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माई

मिलल जिनगी त रिश्ता हजार बनल, हजारों मे एक माई के प्यार बनल। मस्जिद से मंदिर त देव भी हजार हो, सबसे बड़ जिनगी मे…
राघवेंद्र प्रकाश 'रघु' 15 मई 2026 (पब्लिश्ड: 12:12 IST)

मिलल जिनगी त रिश्ता हजार बनल,
हजारों मे एक माई के प्यार बनल।

मस्जिद से मंदिर त देव भी हजार हो,
सबसे बड़ जिनगी मे माई के प्यार हो।

जेकर अँगुरी पकड़ के देखनी जहान हो,
मतलबी दुनिया मे माई तुही महान हो।

जिनगी मे जेकरा ना मिलल प्यार माई के,
बहुते अभागा माने ई संसार मे आई के।

दिल के शीशमहल मे छुपा के राखी माई हो,
बहुते सुकुन मिले ओढ़ी तोहार अंचरा माई हो।

फरेबी बनावटी दुनिया मे ममता के मूरत तू,
बहन-भाई-भाई मे प्यार रहेलु जोड़त तू।

नाही पाई जगह दुनिया मे केहू माई के,
नमन करें “रघुआ” एह दुनिया के सब माई के।

नेकी ना दिलाई माई केहू कतनो महान हो,
जुग कवनो आई माई रहीहे महान हो…
माई रहीहे महान हो।

✍️राघवेंद्र प्रकाश ‘रघु’✍️
ब्रह्मपुर धाम, बक्सर (बिहार)

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