माथे पर गमछा सजावल गइल बा,
जइसे सवांग के जगावल गइल बा।
जेठ के दुपहरी में लू से देहि झुलसे,
तs माथ के ओहार बनावल गइल बा।
उठे जब बबूला के बेजोड़ झोंका,
त मुँह के पट्टी से बचावल गइल बा।
कबो बीँड़ बन के ई माथा पे सोहे,
तs माथा पs बोझा उठावल गइल बा।
खेतवा में मोटरी में सतुआ बँधाइल,
त फाँस के झोरी बनावल गइल बा।
चले जब ना पुरवा तs बनि के बेना,
कि खुद के हवा ई खियावल गइल बा।
कुँआ के जगत पे जो लोटा ना डूबे,
त डोरी के कामो चलावल गइल बा।
अमवा के टिकोरा जो गिरल बग़इचा,
त खोंइछा बना के उठावल गइल बा।
सहर के उ टाई के चमक बा फीका,
कि इज्जत के गाँठ लगावल गइल बा।
’विनायक’ ई माटी के अइसन महक बा,
जेके रोम-रोम में बसावल गइल बा।
कठिन शब्द अउर अर्थ
- बेना: पंखा।
- लोटा: पात्र।
- डोर: रस्सी।
- बेना: पंखा।
- जग: यज्ञ।
- सवांग: अपना परिवार या संबंधी।



