बुढ़ापा एक दिन अइबे करी
बचपन गइल, जवानी आइल,
उहो एक दिन जइबे करी,
चाहे कवनो जुगत भिड़ाईं,
बुढ़ापा एक दिन अइबे करी!
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परदेशी के ईद अइसने होला
केतनो दुध मलिदा खाईं,
काजु किशमिश रोज चबाईं,
खिलल देह खिलले ना रही,
एक दिन इ सूख जइबे करी,
चाहे कवनो जुगत भिड़ाईं,
बुढ़ापा एक दिन अइबे करी!
कवनो पाउडर क्रीम लगाईं,
रोज रोज मेकअप करवाईं,
ढ़ल जाई चेहरा के पानी,
एक दिन इ मुरझइबे करी,
चाहे कवनो जुगत भिड़ाई,
बुढ़ापा एक दिन अइबे करी!
अपने पर इतराइल छोड़ीं,
रुपवा देख धधाइल छोड़ीं
रामसागर कुछ खबर ना लागी,
चाम हऽ ई झुल जइबे करी,
चाहे कवनो जुगत भिड़ाईं,
बुढापा एक दिन अइबे करी!
©️✍️: रामसागर सिंह
सिवान, बिहार
M: 8156077577