मन मार के रहे परेला,
दुख खुद से कहे परेला।
आसान नइखे नोकरी,
बहुत कुछ सहे परेला।
बाहर से चट्टान नियन,
भीतरी से ढहे परेला।
घर खातिर रोजे हँस के,
आपन दर्द सहे परेला।
मन चाहे छोड़ दीं सब कुछ,
फेर लौट के रहे परेला।
तन थाकेला, मन टूटेला,
तबो रोज उठे परेला।
जिनगी आसान कहाँ होला,
‘भावुक’ खुद से लड़े परेला।