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भोजपुरी साहित्य

सृजन के अद्भुत कारीगर

बंदना मिश्रा , गोरखपुर, उत्तर प्रदेश
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26 अक्टूबर 2026 · 09:58 अपराह्न IST
तस्वीर के एआई से बनावल गइल

ले के हाथन में हथियार,
छैनी,पैनी धारदार आ गइने।
असंभव के संभव कइने,
जग के करिश्मा दिखा दिहने।

माटी, पाथर, लोहा, सोना,
सबमें प्राण जगा दिहने।
आ परती रहल इ धरती,
नवरूप में देख सजा दिहने।

लंका जइसन राज सँवरने,
इन्द्रपुरी बना दिहने।
आ बीच समुन्दर में जाके देखीं,
द्वारिकापुरी बसा दिहने।

सूखल बगिया में फूल खिलाके।
चहुँओर बहार ले आ दिहने।
असम्भव के सम्भव करके,।
जग में करिश्मा देखाइ दिहने।

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