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भोजपुरी साहित्य

राती भर मच्छर मुँआ देले बाटे

संतोष विश्वकर्मा 'सूर्य'
8 अप्रैल 2026 · 07:52 पूर्वाह्न IST

सगरो देहियां फूला देले बाटे।
कांचे निनिया जगा देले बाटे।

हाथ गोड़ केतनो पटकनी हंँ दादा,
जगे जगे सूई चुभा देले बाटे।

भनर-भनर कइले बा काने में आ के,
फेरा में अइसन फंसा देले बाटे।

फेल भइल आल-आउट, क्वायल प्रोटक्शन,
गतर-गतर दँतवा हला देले बाटे।

कइले बा सगरो तबाह मोरा जिनगी
राती भर मच्छर मुँआ देले बाटे।

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