रहि-रहि बड़ा याद आवे लरिकइँया
बरखा के पानी आ कागदा के नइया!
नानी कहे कहनी एगो राजा एगो रानी
राजा के महलिया भरल रहे सोना-चानी
फुदुकि-फुदुकि नाचे गावे सोन चिरइया।
रहि -रहि बड़ा याद आवे लरिकइँया
बरखा के पानी आ कगजा के नइया!
गँवुआ के पूरुब ओरि हई गांगा मइया
पँवरी जा खूबे सँगे लेके डेंगी नइया
महल बनाइंजा लेके उजरकी बलुइया।
रहि – रहि बड़ा याद आवे लरिकइँया
बरखा के पानी आ कगजा के नइया!
गँवुआ के पछिम रहे अमवा के बरिया
लाठी लेके होखत रहल खूबे अगोरिया
मारिंजा लुकाई के हो टीस के पुलुइयाँ।
रहि – रहि बड़ा याद आवे लरिकइँया
बरखा के पानी आ कगजा के नइया!
झोरा-पटरी लेके स्कूलिया में जाइँजा
रहिया बीचे घरे सँहतिया के लुकाइँजा
छुट्टी के बेरा घरे लवट के आ जाइँजा
माहुर अस लागत रहे तहिया पढ़इया।
रहि – रहि बड़ा याद आवे लरिकइँया
बरखा के पानी आ कगजा के नइया!
होखे आइस-पाइस, कबड्डी आ चीका
बिन ओल्हा-पाती मन हो जाव फीका
एक दोसरा बिना चलत रहे ना नइया।
रहि – रहि बड़ा याद आवे लरिकइँया
बरखा के पानी आ कगजा के नइया!
गँवुआ के गोंयेड़ा पाकड़ि के गँछिया
दूध पी के दवुरत रहे बछवा-बछिया
खुस होके पगुरी करे सोकनी गइया।
रहि – रहि बड़ा याद आवे लरिकइँया
बरखा के पानी आ कगजा के नइया!
राजा के राज गइल बीतल समइया
कहे राम बहादुर सजग रहऽ भइया
जेकरा सँगे बाड़ऽ उहे हवुए मुदइया
दुसुमन से कइसे तूँ बँचबऽ ए भइया।
रहि रहि बड़ा याद आवे लरिकइँया
बरखा के पानी आ कगजा के नइया!
कठिन शब्द अउर अर्थ
- डेंगी: नाव।
- बरखा: बारिश।
- पाती: चिट्ठी।
- चीका: मिट्टी का टुकड़ा।
- पटरी: पटरा या सीधा लकड़ी।



