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हमहि से प्रेम, हमहि से छुपावे के बा

उसका मक़सद ही शायद मुझे तड़पाना है,
क्योंकि उसके व्यवहार में दर्द ज़्यादा और अपनापन कम महसूस होता है।

वो प्यार भी मुझसे ही करता है,
और उसी प्यार को मुझसे छिपाता भी है —
जैसे प्यार स्वीकारना उसकी कमजोरी हो।

मुकेश यादव "भावुक" 30 नवम्बर 2025 (पब्लिश्ड: 09:06 IST)

उनुकर इरादा हमके सतावे के बा,
हमहीं से प्रेम, हमहीं से छुपावे के बा।

कब ले देखब छुप-छुप के चाँद के,
अब चाँद के ही जमीन पर बुलावे के बा।

रोम-रोम में एगो अलगे नशा चढ़ल बा,
इहे खुशबू अब दुनिया में महकावे के बा।

प्रेम के वासना मत बुझीं, ए भाई,
ई बात अब मजनुवन के समझावे के बा।

मोबाइल आ इंटरनेट के एह दौर में भी,
कवनो कबूतर से चिट्ठी पहुँचावे के बा।

मन बना लीं त मंजिल दूर कहाँ बा,
सात समंदर पार भी घर बनावे के बा।

‘भावुक’, जब-जब उनकर याद सताई,
लौट के, एक ना एक दिन त आवे के बा।

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