माटी कवि सम्मेलन

रहि-रहि बड़ा याद आवे लरिकइँया

प्रकाशित: 10 अप्रैल, 2026

रहि-रहि बड़ा याद आवे लरिकइँया
बरखा के पानी आ कागदा के नइया!

नानी कहे कहनी एगो राजा एगो रानी
राजा के महलिया भरल रहे सोना-चानी
फुदुकि-फुदुकि नाचे गावे सोन चिरइया।

रहि -रहि बड़ा याद आवे लरिकइँया
बरखा के पानी आ कगजा के नइया!

गँवुआ के पूरुब ओरि हई गांगा मइया
पँवरी जा खूबे सँगे लेके डेंगी नइया
महल बनाइंजा लेके उजरकी बलुइया।

रहि – रहि बड़ा याद आवे लरिकइँया
बरखा के पानी आ कगजा के नइया!

गँवुआ के पछिम रहे अमवा के बरिया
लाठी लेके होखत रहल खूबे अगोरिया
मारिंजा लुकाई के हो टीस के पुलुइयाँ।

रहि – रहि बड़ा याद आवे लरिकइँया
बरखा के पानी आ कगजा के नइया!

झोरा-पटरी लेके स्कूलिया में जाइँजा
रहिया बीचे घरे सँहतिया के लुकाइँजा
छुट्टी के बेरा घरे लवट के आ जाइँजा
माहुर अस लागत रहे तहिया पढ़इया।

रहि – रहि बड़ा याद आवे लरिकइँया
बरखा के पानी आ कगजा के नइया!

होखे आइस-पाइस, कबड्डी आ चीका
बिन ओल्हा-पाती मन हो जाव फीका
एक दोसरा बिना चलत रहे ना नइया।

रहि – रहि बड़ा याद आवे लरिकइँया
बरखा के पानी आ कगजा के नइया!

गँवुआ के गोंयेड़ा पाकड़ि के गँछिया
दूध पी के दवुरत रहे बछवा-बछिया
खुस होके पगुरी करे सोकनी गइया।

रहि – रहि बड़ा याद आवे लरिकइँया
बरखा के पानी आ कगजा के नइया!

राजा के राज गइल बीतल समइया
कहे राम बहादुर सजग रहऽ भइया
जेकरा सँगे बाड़ऽ उहे हवुए मुदइया
दुसुमन से कइसे तूँ बँचबऽ ए भइया।

रहि रहि बड़ा याद आवे लरिकइँया
बरखा के पानी आ कगजा के नइया!

कठिन शब्द अउर अर्थ

  • डेंगी: नाव।
  • बरखा: बारिश।
  • पाती: चिट्ठी।
  • चीका: मिट्टी का टुकड़ा।
  • पटरी: पटरा या सीधा लकड़ी।

राम बहादुर राय

भरौली, बलिया,उत्तर प्रदेश
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