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नेपाल के पानी से बिहार में बाढ़ के खतरा, फरक्का पर फेर गरमाइल राजनीति

नेपाल में लगातार हो रहल भारी बरखा के असर अब बिहार में साफ देखे के मिल रहल बा। गंगा समेत कई नदी के जलस्तर बढ़…
द पुरवइया डेस्क 28 अगस्त 2026 (पब्लिश्ड: 10:48 IST)

नेपाल में लगातार हो रहल भारी बरखा के असर अब बिहार में साफ देखे के मिल रहल बा। गंगा समेत कई नदी के जलस्तर बढ़ रहल बा। एह बीच बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी फरक्का बैराज के लेके पश्चिम बंगाल सरकार से बड़ा मांग कइले बाड़न।

23 अगस्त के सम्राट चौधरी पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से बातचीत कइलन आ फरक्का बैराज के सभे फाटक खोल देवे के मांग रखलन। दावा बा कि बातचीत के करीब 24 घंटा के भीतर बैराज के सभे गेट खोल दिहल गइल। एकरा बाद बिहार में कुछ नदियन के पानी तेजी से नीचे जाए लागल।

लेकिन मामला खाली फाटक खोले तक नइखे रुकल। बिहार सरकार अब 1996 वाला गंगा जल समझौता के सिर्फ रिन्यू करे के बजाय एगो नया समझौता चाहत बिया। एह नया समझौता में बिहार के बाढ़, गाद आ जल प्रबंधन से जुड़ल समस्या के प्राथमिकता देवे के बात कहल जा रहल बा।

आखिर फरक्का बैराज बनल काहे रहे?

फरक्का बैराज के निर्माण 1975 में मुख्य रूप से कोलकाता बंदरगाह आ भागीरथी-हुगली जलमार्ग में पानी के पर्याप्त गहराई बनाए रखे खातिर कइल गइल रहे।

सोच ई रहे कि गंगा के पानी के एगो हिस्सा हुगली नदी में पहुंचावल जाव, जवना से गाद कम होखे आ कोलकाता बंदरगाह में जहाजरानी आसान बनल रहे।

लेकिन समय बीतला के साथ फरक्का बैराज सिर्फ पश्चिम बंगाल के परियोजना ना रहल। ई बिहार, पश्चिम बंगाल आ बांग्लादेश के बीच नदी के पानी आ बाढ़ से जुड़ल एगो बड़ा मुद्दा बन गइल।

1996 में भारत-बांग्लादेश के बीच भइल रहे समझौता

12 दिसंबर 1996 के भारत आ बांग्लादेश के बीच गंगा के पानी बांटे खातिर 30 साल के समझौता भइल रहे। ई समझौता दिसंबर 2026 में खत्म होखे वाला बा।

समझौता के तहत गंगा में उपलब्ध पानी के हिसाब से दुनो देश के हिस्सा तय होखे ला।

लेकिन बिहार के शिकायत कुछ अउर बा।

बिहार के तर्क बा कि फरक्का बैराज के कारण गंगा के बहाव के गति पीछे के तरफ धीमा पड़ेला। एहसे नदी अपना साथे ले आवे वाला गाद यानी सिल्ट के एगो हिस्सा बैराज के ऊपर, बिहार वाला इलाका में छोड़ देले।

धीरे-धीरे नदी के तल उथला होत जाला।

अब जब मानसून में पानी अचानक बढ़ेला, त उथली नदी में पानी समाए के क्षमता कम हो जाला। नतीजा—बाढ़।

यानी बिहार के कहना बा कि एक तरफ सूखा के समय पानी के कमी झेले के पड़ेला आ दोसरा तरफ बरसात में बाढ़ के मार।

बिहार में ई मांग भी उठत रहल बा कि फरक्का बैराज के या त हटा दिहल जाव, या फेर अइसन व्यवस्था बनावल जाव कि गंगा के गाद स्वाभाविक रूप से नीचे की ओर बह सके।

अब नेपाल से आवे वाला पानी भी बढ़ा रहल चिंता

फरक्का के विवाद के बीच बिहार सरकार के सामने एगो अउर चुनौती बा—नेपाल में हो रहल भारी बरखा आ फ्लैश फ्लड।

गंडक नदी में अचानक पानी बढ़े के आशंका के चलते राज्य सरकार बांध आ तटबंध पर 24 घंटा निगरानी के आदेश देले बिया।

