असली चेहरा भी दिखाओ तो ज़रा तुम
रूह से पर्दा हटाओ तो ज़रा तुम
भूल जाऊँगा सितम सारे पुराने
फिर सितम ढाने को आओ तो ज़रा तुम
बेवफा वो बे-ख़बर हम से हो तो हो
पर ख़बर उसकी सुनाओ तो ज़रा तुम
डर मुझे काँटों से लगता ही नहीं है
इन गुलाबों से बचाओ तो ज़रा तुम
इल्तिजा है चाँद देखें हम ज़मीं पर
अब ये घूँघट को हटाओ तो ज़रा तुम
है शग़फ़ उसको, सुना है शायरी से
ये हुनर हमको सिखाओ तो ज़रा तुम
थक गया मैं तो हकीमों को दिखा कर
इक दवा दिल की बताओ तो ज़रा तुम
