असली प्रीत ठुकरा के पगली, खोजतारू उधार में,
कदर पिया के कईलू नाहीं, घूमतारू बजार में।
समझा-बुझा के हार गइले ऊ, बात कगरी क दिहलु,
जवन-जवन ऊ मना कइले, करम उहे सगरी क दिहलु।
खाँची भर मेकअप पोतला से, लउटी ना जवानी,
अबो से कदर करs साजन के, मिट जाई परेशानी।
दुनियादारी पड़ जाई भारी, फँस जइबू मझधार में,
कदर पिया के कईलू नाहीं, घूमतारू बजार में।
