कहीं चूल्हे पे अदहन खौलता है-चेतना पाण्डेय

चेतना पाण्डेय 0 Subscribers
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@chetna_pandey • 422 Views • 17 जनवरी, 2026

कहीं चूल्हे पे अदहन खौलता है
कहीं बेबस कोई मन खौलता है

फुहारें सबके हिस्से में कहां हैं
बुझा हो दिल तो सावन खौलता है

लगें जब कानाफूसी करने कमरे
तो फिर उकता के आँगन खौलता है

जो पागल ढूंढते रंगों में मज़हब
उन्हें देखे तो फागुन खौलता है

किसी को कैद,आजादी किसी को
सज़ा कैसी है, बन्धन खौलता है

Purvaiya
चेतना पाण्डेय @chetna_pandey

कहीं चूल्हे पे अदहन खौलता है
कहीं बेबस कोई मन खौलता है

फुहारें सबके हिस्से में कहां हैं
बुझा हो दिल तो सावन खौलता है

लगें जब कानाफूसी करने कमरे
तो फिर उकता के आँगन खौलता है

जो पागल ढूंढते रंगों में मज़हब
उन्हें देखे तो फागुन खौलता है

किसी को कैद,आजादी किसी को
सज़ा कैसी है, बन्धन खौलता है

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