दोसती के हाथ हरदम, बा बढावत लोगवा

गणेश नाथ तिवारी "विनायक"

09 अप्रैल, 2026

दोसती के हाथ हरदम, बा बढावत लोगवा।
नेहिया के डोर हरदम, बा थमावत लोगवा।

जिंदगी में घुल गइलन,मीठ चीनी के तरे।
काम सांचो बात हरदम,बा करावत लोगवा।।

दोसती के दोष नइखे, बदनसीबी ढेर बा।
आग लागल जिंदगी में,बा जरावत लोगवा।।

देत नइखे साथ हरदम,दोसती के नाम पर।
साथ देबे के समय मे,बा सतावत लोगवा।।

प्रेम के अब नाम पर तू, पाठ पूजा छोड़ दs।
राम जइसन नाम हमके,बा रटावत लोगवा।।

कठिन शब्द अउर अर्थ

  • डोर: रस्सी।
  • ढेर: बहुत।

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गणेश नाथ तिवारी "विनायक"

संस्थापक-जय भोजपुरी जय भोजपुरिया, सह सम्पादक- सिरिजन भोजपुरी तिमाही ई पत्रिका श्रीकरपुर,सिवान

"वर्तमान पता-3,प्रिन्सेप लेन कोलकाता शिक्षा - स्नातक मो0 9523825251 (सऊदी अरब में मेकेनिकल टेक्नीशियन के रूप में नोकरी 2011 से 2024 तक )"

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