आजु देखी मर रहल संसार बा

प्रकाशित: 09 अप्रैल, 2026

आजु देखी मर रहल संसार बा।
का कहीं लाचार ई सरकार बा।।

ध्यान राखीं देहिया के काम बा।
आन से आशा कइल बेकार बा।।

जाति के चरचा करा के आदमी।
देखि ली कतना करत तकरार बा।।

लोग के लागे कि हमरा ज्ञान बा।
आजु इनका आदमी दरकार बा

कठिन शब्द अउर अर्थ

  • जात: अनाज पीसे वाला पत्थर के चक्की। (प्रयोग: जांत के पीसल आटा बहुत निमन लागेला।)

गणेश नाथ तिवारी "विनायक"

संस्थापक-जय भोजपुरी जय भोजपुरिया, सह सम्पादक- सिरिजन भोजपुरी तिमाही ई पत्रिका श्रीकरपुर,सिवान

"वर्तमान पता-3,प्रिन्सेप लेन कोलकाता शिक्षा - स्नातक मो0 9523825251 (सऊदी अरब में मेकेनिकल टेक्नीशियन के रूप में नोकरी 2011 से 2024 तक )"

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