देखि के बाग के फूल मउरा गइल

गणेश नाथ तिवारी "विनायक"

09 अप्रैल, 2026

देखि के बाग के फूल मउरा गइल।
का भइल आदमी आज बउरा गइल।।

ना रहल आस जब आँखि पर ओकरा।
आँख अछइत कली आज कजरा गइल।।

गाँठ बान्हल गइल गाँछि पर दाबि के।
साँझि ले गाँठि तs खूब अझुरा गइल।।

काम के ना रही दू नमर धन कबो।
लूट के भोज से देह गदरा गइल।।

घाम में आजु बाड़े घमाइल रघु।
घेरि के साँझि बेरा अब बदरा गइल।।

कठिन शब्द अउर अर्थ

  • घाम: कड़ा धूप के घाम कहल जाला।

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गणेश नाथ तिवारी "विनायक"

संस्थापक-जय भोजपुरी जय भोजपुरिया, सह सम्पादक- सिरिजन भोजपुरी तिमाही ई पत्रिका श्रीकरपुर,सिवान

"वर्तमान पता-3,प्रिन्सेप लेन कोलकाता शिक्षा - स्नातक मो0 9523825251 (सऊदी अरब में मेकेनिकल टेक्नीशियन के रूप में नोकरी 2011 से 2024 तक )"

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