कबो खूब हमके हंसावल गइल

गणेश नाथ तिवारी "विनायक"
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25 Views • अप्रैल 9, 2026

कबो खूब हमके हंसावल गइल,
त कबो बेदर्दी से रोवावल गइल।

नेहिया के नाता से जोड़ी के अब,
बीचही डगर पर छोड़ावल गइल।

भरोसा हमार त तिनका रहल,
ओही के सहारे सतावल गइल।

संभल के त हमहूँ चलत रहनी पर,
पकड़ के कलाई गिरावल गइल।

बिनायक इहाँ केहू नइखे आपन,
इहाँ त बस सपना सजावल गइल।