माटी कवि सम्मेलन

माथे पर गमछा सजावल गइल बा

गणेश नाथ तिवारी "विनायक"

12 अप्रैल, 2026

माथे पर गमछा सजावल गइल बा,
जइसे सवांग के जगावल गइल बा।

​जेठ के दुपहरी में लू से देहि झुलसे,
तs माथ के ओहार बनावल गइल बा।

​उठे जब बबूला के बेजोड़ झोंका,
त मुँह के पट्टी से बचावल गइल बा।

​कबो बीँड़ बन के ई माथा पे सोहे,
तs माथा पs बोझा उठावल गइल बा।

​खेतवा में मोटरी में सतुआ बँधाइल,
त फाँस के झोरी बनावल गइल बा।

​चले जब ना पुरवा तs बनि के बेना,
कि खुद के हवा ई खियावल गइल बा।

​कुँआ के जगत पे जो लोटा ना डूबे,
त डोरी के कामो चलावल गइल बा।

​अमवा के टिकोरा जो गिरल बग़इचा,
त खोंइछा बना के उठावल गइल बा।

​सहर के उ टाई के चमक बा फीका,
कि इज्जत के गाँठ लगावल गइल बा।

​’विनायक’ ई माटी के अइसन महक बा,
जेके रोम-रोम में बसावल गइल बा।

कठिन शब्द अउर अर्थ

  • बेना: पंखा।
  • लोटा: पात्र।
  • डोर: रस्सी।
  • बेना: पंखा।
  • जग: यज्ञ।
  • सवांग: अपना परिवार या संबंधी।

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गणेश नाथ तिवारी "विनायक"

संस्थापक-जय भोजपुरी जय भोजपुरिया, सह सम्पादक- सिरिजन भोजपुरी तिमाही ई पत्रिका श्रीकरपुर,सिवान

"वर्तमान पता-3,प्रिन्सेप लेन कोलकाता शिक्षा - स्नातक मो0 9523825251 (सऊदी अरब में मेकेनिकल टेक्नीशियन के रूप में नोकरी 2011 से 2024 तक )"

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