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असली प्रीत ठुकरा के पगली, खोजतारू उधार में

असली प्रीत ठुकरा के पगली, खोजतारू उधार में, कदर पिया के कईलू नाहीं, घूमतारू बजार में। ​समझा-बुझा के हार गइले ऊ, बात कगरी क दिहलु,…
तबारक अंसारी 9 अप्रैल 2026 (पब्लिश्ड: 09:36 IST)

असली प्रीत ठुकरा के पगली, खोजतारू उधार में,
कदर पिया के कईलू नाहीं, घूमतारू बजार में।

​समझा-बुझा के हार गइले ऊ, बात कगरी क दिहलु,
जवन-जवन ऊ मना कइले, करम उहे सगरी क दिहलु।

​खाँची भर मेकअप पोतला से, लउटी ना जवानी,
अबो से कदर करs साजन के, मिट जाई परेशानी।

​दुनियादारी पड़ जाई भारी, फँस जइबू मझधार में,
कदर पिया के कईलू नाहीं, घूमतारू बजार में।

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