फेरु बयरिया डोले लागी 

श्रद्धानंद पाण्डेय

15 अप्रैल, 2026

फेरु बयरिया डोले लागी !
फेरु भले अधियार गइल बा,
दुर्वह मन के भार भइल बा ;
जँहवाँ ले लउकत बाटे
करिया सगरे संसार भइल बा।
लाल किरिनिया झाँकी, कलिया-
फेरु नजरिया खोले लागी !
फेरु बयरिया डोले लागी !!

हर चेतन चुप-चाप भइल बा,
नीरवता के शाप भइल बा,
मन में कतनो पीर रहे,
ओठनि के खोलल पाप भइल बा।
फेरु चिरइया चहकी, भोरे-
फेरु कोयलिया बोले लागी !
फेरु बयरिया डोले लागी !!

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श्रद्धानंद पाण्डेय

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