माटी कवि सम्मेलन

ना रहित झाँझर मड़इया फूस के

प्रकाशित: 10 अप्रैल, 2026

ना रहित झाँझर मड़इया फूस के
घर में आइत घाम कइसे पूस के

के कइल चोरी, पता कइसे लगी
चोर जब भाई रही जासूस के

आज ऊ लँगड़ो दरोगा हो गइल
देख लीं, सरकार जादू घूस के

ख्वाब में भलही रहे एगो परी
सामने चेहरा रहे मनहूस के

जे भी बा, बाटे बनल बरगद इहाँ
पास के सब पेड़ के रस चूस के

तूहीं ना तऽ जिन्दगी में का रही
छोड़ के मत जा ए ‘भावुक’ रूस के

कठिन शब्द अउर अर्थ

  • घाम: कड़ा धूप के घाम कहल जाला।

मनोज भावुक

कवि-गीतकार

"मनोज भावुक (जन्म 2 जनवरी 1976) भोजपुरी में लिखने वाले एक भारतीय कवि , अभिनेता, टेलीविजन प्रस्तुतकर्ता और पटकथा लेखक हैं, जो भोजपुरी सिनेमा में सक्रिय हैं । उन्हें फिल्मफेयर और फेमिना भोजपुरी आइकॉन्स द्वारा "साहित्य में उत्कृष्ट योगदान" की श्रेणी में सम्मानित किया गया है। उन्होंने कई पुरस्कार विजेता पुस्तकें लिखी हैं। वे भोजपुरी भाषा और साहित्य को बढ़ावा देते हैं"

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