माटी कवि सम्मेलन

आव एगो नया बस्ती बसावल जाव

गणेश नाथ तिवारी "विनायक"

12 अप्रैल, 2026

आव एगो नया बस्ती बसावल जाव,
सुनर एगो नया दुनिया बनावल जाव।

मजहब के कवनो देवाल ना रही उहवा,
मानवता के एगो नया घर बनावल जाव।

जातियन के कुल करम भरम तूर के,
इसांनियत के बस्ती सजावल जाव।

देहला के औकात जदि बा हमनी के तऽ,
चलऽ कुछ लो पर खुशी लुटावल जाव ।

प्यार मोहब्बत से तs सभे खुस रहेला,
दुनिया से नफरत के दूर भगावल जाव।

भोजपुरिया लो तऽ एक दूसरे में भिड़ल बा लो,
चली मिलजुल भोजपुरी के मान बढ़ावल जाव।

गोली बम बारुद,विरोध में फिरत बा सब लो
चलs ‘गणेश’बिना एकरा जहां बनावल जाव।

कठिन शब्द अउर अर्थ

  • जात: अनाज पीसे वाला पत्थर के चक्की। (प्रयोग: जांत के पीसल आटा बहुत निमन लागेला।)

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गणेश नाथ तिवारी "विनायक"

संस्थापक-जय भोजपुरी जय भोजपुरिया, सह सम्पादक- सिरिजन भोजपुरी तिमाही ई पत्रिका श्रीकरपुर,सिवान

"वर्तमान पता-3,प्रिन्सेप लेन कोलकाता शिक्षा - स्नातक मो0 9523825251 (सऊदी अरब में मेकेनिकल टेक्नीशियन के रूप में नोकरी 2011 से 2024 तक )"

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