सब एहीजे मिली

राघवेंद्र प्रकाश 'रघु'

23 अप्रैल, 2026

सब एहीजे मिली
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मोर बाल बच्चा खूबे सुनर,
ई घमंड रूप के पाली मत।
दोसरा के करिया नकभेभर,
मीन मेख अनका काढ़ी मत।।

सुनरको जाइ बउरको जाइ,
बिधना के लेख बुझाई कब।
धरम करम तनी राखी निमन,
ताकि गईला पर गुन गाई सब।।

रहत होखऽ तू महल अटारी,
चाहें टूटल झोपड़ पट्टी लघु।
आइल बा जे ऊ जइबे करी,
के विधि लेखा के टारी ‘रघु’।।

रात अन्हरिया भा अंजोरिया,
हो बसंत या दिन पानी बुनी।
छोड़ देह चल जाइ बहरिया,
अमर आत्मा के सब कहानी सुनी।।

छोड़ऽ घमंड रूपया पइसा के,
सोना नियन महल अटारी के।
ए मनई रहऽ बना व्यवहार के,
ना त उड़त परान देह जारी के।।

बाउर दिन भी बनत मिली,
बनल दिन होत बाउर मिली।
जइसन करबऽ ओइसन मिली,
सरग नरक सब एहीजे मिली।।

✍️राघवेंद्र प्रकाश ‘रघु’
ब्रह्मपुर, बक्सर (बिहार)

कठिन शब्द अउर अर्थ

  • बहरिया: बाहरी हिस्सा।
  • अन्हरिया: अँधेरी रात।
  • निमन: ई ठेठ भोजपुरी शब्द ह। कवनो चीज के गुणवत्ता (Quality) बतावे खातिर एकर प्रयोग कइल जाला

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राघवेंद्र प्रकाश 'रघु'

कलमकार अउर नोकरी बक्सर

"राघवेन्द्र प्रकाश 'रघु' बिहार के बक्सर जिला के ब्रह्मपुर गाँव के रहे वाला बानी। इहाँ के भोजपुरी आ हिंदी मे रचना रचत रहेनी। इहाँ के शिक्षा स्नातकोत्तर (क़ृषि) टी.डी. कॉलेज जौनपुर, उत्तर प्रदेश से प्राप्त करले बानी। साहित्य प्रेमी के साथ वर्तमान में क़ृषि विभाग, बिहार सरकार में एगो कर्मचारी बानी।"

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