पुरवइया

फेरु बयरिया डोले लागी 

फेरु बयरिया डोले लागी !फेरु भले अधियार गइल बा,दुर्वह मन के भार भइल बा ;जँहवाँ ले लउकत बाटेकरिया सगरे संसार भइल बा।लाल किरिनिया झाँकी, कलिया-फेरु नजरिया खोले…
श्रद्धानंद पाण्डेय 15 अप्रैल 2026 (पब्लिश्ड: 07:50 IST)

फेरु बयरिया डोले लागी !
फेरु भले अधियार गइल बा,
दुर्वह मन के भार भइल बा ;
जँहवाँ ले लउकत बाटे
करिया सगरे संसार भइल बा।
लाल किरिनिया झाँकी, कलिया-
फेरु नजरिया खोले लागी !
फेरु बयरिया डोले लागी !!

हर चेतन चुप-चाप भइल बा,
नीरवता के शाप भइल बा,
मन में कतनो पीर रहे,
ओठनि के खोलल पाप भइल बा।
फेरु चिरइया चहकी, भोरे-
फेरु कोयलिया बोले लागी !
फेरु बयरिया डोले लागी !!

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