चोट खा-खा के जिनिगी – कुमार अजय सिंह

कुमार अजय सिंह 0 Subscribers
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@ajay_singhh • 534 Views • 18 जनवरी, 2026

चोट खा-खा के जिनिगी, ई घाही बनल
लागल भगिया में अगिया, तबाही बनल

घाव बड़हन भइलऽ, ऊ नाऽ जल्दी भरी
जे डुबवलस ऊ मौका पर, हाथ का धरी
ऊ चिन्हलके आदमिया बा, डाही बनल
चोट खा-खा के जिनिगी, ई घाही बनल

लोर ढ़रकत ना पोछत, पूछत केहूए बा
का गुजरत ना तनिको,सोंचत केहूए बा
रहनी जेकरा से दूर हम,उहे दाही बनल
चोट खा-खा के जिनिगी, ई घाही बनल

का करि जी केहु केकरो प,अब विश्वास
खाइके मरला से नीमन, रहलका उपास
जब जमलका हमार अब ऊ, नाहीं रहल
चोट खा-खा के जिनिगी, ई घाही बनल

ना रहिले सर झुकाके, नाहीं रहल चाहीं
बात तनिका भर मनवा के, कहल चाहीं
“अजय” चुपचाप सहल,लरिकाही बनल
चोट खा-खा के जिनिगी, ई घाही बनल

Purvaiya
कुमार अजय सिंह @ajay_singhh

चोट खा-खा के जिनिगी, ई घाही बनल
लागल भगिया में अगिया, तबाही बनल

घाव बड़हन भइलऽ, ऊ नाऽ जल्दी भरी
जे डुबवलस ऊ मौका पर, हाथ का धरी
ऊ चिन्हलके आदमिया बा, डाही बनल
चोट खा-खा के जिनिगी, ई घाही बनल

लोर ढ़रकत ना पोछत, पूछत केहूए बा
का गुजरत ना तनिको,सोंचत केहूए बा
रहनी जेकरा से दूर हम,उहे दाही बनल
चोट खा-खा के जिनिगी, ई घाही बनल

का करि जी केहु केकरो प,अब विश्वास
खाइके मरला से नीमन, रहलका उपास
जब जमलका हमार अब ऊ, नाहीं रहल
चोट खा-खा के जिनिगी, ई घाही बनल

ना रहिले सर झुकाके, नाहीं रहल चाहीं
बात तनिका भर मनवा के, कहल चाहीं
“अजय” चुपचाप सहल,लरिकाही बनल
चोट खा-खा के जिनिगी, ई घाही बनल

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