मन धधाइल गावें गइनी-ग़ज़ब के वायरल कविता,बिना पढ़े मत जाइए

मुकेश यादव "भावुक" 2 Subscribers
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@bhawuk • 783 Views • 7 जनवरी, 2026

मन धधाइल, गावें गइनी, का बतलाई का हाल भइल
यूपीएससी भी पीछे छूटल जब अइसन सवाल भइल।

डीह बाबा के चऊरा से ही मन तनी धुकधुकात रहे,
ना जननी की ऐह खेला के इ त बस शुरुआत रहे,
छोड़ी हाल फिकिर के चिंता, पइसे बड़की बात भइल।
मन धधाइल गावें गइनी, का बतलाई का हाल भइल

सौ मीटर के दूरी भी सात समुंदर लेखा लागे लागल,
जाने काहें पिराले देहियां,मन  गांव से भागे लागल,
अस घेराइल घेरा देदा अइसन अइसन उतपात भइल।
मन धधाइल गावें गइनी, का बतलाई का हाल भइल

मुह बान्ह के आगे बढ़नी पर ई सबसे भारी भूल भइल,
महीनों अभी बीतल ना गइले, लागता नोकरी छूट गइल।
स्वागत में हर मुह से बस,  बढ़के एक से एक संवाद भइल।
मन धधाइल गावें गइनी, का बतलाई का हाल भइल

अतनो पर ना मानल किस्मत, सुनी कहानी आगे के,
मरकहवा सढ़वा दउरवलस, कहा जाइ अब भागी के,
सर समान अन्हे छितराइल, एम्बुलेंस के काल भइल।
मन धधाइल गावें गइनी, का बतलाई का हाल भइल

कठिन शब्द अउर अर्थ

Purvaiya
मुकेश यादव "भावुक" @bhawuk

मन धधाइल, गावें गइनी, का बतलाई का हाल भइल
यूपीएससी भी पीछे छूटल जब अइसन सवाल भइल।

डीह बाबा के चऊरा से ही मन तनी धुकधुकात रहे,
ना जननी की ऐह खेला के इ त बस शुरुआत रहे,
छोड़ी हाल फिकिर के चिंता, पइसे बड़की बात भइल।
मन धधाइल गावें गइनी, का बतलाई का हाल भइल

सौ मीटर के दूरी भी सात समुंदर लेखा लागे लागल,
जाने काहें पिराले देहियां,मन  गांव से भागे लागल,
अस घेराइल घेरा देदा अइसन अइसन उतपात भइल।
मन धधाइल गावें गइनी, का बतलाई का हाल भइल

मुह बान्ह के आगे बढ़नी पर ई सबसे भारी भूल भइल,
महीनों अभी बीतल ना गइले, लागता नोकरी छूट गइल।
स्वागत में हर मुह से बस,  बढ़के एक से एक संवाद भइल।
मन धधाइल गावें गइनी, का बतलाई का हाल भइल

अतनो पर ना मानल किस्मत, सुनी कहानी आगे के,
मरकहवा सढ़वा दउरवलस, कहा जाइ अब भागी के,
सर समान अन्हे छितराइल, एम्बुलेंस के काल भइल।
मन धधाइल गावें गइनी, का बतलाई का हाल भइल

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