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साँझीये से बिहँसे ला मनवा हो रामा,बैरी पलँगवा

45 Views • अप्रैल 12, 2026

साँझीये से बिहँसे ला मनवा हो रामा,
बैरी पलँगवा
आधी रतिया के निनिया ना आवे हो रामा
बैरी पलँगवा

हहरा के बहे जब पछुआ के झोंका,
मोजरि के महँक से हिया भइल चोखा
काँट लेखा लागेला सेजरिया हो रामा
बैरी पलँगवा
साँझीये से बिहँसे ला मनवा हो रामा,
बैरी पलँगवा

अँखिया के लोरवा से लिखतानी पाती
धड़केला की ना तोहार हिया ए सँघाती
अइबs कबले हमरो पजरिया हो रामा
बैरी पलँगवा
साँझीये से बिहँसे ला मनवा हो रामा,
बैरी पलँगवा

सोरहो सिंगरवा मोर भइल बा बटोही
परदेस जाके काहे भइल तू निर्मोही
फड़फड़ाता मोर कोमल करेजवा हो रामा
बैरी पलँगवा
साँझीये से बिहँसे ला मनवा हो रामा,
बैरी पलँगवा

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