थोड़ी हया तो होनी चाहिए आँखों में
थोड़ी तमीज़ तो होनी चाहिए बातों में
रुतबा किसका कितना है क्या करना
रास्ते तो गीले हो ही जाते हैं बरसातों में
थोड़ा लहज़ा संभाला करें तो अच्छा है
नफ़रत में घर तक जल जाते हैं बातों में
फ़ुर्सत किसको है किसी से मुलाक़ात की
यहां चेहरे तक पहचाने जाते हैं हालातों में
थोड़ा नरमी रखा करिए ‘बिना रंग बदले
फिर देखिए लोग भीग जाते हैं जज़्बातों में
