असली प्रीत ठुकरा के पगली, खोजतारू उधार में

@tabarak_ansari • 42 Views • 9 अप्रैल, 2026

असली प्रीत ठुकरा के पगली, खोजतारू उधार में,
कदर पिया के कईलू नाहीं, घूमतारू बजार में।

​समझा-बुझा के हार गइले ऊ, बात कगरी क दिहलु,
जवन-जवन ऊ मना कइले, करम उहे सगरी क दिहलु।

​खाँची भर मेकअप पोतला से, लउटी ना जवानी,
अबो से कदर करs साजन के, मिट जाई परेशानी।

​दुनियादारी पड़ जाई भारी, फँस जइबू मझधार में,
कदर पिया के कईलू नाहीं, घूमतारू बजार में।

कठिन शब्द अउर अर्थ

Purvaiya
तबारक अंसारी @tabarak_ansari

असली प्रीत ठुकरा के पगली, खोजतारू उधार में,
कदर पिया के कईलू नाहीं, घूमतारू बजार में।

​समझा-बुझा के हार गइले ऊ, बात कगरी क दिहलु,
जवन-जवन ऊ मना कइले, करम उहे सगरी क दिहलु।

​खाँची भर मेकअप पोतला से, लउटी ना जवानी,
अबो से कदर करs साजन के, मिट जाई परेशानी।

​दुनियादारी पड़ जाई भारी, फँस जइबू मझधार में,
कदर पिया के कईलू नाहीं, घूमतारू बजार में।

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