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चांद पर स्पेसएक्स के रॉकेट की टक्कर, वैज्ञानिकन के हाथ लागल दुर्लभ रिसर्च के मौका

चांद पर इंसानी मशीन के टकराए के घटना अपने आप में नया नइखे, बाकिर एह बेर मामला थोड़ा अलग बा। स्पेसएक्स के एगो फाल्कन 9…
द पुरवइया डेस्क 30 अगस्त 2026 (पब्लिश्ड: 10:09 IST)
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चांद पर इंसानी मशीन के टकराए के घटना अपने आप में नया नइखे, बाकिर एह बेर मामला थोड़ा अलग बा। स्पेसएक्स के एगो फाल्कन 9 रॉकेट के ऊपरी हिस्सा अंतरिक्ष में भटकत-भटकत आखिरकार चांद से जा टकराइल। टक्कर के बाद चांद के सतह पर एगो नया गड्ढा बन गइल आ वैज्ञानिकन के हाथ एगो अइसन मौका लाग गइल, जवन रोज रोज ना मिलेला।

असल में ई रॉकेट के ऊपरी हिस्सा जनवरी 2025 में लॉन्च भइल रहे। फाल्कन 9 रॉकेट फायरफ्लाई एयरोस्पेस के ब्लू घोस्ट मून लैंडर समेत चंद्रमा से जुड़ल मिशन के आगे बढ़वले रहे। अपना काम पूरा कइला के बाद रॉकेट के ऊपरी हिस्सा पृथ्वी के लगे वापस ना आइल आ अंतरिक्ष में घूमत रहल। आखिरकार चांद के गुरुत्वाकर्षण आ ओकर रास्ता पर पड़त दूसरे प्रभावन के चलते ओकर टक्कर चांद से हो गइल।

5 अगस्त 2026 के करीब 8,700 किलोमीटर प्रति घंटा के रफ्तार से ई चार टन के आसपास वजन वाला हिस्सा चांद के सतह से टकराइल। टक्कर एतना जोरदार रहे कि चांद के जमीन से धूल आ चट्टान के टुकड़ा ऊपर उछल गइल। बाद में वैज्ञानिकन के पता चलल कि टक्कर वाली जगह पर एगो नया इम्पैक्ट क्रेटर बन गइल बा।

अब सवाल बा कि एहमें वैज्ञानिकन के फायदा का होई?

चांद पर प्राकृतिक रूप से उल्कापिंड लगातार टकरात रहेलें। बाकिर वैज्ञानिकन के पहिले से पता होखे कि कवन चीज कब आ कहां टकराई, ई बहुत दुर्लभ मौका होला। एह बेर रॉकेट के रास्ता, टक्कर के समय आ जगह के बारे में पहिले से अनुमान मौजूद रहे। एहसे वैज्ञानिक टक्कर से पहिले आ टक्कर के बाद के तस्वीर आ आंकड़ा आपस में मिलाके देख सकत बाड़ें।

NASA के लूनर रिकॉनिसेंस ऑर्बिटर बाद में एह जगह के तस्वीर लेले बा। 11 आ 12 अगस्त के खींचल तस्वीर में रॉकेट के टक्कर से बनल नया गड्ढा साफ नजर आइल। वैज्ञानिकन के मुताबिक गड्ढा करीब 18 मीटर चौड़ा बा आ तीन मीटर से कम गहिराई के मापल गइल बा।

दक्षिण कोरिया के चंद्र ऑर्बिटर दानुरी भी एह घटना में काम आइल। ओकर कैमरा टक्कर वाली जगह के पहिले आ बाद के तस्वीर जुटावे में मदद कइल। एहसे वैज्ञानिकन के ई समझे में मदद मिली कि रॉकेट के टक्कर से चांद के सतह पर असल में का बदलाव आइल।

वैज्ञानिकन खातिर सबसे दिलचस्प बात ई बा कि अब एह घटना के इस्तेमाल भविष्य के चंद्र मिशन सभ के तैयारी में कइल जा सकेला। रॉकेट के टक्कर से निकले वाला धूल, चट्टान आ गैस के अध्ययन से चांद पर तेज रफ्तार से होखे वाला टक्कर के असर के बेहतर ढंग से समझल जा सकेला।

एहसे भविष्य में अगर चांद पर वैज्ञानिक स्टेशन, उपकरण, रोवर या इंसानी बेस बनावल जाई, त ओकरा आसपास अंतरिक्ष के कचरा के रास्ता के लेके ज्यादा सावधानी बरतल जा सकेला। वैज्ञानिक ई भी समझे चाहत बाड़ें कि अइसन टक्कर के असर चंद्र सतह पर कइसे फैलत बा।

एह घटना से एगो अउरी महत्वपूर्ण बात सामने आइल बा। अंतरिक्ष में भेजल गइल रॉकेट आ दूसरे उपकरण मिशन खत्म होखला के बाद भी समस्या पैदा कर सकत बाड़ें। पृथ्वी के आसपास बहुत सारा स्पेस जंक के चर्चा पहिले से होत आइल बा, लेकिन चांद के आसपास बढ़त मिशनन के साथ अब वहां भी अइसन चीज सभ के सही तरीके से संभाले के सवाल उठे लागल बा।

वैज्ञानिकन के नजर में ई टक्कर चांद खातिर कवनो बड़ी तबाही नइखे। चांद के सतह पर प्राकृतिक उल्कापिंडन के टक्कर से अइसन गड्ढा बनत रहेला। बाकिर इंसान के बनावल एगो रॉकेट जब जानबूझ के ना सही, चांद से टकरा गइल, त ओकरा के पहिले से ट्रैक कइल जा रहल रहे। एह वजह से वैज्ञानिकन के लगे एगो लगभग नियंत्रित प्रयोग जइसन मौका आ गइल।

मतलब साफ बा। स्पेसएक्स के रॉकेट के चांद से टकरावल भले एगो अनचाही घटना रहे, बाकिर वैज्ञानिक अब एह हादसा से मिले वाला हर आंकड़ा बटोर रहल बाड़ें। चांद के सतह, धूल, गड्ढा आ टक्कर के असर से जुड़ल ई जानकारी आगे के चंद्र मिशन खातिर काफी काम के साबित हो सकेला।

आ आवे वाला समय में जब इंसान चांद पर अउरी ज्यादा मिशन भेजी, तब शायद आज के ई भटकल रॉकेट वैज्ञानिकन के एगो जरूरी सबक दे गइल होई कि चांद के खाली पहुंचल ही काफी नइखे, वहां पहुंचला के बाद अंतरिक्ष कचरा के कइसे संभाली, ई भी उतने ही जरूरी बा।

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