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केकरा चिंता बाटे ए भइया, असल मे एगो बिहारी के

284 Views • अप्रैल 11, 2026

कुल्हत मुसमात महतारी के
समाज के अपना नारी के
केकरा चिंता बाटे ए भइया
असल मे एगो बिहारी के

आवता जे भी खाता उहे
बाड़ेन असली दाता उहे
का कहीं सरकार के जी
सवत आपन बुझाता उहे

मजदुर हमके मानल जाता
भावना रोज खानल जाता
कहीं बोली कहीं भाषा पर
लाठी बेर-बेर तानल जाता

बॉम्बे गुजरात ठेलल जाई
पक्ष-विपक्ष खेलल जाई
धरम के ख़ास मुद्दा बनाके
फेरू बिहार मे हेलल जाई

आए दिन मिलता ऑफ़र
अब छठ मे रेल गाड़ी के
केकरा चिंता बाटे ए भइया
असल मे एगो बिहारी के

केहू दिन केहू रात के नेता
ना मिले रोटी भात के नेता
गली गली अब घूमतारान
देखीं ना रउवा जात के नेता

अपराध के चले जुग जमाना
डरल बाटे व्यापारी घारना
हिम्मत बाटे त पूछी ना जाके
सुतल बा कहँवा पुलिस थाना

आँगन राउर दुवार मे का बा
गाँव राउर बाजार मे का बा
कुछ दिन मे कहिअन नेहा
यूपी मे का बिहार मे का बा

कहे लोग बिहार ना सुधरी
बुरबक आ लाचार ना सुधरी
कइसे रोजी-रोजगार मिली
आदत जब हमार ना सुधरी

पाँच किलो अनाज अउरी
दू चार सौ रोज डेहारी के
केकरा चिंता बाटे ए भइया
असल मे आज बिहारी के

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