पुरवइया

48 प्रकाश वर्ष दूर एगो ग्रह पर मिलल वायुमंडल

ब्रह्मांड में इंसान के सबसे बड़ सवालन में एगो सवाल ई भी बा कि का हमनी के अलावा कहीं अउरी जिंदगी मौजूद बा? अब वैज्ञानिकन…
द पुरवइया डेस्क 30 अगस्त 2026 (पब्लिश्ड: 10:00 IST)

ब्रह्मांड में इंसान के सबसे बड़ सवालन में एगो सवाल ई भी बा कि का हमनी के अलावा कहीं अउरी जिंदगी मौजूद बा? अब वैज्ञानिकन के एगो अइसन खोज मिलल बा, जे एह सवाल के जवाब के खोज में एगो नया उम्मीद जरूर जगावत बा।

वैज्ञानिकन के पहिला बेर एगो सुदूर तारा के चक्कर काटत पृथ्वी जइसन चट्टानी ग्रह के आसपास वायुमंडल के संकेत मिलल बा। ई ग्रह अपना तारा के ओह इलाका में मौजूद बा, जहां सही परिस्थिति होखे पर पानी तरल रूप में मौजूद रह सकेला।

ग्रह के नाम एलएचएस 1140 बी बा। ई धरती से करीब 48 प्रकाश वर्ष दूर स्थित बा। ई एगो लाल बौना तारा के चक्कर काटेला, जवन आकार में हमनी के सूरज से छोट आ तापमान में भी ठंडा बा।

अब एह खोज के सबसे खास बात समझीं। वैज्ञानिकन के एह ग्रह के वायुमंडल में हीलियम गैस के संकेत मिलल बा। हालांकि, सिर्फ हीलियम मिलला से ई साबित ना होला कि ग्रह पर जीवन मौजूद बा।

हीलियम अपने आप में जीवन खातिर अनुकूल गैस ना मानल जाला। लेकिन वैज्ञानिकन के मानना बा कि ग्रह के वायुमंडल के ऊपरी हिस्सा में हीलियम के साथ अउरी गैस भी हो सकेलीं। अब आगे के रिसर्च में एह गैसन के पता लगावल जरूरी होई।

एह ग्रह के लेकर वैज्ञानिकन के दिलचस्पी के एगो अउरी वजह बा। एलएचएस 1140 बी अपना तारा से अइसन दूरी पर बा, जेकरा के वैज्ञानिक रहने लायक क्षेत्र कहेलें।

इहे इलाका के आम बोलचाल में गोल्डिलॉक्स जोन भी कहल जाला। मतलब ना बहुत गरम आ ना बहुत ठंडा। ठीक ओतना तापमान, जहां पानी के तरल रूप में मौजूद रहे के संभावना बन सके।

पृथ्वी पर जीवन खातिर पानी के भूमिका सबसे अहम बा। एह वजह से जब वैज्ञानिक कवनो दूसरे ग्रह में पानी के संभावना देखेलें, त ओकरा पर खास नजर रखल जाला।

अगर ग्रह अपना तारा के बहुत नजदीक होई, त तापमान एतना बढ़ सकेला कि पानी टिके के मुश्किल हो जाई। आ अगर ग्रह बहुत दूर होई, त अत्यधिक ठंड के कारण पानी जम सकेला। एहसे सही दूरी जीवन के संभावना के लिहाज से महत्वपूर्ण मानल जाला।

अब तक वैज्ञानिक सौर मंडल के बाहर 6 हजार से ज्यादा ग्रह खोज चुकल बाड़ें। लेकिन पृथ्वी जइसन छोट आ चट्टानी ग्रह बहुत कम मिलल बा। एह तरह के ग्रह पर वायुमंडल के संकेत मिलल वैज्ञानिकन खातिर बड़ा कदम मानल जा रहल बा।

एह शोध के प्रमुख लेखक हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के डॉ. कॉलिन चेरुबिम एह खोज के बहुत बड़ी उपलब्धि बतवले बाड़ें। उनका मुताबिक, कवनो तारा के रहने लायक क्षेत्र में मौजूद चट्टानी ग्रह के वायुमंडल के संकेत पहिला बेर मिलल बा।

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के डॉ. डेविड शार्बोनो के मुताबिक, इंसान के सामने अबहियो सबसे बड़ा सवाल ई बा कि का हमनी के ब्रह्मांड में अकेले बानीं। धरती आ सौर मंडल से बाहर जीवन के तलाश में ई अध्ययन एगो महत्वपूर्ण कदम बा।

हालांकि वैज्ञानिक खुद साफ कर रहल बाड़ें कि अभी एलएचएस 1140 बी पर जीवन खोज लिहल गइल बा, अइसन दावा नइखे कइल जा सकेला। अभी कहानी वायुमंडल के संकेत तक ही पहुंचल बा।

वैज्ञानिकन के अगिला नजर एह बात पर बा कि ग्रह के वायुमंडल में हीलियम के अलावा अउरी कवन-कवन गैस मौजूद बाड़ीं। अगर वहां पानी आ जीवन से जुड़ल कुछ खास रासायनिक संकेत मिलल, त एह ग्रह के महत्व बहुत बढ़ जाई।

लेकिन एलएचएस 1140 बी अकेला ग्रह नइखे, जे जीवन के खोज में वैज्ञानिकन के उम्मीद जगावत बा।

के2-18बी नाम के एगो सब नेपच्यून ग्रह पर भी वैज्ञानिकन के काफी दिलचस्पी बा। मानल जाला कि एह ग्रह के भीतर पानी से भरल हिस्सा हो सकेला।

एक समय एह ग्रह के चर्चा तब तेज हो गइल रहे, जब वैज्ञानिकन के वहां डाइमेथाइल सल्फाइड नाम के गैस के संकेत मिलल। धरती पर ई गैस समुद्री जीव सभ से जुड़ल मिलेला।

लेकिन बाद में एह संकेत के दोबारा जांचल गइल। साल 2025 में नासा के नेतृत्व में भइल विश्लेषण में सामने आइल कि संकेत एतना मजबूत नइखे कि गैस के मौजूदगी के पक्का पुष्टि कइल जा सके। वैज्ञानिकन ई भी बतवले कि ई गैस बिना जीवन के भी कुछ प्राकृतिक प्रक्रिया से बन सकेला।

एही तरह ट्रैपिस्ट 1 तारा के चक्कर काटे वाला सात गो चट्टानी ग्रह भी वैज्ञानिकन के नजर में बाड़ें। जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप के आंकड़ा ट्रैपिस्ट 1डी पर पृथ्वी जइसन वायुमंडल होखे के संभावना के खारिज कर चुकल बा।

वहीं ट्रैपिस्ट 1ई से मिलल आंकड़ा अबहियो साफ नइखे। वैज्ञानिक अभी एह ग्रह के लेकर कवनो पक्का निष्कर्ष पर नइखन पहुंचल।

फिलहाल एलएचएस 1140 बी पर मिलल वायुमंडल के संकेत जीवन के सबूत नइखे। लेकिन ई खोज वैज्ञानिकन के ई जरूर बतावत बा कि अब इंसान सौर मंडल से बाहर मौजूद पृथ्वी जइसन चट्टानी ग्रह सभ के वायुमंडल के भी जांच सकेला।

आ शायद जीवन के खोज में सबसे बड़ा सवाल के जवाब तक पहुंचे के रास्ता भी अइसने छोट छोट सुराग से बनत जाई।

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