल छिल बिल,
नंगई के कहे मुक्ति कुछ मादा।

धरम जाती करावे लौआ लाठी,
नेता के साथी, जरावे ई काठी।

बच के तौसीफ़ बचा के रखिय,
भिंकावे सोझ मन में ई हाडा।

बुरा मत मनी हs ,ए बबुआ,
मन में रखीहs ई बात सदा।

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