गर आपन केहू रूठे तऽ
बेमतलब रिश्ता टूटे तऽ
कईसे सुलझाई?
केहू यार बताई?
सब लोग ही अंधी दौड़ में बा
का आपन अउर पराया काऽ
केहु कहे कि रिश्ता बंधन हऽ
केहु कहे कि रिश्ता माया हऽ
अइसे में कइसे मन में केहु के
अपनापन के बीज उगाई!
केहू यार बताई?
रिश्तन के खींचा – तानी में
बस , उमर बेचारी सरकऽता
एक ओर जमाना के ताना
एक ओर जवानी फरकऽता
मन द्वंद के झूला में झूले
बैरी आपन ही परछाईं!
केहू यार बताई?