सीमा से सटल बिहार के छह जिला पर बाढ़ के खतरा बतावल जा रहल बा।

नेपाल के त्रिशूली नदी में भारी सैलाब आइल बा। ई पानी गंडक नदी के तरफ बढ़ रहल बा। नेपाल में जे नदी नारायणी कहल जाले, उहे बिहार में आके गंडक नदी के नाम से जानल जाले।

आशंका बा कि गंडक के जलस्तर में करीब एक से तीन मीटर तक बढ़ोतरी हो सकेला।

जल संसाधन विभाग के मुताबिक बुधवार रात करीब 8 बजे के बाद फ्लैश फ्लड के पानी आवे लागल। रात 12 बजे तक गंडक में पानी के बहाव करीब डेढ़ लाख क्यूसेक पहुंच गइल।

हालांकि ओकरा बाद पानी कुछ घटे लागल।

रात 12:30 बजे बहाव करीब 1.42 लाख क्यूसेक, रात 1 बजे 1.29 लाख क्यूसेक आ 2 बजे करीब 1.04 लाख क्यूसेक दर्ज कइल गइल।

सुरक्षा के लिहाज से पश्चिम चंपारण में मौजूद वाल्मीकिनगर बैराज के सभे 36 फाटक खोल दिहल गइल।

बिहार के सामने असली समस्या का बा?

नेपाल से बिहार में आवे वाली ज्यादातर नदियन के बहाव बिहार के ओर ही बा। ऊपर से बिहार के कई नदी पहिलहीं से गाद से भरल बाड़ी।

ऐसे में अगर नेपाल से अचानक भारी मात्रा में पानी आ गइल, त नदी के भीतर पानी समाए के जगह कम हो सकेला। एहसे बड़ इलाका में बाढ़ के खतरा बढ़े के आशंका बा।

गंगा मुक्ति आंदोलन के संस्थापक ए. प्रकाश के कहना बा कि मानसून में नेपाल में होखे वाली बरखा के असर बिहार के करीब 20 जिला तक पहुंचे ला।

उनकर मानना बा कि नेपाल के बरखा के रोकल संभव नइखे, लेकिन ओकर असर जरूर कम कइल जा सकेला।

फरक्का पर बिहार की राजनीति फेर गरम

दिसंबर 2026 में भारत-बांग्लादेश के गंगा जल समझौता के 30 साल पूरा होखे वाला बा। समझौता खत्म होखे से पहिले बिहार में फरक्का के मुद्दा राजनीतिक रंग पकड़ लिहले बा।

जेडीयू आ आरजेडी दुनो एक-दूसरा पर सवाल उठा रहल बाड़े।

जेडीयू सांसद संजय झा के कहना बा कि 1996 में जब भारत सरकार बांग्लादेश के साथ ई समझौता करत रहे, तब लालू प्रसाद यादव केंद्र की राजनीति में काफी प्रभावशाली स्थिति में रहलें।

संजय झा के आरोप बा कि अगर ओह समय बिहार सरकार एह समझौता के मजबूती से विरोध कइले रहती, त बिहार के पिछले तीन दशक से बाढ़ आ सूखा के दोहरी मार ना झेले के पड़त।

अब आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव एह आरोप के जवाब देले बाड़न।

लालू प्रसाद सोशल मीडिया पर बयान जारी करके नीतीश कुमार पर निशाना साधलन। उनका आरोप बा कि नीतीश कुमार अपना राजनीतिक जीवन में दूरगामी असर वाला मुद्दा पर गंभीरता से ध्यान ना दिहलन आ फरक्का के मामला पर चुप रहलन।

लालू प्रसाद अपना पुरान संसद भाषण के वीडियो भी साझा कइले, जवना में ऊ फरक्का समझौता के देशहित के खिलाफ बतावत एकरा रद्द करे के मांग करत नजर आवत बाड़न।

उनकर तर्क रहे कि एह समझौता में बिहार के भविष्य पर पड़ सके वाला खतरा के पर्याप्त महत्व ना दिहल गइल।

मतलब साफ बा—नेपाल में बरखा, गंडक में बढ़त पानी, बिहार के गाद से भरल नदियां आ सामने फरक्का समझौता के खत्म होखे के तारीख।

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