चाहे गमछा फार के रहअ

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@jamil-meer • 720 Views • 9 जनवरी, 2026

चाहे गमछा फार के रहअ।
चाहे तु झार के रहअ।।

दिल मे अपने मुहब्बत के
दिया एगो बार के रहअ।।

ना प्यार ना बैर से
ना आपन ना गैर से

जब भी चलअ राह मे
आपन कदम सम्हार के रहअ।।

झूठ से बचल जाता कहाँ
सांच बोलल जाता कहाँ

जहाँ चुगलन के देखअ भाई
मुँह पर ताला मार के रहअ।।

चाहे गमछा फार के रहअ।
चाहे तु झार के रहअ।।

Purvaiya
जमील मिर @jamil-meer

चाहे गमछा फार के रहअ।
चाहे तु झार के रहअ।।

दिल मे अपने मुहब्बत के
दिया एगो बार के रहअ।।

ना प्यार ना बैर से
ना आपन ना गैर से

जब भी चलअ राह मे
आपन कदम सम्हार के रहअ।।

झूठ से बचल जाता कहाँ
सांच बोलल जाता कहाँ

जहाँ चुगलन के देखअ भाई
मुँह पर ताला मार के रहअ।।

चाहे गमछा फार के रहअ।
चाहे तु झार के रहअ।।

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